love poetry in hindi | प्यार पर कविताएँ

प्यार शब्द का मतलब बहुत मुश्किल से समझ आता है क्यूंकि उसे हमें महसूस करना पड़ता है। प्यार एक एहसास हैं जिसे भगवान ने हमारे लिए बनाया हैं। एक इन्सान किसी दुसरे इन्सान को उसके हर आदतों के साथ प्यार करता हैं. हम सब में बहुत सारी अच्छाईयाँ और कुछ बुराई भी होगी।

लेकिन जब हम किसी से प्यार करते हैं तो जो जैसा होता है, वैसा ही उसको पसंद करते हैं। यह सबसे खूबसूरत बात होती है. । आज हम आपके लिए प्यार पर कुछ कविताएँ – poetries on love in hindi लाये हैं. आपको जरुर पसंद आएँगी। कविताएं हिंदी और रोमन इंग्लिश में भी लिखी गयी हैं.

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love poetry in hindi -bayaan

swarachit rachna in hindi

बयान तो करो

तुम अकेले हो हम तनहा है
कभी मिले थे आज कहां हैं
क्या हाल है तुम्हारे ?
थोड़ा बयान तो करो

कहो दुबारा उन परियों की कहानी
बितायी थी जिसमें हमने जवानी
क्या तुम भूल गए सब कुछ?
पूछो खुद से ,थोड़ा ना तो करो

खामोश लब मुस्कुरा लेंगे दोबारा
जी लेंगे वह पल हम फिर सहारा
मेरे सवालों की तुम ही राह्बहरो
मान जाओ, थोड़ा हां तो करो

गम को हटाकर जरा इश्किया सागर तो देखो
मन को समझा कर थोड़ा दूरियां बाहर तो फेंको
दिल के प्याले को चलो थोड़ा भरो
मोहब्बत के दिलवाले को थोड़ा बयान तो करो

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best poems in hindi Thoda Bayaan toh karo

swarachit kavita in hindi

Tum akele ho hum tanha hai
Kabhi mile the aaj kahan hai
Kyaa haaal hai tumhare
Thoda Bayaan toh karo

Kaho dubara un pariyo ki kahani
Bitaayi thi hamne jisme jawani
Kya tum bhul gaye sab kuch ?
Thoda naa toh karo

Khaamosh labh muskra lenge dubara
Ji lenge wo pal hum fir sara,
Mere sawaalo ka hi tum rehbaro ho
Maan jao Thoda haan toh karo

Gum ko hata kar zara isqhiya saagar toh dekho
Man ko samjhakar thoda duriyaa bahar toh fekho
Dil ke pyaale ko chalo thoda bharo
Mohabbat ke dilwale ko Thoda bayaan toh karo

love poem in hindi for girlfriend maangunga

Love Poem in Hindi |  swarachit kavita in hindi

आंखें खुले तो दीदार तुम्हारा मांगूंगा
अगर हो बंद तो प्यार तुम्हारा मांगूंगा
मरने के लिए हर लम्हा मंजूर है
गुजरने से पहले इंतजार तुम्हारा मांगूंगा

चाहता हूं तुम मेरी नजरों में रहो
तुम प्यार करती हो बस यही कहो
आंखों में चुरा कर छुपा लूं तुम्हें
कैसे कहूं कि तुम मेरी हो मेरी ही रहो

खुश तो रहने की लाख कोशिशें की हैं
मरने से पहले इश्क में चालाक हरकतें की हैं
बनाने वाले ने तुझे क्या बनाया है
तेरे जैसा यार ही हर बार मांगूंगा

हर मोहल्ले में चर्चा तुम्हारा ही रहता है
पर खुले में इश्क का पर्चा हमारा ही कहता है
सुन लो मेरी एक बात इंतजार तुम्हारा मांगूंगा
आंखें खुले जब भी प्यार तुम्हारा मांगूंगा

ना तेरा सलमान हूं ना कहीं का आमिर खान हूं
तू लैला है मेरी , मान जाओ मैं ही तेरा जान हूं
देखी है दिवाली संग संग खेले हैं होली के रंग
हर साल तेरा मजेदार हो हर बार यही मांगूंगा

