Top 10 Akbar Birbal Stories In Hindi-अकबर बीरबल 10 कहानियां

तारो की गिनती | New Akbar Birbal Story in Hindi | अकबर बीरबल की कहानी

एक रात बादशाह अकबर बीरबल के साथ अपने महल के झरोखे में खड़े हुए थे। आसमान में चाँद खिला हुआ था और सितारे भी चमक रहे थे।तभी बादशाह अपनी ही धुन में बीरबल से पूछ बैठे, ‘बीरबल, क्या तुम मुझे आसमान में तारों की सही गिनती बता सकते हो?”

तारो की गिनती | New Akbar Birbal Story Hindi
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“बिल्कुल जहांपनाह,” बीरबल तुरंत बोले, “आसमान में उतने ही तारे हैं, जितने एक घोड़े के सिर पर बाल होते हैं।” “लेकिन बीरबल,” बादशाह कुछ सोचते हुए बोले, “घोड़े के सिर पर तो अनगिनत बाल होते हैं।” “हुजूर, वही तो मैं कह रहा हूँ।

तारे भी आसमान में अनगिनत ही हैं।” बीरबल छूटते ही बोले। बीरबल का सटीक जवाब सुनकर बादशाह भौंचक्के रह गए।

फिर अकबर हँसते हुए बोले, “बीरबल, हाजिरजवाबी में तुम्हारा कोई टक्कर का नहीं। चिराग लेकर ढूँढने पर भी तुम्हारे जैसा दिमाग वाला कोई नहीं मिलेगा।”

अकबर बीरबल कहानी – आगरा में कितने मोड़ ? | Latest Akbar Birbal Story in Hindi


एक दिन अफगानिस्तान के बादशाह का दूत अकबर के दरबार में आया और उन्हें सलाम करके बोला, “हमारे बादशाह आगरा तशरीफ लाना चाहते हैं।

आगरा का बाजार देखने और आपसे मिलने की उनके मन में बड़ी ख्वाहिश है। लेकिन यहाँ आने के पहले वे ये जरूर जानना चाहते हैं कि आगरा की गलियों में कितने मोड हैं, ताकि यहाँ आने के बाद वे पशोपेश में न पड़ जाएँ।”

बादशाह अकबर ने जवाब दिया, “यह पता लगाने में कुछ वक्त लगेगा कि आगरा की गलियों में कितने मोड़ हैं। आप कुछ दिन हमारे यहाँ मेहमान बनकर रहिए। फिर हम आपको जवाब बता देंगे।”

“नहीं महाराज , मैं रुक नहीं पाउँगा । मेरे बादशाह ने मुझे यह बात पता करके तुरंत लौटने का हुक्म दिया है। मुझे कल सुबह आगरा छोड़ देना है।” दूत ने बताया। उसकी बात सुनकर बादशाह के माथे पर बल पड़ गए।

घोड़ों की गिनती में कुछ वक्त तो लगना ही था। भला इतनी जल्दी आगरा की गलियों में घोड़ों की गिनती कैसे बता दी जाए।

उन्होंने इस सम्बंध में अपने दरबारियों से भी सलाह-मशविरा किया, लेकिन कोई भी इस समस्या का समाधान बता नहीं सका। बादशाह अभी भी इस चुनौती का हल खोजने में लगे ही थे, तभी बीरबल ने दरबार में प्रवेश किया।

बीरबल को देखकर बादशाह ने राहत की साँस ली। उन्होंने बीरबल को बताया, “अफगानिस्तान के बादशाह ने हमसे एक बात बताने को कहा है। उन्होंने आगरा तशरीफ लाने की ख्वाहिश जाहिर की है| “

लेकिन इसके पहले वे ये जानना चाहते हैं कि आगरा की गलियों में कुल मोड़ कितने हैं उन्होंने यह पता करना है।” लगाने के लिए वक्त भी नहीं दिया है। उनके दूत को कल सुबह ही आगरा से कूच “यह तो बड़ा आसान सवाल है,

जहांपनाह!” बीरबल बोले, “और मझे लगता है काबुल के बादशाह को पहले से ही इस सवाल का जवाब मालूम होगा।” “क्या कह रहे हो तुम? क्या तुम इस सवाल का जवाब जानते हो?” बादशाह ने चौंकते हुए पूछा।

“बिल्कुल जानता हूँ, हुजूर! आगरा ही नहीं, दुनिया की सारी गलियों और सडकों में सिर्फ दो ही मोड़ होते हैं, दायाँ और बायाँ!” बीरबल ने कहा। बीरबल की बात सुनकर बादशाह हँसते हुए बोले,

“बीरबल, तुमने अपनी हाजिरजवाबी से एक बार फिर हमारी सल्तनत की लाज रख ली। हम तुम्हें बतौर इनाम पाँच सौ अशर्फियाँ देते हैं।”


