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What is Personal Finance in hindi पर्सनल फाइनेंस

पर्सनल फाइनेंस का विवरण

कोरोना के समय ये बताने कि जरुरत नहीं एक बेहतर लाइफ को जीने के लिए पैसा जरुरी है,

आप  पैसे के महत्व को अच्छी तरह से समझते है। हम सभी अपने जीवन यापन के लिए पैसे कमा ही लेते है, और उस कमाए गए पैसो को अपने तरीके से खर्च करने का हमारा पूरा हक़ होता है, हम कमाते है और खर्च करते है, और इस कमाने और खर्च करने के बीच हमें कुछ पैसे अपने फ्यूचर के लिए बचत  करना चाहिए। 

आजकल के दौरान जहाँ पर करोडो नौकरियाँ  जा चुकी है वहां पर इस  बात की जरूरत और भी ज्यादा हो चली है। 

कई लोग “पैसे का प्रबंधन” मतलब पैसे को हैंडल या मैनेज अच्छे से कर लेते हैं।  उनके पास कुछ ही सालो ढेर सारे पैसे हो जाते है,और वो लाइफ में काफी आगे बढ़ जाते है, पैसे को अच्छी तरह मैनेज करके और बेहतर तरीके से निवेश करके वो अच्छा घर, गाड़ी और अपने कई सपने पूरा कर लेते है। 

ज्यादातर लोग पैसे का प्रबंधन / पैसे को मैनेज नहीं कर पाते क्यूंकि पैसा होना और पैसे के साथ क्या करना है दोनों में भारी अंतर होता है । हमारे पास बहुत सारे पैसे आते है, लेकिन कुछ समय बाद  हमारे  हाथ फिर खाली हाथ ही रह जाते है, पैसे आते है – और चले जाते है,

ज्यादातर लोगो के साथ ये चलता ही रहता है । 

पर्सनल फाइनेंस  उन लोगो के लिए इस दुविधा को दूर  करने में बहुत मदद करता है।

आखिर ये पर्सनल फाइनेंस है क्या ? किस तरह की चीज़ो का हमें ध्यान रखना चाहिए अपनी पर्सनल फाइनेंस को करते वक़्त ? 

पर्सनल फाइनेंस क्या है (personal finance in hindi )

पर्सनल मतलब खुद का ,फाइनेंस मतलब इसका लेना देना पैसे से है।  जैसा की बताया की अगर आपने 5 साल कमाया और आज भी आपके पास कोई savings /बचत/ सेविंगस नहीं है। तो इसके दो कारण आपने सब बचत खर्च कर दिए या फिर कोई इमरजेंसी आ गयी होगी।

पर्सनल फाइनेंस

किसी व्यक्ति के धन से जुड़ा एक ऐसा विषय है, जो धन को सँभालने , पैसे को नियंत्रित करने के साथ साथ उपलब्ध धन का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने के तरीके सिखाता है,

 कहने का तात्पर्य यह है की बचे हुए पैसे को कितना बैंक अकाउंट में रखना है ,कितना इन्वेस्टमेंट करना है ,कितना शेयर में लगाना है या फिर गोल्ड में खरीदना है।  इन सब मुद्दों को सोचकर समझकर उस पर कदम उठाना चाहिए। पर्सनल फिएंन्स में यही सोचा,लिखा और कार्यान्वित किया जाता है

और दुसरे शब्दों में कहे तो

“किसी व्यक्ति के धन कमाने, खर्च करने के साथ साथ उस व्यक्ति के बचत और निवेश करने से सम्बंधित पैसे से जुडी बातो और आर्थिक फैसलों ” को हम उसका “पर्सनल फाइनेंस का विषय” कह सकते है

इस तरह हमने देखा की इसमें कामना,खर्च करना, बचाना और निवेश करना जैसे 4 मुद्दे हैं। 

