love poetry in hindi | प्यार पर कविताएँ

प्यार शब्द का मतलब बहुत मुश्किल से समझ आता है क्यूंकि उसे हमें महसूस करना पड़ता है। प्यार एक एहसास हैं जिसे भगवान ने हमारे लिए बनाया हैं। एक इन्सान किसी दुसरे इन्सान को उसके हर आदतों के साथ प्यार करता हैं. हम सब में बहुत सारी अच्छाईयाँ और कुछ बुराई भी होगी।

लेकिन जब हम किसी से प्यार करते हैं तो जो जैसा होता है, वैसा ही उसको पसंद करते हैं। यह सबसे खूबसूरत बात होती है. । आज हम आपके लिए प्यार पर कुछ कविताएँ – poetries on love in hindi लाये हैं. आपको जरुर पसंद आएँगी। कविताएं हिंदी और रोमन इंग्लिश में भी लिखी गयी हैं.

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love poetry in hindi -bayaan

swarachit rachna in hindi

बयान तो करो

तुम अकेले हो हम तनहा है
कभी मिले थे आज कहां हैं
क्या हाल है तुम्हारे ?
थोड़ा बयान तो करो

कहो दुबारा उन परियों की कहानी
बितायी थी जिसमें हमने जवानी
क्या तुम भूल गए सब कुछ?
पूछो खुद से ,थोड़ा ना तो करो

खामोश लब मुस्कुरा लेंगे दोबारा
जी लेंगे वह पल हम फिर सहारा
मेरे सवालों की तुम ही राह्बहरो
मान जाओ, थोड़ा हां तो करो

गम को हटाकर जरा इश्किया सागर तो देखो
मन को समझा कर थोड़ा दूरियां बाहर तो फेंको
दिल के प्याले को चलो थोड़ा भरो
मोहब्बत के दिलवाले को थोड़ा बयान तो करो

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best poems in hindi Thoda Bayaan toh karo

swarachit kavita in hindi

Tum akele ho hum tanha hai
Kabhi mile the aaj kahan hai
Kyaa haaal hai tumhare
Thoda Bayaan toh karo

Kaho dubara un pariyo ki kahani
Bitaayi thi hamne jisme jawani
Kya tum bhul gaye sab kuch ?
Thoda naa toh karo

Khaamosh labh muskra lenge dubara
Ji lenge wo pal hum fir sara,
Mere sawaalo ka hi tum rehbaro ho
Maan jao Thoda haan toh karo

Gum ko hata kar zara isqhiya saagar toh dekho
Man ko samjhakar thoda duriyaa bahar toh fekho
Dil ke pyaale ko chalo thoda bharo
Mohabbat ke dilwale ko Thoda bayaan toh karo

love poem in hindi for girlfriend maangunga

Love Poem in Hindi |  swarachit kavita in hindi

आंखें खुले तो दीदार तुम्हारा मांगूंगा
अगर हो बंद तो प्यार तुम्हारा मांगूंगा
मरने के लिए हर लम्हा मंजूर है
गुजरने से पहले इंतजार तुम्हारा मांगूंगा

चाहता हूं तुम मेरी नजरों में रहो
तुम प्यार करती हो बस यही कहो
आंखों में चुरा कर छुपा लूं तुम्हें
कैसे कहूं कि तुम मेरी हो मेरी ही रहो

खुश तो रहने की लाख कोशिशें की हैं
मरने से पहले इश्क में चालाक हरकतें की हैं
बनाने वाले ने तुझे क्या बनाया है
तेरे जैसा यार ही हर बार मांगूंगा

हर मोहल्ले में चर्चा तुम्हारा ही रहता है
पर खुले में इश्क का पर्चा हमारा ही कहता है
सुन लो मेरी एक बात इंतजार तुम्हारा मांगूंगा
आंखें खुले जब भी प्यार तुम्हारा मांगूंगा

