Husn ki tareef shayari in hindi

हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँदो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतींपरवीन शाकिर हुस्न को शर्मसार करना हीइश्क़ का इंतिक़ाम होता हैअसरार-उल-हक़ मजाज़ तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवरतुम्हें कोई ज़रूरत ही नहीं बनने सँवरने कीअसर लखनवी आइना देख के कहते हैं सँवरने वालेआज बे-मौत मरेंगे मिरे मरने वालेदाग़ देहलवी न पूछो हुस्न …

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