Amazing Akbar Birbal Story in Hindi | बादशाह का नगीना | अकबर बीरबल कहानी


एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में रहने वाले एक विदेशी प्रतिनिधि ने कहा, “जहांपनाह, हमारे मुल्क में कई उस्ताद वैद्य हैं जो रत्नों व मणियों से इलाज करते हैं। उनके पास ऐसे-ऐसे पत्थर है जो दुनिया में कहीं और मिलने नामुमकिन हैं।

सोने और पीतल का अंतर जानने के लिए अक्सर इन पत्थरों का इस्तेमाल होता है। क्या आपके मुल्क में भी इस तरह की कोई चीज है?” “बिल्कुल है,” बादशाह बोले, “मेरे पास ऐसा नग है जो इससे भी बड़ी करामात कर सकता है।

वह सोने और चाँदी में ही नहीं, बल्कि अच्छी और बुरी बात में भी अंतर कर सकता है।” “ऐसी चीज तो निश्चय ही हैरतअंगेज होगी!” वह वैद्य बोला, “क्या आप मुझे वह चीज दिखा सकते हैं?”

Amazing Akbar Birbal Story In Hindi

“बिल्कुल दिखा सकता हूँ!” कहते हुए बादशाह ने बीरबल को सामने आने का इशारा किया। सारे दरबारी और वह विदेशी प्रतिनिधि यह सब बड़ी हैरत से देख रहे थे।

“यही है हमारा करामाती पत्थर!” बादशाह बीरबल की ओर इशारा करते हुए बोले, “यही वह बेशकीमती नगीना है जो सोने और पीतल ही नहीं, बल्कि अच्छी और बुरी बात में अंतर समझने काबिलियत भी रखता है।”

“आपने हीरे की कद्र कर ली है, बादशाह सलामत,” वह विदेशी प्रतिनिधि बोला, “आपका नगीना वाकई किसी भी कीमती से कीमती नगीने से बढ़कर है। हम सब आपके इस नगीने को सलाम करते हैं।” बादशाह बड़े गर्व से बीरबल की ओर देख रहे थे।


Best Akbar Birbal Story in Hindi for class 5 | अकबर बीरबल बर्तन में बुद्धि


एक दिन श्रीलंका के राजा का दूत बादशाह अकबर के दरबार में आया। बादशाह का अभिवादन करके वह बोला, “महाबली, हमारे महाराज को पता चला है कि आपके दरबार में अनेक बुद्धिमान लोग हैं।

उनका आग्रह है कि आप एक घड़ा बुद्धि उनके लिए भी भेज दें ।” श्रीलंका के महाराज का आग्रह सुनकर वहाँ मौजूद सभी दरबारी हक्के-बक्के रह गए और एक-दूसरे की शक्ल देखने लगे।

वे समझ गए थे कि श्रीलंका का राजा इस प्रकार का आग्रह करके उनकी होशियारी का इम्तहान लेना चाहता है। लेकिन उन्हें इसका कोई जवाब नहीं सूझ रहा था।

एक दरबारी ने तो खड़े होकर बोल भी दिया, ‘बादशाह सलामत, यह प्रार्थना पूरी कर पाना मुमकिन नहीं है। भला ये कैसे हो सकता है कि बुद्धि को घड़े में भरकर भेज दिया जाए?”

तभी बीरबल खड़े होकर बोले, “मैं श्रीलंका के महाराज की इच्छा पूरी सकता हूँ, लेकिन मुझे इस काम के लिए एक हफ्ते का वक्त चाहिए।”

बादशाह ने दूत से कहा,”आप एक सप्ताह के लिए हमारे मेहमान खाने में रहिए। तब तक बुद्धि को घड़े में भरने का काम पूरा हो जाएगा। आपको इसमें कोई दिक्कत तो नहीं है न?”

दत को एक सप्ताह का वक्त देने में कोई दिक्कत नहीं लगी, क्योंकि वह सोच रहा था कि बुद्धि को घड़े में भर देना किसी के लिए सम्भव ही नहीं है। उसने बादशाह अकबर का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

उधर बीरबल ने घर पहुँचकर अपने नौकर से कहा, “बाजार जाकर कुछ छोटे मुँह वाले घड़े ले आओ।” नौकर बाजार गया और एक दर्जन घड़े लेकर लौट आया।

बीरबल उन घड़ों को लेकर अपने बगीचे में जा पहुँचे, जहाँ बहुत से कद्दू बोए गए थे। उन्होंने कुछ पौधों को घड़ों के अंदर स्थापित कर दिया। फिर उन्होंने नौकर को आदेश दिया कि उनके कहने तक उन घडों को वहाँ से न हटाया जाए।