ना तेरा सलमान हूं ना कहीं का आमिर खान हूं
तू लैला है मेरी , मान जाओ मैं ही तेरा जान हूं
देखी है दिवाली संग संग खेले हैं होली के रंग
हर साल तेरा मजेदार हो हर बार यही मांगूंगा

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love poetry in hindi

hindi english poem maangunga

Ankhe khule toh didaar tumhara maangunga
Agar ho band ho toh pyaar tumhara mangunga
marne ke liye har lamha manjoor hai,
gujarne se pehale intejaar tumhara mangunga

Chahta hu tum meri najro me raho
tum pyar karti ho bas yahi kaho
aankhon me chura kar chupa lun tumhe
Kaise kahu ki tum meri ho meri hi raho

Khush toh rahne ki lakh koshishe ki hain
Marne se pehale ishq me chalaak harktei ki hai
Banaane wale ne tujhe kya banaya hai
Tera jaisa yaar hi harbaar maanguga

Har muhalle me charcha tumhara hi rehta hai
Par khule me ishq ka parcha hamara hi kehta hai
Sun lo meri ek baat intejaar tumhara maangunga
Aankh khule jab bhi pyaar tumhara maangunga

Naa tera salmaan hun naa kahi ka amir khan hu
Tu laila hai meri , maan jao mai hi tera jaan hu
Dekhi hai Diwali sangsang khele hai holi ke rang
Har saal tera majedaar ho harbaar yahi mangunga

new poem in hindi dil ke kone se

दिल के इस कोने से | samajik kavita hindi

हमने चाहा है तुम्हें दिल के इस कोने से
नींद आती नहीं, हम परेशान हैं रोने से
एहसास जिंदा है तुम्हारे जाने के बाद भी
कहीं मर ना जाएं, तुम्हारा इंकार होने से
एक हां और मांगता हूं, दोगी ना तुम यह जानता हूं
प्यार तुम ही हो, आवाज आती है दिल के उसी कोने से
तुम्हारी जुल्फों की वह भीनी खुशबू बहुत तड़पाती है
सोच कर खुश हो जाता हूं तुम्हारे शब्दों के खिलौने से
नहीं जी सकता घुट घुट के चाहे जो भी करना पड़े
तकलीफ होती है हमें, तुम्हारी नजरों के बेवजह होने से

love poem in hindi for husband

Hamne chaha hai tumhe dil ke is kone se
Neend aati nahi, hum pareshaan hai rone se

Ehsaas jinda hain, tumhare jaane ke baad bhi
kahi mar naa jaayei, tumhara inkaar hone se

ek haan aur maangta hu,dogi naa tum ye jaanta hu
pyaar tumhi ho ,awaaz aati hai dil ke ussi kone se

tumhari zulfo ki wo bhini khusbu bahut tadpaati hai
soch ke khush ho jaata hu, tumhare labo ke khilaune se

nahi ji sakta ghutghut ke chahe jo bhi karna pade
taklif hoti hai hamei, tumhare najro ke bewajah rone se

love poem in hindi for husband

प्यार पर कविता | तो क्या बात होगी

तेरे हाथ मेरे हाथों में रह जाए तो क्या बात होगी
जीवन बस यूं ही कट जाए तो क्या बात होगी
तुम मेरी ग़ज़ल हो इश्क का लहराती फसल हो
अगर तुम्हें यह पता चल जाए तो क्या बात होगी
झूम रहा हूं तुम्हारी याद में, अक्सर इसी जज्बात में
तुम आ जाओ मिलने,सब छोड़ के तो क्या बात होगी
मेरा दिल जलना चाहता है ,इश्क की राख बनना चाहता है
तुम अपने दिल को यह समझाओ तो क्या बात होगी

kavita image

Tere haath mere haathon me rah jaaye to kya baat hogi
Jiwan bas yu hi kat jaaye toh kya baat goi

Tum meri gazal ho ishq ka lahlahati fasl ho
Agar tumhe ye pata chal jaaye toh kyaa baat hogi

