zakir khan shayari

Zakir Khan shayari in hindi

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Zakir Khan shayari in hindi

मेरी जमीन तुमसे गहरी रही है,
वक़्त आने दो, आसमान भी तुमसे ऊंचा रहेगा।

लूट रहे थे खजाने मां बाप की छाव मे,
हम कुड़ियों के खातिर, घर छोड़ के आ गए।

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कामयाबी तेरे लिए हमने खुद को कुछ यूं तैयार कर लिया,
मैंने हर जज़्बात बाजार में रख कर एश्तेहार कर लिया ।

यूं तो भूले हैं हमें लोग कई, पहले भी बहुत से
पर तुम जितना कोई उन्मे सें , कभी याद नहीं आया।

zakir khan shayari on life

ज़मीन पर आ गिरे जब आसमां से ख़्वाब मेरे
ज़मीन ने पूछा क्या बनने की कोशिश कर रहे थे।

zakir khan shayari on love

हर एक दस्तूर से बेवफाई मैंने शिद्दत से हैं निभाई
रास्ते भी खुद हैं ढूंढे और मंजिल भी खुद बनाई।

मेरी अपनी और उसकी आरज़ू में फर्क ये था
मुझे बस वो…
और उसे सारा जमाना चाहिए था।

मेरे इश्क़ से मिली है तेरे हुस्न को ये शोहरत,
तेरा ज़िक्र ही कहां था , मेरी दास्तान से पहले।

Zakir khan shayaris

zakir khan shayari main shunya pe sawar hu,

गर यकीन ना हों तो बिछड़ कर देख लो
तुम मिलोगे सबसे मगर हमारी ही तलाश में।

zakir khan famous shayari

इश्क़ किया था
हक से किया था
सिंगल भी रहेंगे तो हक से ।

zakir khan shayari sakht launda

Zakir khan shayaris

जिंदगी से कुछ ज्यादा नहीं,
बस इतनी सी फर्माइश है,
अब तस्वीर से नहीं,
तफसील से मिलने की ख्वाइश है ।

ये तो परिंदों की मासूमियत है,
वरना दूसरों के घर अब आता जाता कौन हैं।

तुम भी कमाल करते हों ,
उम्मीदें इंसान से लगा कर
शिकवे भगवान से करते हो।

zakir khan best shayari in hindi

कामयाबी, तेरे लिए हमने खुदको को कुछ यूँ तैयार कर लिया,
मैंने हर जज़्बात बाज़ार में रख कर इश्तेहार कर लिया…

यूँ तो भूले है हमे लोग कई पहले भी बोहोत से,
पर तुम जितना उनमे से कभी कोई याद नहीं आता…

तुझे खोने का खौफ जबसे निकला है बाहर,
तुझे पाने की जिद भी टिक न सकी दिल में…

ZAKIR KHAN SHAYARI LYRICS IN HINDI

इश्क़ को मासूम रहने दो , नोटबुक के आखरी पन्ने पर,
आप उससे किताबों में डाल के मुश्किल न कीजिये…

रफ़ीक़ों से रक़ीब अच्छे जो जल कर नाम लेते हैं
गुलों से ख़ार बेहतर हैं जो दामन थाम लेते हैं

ZAKIR KHAN SHAYARI SHUNYA

कितनी पामाल उमंगों का है मदफ़न मत पूछ
वो तबस्सुम जो हक़ीक़त में फ़ुग़ाँ होता है

ZAKIR KHAN SHAYARI QAYAMAT LYRICS

मार डाला मुस्कुरा कर नाज़ से
हाँ मिरी जाँ फिर उसी अंदाज़ से

मैं भी हैरान हूँ ऐ ‘दाग़’ कि ये बात है क्या
वादा वो करते हैं आता है तबस्सुम मुझ को

दिल तो रोता रहे ओर आँख से आँसू न बहे
इश्क़ की ऐसी रिवायात ने दिल तोड़ दिया

ZAKIR KHAN SHAYARI JASHN E REKHTA

ऐ दिल-ए-बे-क़रार चुप हो जा
जा चुकी है बहार चुप हो जा

हम से पूछो न दोस्ती का सिला
दुश्मनों का भी दिल हिला देगा