एक हफ्ते बाद बीरबल बगीचे में उन कद्दुओं को जाँचने के लिए पहुंचे। उन्होंने पाया कि कद्दू उन घड़ों के अंदर पूरी तरह उग चुके हैं। उन्होंने नौकरों को कदू से भरा हुआ एक घड़ा बड़ी सावधानी से वहाँ से दरबार में ले चलने का हुक्म दिया।

बीरबल दरबार जा पहुंचे। बीरबल के साथ घड़ा देखकर बादशाह के चेहरे पर मुस्कुराहट तैरने लगी। वे समझ गए कि बीरबल ने श्रीलंका के राजा की योजना निष्फल कर देने की व्यवस्था कर ली है।

उन्होंने तुरंत एक नौकर को श्रीलंका के दूत को बुला लाने के लिए भेज दिया। थोड़ी ही देर में, श्रीलंका का दूत दरबार में आ पहुँचा। बीरबल को घड़ों के साथ वहाँ मौजूद देखकर वह भौंचक्का रह गया।

उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि बीरबल उनकी चुनौती को इतनी आसानी से पूरा कर देंगे। फिर बीरबल दूत को वह घड़ा देते हुए बोले, “मैं आपको मुगल दरवार की ओर से बुद्धि से भरा यह घड़ा दे रहा हूँ।

आप सोच रहे होंगे कि बुद्धि हमने इस घड़े में कैसे डाली। मैं आपको बताना चाहूँगा कि हम बुद्धि को बहुत ही कीमती समझते हैं और इसीलिए इसे घड़ों में छिपाकर रखते हैं। हम श्रीलंका के महाराज को अपना मित्र समझते हैं।

यही कारण है कि हम इतनी बहुमूल्य वस्तु उन्हें उपहारस्वरूप दे रहे हैं। बुद्धि को घड़े से निकालते समय आप एक बात अवश्य ध्यान रखिएगा।

उसे इस घड़े से इतनी सावधानी से निकालना है कि उसे अथवा इस घड़े को किसी किस्म का कोई नुकसान नहीं पहुंचे। अगर आपने बिना घड़े को तोड़े-फोड़े बुद्धि निकाल ली, तो समझ लेना कि आप बुद्धिमान हो गए हैं।”

दूत को दिया गया घड़ा कपड़े से ढका हुआ था। कपड़ा हटाने पर जब दूत ने उसमें कद्दू पाया, तो वह हैरान रह गया। वह समझ नहीं पा रहा था कि उस कद को घडे के अंदर घुसेड़ा कैसे गया होगा।

उसने वहाँ से चुपचाप निकल जाने में ही अपनी समझदारी समझी । वह जल्दी से बादशाह का अभिवादन करके वहाँ से निकल लिया। जब बादशाह अकबर ने घड़े में रखी बुद्धि के बारे में जानना चाहा,

तो बीरबल ने अपने घर से एक और घड़ा मँगवा लिया। जब बादशाह ने उसके अंदर रखे कद् को देखा तो हँसते-हँसते लोटपोट हो गए। फिर वे बोले, “श्रीलंका का राजा अब जीवन में कभी बुद्धि के घड़े की माँग नहीं करेगा।”

ईश्वर का प्रेम अकबर बीरबल कहानी | Famous Akbar Birbal Story in Hindi

बादशाह अकबर सभी धर्मों के प्रति आदर भाव रखते थे। अपनी प्रजा में वे कभी धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करते थे। हिंदू धर्मशास्त्रों का तो उन्हें अच्छा-खासा ज्ञान था।

उदार और सहिष्णु स्वभाव के होने के साथ वे विनोदी स्वभाव के भी थे और बीरबल के साथ हल्की-फुल्की फुलझड़ियों का आदान-प्रदान करते रहते थे। एक दिन उन्होंने हास-परिहास के दौरान बीरबल से पूछा,

“एक बात बताओ, श्रीकृष्ण हर जगह अपने भक्तों की रक्षा करने खुद क्यों भागते थे? उनके पास कोई नौकर-चाकर नहीं थे क्या?” बादशाह की बात सुनकर बीरबल मुस्कुराए।

वे समझ गए कि बादशाह का मजाक करने का मन है। उधर बादशाह कहते चले गए, “ये देवता बड़े फुर्तीले भी होते हैं। किसी भक्त ने बुलाया नहीं कि दौड़े चले आते हैं, जैसे फुर्सत में ही बैठे हों।’

बीरबल बोले, “जहांपनाह, आपके सवाल का जवाब तुरंत देना मुमकिन नहीं है। मुझे कुछ वक्त दीजिए। मैं ठीक वक्त पर आपकी वात का माकूल जवाब दूंगा।” बादशाह हँस दिए। वैसे भी वे अपनी बात को लेकर गम्भीर नहीं थे।

