Taj Mahal Shayari in Hindi – taj mahal shayari 2 line – ताजमहल पर शायरी

Taj Mahal Shayari – हम आपके लिए Taj Mahal Shayari In Hindi लेकर आये है. ताजमहल को प्रेम का प्रतीक माना जाता हैं.

हजारों-लाखों मजदूरों की मेहनत, कलाकारों की चित्रकारी, सफेद संगमरमर, बहुमूल्य रत्नों से सुसज्जित ताजमहल अतिभावन लगता था.

इसका निर्माण शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज की याद में बनवाया था. इसे देखने के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं.

इस पोस्ट में कुछ बेहतरीन Taj Mahal Shayari, TajMahal Status, Taj Mahal Quotes, Taj Mahal Par Shayari, Taj Mahal Love Shayari In Hindi , Taj Mahal Fb Status In Hindi, आदि इस पोस्ट में दिए हुए हैं. अगर आपको हमारी शायरी पसंद ए तो इसको अपने दोस्तों और परिवार वालो के साथ शेयर करे। और दोस्त कॉमेंट करना ना भूले। .

Taj Mahal Shayari

जब इश्क का जादू चलता है
तभी सेहरा में फूल खिलता है
जब कोई दिवाना यु मचलता है
तब कोई इमारत ताजमहल बन निकलता है

रिश्ते ताजमहल की तरह होते हैं,
उनकी खूबसूरती को सभी देखते हैं
पर उन्हें बनानें में लगी ‘मेहनत’ और ‘वक्त’
किसी को महसूस नहीं होता

सिर्फ इशारों में होता इश्क अगर,
इन अलफाजों को खुबसूरती कौन नवाजता ?
बस इमारत बन के रह जाता “ताज महल”
अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता..


मै भी बना दूंगा महल
तू मुमताज़ बनके तो दिखा

Taj Mahal Shayari In Hindi

किसकी खूबसूरती का दीदार करें हम,
आज वो और ताजमहल दोनों एक साथ हैं.

कोई तो बात होगी मोहब्बत मे
वरना एक महरूम के लिए ताजमहल कहाँ बनता॥

ज़िंदा है शाहजहाँ की मोहब्बत अब तक,
गवाह है मुमताज़ की उल्फत अब तक,
जाओ देख आओ ताज महल को यारों ,
पत्थर से टपकती है चाहत अब तक…

संगमरमर की तू बात न कर मुझसे,
मैं अगर चाहुँ तो तेरी इबादत लिख दूँ,
ताजमहल भी उठ जायेगा जाएगा चूमने के लिए,
में जो अगर तेरे आँखों की क़यामत लिख दू

Taj Mahal Love Shayari In Hindi

झूम के जब यारो को पिला दी,
दिलो ने चुपके चुपके दुआ दी,
एक कमी थी दिल के ताज-महल में,
मैंने तेरी तस्वीर सजा दी…

Taj Mahal Shayari In Hindi 2 Line

शहर के हर गली में ताज होता।
गर मेरे इसक में भी अक्स-ए-मुमताज होता।

Taj Mahal Quotes

इम्मारत की ईंटों से ताजमहल नहीं बनता,
नदी रोकने से समुन्दर नहीं बनता
लड़ते रहो जिन्दगी से हर पल
एक हलकी जीत से कोई सिकन्दर नहीं

Taj Mahal Fb Status In Hindi

अगर तुम न होते तो गजल कौन लिखता ,
तुम्हारे चेहरे को कमल कौन लिखता ,
यह तो करिश्मा हैं इश्क का
वरना इमारत को ताजमहल कौन लिखता .

Taj Mahal Shayari

सफ़र लम्बा है यार बनाते रहिये,
दिल मिले ना मिले प्यार बढ़ाते रहिये,
ताजमहल न बनवाइये महंगा पड़ जायेगा ,
मगर हर तरफ मुमताज़ बनाते रहिये।

Taj Mahal Par Shayari

Shayari On Taj Mahal In Hindi

जिन्दा है शाहजहाँ की चाहत अब तक,
जवान है मुमताज की उल्फत अब तक,
जाओ देखो ताजमहल को यारो
इमारत से भी झलकती है इश्के मोहब्बत अब तक.