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love poetry in hindi

hindi english poem maangunga

Ankhe khule toh didaar tumhara maangunga
Agar ho band ho toh pyaar tumhara mangunga
marne ke liye har lamha manjoor hai,
gujarne se pehale intejaar tumhara mangunga

Chahta hu tum meri najro me raho
tum pyar karti ho bas yahi kaho
aankhon me chura kar chupa lun tumhe
Kaise kahu ki tum meri ho meri hi raho

Khush toh rahne ki lakh koshishe ki hain
Marne se pehale ishq me chalaak harktei ki hai
Banaane wale ne tujhe kya banaya hai
Tera jaisa yaar hi harbaar maanguga

Har muhalle me charcha tumhara hi rehta hai
Par khule me ishq ka parcha hamara hi kehta hai
Sun lo meri ek baat intejaar tumhara maangunga
Aankh khule jab bhi pyaar tumhara maangunga

Naa tera salmaan hun naa kahi ka amir khan hu
Tu laila hai meri , maan jao mai hi tera jaan hu
Dekhi hai Diwali sangsang khele hai holi ke rang
Har saal tera majedaar ho harbaar yahi mangunga

new poem in hindi dil ke kone se

दिल के इस कोने से | samajik kavita hindi

हमने चाहा है तुम्हें दिल के इस कोने से
नींद आती नहीं, हम परेशान हैं रोने से
एहसास जिंदा है तुम्हारे जाने के बाद भी
कहीं मर ना जाएं, तुम्हारा इंकार होने से
एक हां और मांगता हूं, दोगी ना तुम यह जानता हूं
प्यार तुम ही हो, आवाज आती है दिल के उसी कोने से
तुम्हारी जुल्फों की वह भीनी खुशबू बहुत तड़पाती है
सोच कर खुश हो जाता हूं तुम्हारे शब्दों के खिलौने से
नहीं जी सकता घुट घुट के चाहे जो भी करना पड़े
तकलीफ होती है हमें, तुम्हारी नजरों के बेवजह होने से

love poem in hindi for husband

Hamne chaha hai tumhe dil ke is kone se
Neend aati nahi, hum pareshaan hai rone se

Ehsaas jinda hain, tumhare jaane ke baad bhi
kahi mar naa jaayei, tumhara inkaar hone se

ek haan aur maangta hu,dogi naa tum ye jaanta hu
pyaar tumhi ho ,awaaz aati hai dil ke ussi kone se

tumhari zulfo ki wo bhini khusbu bahut tadpaati hai
soch ke khush ho jaata hu, tumhare labo ke khilaune se

nahi ji sakta ghutghut ke chahe jo bhi karna pade
taklif hoti hai hamei, tumhare najro ke bewajah rone se

love poem in hindi for husband

प्यार पर कविता | तो क्या बात होगी

तेरे हाथ मेरे हाथों में रह जाए तो क्या बात होगी
जीवन बस यूं ही कट जाए तो क्या बात होगी
तुम मेरी ग़ज़ल हो इश्क का लहराती फसल हो
अगर तुम्हें यह पता चल जाए तो क्या बात होगी
झूम रहा हूं तुम्हारी याद में, अक्सर इसी जज्बात में
तुम आ जाओ मिलने,सब छोड़ के तो क्या बात होगी
मेरा दिल जलना चाहता है ,इश्क की राख बनना चाहता है
तुम अपने दिल को यह समझाओ तो क्या बात होगी

kavita image

Tere haath mere haathon me rah jaaye to kya baat hogi
Jiwan bas yu hi kat jaaye toh kya baat goi

Tum meri gazal ho ishq ka lahlahati fasl ho
Agar tumhe ye pata chal jaaye toh kyaa baat hogi

Jhoom raha hu tumhari yaad me aksar issi jazbaat me
Tum aa jao milne sab chor ke toh kyaa baat hogi

Mera dil jalna chahta hai ishq ki raakh banana chahta hai
Tum apne dil ko yah samjhao toh kyaa baat hoi

allama iqbal shayari in hindi -अल्लामा इक़बाल की शायरी

प्रश्तुत है इक़बाल के प्रसिद्द शेर और शायरी, iqbal shayari in hindi,allama iqbal love shayari,iqbal ke sher, allama iqbal quotes in hindi,अल्लामा इक़बाल की शायरी जो की पाठकों को पसंद आएगा