Jhoom raha hu tumhari yaad me aksar issi jazbaat me
Tum aa jao milne sab chor ke toh kyaa baat hogi

Mera dil jalna chahta hai ishq ki raakh banana chahta hai
Tum apne dil ko yah samjhao toh kyaa baat hoi

poems in hindi | हिंदी कविता

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दोस्तों प्रश्तुत है  Poems in Hindi | कविता संग्रह ,हिंदी कविताएँ. वर्तमान समय में सभी को प्रेरणा चाहिए। हर उस व्यक्ति का हाथ थामना चाहिए जो निराशा से ग्रस्त है।

कवी का काम समाज में चल रही कुरीतिये, कुव्यवस्थाओं के साथ साथ पाठक का मनोरंजन करना भी होता है. हमारी कोशिश है की हम सारो मुद्दों को मनोरंजक रुप में रखें बहुत सारे कविता थोड़े बड़े हैं लेकिन पाठक अगर पढ़ेंगे तो उन्हें मजा आएगा
इसीलिए हम कविताओं के माध्यम से सभी को प्रेरणा देने का प्रयास किया है. उम्मीद है कि आपको यह सभी कविताएं Poems in Hindi | कविता संग्रह पसंद आएंगी.

[su_heading] Poem in Hindi | अंजाम अभी बाकी है[/su_heading]

हुजूम निकला है हुकमदारो का ,अंजाम निकलना अभी बाकी है |
सुकून पिघला है सितारों का, चाँद पिघलना अभी बाकी है ||
सुना है तहखाने भरे है मोतियों से , खदान खुलना अभी बाकी है |
गड़े है मुर्दे शामियाने में , कब्रिस्तान निकलना अभी बाकी है ||
जल रहे अरमान, गंगास्नान करना अभी बाकी है
मर रही है उम्मींदे, समशान निकलना अभी बाकी है
गर्म चर्चाएं हो रही इन चुनावी गर्मियों में , आस्मां पिघलना अभी बाकी है
रुझानों ने हवा का रुख बता दिया है ,परिणाम निकलना अभी बाकी है
सतरंज के प्यादे लद गए है , अंजाम निकलना अभी बाकी है
कुछ पात्र रचे गए है ,पुराण निकलना अभी बाकी है
थकी है जनता उत्पीड़न से , एलान निकलना अभी बाकी है
ढकी है इज्जत जिनकी सत्ता से ,सम्मान निकलना अभी बाकी है
संजो के रखना उम्मीद के परो को ,उड़ान निकलना अभी बाकी है
सीता का अपहरण हुआ है ,हनुमान निकलना अभी बाकी है

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[su_heading size=”16″]Poem in Hindi | महात्मा गाँधी[/su_heading]

उन्हतर में इस श्रिस्टी ने दिया भारत को वरदान था ,
जब आया इस धरती पे वो एक ऐसा इंसान था ॥
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था ॥
हिन्दू का वो बनिया भारत का गुजरती था
कहाँ सेहर थे उस वक़्त ,वो तो ठेठ देहाती था ॥
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था ॥
किसने सोचा तब चलके आगे ये गाँधी ‘ बापू महान’ था ,
भारत में के गौरव पे लगा तिलक संग्राम था ॥
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था ॥
विदेशी धारित से शुरू की वो तो एक’ उत्थान ‘था
ना आया केवल आम श्रमिक, जुड़ गया किसान था ॥
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था ॥
स्वराज की लौ जलाई वो सन इक्कीस था ,
अंग्रेजो के लिए जीता जागता अहिंसक टीस था
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था[su_divider size=”4″ margin=”25″]

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[su_heading size=”16″] new kavita 2020| भारत को हिंदुस्तान चाहिए[/su_heading]