बीरबल ने बादशाह के सामने अपने बात स्पष्ट करने के लिए एक योजना बनाई। वे एक मूर्तिकार के पास पहुंचे और उसे बादशाह के पोते खुर्रम की एक मोम की मूर्ति बनाने को कहा। बादशाह को खुर्रम से बहुत प्रेम था।

मूर्ति तैयार हो जाने पर वे उसे लेकर बादशाह के महल में जा पहुँचे और उनके नौकरों से उस मूर्ति को खुर्रम के कपड़े पहना देने को कहा। नौकरों ने तुरंत बीरबल की आज्ञा पर अमल किया।

अब कोई भी अगर दूर से खुर्रम की उस मूर्ति को देखता, तो उसे असली खुर्रम ही समझता। फिर बीरबल ने नौकरों को कुछ सलाह दी। अगले दिन बीरबल बादशाह के साथ शाही बगीचे में टहलने गए।

जैसे ही वे झील के पास आए, बीरबल ने नौकर को संकेत किया। उस मूर्ति को लेकर छिपे बैठे नौकर ने तुरंत ही वह मूर्ति झील के पानी में फेंक दी। बादशाह को दूर से देखकर ऐसा लगा, जैसे उनका पोता खुर्रम ही झील में गिर गया हो।

ईश्वर का प्रेम अकबर बीरबल कहानी | Famous Akbar Birbal Story Hindi

एक भी पल इंतजार किए बिना बादशाह भागते हुए आगे बढे और उन्होंने झील में छलांग लगा दी। जब वे तेजी से तैरते हुए उस जगह पर पहुंचे, तो पाया कि वह तो एक मूर्ति है। तब तक बीरबल भी वहाँ आ गए थे।

बीरबल की मदद से बादशाह झील के बाहर निकल आए। तभी बीरबल उनसे पूछ बैठे, “जहांपनाह, आपके पास नौकरों की कोई कमी तो है नहीं। फिर इस मूर्ति को गिरते देखकर आपने पानी में खुद छलांग क्यों लगा दी?

आपको खुद पानी में कूद जाने की क्या जरूरत थी?” “क्या बात कर रहे हो, बीरबल?” बादशाह बोले, “खुर्रम हमारा प्यारा पोता है। क्या हम उसे झील में डूबने से बचाने के लिए अपने नौकरों का इंतजार करते?

अगर इसी बीच वह डूब जाता तो? वह तो अच्छा हुआ कि यह बुत ही था!” यह मूर्ति मैंने ही बनवाई थी!” बीरबल ने खुलासा किया। “क्यों?” बादशाह ने बड़ी हैरत से पूछा।

“आपने खुर्रम को बचाने के लिए नौकरों का इंतजार नहीं किया, क्योंकि आप उससे बहुत मोहब्बत करते हैं। इसी तरह देवता भी अपने भक्तों से प्रेम करते हैं और उनकी रक्षा के लिए दौड़े आते हैं। भक्तों को बचाने के लिए देवता समय भी नहीं देखते।” बीरबल ने अपनी बात स्पष्ट की।

नकली साधु | अकबर बीरबल कहानी | Best Akbar Birbal Story Hindi

आगरा के पास ही एक साधु अपनी कुटिया बनाकर रहता था। सभी लोग उसे दीन-दुनिया से बेखबर एक संत समझते थे, लेकिन हकीकत में वह बड़ा लालची था।

एक दिन एक बूढ़ी औरत उसके पास आकर बोली, “साधु बाबा, मैं तीर्थयात्रा पर जा रही हूँ। मेरे पास ताँबे के कुछ सिक्के हैं, जो मेरी जीवन भर की बचत हैं। ये सिक्के अपने पास रख लीजिए।

मैं तीर्थयात्रा से लौटकर उन सिक्कों को आपसे ले लूँगी।” “मैं तो सांसारिक माया-मोह से संन्यास ले चुका हूँ।” साधु बोला, “धन से तो मेरा दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है। इसलिए मैं इन सिक्कों को हाथ नहीं लगाऊँगा।

तुम खुद इन सिक्कों को झोंपड़ी के किसी कोने में गाड़ दो।” साधु ने कहा और अपनी आँखें ध्यान के लिए बंद कर लीं। उस औरत ने वे सिक्के झोंपड़ी के एक कोने में गाड़ दिए और तीर्थ यात्रा पर चली गई।

कुछ महीनों बाद वह औरत तीर्थयात्रा से लौट आई। वह साधु के पास पहुँचकर बोला, “महाज्ञानी साधु! मैं तीर्थयात्रा से लौट आई हूँ। क्या मैं उन सिक्कों को ले लूँ? उन्हों के बूते तो मैं अपना बुढ़ापा शांति से गुजारने का सपना हूँ।”