इकबाल – मतलब हिंदी में Iqbal meaning in hindi

प्रताप,तेज, किस्मत,भाग्य ,धनदौलत, वैभव,अपराध आदि स्वीकार करने की क्रिया या भाव स्वीकृति,इकरार।

allama iqbal shayari

दिल की बस्ती अजीब बस्ती है,
लूटने वाले को तरसती है।

Dil ki basti ajeeb hai
Lootne waale ko tarsati hai

ढूंढता रहता हूं ऐ ‘इकबाल’ अपने आप को,
आप ही गोया मुसाफिर, आप ही मंजिल हूं मैं।

Doondta rahta hoon ae ‘Iqbal’ apne aap ko
Aap hi goya musafir, aap hi manjil hoon main

allama iqbal quotes in hindi

मुझे रोकेगा तू ऐ नाखुदा क्या गर्क होने से
कि जिसे डूबना हो, डूब जाते हैं सफीनों  में

Mujhe rokega tu ae nakhuda kya gark hone se
Ki jise doobna ho, doob jaate hai safeenon mein

उम्र भर तेरी मोहब्बत मेरी खिदमत रही
मैं तेरी खिदमत के क़ाबिल जब हुआ तो तू चल बसी

Umr bhar teri mohabbat meri khidmat rahi
Mai teri khidmat ke kabil jab hua tu chal basi

allama iqbal sher in hindi

साकी की मुहब्बत में दिल साफ हुआ इतना
जब सर को झुकाता हूं शीशा नजर आता है

Saaqi ki muhabbat mein dil saaf hua itna
Jab sar ko jhukaata hoon sheesha nazar aata hai

iqbal poetry in hindi

साकी की मुहब्बत में दिल साफ हुआ इतना
जब सर को झुकाता हूं शीशा नजर आता है

Saaqi ki muhabbat mein dil saaf hua itna
Jab sar ko jhukaata hoon sheesha nazar aata hai

और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Aur bhi kar deta hai dard me ijafa
Tere hote hue gairon ka dilasa dena

allama iqbal shayari on imam hussain in hindi

कभी छोड़ी हुई मंज़िल भी याद आती है राही को
खटक सी है जो सीने में ग़म-ए-मंज़िल न बन जाए

ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं
तू आबजू इसे समझा अगर तो चारा नहीं

आईन-ए-जवाँ-मर्दां हक़-गोई ओ बे-बाकी
अल्लाह के शेरों को आती नहीं रूबाही

किसे ख़बर कि सफ़ीने डुबो चुकी कितने
फ़क़ीह ओ सूफ़ी ओ शाइर की ना-ख़ुश-अंदेशी

कभी हम से कभी ग़ैरों से शनासाई है
बात कहने की नहीं तू भी तो हरजाई है

shayari iqbal in hindi

किसी की याद ने ज़ख्मो से भर दिया सीना
हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी

Kisi ki yaad ne jakhmo se bhar diya sina
Har ek saans par shaq hai ke akhiri hoga

मिटा दे अपनी हस्ती को गर कुछ मर्तबा* चाहिए
कि दाना खाक में मिलकर, गुले-गुलजार होता है

ALLAMA IQBAL SHAYARI ON NAMAZ

उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सहमे जाते हैं
कि ये टूटा हुआ तारा मह-ए-कामिल न बन जाए

ज़मीर-ए-लाला मय-ए-लाल से हुआ लबरेज़
इशारा पाते ही सूफ़ी ने तोड़ दी परहेज़

अज़ाब-ए-दानिश-ए-हाज़िर से बा-ख़बर हूँ मैं
कि मैं इस आग में डाला गया हूँ मिस्ल-ए-ख़लील

ज़िंदगानी की हक़ीक़त कोहकन के दिल से पूछ
जू-ए-शीर ओ तेशा ओ संग-ए-गिराँ है ज़िंदगी

उसे सुब्ह-ए-अज़ल इंकार की जुरअत हुई क्यूँकर
मुझे मालूम क्या वो राज़-दाँ तेरा है या मेरा