इंसान को एक काम या हिन्दू को भगवान् चाहिए
मंदिर में राम या भारत को इंसान चाहिए
नहीं चाहिए अरबो पैसे ,नहीं कोई महान चाहिए
देदो ऐसा मुल्क जहाँ इंसान को इंसान चाहिए
मुझको राम, तुझे अल्लाह का नाम चाहिए
मोहब्बत से जो जीना दिखाए सिर्फ वही अंजाम चाहिए
ना हिन्दू मंदिर में, ना ही मस्जिद में मुसलमान
बस दे सके सबका हक़ ऐसा एक रुझान चाहिए
दे हमको कबीर की कहानी जो चले मीरा की जुबानी
ऐसा कोई अफसाना ऐसा ही कोई फरमान चाहिए
नहीं तुम्हारी भागती अंग्रेजी , ना ही मेरी शर्माती हिंदी
बिना बोले हम सब समझे ऐसी एक जुबान चाहिए
ना तुम्हारी अनमोल अशर्फी ,ना ही बड़ा इनाम चाहिए
बिन पिए मदमस्त झूमा दे ऐसा कोई जाम चाहिए
दे दो ऐसा मुक्क्दर जहाँ ढेर सारा काम चाहिए
ना चाह्ने देना हराम ऐसा वो पैगाम चाहिए

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[su_heading size=”16″] new kavita 2020 | हिन्दुस्तान किसका है[/su_heading]

जाओ देखो तो सही जुबान किसका है
लाओ फेंको तो कही शैतान किसका है
जो नहीं मिली इजाजत फरमान किसका है
दो वहीं दिली हिफाजत मुसलमान किसका है
अंदर का डर निकालो ,अरमान किसका है
सिकंदर का नर निकालो ,जिस्मो जान किसका है
अल्लाह की है पाक रवानी रमजान किसका है
मल्लाह की बेबाक जुबानी बेफारमन किसका है
नफरतो के इस जंगल में ,सोम बुध और मंगल में तालिबान किसका है
फ़रहतो के इस दंगल में ,रोम रूस और चम्बल में कत्लेआम किसका है
क्यों तोड़ने लगे है मेरे जुटे इमारत को ,फरमान किसका है |
लूट गया है महल मेरा ,जाने साजो सामान किसका है
कभी मुर्दो ने उठ कर पूछा है क्या ये कब्रिस्तान किसका है
सोचता हूँ उड़ के देख लू , वो आस्मां किसका है
जिन्दा लोग जलने लगे है ,समसान किसका है
लंगड़े लोग टहलने लगे है ,मतदान किसका है
मत बांधो मेरे अरमानो को ,ये खुला आसमान किसका है
तैर के आया हु मै उस सूखे समंदर से ,ये भरा जाम किसका है
बिलखता बेवा का चेहरा ,काम किसका है
बिदकता जानलेवा शेहरा इंतजाम किसका है

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[su_heading size=”16″]Hindi Poetry on life| Middle class[/su_heading]

तुम देखते भरी ,वो आधी गिलास को,
चुनते सही मिड पाथ को,
कही ना हो जाए सत्यानाश
बेचारा बिंदास, हे पार्थ, तुम मिडिल क्लास
क्या कभी मिला सबकुछ ,जो तुमने फ़रमाया था
क्यों भूल गए पापा का चेहरा, जो गुस्से में झल्लाया था
लाइट जाने पे चंद रातो को देखे है चांदनी आकाश
यही है इतिहास ,हे पार्थ तुम मिडिल क्लास
घर के दुलारे और शायद आखिरी आस,
मेहनत से किये है तुमने कई एंट्रेंस पास
सीखा है तुमने करना जीवन भर निरंतर प्रयास
तुम झकास हो, हे पार्थ, तुम मिडिल क्लास
सरकारी बस का वो मंथली पास
क्या अनजाने में सताता है तुम्हारा क्लास
नौकरी पाने पे होता हर्षो उल्लास
पहन लो एडिडास, पर हे पार्थ, तुम मिडिल क्लास
क्या गरीब ,क्या आमिर, सबके तुम काम आते
कुछ गरीब को खाना मिलता ,अमीरो का चेहरा लोन से खिलता
तुम्हारा खुदका ना हो घर ,पर हर गरीब घर के पीछे तुम्हारा वो कर ,
तुम जीवित मास , हे पार्थ, तुम मिडिल क्लास
तुमको आता थोड़ा रास, कभी हो जाते उदास
वसूले कर के पैसो का सवाल तो पूछो
कहाँ क्या किया है सरकार ने ,जरा हाल तो पूछो