नकली साधु अकबर बीरबल कहानी |  Best Akbar Birbal Story Hindi

“जहाँ तुमने उन सिक्कों को गाड़ा हो, वहीं से उन्हें निकाल लो। मैं तो सिक्कों को हाथ लगाता नहीं हूँ।” पाखंडी साधु बोला। वह औरत झोंपड़ी के अंदर जाकर उसी जगह खुदाई करने लगी, जहाँ उसने अपने सिक्कों को गाड़ा था।

लेकिन जब उसने अपने सिक्कों को वहाँ नहीं पाया,तो वह भौचक्की रह गई। उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी जीवन भर की कमा इस तरह गायब हो जाएगी।

उसने तो यही समझकर उन पैसों को साधु के पास छोड़ा था कि वहाँ वे सुरक्षित रहेंगे। वह भागती हुई उस साधु के पास पहुँची और बोली, “साधु बाबा, मेरे सिक्के वहाँ पर नहीं हैं, जहाँ मैंने उन्हें रखा था।”

“तो मैं क्या करूं?” पाखंडी साधु झल्लाता हुआ बोला, “तुमने खुद अपने सिक्कों को वहाँ रखा था। मैंने तो उन्हें छुआ तक नहीं था।” वह औरत समझ गई थी कि वह उस लालची साधु का शिकार बन गई है।

तभी उसके मन में बीरबल की मदद लेने का ख्याल आया। बीरबल बड़े ही बुद्धिमान थे और गरीबों की मदद के लिए जाने जाते थे। वह बीरबल के पास जा पहुँची और उन्हें सारी बात कह सुनाई।

बीरबल ने ध्यान से उसकी पूरी बात सुनी। कुछ देर सोचकर वे उससे बोले, “चिंता न करो, मैं तुम्हारे सिक्के दिलवा दूंगा। बस, तुम वैसा ही करना, जैसा मैं तुम्हें कह रहा हूँ।” फिर उन्होंने उस बुढिया को कुछ समझाया।

पूरी योजना समझकर बुढ़िया की बांछे खिल गई। अगले दिन बीरबल उस साधु के पास पहुँचकर बोले, “महात्मा जी, मैंने आपके विषय में बहुत कुछ सुन रखा है।

लोगों ने मुझे बताया है कि आप मोह-माया से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं रखते। इसीलिए मैं आपके पास आया हूँ। दरअसल मुझे अपने चचेरे भाई से मिलने के लिए देहली जाना है। वहाँ जाकर लौटने में मुझे एक महीने का वक्त लगेगा। मैं चाहता हूँ कि इतने समय के लिए आप मेरा यह थैला अपने पास रख लें।”

यह कहते हुए बीरबल ने एक थैला निकाला और उसे उस पाखंडी साधु के सामने ही खोल दिया। उस थैले में कीमती जवाहरात और मोती रखे हुए थे। इतनी दौलत देखते ही उस लालची साधु की आँखें चमकने लगीं।

वह मन ही मन सोच रहा था, ‘बस थोड़ी ही देर में ये सारी दौलत मेरी हो जाएगी। फिर मुझे साधु के वेश में यहाँ रहने की जरूरत ही नहीं रहेगी। मैं कहीं दूर भाग जाऊँगा और अपनी सारी जिंदगी मजे से करूंगा।’

तभी, उसे वह औरत उसी ओर आती दिखाई दी। उसने घबराकर सोचा, ‘अगर इस बुढ़िया ने इस मोटे आसामी के सामने कुछ कह दिया, तो फिर मेरे हाथ एक फूटी कौड़ी तक नहीं लगेगी।

मुझे इस बुढ़िया के चंद सिक्के देकर इसे भगा देना चाहिए।’ उस बुढ़िया के पास आते ही साधु उसके कुछ कहने के पहले ही बोल उठा, “अच्छा हुआ तुम आ गई।

मैंने ध्यान करने पर पाया कि तुम्हारे सिक्के झोंपड़ी के उत्तर वाले कोने की ओर दबे हुए हैं। तुम जाओ और वहाँ खोदकर सिक्के निकाल लो।” बुढ़िया अंदर जाकर उस जगह पर खोदने लगी।

थोड़ी ही देर में उसे वहाँ सिक्के दब मिल गए। तभी बीरबल का एक नौकर वहाँ आ पहुँचा और उनसे बोला, “मालिक, आपके देहली वाले भाई आए हुए हैं। वे आपसे मुलाकात करना चाहते हैं।” “वाह! यह तो बड़ा अच्छा हुआ।

अब तो मेरे देहली जाने की कोई जरूरत ही नहीं। है।” यह कहते हुए बीरबल अपने महल की ओर लौट पड़े। इस तरह उस पाखडा साधु को न बुढ़िया के सिक्के मिल सके और न ही बीरबल की दौलत। उसका तो वहा हाल हुआ कि ‘न खुदा ही मिला न विसाले सनम, न इधर के रहे न उधर के रहे ।