Allama iqbal shayari on karabali in hindi

अगर हंगामा-हा-ए-शौक़ से है ला-मकाँ ख़ाली
ख़ता किस की है या रब ला-मकाँ तेरा है या मेरा

नहीं इस खुली फ़ज़ा में कोई गोशा-ए-फ़राग़त
ये जहाँ अजब जहाँ है न क़फ़स न आशियाना

जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही
खुलते हैं ग़ुलामों पर असरार-ए-शहंशाही

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर
तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में

इश्क़ तिरी इंतिहा इश्क़ मिरी इंतिहा
तू भी अभी ना-तमाम मैं भी अभी ना-तमाम

Mita de apni hasti ko gar kuchh martba chaahiye
Ki daana khaak meinmilkar, gule-gulzaar hota hai

allama iqbal shayari in urdu

तेरी दुआ से कज़ा तो बदल नहीं सकती
मगर है इस से यह मुमकिन की तू बदल जाये

Teri dua se kaza to badal nahi sakti
Magar hai is se yeh mumkin ki tu badal jaye

allama iqbal shayari in hindi font

जफा जो इश्क में होती है वह जफा ही नहीं,
सितम न हो तो मुहब्बत में कुछ मजा ही नही

Jafa jo ishq mein hoti hai wah zafa hi nahin
Sitam na ho to muhabbat mein kuchh maza hi nahin

हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ी
ख़ुदा करे कि जवानी तिरी रहे बे-दाग़

Haya nahi hai jamaane ki aankh mein baki
Khuda kare ki jawaani teri bedaag rahe

allama iqbal motivational shayari in hindi

हंसी आती है मुझे हसरते इंसान पर
गुनाह करता है खुद और लानत भेजता है सैतान पर

Hansi Aati Hai Mujhe Hasrate Insaan Par
Gunah Karta Hai Khud Aur Lanat Bhejta Hai Saitan Par.. …
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dr iqbal shayari in hindi

फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर
मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर

Phool Ki Patti Sy Cut Sakta He Heeray Ka Jigar
Kalam E Narm O Nazuk Mard E Nadan Pr By Asar..

iqbal ki shayari

हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा

Hazaron saal nargis apni benoori pe roti hai
Badi mushkil se hota hai chaman mein deedawar paida

न पूछो मुझ से लज़्ज़त ख़ानमाँ-बर्बाद रहने की
नशेमन सैकड़ों मैं ने बना कर फूँक डाले हैं

इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में
या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर

न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्ताँ वालो
तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में

गुज़र जा अक़्ल से आगे कि ये नूर
चराग़-ए-राह है मंज़िल नहीं है

नहीं है ना-उमीद ‘इक़बाल’ अपनी किश्त-ए-वीराँ से
ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बहुत ज़रख़ेज़ है साक़ी

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अल्लामा इकबाल शायरी इन हिंदी

एक सरमस्ती ओ हैरत है सरापा तारीक
एक सरमस्ती ओ हैरत है तमाम आगाही

बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी
मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है

गला तो घोंट दिया अहल-ए-मदरसा ने तिरा
कहाँ से आए सदा ला इलाह इल-लल्लाह

दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है

अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे

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Ghalib Shayari in hindi – मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

ग़ालिब के कुछ मशहूर शेर और शायरी, Ghalib Shayari in hindi | मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी प्रश्तुत हैं ।

शेर बस दो पंक्तियों की कविता है। कृपया ध्यान दें, हर शेर अपने आप में एक कविता है! मतलब समझने के लिए शेर को किसी और माध्यम की जरूरत नहीं होती ।

ग़ज़ल एक प्रकार से तुकबंदी करने वाले दोहे है। ग़ज़ल आमतौर पर नुकसान या अलगाव और उस दर्द के बावजूद प्यार की सुंदरता दोनों के बारे में होती है। एक ग़ज़ल में 4-5 शेर (दोहे) होते हैं।हर शेर के पास एक ही मीटर और तुकबंदी योजना होगी, लेकिन अलग-अलग विषय हो सकते हैं। दोहे एक ही विचार हो सकते हैं या नहीं भी। ग़ज़ल में आम तौर पर एक सख्त लय और ताल संरचना होती है।