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[su_box title=”जीवन पर कविता ” radius=”4″]Hindi Poetry on life | 377 [/su_box]

ईश्वर बने भार का ढोना नश्वर जने वो जादू टोना |
कब तक हम भगवान् बनेंगे बलवान हम है,कब हम इंसान बनेंगे ii
नफरत का वो खेल पुराना ग़फ़लत का बेमेल जमाना i
दूसरे को तीसरा बताना तीसरे को खतरा समझाना ii
उस शिखंडी को महाभारत गाता खुश पाखंडी को शरारत भाता |
कब तक हम ईमान चरेंगेक्या अब भी अभिमान भरेंगे ||
हर भीसम को शिखंडी चाहिए ‘पने जीवन की लड़ाई में
हर ग्रीष्म को कालिंदी चाहिएअपने यौवन की अंगड़ाई में ||

[su_box title=”जीवन पर कविता ” radius=”4″]समंदर [/su_box]

बना धरती की ज्वाला से जो ,
सना तरंगो की माला से वो ।
पानी का मंजर है यह
,गागर नहीं समंदर है यह ॥

उस पानी के खारेपन में ,
जलजीवों के ईशारेपन में ।
नदियों से शदियों का नाता
पशु पक्षियों का यह भाग्य विधाता ॥

धरा के नीलेपन का होना
सूरज से पीलेपन का खोना ।
पानी का मंजर है यह
,गागर नहीं समंदर है यह ॥

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Motivational Poems in Hindi | प्रेरणादायक कविता संग्रह

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दोस्तों प्रश्तुत है Motivational Poems in Hindi | प्रेरणादायक कविता संग्रह ,मोटिवेशनल कविताएँ. वर्तमान समय में सभी को प्रेरणा चाहिए। अत्यंत दबाब भरी जिंदगी में इंसान बिना सोचे समझे लिए गए निर्णयो के कारण अक्सर लोग निराश हो जाते है. फिर वे कुछ ऐसा कर बैठते है कि बयां करना मुश्किल हो जाता है हर उस व्यक्ति का हाथ थामना चाहिए जो निराशा से ग्रस्त है।


इसीलिए हम कविताओं के माध्यम से सभी को प्रेरणा देने का प्रयास किया है. उम्मीद है कि आपको यह सभी मोटिवेशनल कविताएं inspirational poem in hindi, motivational poems in hindi for students, Motivational Poems in Hindi | प्रेरणादायक कविता संग्रह पसंद आएंगी.

Harivansh Rai Bacchan motivational Poem

[su_heading size=”16″]कविता – अग्निपथ[/su_heading]

लेखक – हरिवंश राय बच्चन

वृक्ष हों भले खड़े
हों घने, हों बड़े
एक पत्र छाँह भी
मांग मत ! मांग मत ! मांग मत !
अग्निपथ ! अग्निपथ ! अग्निपथ !

तू न थकेगा कभी
तू न थमेगा कभी
तू न मुड़ेगा कभी
कर शपथ ! कर शपथ ! कर शपथ !
अग्निपथ ! अग्निपथ ! अग्निपथ !

यह महान दृश्य है
चल रहा मनुष्य है
अश्रु-स्वेद-रक्त से
लथ-पथ ! लथ-पथ ! लथ-पथ !
अग्निपथ ! अग्निपथ ! अग्निपथ !