Taj Mahal Ki Shayari

रहा यूँ ही नामाकूल ग़म-ए-इश्क का फसाना,
कभी मुझको नींद आई कभी सो गया मेरा ज़माना।

Taj Mahal Ki Shayari Hindi Me


हजारों झोपडियां जलकर राख हो गयी
तब जाकर एक महल बना
आशिको के मरने पर कफ़न भी नहीं मिलता,
हसीना के मरने पर ‘ताज महल’ बना

Shayari In Hindi 2 Line

सिर्फ इशारों में होती महोब्बत अगर,
इन अलफाजों को खुबसूरती कौन देता
बस पत्थर बन के रह जाता ‘ताज महल’
अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता

Taj Mahal Shayari In Hindi 2 Line

हर धड़कन में एक मुमताज होती है,
हर दिल एक ताजमहल होता हैं.

जब मोहब्बत का शुरुर चलता है
सेहरा में फूल खिल जाता है
जब कोई दिवाना मचलता है
तब ताजमहल बन जाता है.

Taj Mahal Funny Shayari In Hindi 2 Line

ताजमहल की ईमारत मोहब्बत की मिसाल है
हम किस किस के लिए ताजमहल बनाये
हमे तो हर लड़की में मुम्ताज़ नज़र आती है

Taj Mahal Shayari In Hindi 2 Line

ताज महल नहीं चाहिए,
मुझे तेरा प्यार ही चाहिए,
रुक्सत होने पर मेरे नाम का ताजमहल नहीं बनना,
सिर्फ अपने दिल में मेरी तस्वीर तुम सजाना.

ज़िंदा है शाहजहाँ की चाहत अब तक,
गवाह है मुमताज़ की उल्फत अब तक,
जाके देखो ताज महल को ए दोस्तों,
पत्थर से टपकती है मोहब्बत अब तक..


संगमरमर की तू बात न कर ,
चाहता हु एहसास-ऐ-मोहब्बत लिख दूँ,
ताजमहल भी झूक जाएगा इबादत में
में जो एक पत्थर पे ऐसा कलमा लिख दूँ…

Taj Mahal Fb Status In Hindi

अगर इस जहाँ में मेहनती मजदूर का न नामों निशाँ होता,
फिर न होता हवामहल और न ही ताजमहल होता…

ताजमहल को देख कर बोला शाहजहाँ का पोता.
हमारा भी बैंक बैलेंस होता, अगर दादा आशिक ना होता!

Taj Mahal Shayari In Hindi

तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता,
तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता,
यह तो करिश्मा है जूनून का,
वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता…


Taj Mahal Funny Fb Status In Hindi

ताज महल क्या चीज़ है मैं तेरे लिए हीरों का महल बनवाऊंगा
मुमताज़ तो मर के दफ़न हुई थी मैं तुझे जिंदा ही दफ्नाऊंगा.


इश्क ने इंसान को क्या बना दिया,
किसी को कवि किसी को फिकरा बना दिया,
दो फूलों का बोझ न उठा सकती थी मुमताज
और शाहजहाँ ने उसपर ताजमहल बना दिया.

Taj Mahal Fb Status In Hindi

शहंशाह ने बनवा दी बेहतरीन ताज-महल,
सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है…

अगर तुम न होते तो गजल कौन कहता,
तुझे कीचड़ में कमल कौन कहता,
यह तो करिश्मा है मोहब्बत का
वरना पत्थर को ताजमहल कौन कहता।

जब प्यार किसी से होता हैं,
हर दर्द दवा बना जाता है,
क्या चीज इश्क होती हैं,
एक शख़्स खुदा बन जाता हैं

ताजमहल को शाहजहां ने अपनी बेग़म मुमताज़ के लिए बनवाया था। तब से ताजमहल प्रेम का प्रतीक बन गया। इसी ताजमहल पर शायरों ने भी अपनी नज़्में लिखी हैं। पेश हैं ताजमहल पर लिखीं बेहतरीन कविताएं

इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताज-महल
सारी दुनिया को मोहब्बत की निशानी दी है
इस के साए में सदा प्यार के चर्चे होंगे
ख़त्म जो हो न सकेगी वो कहानी दी है
इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताज-महल

ताज वो शमा है उल्फ़त के सनम-ख़ाने की
जिस के परवानों में मुफ़्लिस भी हैं ज़रदार भी हैं
संग-ए-मरमर में समाए हुए ख़्वाबों की क़सम
मरहले प्यार के आसाँ भी हैं दुश्वार भी हैं
दिल को इक जोश इरादों को जवानी दी है
इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताज-महल – शकील बदायुनी