नज़्म कहानी कहने की तरह है। इसका केवल एक ही विषय है। यह ग़ज़ल की तुलना में कम प्रतिबंधात्मक है जिसमें दार्शनिक, रोमांस, प्रेम और समान विषय हो सकते हैं।

शायरी शब्द ‘शेर’ से लिया गया है जो एक ग़ज़ल का दोहा है। शायरी भी शेरों के अनुवाद का एक रूप है। शायरी के लिए ली गई कविताएँ आमतौर पर रोमांटिक प्रकृति की होती हैं। इसमें वाक्य, विनोदी और शब्दों का आश्चर्यजनक उपयोग होता है।

Mirza Ghalib Shayari in hindi | मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

गैर ले महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूँ तश्ना-ऐ-लब पैगाम के
खत लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
इश्क़ ने “ग़ालिब” निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

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दिया है दिल अगर उस को , बशर है क्या कहिये
हुआ रक़ीब तो वो , नामाबर है , क्या कहिये
यह ज़िद की आज न आये और आये बिन न रहे
काजा से शिकवा हमें किस क़दर है , क्या कहिये
ज़ाहे -करिश्मा के यूँ दे रखा है हमको फरेब
की बिन कहे ही उन्हें सब खबर है , क्या कहिये
समझ के करते हैं बाजार में वो पुर्सिश -ऐ -हाल
की यह कहे की सर -ऐ -रहगुज़र है , क्या कहिये
तुम्हें नहीं है सर-ऐ-रिश्ता-ऐ-वफ़ा का ख्याल
हमारे हाथ में कुछ है , मगर है क्या कहिये
कहा है किस ने की “ग़ालिब ” बुरा नहीं लेकिन
सिवाय इसके की आशुफ़्तासार है क्या कहिये

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सादगी पर उस के मर जाने की हसरत दिल में है
बस नहीं चलता की फिर खंजर काफ-ऐ-क़ातिल में है
देखना तक़रीर के लज़्ज़त की जो उसने कहा
मैंने यह जाना की गोया यह भी मेरे दिल में है

सबने पहना था बड़े शौक से कागज़ का लिबास
जिस कदर लोग थे बारिश में नहाने वाले
अदल के तुम न हमे आस दिलाओ
क़त्ल हो जाते हैं , ज़ंज़ीर हिलाने वाले

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मैं उन्हें छेड़ूँ और कुछ न कहें
चल निकलते जो में पिए होते
क़हर हो या भला हो , जो कुछ हो
काश के तुम मेरे लिए होते
मेरी किस्मत में ग़म गर इतना था
दिल भी या रब कई दिए होते
आ ही जाता वो राह पर ‘ग़ालिब ’
कोई दिन और भी जिए होते

फिर उसी बेवफा पे मरते हैं
फिर वही ज़िन्दगी हमारी है
बेखुदी बेसबब नहीं ‘ग़ालिब’
कुछ तो है जिस की पर्दादारी है

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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन 
दिल के ख़ुश रखने को ‘ग़ालिब’ ये ख़याल अच्छा है 

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल 
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है 

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा 
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं 

Kudrat ke niyamon se inaayat na karna,
Apni Kismat pe aitbaar na karna,
Wo khud dega ijazat apko,
Bas, Waqt se pehle paane ki shikayat na karna..

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इश्क़ मुझको नहीं वेहशत ही सही
मेरी वेहशत तेरी शोहरत ही सही
कटा कीजिए न तालुक हम से
कुछ नहीं है तो अदावत ही सही |Ghalib Shayari | मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी

Ghalib sher | मिर्ज़ा ग़ालिब के शेर

इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया 
वर्ना हम भी आदमी थे काम के 

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इब्न-ए-मरयम हुआ करे कोई,
मेरे दुख की दवा करे कोई।

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले 
बहुत निकले मिरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले 

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मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का 
उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले 

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक 
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक 

galib ki shayari in hindi on love

इक शौक़ बड़ाई का अगर हद से गुज़र जाए
फिर ‘मैं’ के सिवा कुछ भी दिखाई नहीं देता

इक क़ैद है आज़ादी-ए-अफ़्कार भी गोया,
इक दाम जो उड़ने से रिहाई नहीं देता

इक आह-ए-ख़ता गिर्या-ब-लब सुब्ह-ए-अज़ल से,
इक दर है जो तौबा को रसाई नहीं देता

galib shayari hindi

इक क़ुर्ब जो क़ुर्बत को रसाई नहीं देता,
इक फ़ासला अहसास-ए-जुदाई नहीं देता

आज फिर पहली मुलाक़ात से आग़ाज़ करूँ,
आज फिर दूर से ही देख के आऊँ उस को !!
_

ज़िन्दग़ी में तो सभी प्यार किया करते हैं,
मैं तो मर कर भी मेरी जान तुझे चाहूँगा !!

हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे 
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और 

उस पे आती है मोहब्बत ऐसे
झूठ पे जैसे यकीन आता है


खुद को मनवाने का मुझको भी हुनर आता है
मैं वह कतरा हूं समंदर मेरे घर आता है

फिर आबलों के ज़ख़्म चलो ताज़ा ही कर लें,
कोई रहने ना पाए बाब जुदा रूदाद-ए-सफ़र से !!

mirza ghalib love shayari in hindi

एजाज़ तेरे इश्क़ का ये नही तो और क्या है,
उड़ने का ख़्वाब देख लिया इक टूटे हुए पर से !!

साज़-ए-दिल को गुदगुदाया इश्क़ ने
मौत को ले कर जवानी आ गई

उन के देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़ 
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है 

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई,
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई।

ghalib sher in hindi

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है,
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई,
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई।

दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है,
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है।

क़र्ज़ की पीते थे मय लेकिन समझते थे कि हाँ
रंग लावेगी हमारी फ़ाक़ा-मस्ती एक दिन

koi umeed bar nahi aati shayari in hindi

ईमाँ मुझे रोके है जो खींचे है मुझे कुफ़्र
काबा मिरे पीछे है कलीसा मिरे आगे

है आदमी बजा-ए-ख़ुद इक महशर-ए-ख़याल,
हम अंजुमन समझते हैं ख़ल्वत ही क्यूँ न हो
_


तिरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना,
कि ख़ुशी से मर न जाते अगर ए’तिबार होता !!

mirza ghalib ki shayari in hindi

आ ही जाता वो राह पर गालिब
कोई दिन और भी जिए होते

उस अंजुमन-ए-नाज की क्या बात है गालिब
हम भी गए वां और तेरी तकदीर को रो आए

कुछ तो पढ़िए कि लोग कहते हैं
आज गालिब गजल-सरा न हुआ

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आईना क्यूं न दूं कि तमाशा कहें जिसे
ऐसा कहां से लाऊं कि तुझ सा कहें जिसे

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Mirza Ghalib shayari in hindi

इश्क मुझ को नहीं वहशत ही सही
मेरी वहशत तेरी शोहरत ही सही

mirza ghalib ki shayari

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं

उन के देखे से जो आ जाती है चेहरे पर रौनक
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है

कोई उम्मीद बर नहीं आती
कोई सूरत नजर नहीं आती
मौत का एक दिन मुअय्यन है
नींद क्यूं रात भर नहीं आती
आगे आती थी हाल-ए-दिल पे हंसी
अब किसी बात पर नहीं आती।

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mirza ghalib shayari in english

Kaid-e-Hayat-o-Band-e-Gham asal me dono ek hain, Maut se pehle aadmi gham se nizaat paaye Kyun”

Meaning: The prison of life and the bondage of grief are one and the same. Before the onset of death, why should man expect to be free of grief?

“Aah Ko chahiye ek umra asar hote tak, Kaun jeeta hai tere zulf ke sar hote tak”

Meaning: One needs lifetime to fulfill all wishes, Who lives enough to conquer your love?

“Maut ka ek din moiyyan hai, Toh neend kyu raat bhar nhi aati”

Meaning: The day of death is fixed, why sleep is missing all the night?

mirza ghalib poetry in english

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mirza ghalib status

“Meherban hoke Bula lo mujhe chahe jis waqt.Main Gaya waqt nahi hun ki phir na aa sakun”

Bazeecha-e-atfal hai duniya mere aage, Hota hai shab-o-roz tamasha mere aage”

Meaning: This world is like a playground of Children to me, where fuss is going on daily.