Akbar Birbal Stories in Hindi for Kids | अकबर बीरबल की तीन कहानी |बुढ़िया की कहानी


बीरबल के घर के पास ही एक बुढ़िया का मकान था। एक दिन बीरबल ने बुढ़िया के जोर-जोर से रोने की आवाज सुनी। पता करने पर उन्हें मालूम हुआ कि बुढ़िया का जवान बेटा लड़ाई में मारा गया है।

दरअसल, बुढ़िया का इकलौता बेटा मुगलिया फौज में सिपाही था और वह एक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गया था। बेटे के बिना बुढ़िया का अपना जीवन गुजारना भी मुश्किल हो गया था

बीरबल ने भी उस औरत से मुलाकात करके उसके प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त की। बुढ़िया बोली, “मेरा बेटा अपनी तनख्वाह का आधा हिस्सा मुझे भेज देता था। उसी से मेरा घर चलता था।

अब तो मेरे लिए भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी।” बीरबल एक क्षण विचार करके उससे बोले, “क्या तुम्हारे पास कोई ऐसी वस्तु है, जो तुम बादशाह सलामत को तोहफे में दे सको?” “मेरे पास तो एक पुरानी तलवार के अलावा कुछ नहीं है।

वह तलवार भी मेरे बेटे की है।” बुढ़िया ने जवाब दिया। “वह तलवार दरबार में ले जाकर बादशाह सलामत को तोहफे में दे दो। इसके बदले वे जरूर तुम्हें कुछ देंगे।” बीरबल ने सलाह दी।

बुढ़िया ने वैसा ही किया, जैसा बीरबल ने उसने कहा था। अगले दिन वह दरबार में पहुँची और तलवार को दोनों हाथों पर रखकर बोली, “जहांपनाह, मेरा बेटा आपकी फौज में काम करता था।

मैं यह तलवार आपको तोहफे में देना चाहती हूँ, जिससे यह फिर आपके काम आ सके।” बादशाह ने वह तलवार अपने हाथ में लेकर गौर से देखते हुए कहा, “इसमें तो जंग लग गई है। अब यह किसी काम की नहीं रही।”

फिर भी बादशाह ने एक नौकर से उस बुढ़िया को खजाने से कुछ धन दिलवा देने को कहा। बीरबल जानते थे कि वह धन बुढ़िया के लिए काफी नहीं होगा। “जहांपनाह, क्या यह तलवार मुझे देखने का एक मौका देंगे?”

यह कहते हुए बीरबल ने वह तलवार बादशाह के हाथों से ले ली और बड़ी हैरत का भाव दर्शाते हुए उसे देखने लगे। “क्या हुआ? तुम्हें इतनी हैरत किस बात से हो रही है?” बादशाह ने बड़े आश्चर्य से पूछा।

“मैंने सुना है कि बादशाह सलामत के किसी चीज को छ लेने पर वह चीज सोने की बन जाती है। मुझे हैरानी है कि इस बार ऐसा क्यों नहीं हुआ!” बीरबल बोले। बादशाह बीरबल का भावार्थ समझ गए।

उन्होंने एक नौकर को उस तलवार को सोने। के सिक्कों में तौलने और वे सिक्के उस बुढ़िया को दे देने का हुक्म दिया। सिक्के लेकर बहुत बुढ़िया खुशी-खुशी घर लौट गई।

सबसे चमकीली चीज | अकबर बीरबल की छोटी कहानी | Best Akbar Birbal Story in Hindi

एक बार बादशाह अकबर दरबार में बैठे-बैठे ऊब रहे थे। दरबार के सभी काम निपटाकर उनके दरबारी भी आराम की मुद्रा में बैठे थे ऐसे में बादशाह अकबर कोई ऐसी बात जरूर छेड़ देते थे,  जिससे दरबार का माहौल खुशगवार हो गए। इसी इरादे से उन्होंने दरबारियों से एक प्रश्न किया, “वह कौन सी चीज है जो सबसे ज्यादा चमकीली है?” जिसकी समझ में जैसा आया, उसने वैसा ही उत्तर दिया।  किसी ने कहा कि दूध सबसे अधिक चमकीला होता है।

वहीं कुछ लोगों ने कहा कि रुई सबसे ज्यादा चमकीली होती है। सभी लोग अपनी-अपनी बुद्धि के अनुसार उत्तर दे रहे थे।  आश्चर्य की बात यह थी कि सबसे अधिक बुद्धिमान समझे जाने वाले बीरबल अभी तक चुपचाप अपनी जगह बैठे हुए तमाशा देख रहे थे। जब अकबर की नजर बीरबल पर पड़ी, तो उन्होंने उनसे पूछा,  “तुम्हारा क्या कहना है, बीरबल? सभी लोग अपनी अपनी बात कह रहे हैं, फिर तुम क्यों चुप हो?” “मेरे ख्याल से सूरज की रोशनी दूसरी सभी चीजों से कहीं ज्यादा चमकीली होती है।”बीरबल ने उत्तर दिया।

