Varsha Ritu Kavita – Rainy Season Poem in Hindi | वर्षा ऋतु पर कविता – बारिश कविता

इस दुनिया में मौसम में सबसे खुशमिज़ाज़ मौसम बारिश का मौसम माना जाता है क्योकि वर्षा का मौसम बहुत अच्छा होता है इस मौसम में चारो तरफ बारिश होती है पूरा बादल साफ़ व बादल इंद्रधनुष के रंगो से रंगा होता है | इस मौसम का आनंद लगभग सभी लोग लेते है इसीलिए हम आपको वर्षा ऋतु पर कुछ बेहतरीन कविताएँ बताते है जो कविताएँ कई स्कूल व कॉलेजों में कक्षा Class 1, Class 2, Class 3, Class 4, Class 5, Class 6, Class 7, Class 8, Class 9, Class 10, Class 11, Class 12 के बच्चो को पढ़ाई जाती है |

RAINY SEASON POEM IN HINDI

आपको hindi poems on rain by rabindranath tagore, poem on rain in hindi for class 7, poem on rain in hindi for nursery, hindi poems on rain by mahadevi verma, poem on clouds in hindi for class 10, barish par kavita in hindi, short poem on mausam in hindi, varsha ritu par kavita hindi mein, varsha ritu par kavita in gujarati, varsha ritu par kavita ka sangrah, rain poem in hindi lyrics के बारे में जानकारी यहां से जान सकते है :

आसमान पर छाए बादल
बर्षा लेकर आए बादल
गड़-गड़, गड़-गड़ की धुन में
ढोल-नगाड़े बजाए बादल
बिजली चमके चम-चम, चम-चम
छम-छम नाच दिखाए बादल
चले बयार सन-सन, सन-सन
मस्त गीत सुनाए बादल
बूँदें टपके टप-टप, टप-टप
झमाझम जल बरसाए बादल
झरने कहे कल-कल, कल-कल
इनमें बहते जाए बादल
चेहरे लगे हँसने-मुसकाने
इतनी खुशियाँ लाए बादल

वर्षा ऋतु पर कविताओं का संग्रह

बादल आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।
आगे-आगे नाचती – गाती हवा चली
दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगी गली-गली
पाहुन ज्यों आये हों गाँव में शहर के।
पेड़ झुके झाँकने लगे गरदन मचकाये
आँधी चली, धूल भागी घाघरा उठाये
बांकी चितवन उठा नदी, ठिठकी, घूँघट सरके।
बूढ़े़ पीपल ने आगे बढ़ कर जुहार की
‘बरस बाद सुधि लीन्ही’
बोली अकुलाई लता ओट हो किवार की
हरसाया ताल लाया पानी परात भर के।
क्षितिज अटारी गदरायी दामिनि दमकी
‘क्षमा करो गाँठ खुल गयी अब भरम की’
बाँध टूटा झर-झर मिलन अश्रु ढरके
मेघ आये बड़े बन-ठन के, सँवर के।

बारिश का मौसम कविता

RAINY SEASON SHORT POEM IN HINDI

पानी आया… पानी आया…
गरज रहे बादल घनघोर
ठुमक ठुमक कर नाचे मोर
पी-पी रटने लगा पपीहा
झन-झन-झन झींगुर का शोर
दूर कहीं मेंढक टर्राया
पानी आया… पानी आया…
रिमझिम-रिमझिम बूंदें आईं
खुशियों की सौगातें लाईं
पेड़ों के पत्तों ने भरभर
झूम-झूमकर तालियां बजाईं
गर्मी का हो गया सफाया
पानी आया… पानी आया…
भीग रहे कुछ छाता ताने
रानू-मोनू लगे नहाने
छप-छप-छप-छप करते फिरते
सपने जैसे हुए सयाने
बच्चों का मन है हर्षाया

BARISH KAVITA IN HINDI

मुखिया के टपरे हरियाये
मदारी के घाव
सावन की झांसी में गुमसुम
भीग रहा है गाँव
धन्नो के टोले का तो
हर छप्पर छलनी है
सब की सब रातें अब तो
आँखों में कटनी हैं
चुवने घर में कहीं नहीं
खटिया भर सूखी ठाँव
निंदियारी आँखें लेकर
खेतों में जाना है
रोपाई करते करते भी
कजली गाना है
कीचड़ में ही चलते चलते
सड़ जाएंगे पाँव

VARSHA RITU POEM IN HINDI LANGUAGE


निशि के तम में झर झर
हलकी जल की फुहार
धरती को कर गई सजल ।
अंधियाली में छन कर
निर्मल जल की फुहार
तृण तरु को कर उज्जवल !
बीती रात,…
धूमिल सजल प्रभात
वृष्टि शून्य, नव स्नात ।
अलस, उनींदा सा जग,
कोमलाभ, दृग सुभग !
कहाँ मनुज को अवसर
देखे मधुर प्रकृति मुख ?
भव अभाव से जर्जर,
प्रकृति उसे देगी सुख ?