“Personal finance पैसे को manage ya handle  करने का एक महत्पूर्ण विषय है, और इस विषय में में सभी तरह के financial decisions जैसे-  हमारी घरेलु, पारिवारिक आर्थिक स्थिति तथा व्यक्तिगत रूप से कमाने, खर्च करने और बचत तथा निवेश करने के तरीके शामिल किये जाते है,पैसे का व्यवहार कहा और कैसे-कैसे करते है।

आप को जो भी व्यव्हार पैसे से जुड़ा हुआ दिखे वो सब व्यव्हार (Money Transaction) “पर्सनल फाइनेंस” से जुड़ा हुआ विषय होता है ।

जैसे – Income, salary, budget, monthly expenses, bills payment, shopping, bank accounts, credit cards, home loan, personal loan, stock market portfolio, investment, life insurance and health insurance etc ,  mortgages loans, और एनी सभी तरह के loans/कर्ज , हमारी सम्पति(asset), हमारी देनदारिया (liabilities), और हमारी  future planning जैसे – retirement, child education, holiday trip,etc

इस तरह की सभी चीजे जो आपके पैसे से जुडी हुई हो, वो सब कुछ आपके “Personal finance Subject” से सम्बंधित होता है,

categories of personal finance in hindi


पर्सनल फाइनेंस के अन्दर आने वाले सभी तरह की चीजो को कुछ केटेगरी में बाटा जा सकता है, ताकि पर्सनल फाइनेंस को हम आसानी से समझ सके. इन पांच केटेगरी को ही सबसे प्रमुख माना जाता है,

पर्सनल फाइनेंस की अलग अलग केटेगरी

बजट (Budget) – जिसमे सभी तरह के इनकम और खर्चे शामिल हो जाते है

बीमा (Insurance) – सभी तरह की बिमा योजनाये जो हम समय पर लेते है जैसे – Life Insurance, Health Insurance, घर, गाडी, या दुसरे insurance,

टैक्स (Tax) – जिसमे कुछ प्रमुख टैक्स है – Income Tax, TDS, और दुसरे

बचत निवेश (Saving and Investment)

Financial Planning -जिसमे हम फाइनेंसियल फ्रीडम,रिटायरमेंट,बच्चो की एजुकेशन, शादी, और अन्य चीजो के खर्च की योजनाये बनाते है और उस पर काम करते है,

धन एक बहुत ही व्यक्तिगत विषय है, और आप ध्यान से देखेंगे तो समझेंगे कि हर व्यकित की धन कमाने की क्षमता एक दुसरे से अलग अलग होती है, और शायद ही कभी आपको दो लोगो ka कमाने, खर्च करने, बचत और निवेश करने का तरीका बिलकुल एक जैसा दिखे

हर व्यक्ति का अपना खुद का एक अलग “पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट” का तरीका होता है

अगर आप पढ़े लिखे ( वित्तीय साक्षरता ) हैं और अगर आपके पास टाइम है तो ये तीन कारण है आपको खुद ही पर्सनल फाइनेंस क्यों संभालना चाहिए

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Reasons for self managing Personal finance in hindi

आंकड़ों से पता चलता है कि लोग अब भी अपना पैसा प्रॉपर्टी, गोल्ड और बैंक डिपॉजिट में रखना पसंद करते हैं.

कई लोग इंश्योरेंस पॉलिसी लेते हैं. लेकिन, उन्हें यह नहीं पता होता कि उन्होंने सही कदम उठाया है या नहीं. एक्सपर्ट बनकर ठगी करने वालों के जाल में फंसकर भी बहुत से लोग अपनी रकम गंवा देते हैं.

यह मानना आसान है कि वित्तीय साक्षरता ऐसी मुश्किलों से बचा सकती है. लेकिन, सही में ऐसा नहीं है. निवेशकों को अपने पर्सनल फाइनेंस की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए. इसके तीन प्रमुख कारण हैं.