“क्या तुम अपनी बात साबित कर सकते हो?” बादशाह अकबर ने पूछा।  “हाँ, मैं कर सकता हूँ।” बीरबल बोले। दूसरे दिन बीरबल ने अकबर को अपने घर रात भर ठहरने के लिए आमंत्रित किया।  अकबर बीरबल को अपने घर के सदस्य जैसा ही मानते थे, अत: उन्होंने बीरबल का यह निमंत्रण बेझिझक स्वीकार कर लिया और उनके यहाँ रहने चले गए। खाने के बाद बीरबल अकबर को शयनकक्ष में ले गए। 

शयनकक्ष को शहंशाह के लिए खासतौर पर सजाया गया था। खुशबूदार इत्रों की वजह से कमरा इतना महक रहा था कि अकबर को तुरंत नींद आ गई।  सुबह जब वे उठे, तो उन्होंने पाया कि शयनकक्ष के सभी दरवाजे व खिड़कियाँ बंद थीं तथा वे घोर अंधकार में खड़े थे। वे अनुमान से द्वार की ओर बढ़े। तभी उनका पैर किसी वस्तु से टकराया।  परंतु अंधेरा होने के कारण वे उस वस्तु को देख नहीं पाए। मुश्किल से टटोलते हुए वे दरवाजे तक पहुँच सके। उन्होंने जब द्वार खोला तो सूर्य की किरणें कमरे में आने लगीं।  उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो पाया कि वे एक दूध से भरे कटोरे से टकरा गए थे। पास ही कुछ रुई भी पड़ी थी। अकबर अभी स्थिति को समझने की कोशिश कर रहे थे कि तभी वहाँ बीरबल ने प्रवेश किया।

 “यह सब क्या हो रहा है? कमरे के सारे दरवाजे और खिड़कियाँ किसने बंद कर दिए थे? अंदर इतना घना अंधेरा छा गया था कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था। मुझे तो दरवाजे तक पहुँचना भी मुश्किल हो गया था।  किसी तरह टटोल-टटोलकर दरवाजे तक आ सका।” बादशाह ने आश्चर्यपूर्वक पूछा। “जहांपनाह, दरवाजे और खिड़कियाँ मैंने बंद किए थे।” बीरबल ने उत्तर दिया। बीरबल के इस उत्तर पर बादशाह को कुछ गुस्सा आ गया। 

उन्हें बीरबल से ऐसी आशा कदापि न थी। “इस हरकत की वजह?” उन्होंने अपना गुस्सा दबाने की कोशिश करते हुए पूछा। “जहांपनाह, जब अंधेरा था, तब आप दूध और रुई के होते हुए भी कमरे में कुछ भी देखने में नाकामयाब रहे थे।  आप तभी देख सके, जब सूरज की रोशनी अंदर आने लगी। अब आप ही बताइए कि सबसे ज्यादा चमकीली चीज कौन सी होती है?”

 अकबर को यह समझते देर नहीं लगी कि बीरबल ने यह नाटक अपनी बात को सिद्ध करने के लिए ही किया है। “मैं तुम्हारी बात समझ गया, बीरबल, कि सूरज की रोशनी से ज्यादा चमकीली चीज दुनिया में दूसरी नहीं है।  परन्तु यह समझाने के लिए तुमने मुझे बहुत तकलीफ में डाल दिया था। आगे से अपनी बात साबित करने के लिए थोडा सरल रास्ता अपनाना, जिससे ऐसी दिक्कत न हो।” अकबर ने कहा। बीरबल ने मस्कराते हए हामी भर दी।

सर्वोत्तम हथियार | Akbar Birbal Stories in Hindi 2021

एक दिन बादशाह अकबर शस्त्रागार में अपने अस्त्र-शस्त्रों का निरीक्षण कर रहे थे। पड़ोसी राज्यों के हमले के खतरे के चलते उन्हें सुरक्षा की चिंता सता रही थी, जिस कारण से वे यह जान लेना चाहते थे कि उनके पास कितने अस्त्र-शस्त्र हैं।  चलते-चलते उन्होंने अपने साथ चल रहे दरबारियों से पूछा, “जंग का सबसे बढ़िया हथियार कौन सा है?” “जहांपनाह, तलवार।” एक ने कहा। “तीर और धनुष, आलमपनाह।”  दूसरे दरबारी ने अपनी बुद्धि घुमाई। “बीरबल, क्या हुआ भई, तुम्हारे हिसाब से जंग या अपने बचाव के लिए सबसे बढ़िया हथियार क्या होता है?’ बादशाह ने पूछा। “मैं समझता हूँ कि सबसे बेहतरीन हथियार वही है,  जो वक्त पर तुरंत हाथ में आ जाए।” बीरबल ने कहा।