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Motivational Poem in Hindi

Sarfaroshi ki Tamanna Bismil |best motivational poems in hindi

[su_heading size=”16″]कविता – सरफ़रोशी की तमन्ना[/su_heading]

लेखक – बिस्मिल अज़ीमाबादी

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है l
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है l

एक से करता नहीं क्यों दूसरा कुछ बातचीत, देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है।
रहबरे-राहे-मुहब्बत ! रह न जाना राह में, लज्जते-सेहरा-नवर्दी दूरि-ए-मंजिल में है।

अब न अगले वल्वले हैं और न अरमानों की भीड़, एक मिट जाने की हसरत अब दिले-‘बिस्मिल’ में है ।
ए शहीद-ए-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार, अब तेरी हिम्मत का चर्चा गैर की महफ़िल में है।

खींच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद, आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है l

है लिये हथियार दुश्मन ताक में बैठा उधर, और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर।
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।

हाथ जिनमें हो जुनूँ, कटते नही तलवार से, सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से,
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।

हम तो निकले ही थे घर से बाँधकर सर पे कफ़न, जाँ हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम।
जिन्दगी तो अपनी महमाँ मौत की महफ़िल में है, सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है।

यूँ खड़ा मकतल में कातिल कह रहा है बार-बार, क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है l
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है l

दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब, होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको न आज।
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है ! सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है ।

जिस्म वो क्या जिस्म है जिसमें न हो खूने-जुनूँ, क्या वो तूफाँ से लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है।
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है l

self motivation poem hindi | motivational poems in hindi for students

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Motivational Poem in Hindi

self motivation poem hindi APJ Abdul Kalaam

[su_heading size=”16″]Motivational poem in Hindi | Abdul Kalaam[/su_heading]


महानता कहाँ पैदा होती उसे तो गढ़ना पड़ता है
सिकंदर वही रचे जाते है जहाँ लड़ना पड़ता है
कई लोग खपे है अपने अब्दुल को हमारा कलाम बनाने में
कई योग जुटे हैं सपने प्रतिकूल को प्यारा अंजाम दिलाने में

धन्य हुई मातरम की धरती उनके अब्बू के नाव चलाने में
धनि हुई रामसेश्वरम की वो कश्ती हिन्दु के आने जाने में
बचपन में अखबार बाटके ऐसे हाथ बटाने में
परिश्रम ही अधिकार जानके बड़ा हुआ अनजाने में

कलाम का खुद में इंसान ढूँढना उनका सव्माभिमान ढूँढना
बचपन में उस लड़के का अखबार बेचना
नहीं थी उसमे कोई अद्भुत क्षमता पर मेहनत का कोई तोड़ नहीं
कलाम जो भी थे जैसे भी थे उनका कोई गठजोड़ नहीं

मगन रहा वो DRDO के गलियारों में राकेट बनाने में
नहीं मतलब था उसको कोई सरकार आने जाने में
उसने तो इंदिरा को भी बताया था उस जमाने में
अटल को भी यह समझ आया पोखरण में बम उड़ाने में

माहिर था वो मिसाइलों को उड़ाने में
ना पला बढ़ा था कही किसी राज घराने में
बना भारत का राष्ट्रपति नोटों के इस जमाने में
जीता रहा भारत के लिए नहीं था वो किसी को में

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Motivational Poem in Hindi

New Hindi Poem Naukari | latest motivational poem in hindi

[su_heading size=”16″]Poem in Hindi | Naukri[/su_heading]


बचपन निकला जन गण मन में
था जीवन ढीला बिना टेंशन में
इंटर से जो किस्सा चल निकला ,
लगी आग उस प्यासे मन में

कितने नंबर लाये हो ,कौन सा कॉलेज पाए हो
किस कोर्स से आगे जाओगे ,कितना पैकेज पाए हो
सच कहता हु सनक जाता हुँ,कभी कभी भड़क जाता हुँ
फिर समझ आया ये मायावी खेल,तुम अकेले नहीं धूम मचाये हो