पहला, सरकार की ओर से हमें चीजें उपलब्ध कराने का दौर बीत गया है. आपको अपने पैसे पर भरोसा करना पड़ेगा. पेंशन वाली नौकरियां नहीं करने वाली एक पीढ़ी जल्द रिटायर हो जाएगी.लोग ज्यादा समय तक ज़िंदा रह रहे हैं. ज्यादा पैसे चाहिए। लम्बा जीवन काल व्यतीत करने के लिए

दूसरा मार्केट में पालिसी ,प्लान,वित्तीय प्रोडक्ट बेचने वालो का बहुत संख्या है। इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. इनके लुभावने वादों के जाल में फंसने से बचने के लिए निवेशकों को अपने पर्सनल फाइनेंस के फैसले खुद लेने होंगे और अधिक रिटर्न के वादों की हकीकत परखनी होगी.

तीसरा, लोन और नकदी की कमी के शुरुआती वर्षों के बाद करियर में आगे बढ़ने की चिंता सताती है. समय पर फैसले न लेने की कसक बाद में परेशान कर सकती है.आपको पैसे की कमी के कारण कई करियर से जुड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं.

पर्सनल फाइनेंस जीवन में किए जाने वाले कई फैसलों से नहीं जुड़ा है. यह जीवनभर के लिए किए जाने वाले कुछ निर्णयों के बारे में है. अगर आपका लक्ष्य वित्तीय आजादी का है तो आप इसे एक मजबूत आमदनी, नियंत्रित खर्च और एसेट जुटाने के बिना नहीं पा सकते हैं.

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पर्सनल फाइनेंस में किन बातो का ध्यान रखें

अगर आप निवेश के अच्छे फैसले करना चाहते हैं तो आपको एसेट एलोकेशन और डायवर्सिफिकेशन पर ध्यान देना होगा.आपके जमा पूंजी ,शेयर्स,डिबेंचर्स, इत्यादि किधर किधर लगे हैं और वो किस तरह के रिटर्न्स दे रहे हैं।

आप अगर बिना सोचे समझे फाइनेंशियल प्रोडक्ट खरीदते रहेंगे या प्रॉपर्टी में बहुत अधिक निवेश करेंगे तो एसेट एलोकेशन और डायवर्सिफिकेशन के लिहाज से आप बड़ी गलती कर सकते हैं.आपने कितनी पूंजी डिपाजिट में राखी है ,कितनी इन्शुरन्स में ,कितनी गोल्ड,सोना,म्यूच्यूअल फण्ड ,कितनी सिप इत्यादि में ,यह आपको मालूम होना चाहिए

ग्रोथ और इनकम के आइडिया को समझें . आपके जीवन के दौर के अनुसार पैसा जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है या नहीं. आपसे ज्यादा आपकी आर्थिक जरूरतों को कोई नहीं जानता। और यह भी परम सत्य है की आपके लिए जो पैसा बहुत है हो सकता है किसी के लिए वो बहुत कम हो।

आपकी रोजमर्रा की जरूरत का खर्च आपकी आमदनी से चलना चाहिए और बाकी सभी वैल्यू में ग्रोथ के लिए इनवेस्ट होना चाहिए.

इनवेस्टमेंट के लिए मार्केट में कई प्रोडक्ट हैं.

इनमें से आपको वे प्रोडक्ट चुनने होंगे जो आपकी जरूरत के अनुसार इनकम या ग्रोथ देते हैं. प्रत्येक फैसले के साथ सही चीज करने की इच्छा जुड़ होती है.

फैसले के साथ आपको कुछ समझौते भी करने पड़ सकते हैं. चाहे वह लोन, क्रेडिट कार्ड की बकाया रकम हो या आईपीओ पर आपका दांव या आपकी ओर से खरीदा गया म्यूचुअल फंड हो. आपको इस पर संतुष्ट होना पड़ेगा कि वह आपके लिए सही है.

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