बीरबल के इस उत्तर पर सभी सोच में पड़ गए, क्योंकि इस उत्तर का अर्थ उनकी समझ में नहीं आया था। “तुम्हारी बात का क्या मतलब हुआ, बीरबल?” बादशाह ने भी पूछा।  “इस तरह से बताना मुश्किल होगा, जहांपनाह,” बीरबल बोले, “किसी दिन सही मौका आने पर मैं अपनी बात का मतलब साफ कर दूँगा।” कुछ दिनों बाद बादशाह अकबर बीरबल के साथ नगर भ्रमण के लिए निकले।

पैदल इधर-उधर भ्रमण करते हुए वे दोनों सामान्य नागरिकों जैसे जीवन का आनंद उठा रहे थे। उन दोनों ने वेष बदल रखा था ताकि लोग उन्हें पहचान न सकें।  चलते-चलते अचानक उन्होंने सामने से एक बड़े कुत्ते को आक्रमण की मुद्रा में अपनी ओर आते हुए देखा। सहयोग से अकबर आगे व बीरबल पीछे चल रहे थे। कुत्ता इतना निकट आ चुका था कि पीछे मुड़कर भागना सम्भव नहीं था।  वेष बदलकर तलवार भी छुपाए होने के कारण शीघ्रता से उसे निकालना भी सम्भव न हो सका। कुत्ता उछलकर आक्रमण करने ही वाला था कि तभी बीरबल ने शीघ्रता से किनारे पडे एक पत्थर को उठाकर कुत्ते की ओर फेंक दिया।  कुत्ता भय से पलटकर वहाँ से भाग गया।

अब गली में उन दोनों के अतिरिक्त और कोई नहीं था। अकबर अपने चेहरे से पसीना पोंछते हुए बोले,  “बीरबल, यदि तुमने पत्थर फेंककर उसे भगाया न होता, तो उस पागल कुत्ते ने तो हमारा काम तमाम कर ही दिया था।” “जहांपनाह, अब आप ही बताइए कि सबसे बढ़िया हथियार कौन सा है? तलवार या पत्थर?”  बीरबल ने मुस्कुराते हुए पूछा। “अरे! यहाँ तो मुसीबत से बचने को तुरंत हाथ में आया पत्थर ही सबसे बढ़िया हथियार साबित हुआ है। तुमने सही कहा था, बीरबल, मुसीबत के वक्त जो हथियार काम आए, वही सबसे अच्छा होता है।”

गधा कौन | अकबर बीरबल की कहानियां | Akbar Birbal Stories in hind for Students

एक दिन बादशाह अकबर सारा कामकाज निपटाने के बाद मनोरंजन की मुद्रा में बैठे हुए थे। लेकिन बीरबल ऐसे वातावरण में भी शांत बैठे थे। उस दिन वे हँसी-मजाक में कोई दिलचस्पी नहीं ले रहे थे।  बीरबल के बिना बादशाह की महफिल पूरी कैसे होती? इसलिए उन्हें उकसाने की दृष्टि से बादशाह ने उन्हें छेड़ा, “बीरबल, जरा यह बताओ कि तुममें और गधे में कितना अंतर है?”

  ईर्ष्यालु दरवारियों ने बादशाह का सवाल सुनकर ठहाके लगाने शुरू कर दिए। उधर बीरबल कहाँ चुप रहने वाले थे। उन्होंने चुपचाप अपना सिर नीचे झुका लिया जैसे भूमि की ओर देखते हुए कुछ गणना कर रहे हों।  उनकी मुद्रा बड़ी गम्भीर थी और वे अपने हाथों पर कुछ गिनती कर रहे थे। “क्या गिनती कर रहे हो, बीरबल?” अकबर ने थोड़ी हँसी के साथ पूछा। “मैं अपने और गधे के बीच की दूरी पता करने की कोशिश रहा था मैंने गिनती कर ली है,” 

बीरबल ने अपनी दृष्टि अकबर की ओर उठाते हुए कहा, “यह कोई सोलह फीट जान पड़ती है।” इस उत्तर पर अकबर अत्यंत लज्जित हो गए और कुछ देर तक दृष्टि ऊपर न कर सके।  दरअसल बीरबल ने अकबर के सिंहासन के सामने खड़े होकर उनके और अपने बीच की दूरी बताई थी। इस प्रकार बीरबल ने बादशाह द्वारा किए गए मजाक को उन्हीं पर पलट दिया।