जीवन की तन्हाई में या यौवन की अंगड़ाई में
अटकी हैं जान सबकी नौकरी वाली खायी में
इस माई के कई भक्तगण है लेकिन सीटे काफी कम है
इस सच्चाई का क्या ज्ञान करो,लगा दो हिम्मत पढाई में

मिडिल क्लास की आप आस ,ना मिले तो रहता मन उदास
बहुत लोग कर रहे प्रयास ,पाते केवल कुछ ही ख़ास
इस बार गर नौकरी पाउँगा ,तो जाके गंगा नहाऊंगा
सच बोलता हु दो किलो,घी वाले लड्डू मईया तुझे चढ़ाऊंगा

सौगंध माई की खता हु ना खाऊंगा ना खिलाऊंगा
मंदिर का पता नहीं पर यह देश थोड़ा बनाऊंगा
अभी शायद दुर्योधन हु पर श्रावण कुमार हो जाऊंगा
हे माई तुम पुकार सुनो ,भक्तो में अबकी बार चुनो

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[su_heading size=”16″]कोशिश करने वालों की हार नहीं होती[/su_heading]

लेखक – सोहनलाल द्विवेदी

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

Mai Tufaano me chalne ka Aadi hu Gopaldas Niraj | self motivation poem hindi

[su_heading size=”16″] कविता | मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं[/su_heading]

लेखक – गोपालदास नीरज

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते..
मरुस्थल, पहाड़ चलने की चाह बढाते..
सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं..
मेरे पग तब चलने में भी शर्माते..
मेरे संग चलने लगे हवायें जिससे..
तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

अंगार अधर पे धर मैं मुस्काया हूं..
मैं मर्घट से ज़िन्दगी बुला के लाया हूं..
हूं आंख-मिचौनी खेल चला किस्मत से..
सौ बार मृत्यु के गले चूम आया हूं..
है नहीं स्वीकार दया अपनी भी..
तुम मत मुझपर कोई एहसान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

शर्म के जल से राह सदा सिंचती है..
गति की मशाल आंधी में ही हंसती है..
शोलो से ही श्रिंगार पथिक का होता है..
मंजिल की मांग लहू से ही सजती है..
पग में गति आती है, छाले छिलने से..
तुम पग-पग पर जलती चट्टान धरो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

फूलों से जग आसान नहीं होता है..
रुकने से पग गतिवान नहीं होता है..
अवरोध नहीं तो संभव नहीं प्रगति भी..
है नाश जहां निर्मम वहीं होता है..
मैं बसा सुकून नव-स्वर्ग “धरा” पर जिससे..
तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

मैं पन्थी तूफ़ानों मे राह बनाता..
मेरा दुनिया से केवल इतना नाता..
वेह मुझे रोकती है अवरोध बिछाकर..
मैं ठोकर उसे लगाकर बढ्ता जाता..
मैं ठुकरा सकूं तुम्हें भी हंसकर जिससे..
तुम मेरा मन-मानस पाषाण करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

Vir Hindi Poem Ramdhari Singh Dinkar | motivational poems in hindi about success for students

[su_heading size=”16″]कविता – वीर[/su_heading]

लेखक – रामधारी सिंह “दिनकर”

सच है, विपत्ति जब आती है,
कायर को ही दहलाती है,
सूरमा नहीं विचलित होते,
क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं,
काँटों में राह बनाते हैं।

मुहँ से न कभी उफ़ कहते हैं,
संकट का चरण न गहते हैं,
जो आ पड़ता सब सहते हैं,
उद्योग-निरत नित रहते हैं,
शूलों का मूल नसाते हैं,
बढ़ खुद विपत्ति पर छाते हैं।

है कौन विघ्न ऐसा जग में,
टिक सके आदमी के मग में?
ख़म ठोंक ठेलता है जब नर
पर्वत के जाते पाव उखड़,
मानव जब जोर लगाता है,
पत्थर पानी बन जाता है।