Varsha Ritu Par Kavita

RAINY SEASON POETRY IN HINDI

अगर आप बारिश के ऊपर कुछ बेहतरीन कविताएँ अन्य भाषाओ जैसे Hindi, Kannada, Malayalam, Marathi, Telugu, Urdu, Tamil, Gujarati, Punjabi, Nepali, English Language Font 120 Words, 140 Character के 3D HD Image, Wallpapers, Photos, Pictures, Pics Free Download में जानना चाहे तो यहाँ से जान सकते है :

सावन भादौं साधु हो गए, बादल सब संन्यासी
पछुआ चूस गई पुरवा को, धरती रह गई प्यासी
फसलों ने वैराग ले लिया, जोगी हो गई धानी
भगवान जाने कब बरसेगा पानी

ताल तलैया माटी चाटै, नदियाँ रेत चबाएँ
कुएँ में मकड़ी जाला ताने, नहरें चील उड़ाएँ
उबटन से गगरी रूठी है, पनघट से बहुरानी
भगवान जाने कब बरसेगा पानी

छप्पर पर दुपहरिया बैठी, धूप टँगी अँगनाई
द्वार का बरगद ठूँठ हो गया, उजड़ गई अमराई
चौपालों से खलिहानों, तक सूरज की मनमानी
भगवान जाने कब बरसेगा पानी

पिघल गया चेहरों का सोना, उतर गई महताबी
गोरी बाँहें हुईं साँवरी, बुझ गए नयन गुलाबी
सपने झुलस गए राधा के, श्याम हुए सैलानी
भगवान जाने कब बरसेगा पानी

बाज़ारों में मँहगाई की बिखर गई तस्वीरें
हमदर्दों के पाँव पड़ गई वादों की जंजीरें
सँसद की कुरसी में धँस गई खेती और किसानी
भगवान जाने कब बरसेगा पानी

RAINY SEASON SHORT POEMS IN HINDI

बारिश जब आती है
खूब खुशिया लाती है
धरती की प्यास बुझाती है
धुलो का उड़ना बंद कराती है
मिटटी की सुगंध फैलाती है
बारिश जब आती है
खूब खुशिया लाती है
भीषण गर्मी से बचाती है
ठंडक हमें दे जाती है
मुसलाधार बारिश से पतझड़ को भागाती है
बहारो का मौसम लाती है
बारिश जब आती है
खूब खुशिया लाती है
चारो ओर हरियाली फैलाती है
नदियों का पानी बढाती है
तालाबो को भर जाती है
बारिश जब आती है
खूब खुशिया लाती है
बारिश के चलते ही खेती हो पाती है
किसानो के होठो पे मुस्कान ये लाती है
रिमझिम फुहारों से सुखा मिटाती है
बारिश जब आती है
खूब खुशिया लाती है
मोरो को नचाती है
पहाड़ो में फूल खिलाती है
बीजो से नए पौधे उगाती है
बारिश जब आती है
खूब खुशिया लाती है

POEM ON RAINY DAY IN HINDI


बारिश का मौसम है आया ।
हम बच्चों के मन को भाया ।।
‘छु’ हो गई गरमी सारी ।
मारें हम मिलकर किलकारी ।।
काग़ज़ की हम नाव चलाएँ ।
छप-छप नाचें और नचाएँ ।।
मज़ा आ गया तगड़ा भारी ।
आँखों में आ गई खुमारी ।।
गरम पकौड़ी मिलकर खाएँ ।
चना चबीना खूब चबाएँ ।।
गरम चाय की चुस्की प्यारी ।
मिट गई मन की ख़ुश्की सारी ।।
बारिश का हम लुत्फ़ उठाएँ ।
सब मिलकर बच्चे बन जाएँ ।।

Short Poem on Rainy Season in Hindi

POEMS ON RAINY SEASON IN HINDI BY FAMOUS POETS


अगर आप वर्षा ऋतु पर सचित्र कविता, वर्षा रितु कविता, वर्षा ऋतु पर निबंध in संस्कृत, वर्षा ऋतु का महत्व, पहली बारिश पर कविता इन हिंदी, ग्रीष्म ऋतु पर कविता, शरद ऋतु पर कविता, ग्रीष्म ऋतु पर एक कविता, वर्षा ऋतु पर शायरी, वर्षा ऋतु पर आधारित कविता, बारिश पर कविता हिंदी में, बारिश पे कविता, बारिश पर 10 कविता, बारिश के बारे में कविता, इस बारिश में कविता, बारिश पर बाल कविता, बारिश से संबंधित कविता, कविता बारिश का मौसम, ग्रीष्म ऋतु पर छोटा निबंध, बारिश पर कविता बरखा रानी, बारिश आई बारिश आई कविता, बारिश के ऊपर कविता के बारे में जानकारी पाना चाहते है तो यहां से जान सकते है :

बूँद टपकी एक नभ से,
किसी ने झुक कर झरोके से
कि जैसे हंस दिया हो,
हंस रही – सी आँख ने जैसे
किसी को कस दिया हो;
ठगा – सा कोई किसी की आँख
देखे रह गया हो,
उस बहुत से रूप को रोमांच रोके
सह गया हो।
बूँद टपकी एक नभ से,
और जैसे पथिक
छू मुस्कान, चौंको और घूमे
आँख उस की, जिस तरह
हंसती हुई – सी आँख चूमे,
उस तरह मै ने उठाई आँख
बादल फट गया था,
चन्द्र पर अत हुआ – सा अभ्र
थाड़ा हट गया था।
बूँद टपकी एक नभ से
ये कि जैसे आँख मिलते ही
झरोका बंद हो ले,
और नूपुर ध्वनि झमक कर,
जिस तरह दुत छंद हो ले,
उस तरह बादल सिमट कर,
चन्द्र पर छाय अचानक,
और पानी के हज़ारों बूँद
तब आये अचानक।