ताज तेरे लिए इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सही
तुझ को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही

मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से
बज़्म-ए-शाही में ग़रीबों का गुज़र क्या मानी

सब्त जिस राह में हों सतवत-ए-शाही के निशाँ
उस पे उल्फ़त भरी रूहों का सफ़र क्या मअ’नी

मेरी महबूब पस-ए-पर्दा-ए-तश्हीर-ए-वफ़ा
तू ने सतवत के निशानों को तो देखा होता

ये चमन-ज़ार ये जमुना का किनारा ये महल
ये मुनक़्क़श दर ओ दीवार ये मेहराब ये ताक़

इक शहंशाह ने दौलत का सहारा ले कर
हम ग़रीबों की मोहब्बत का उड़ाया है मज़ाक़

मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझ से

साहिर लुधियानवी


है किनारे ये जमुना के इक शाहकार
देखना चाँदनी में तुम इस की बहार
याद-ए-मुम्ताज़ में ये बनाया गया
संग-ए-मरमर से इस को तराशा गया
शाहजहाँ ने बनाया बड़े शौक़ से
बरसों इस को सजाया बड़े शौक़ से
हाँ ये भारत के महल्लात का ताज है
सब के दिल पे इसी का सदा राज है – अमजद हुसैन हाफ़िज़ कर्नाटकी


अल्लाह मैं ये ताज महल देख रहा हूँ
या पहलू-ए-जमुना में कँवल देख रहा हूँ

ये शाम की ज़ुल्फ़ों में सिमटते हुए अनवार
फ़िरदौस-ए-नज़र ताज-महल के दर-ओ-दीवार

अफ़्लाक से या काहकशाँ टूट पड़ी है
या कोई हसीना है कि बे-पर्दा खड़ी है

इस ख़ाक से फूटी है ज़ुलेख़ा की जवानी
या चाह से निकला है कोई यूसुफ़-ए-सानी

गुल-दस्ता-ए-रंगीं कफ़-ए-साहिल पे धरा है
बिल्लोर का साग़र है कि सहबा से भरा है

महशर बदायुनी

परवीन शाकिर
संग-ए-मरमर की ख़ुनुक बाँहों में
हुस्न-ए-ख़्वाबीदा के आगे मेरी आँखें शल हैं
गुंग सदियों के तनाज़ुर में कोई बोलता है
वक़्त जज़्बे के तराज़ू पे ज़र-ओ-सीम-ओ-जवाहिर की तड़प तौलता है

हर नए चाँद पे पत्थर वही सच कहते हैं
उसी लम्हे से दमक उठते में उन के चेहरे
जिस की लौ उम्र गए इक दिल-ए-शब-ज़ाद को महताब बना आई थी!
उसी महताब की इक नर्म किरन
साँचा-ए-संग में ढल पाई तो
इश्क़ रंग-ए-अबदिय्यत से सर-अफ़राज़ हुआ

कैफ़ी आज़मी
ये धड़कता हुआ गुम्बद में दिल-ए-शाहजहाँ
ये दर-ओ-बाम पे हँसता हुआ मलिका का शबाब
जगमगाता है हर इक तह से मज़ाक़-ए-तफ़रीक़
और तारीख़ उढ़ाती है मोहब्बत की नक़ाब
चाँदनी और ये महल आलम-ए-हैरत की क़सम
दूध की नहर में जिस तरह उबाल आ जाए
ऐसे सय्याह की नज़रों में खुपे क्या ये समाँ
जिस को फ़रहाद की क़िस्मत का ख़याल आ जाए
दोस्त मैं देख चुका ताज-महल
वापस चल

अज्ञेय / ताजमहल की छाया में
हम-तुम आज खड़े हैं जो कन्धे से कन्धा मिलाये,
देख रहे हैं दीर्घ युगों से अथक पाँव फैलाये
व्याकुल आत्म-निवेदन-सा यह दिव्य कल्पना-पक्षी
क्यों न हमारा ह्र्दय आज गौरव से उमड़ा आये

मैं निर्धन हूँ,साधनहीन ; न तुम ही हो महारानी
पर साधन क्या? व्यक्ति साधना ही से होता दानी
जिस क्षण हम यह देख सामनें स्मारक अमर प्रणय का
प्लावित हुए, वही क्षण तो है अपनी अमर कहानी

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