गुन बड़े एक से एक प्रखर,
हैं छिपे मानवों के भितर,
मेंहदी में जैसी लाली हो,
वर्तिका-बीच उजियाली हो,
बत्ती जो नहीं जलाता है,
रोशनी नहीं वह पाता है।

Dushyant Kumar |student motivational poem in hindi

[su_heading size=”16″]हो गई है पीर पर्वत-दुष्यंत कुमार[/su_heading]

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

आज यह दीवार, परदों की तरह हिलने लगी,
शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर, हर गली में, हर नगर, हर गाँव में,
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।

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Shohan lal Dwivedi | upsc motivational poem in hindi

[su_heading size=”16″]कोशिश करने वालों की हार नहीं होती -सोहनलाल द्विवेदी [/su_heading]

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

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motivational poem in hindi pdf | Shivmangal Singh Suman Vardaan mangunga nahi

[su_heading size=”16″]वरदान माँगूँगा नहीं —शिवमंगल सिंह ‘सुमन’[/su_heading]

यह हार एक विराम है
जीवन महासंग्राम है
तिल-तिल मिटूँगा पर दया की भीख मैं लूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

स्‍मृति सुखद प्रहरों के लिए
अपने खंडहरों के लिए
यह जान लो मैं विश्‍व की संपत्ति चाहूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

क्‍या हार में क्‍या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
संधर्ष पथ पर जो मिले यह भी सही वह भी सही।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

लघुता न अब मेरी छुओ
तुम हो महान बने रहो
अपने हृदय की वेदना मैं व्‍यर्थ त्‍यागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

चाहे हृदय को ताप दो
चाहे मुझे अभिशाप दो
कुछ भी करो कर्तव्‍य पथ से किंतु भागूँगा नहीं।
वरदान माँगूँगा नहीं।।

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[su_heading size=”16″]Motivation Hindi kavita Gopaldas Neeraj[/su_heading]

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

हैं फ़ूल रोकते, काटें मुझे चलाते..
मरुस्थल, पहाड चलने की चाह बढाते..
सच कहता हूं जब मुश्किलें ना होती हैं..
मेरे पग तब चलने मे भी शर्माते..
मेरे संग चलने लगें हवायें जिससे..
तुम पथ के कण-कण को तूफ़ान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

अंगार अधर पे धर मैं मुस्काया हूं..
मैं मर्घट से ज़िन्दगी बुला के लाया हूं..
हूं आंख-मिचौनी खेल चला किस्मत से..
सौ बार म्रत्यु के गले चूम आया हूं..
है नहीं स्वीकार दया अपनी भी..
तुम मत मुझपर कोई एह्सान करो..
 
मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

शर्म के जल से राह सदा सिंचती है..
गती की मशाल आंधी मैं ही हंसती है..
शोलो से ही श्रिंगार पथिक का होता है..
मंजिल की मांग लहू से ही सजती है..
पग में गती आती है, छाले छिलने से..
तुम पग-पग पर जलती चट्टान धरो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

फूलों से जग आसान नहीं होता है..
रुकने से पग गतीवान नहीं होता है..
अवरोध नहीं तो संभव नहीं प्रगती भी..
है नाश जहां निर्मम वहीं होता है..
मैं बसा सुकून नव-स्वर्ग “धरा” पर जिससे..
तुम मेरी हर बस्ती वीरान करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..

मैं पन्थी तूफ़ानों मे राह बनाता..
मेरा दुनिया से केवल इतना नाता..
वेह मुझे रोकती है अवरोध बिछाकर..
मैं ठोकर उसे लगाकर बढ्ता जाता..
मैं ठुकरा सकूं तुम्हें भी हंसकर जिससे..
तुम मेरा मन-मानस पाशाण करो..

मैं तूफ़ानों मे चलने का आदी हूं..
तुम मत मेरी मंजिल आसान करो..