“Ho chuki ‘ghalib’ balayen sab tamam, Ek marg-e-na-gahani aur hai”

Meaning: All the problems have been finished ‘Ghalib’, sudden death is something else”

mirza ghalib love poetry

की मेरे क़त्ल के बाद उस ने जफ़ा से तौबा,
हाए उस ज़ूद-पशीमाँ का पशीमाँ होना !! –

आता है मेरे क़त्ल को पर जोश-ए-रश्क से
मरता हूँ उस के हाथ में तलवार देख कर

mirza ghalib sher

करने गये थे उनसे तगाफुल का हम गिला,
की एक ही निगाह कि हम खाक हो गये !! –

ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता,
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता !! –

ता करे न ग़म्माज़ी कर लिया है दुश्मन को
दोस्त की शिकायत में हम ने हम-ज़बाँ अपना

‘ग़ालिब’ नदीम-ए-दोस्त से आती है बू-ए-दोस्त
मश्ग़ूल-ए-हक़ हूँ बंदगी-ए-बू-तराब में

ghalib romantic shayari

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है तमाशा शब् ओ रोज़ मेरे आगे

हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी कि हर ख़्वाहिश पे दम निकले
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक

हैं और भी दुनिया में सुख़न-वर बहुत अच्छे
कहते हैं कि ‘ग़ालिब’ का है अंदाज़-ए-बयाँ और

दर्द मिन्नत-कश-ए-दवा न हुआ
मैं न अच्छा हुआ बुरा न हुआ

ghalib shayari in hindi

फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया
दिल जिगर तश्ना ए फरियाद आया
दम लिया था ना कयामत ने हनोज़
फिर तेरा वक्ते सफ़र याद आया

mirza ghalib status

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ghalib shayari on dosti in hindi

जान दी दी हुई उसी की थी
हक़ तो ये है कि हक़ अदा न हुआ

हो चुकीं ‘ग़ालिब’ बलाएँ सब तमाम
एक मर्ग-ए-ना-गहानी और है
ग़ालिब

इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश ‘ग़ालिब’
कि लगाए न लगे और बुझाए न बने

इनकार की सी लज़्ज़त इक़रार में कहाँ,
होता है इश्क़ ग़ालिब उनकी नहीं नहीं से !!

कहूँ किस से मैं कि क्या है शब-ए-ग़म बुरी बला है
मुझे क्या बुरा था मरना अगर एक बार होता

best shayari of mirza ghalib in hindi

देखो तो दिल फ़रेबि-ए-अंदाज़-ए-नक़्श-ए-पा,
मौज-ए-ख़िराम-ए-यार भी क्या गुल कतर गई !! –

देखिए लाती है उस शोख़ की नख़वत क्या रंग
उस की हर बात पे हम नाम-ए-ख़ुदा कहते हैं
-ग़ालिब

जान दी हुई उसी की थी,
हक़ तो ये है कि हक़ अदा न हुआ।

फ़िक्र-ए-दुनिया में सर खपाता हूँ,
मैं कहाँ और ये बवाल कहाँ।
इश्क़ ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया,
वरना हम भी आदमी थे काम के।

ghalib ki shayari

हर एक बात पे कहते हो की तू क्या है ,
तुम कहो की ये अंदाज़े गुफ्तगू क्या है ,
रंगो में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल ,
जब आँख से ही ना टपका तो फिर लहू क्या है।

क्या वो नमरूद की ख़ुदाई थी,
जो बंदगी में मिरा भला न हुआ।

ghalib ke sher in hindi

अफ़साना आधा छोड़ के सिरहाने रख लिया,
ख़्वाहिश का वर्क़ मोड़ के सिरहाने रख लिया !!

तमीज़-ए-ज़िश्ती-ओ-नेकी में लाख बातें हैं,
ब-अक्स-ए-आइना यक-फ़र्द-ए-सादा रखते हैं !!

mirza galib ki shayari

ज़रा कर ज़ोर सीने में कि तीरे-पुर-सितम निकले,
जो वो निकले तो दिल निकले, जो दिल निकले तो दम निकले !!

तू ने कसम मय-कशी की खाई है ‘ग़ालिब’
तेरी कसम का कुछ एतिबार नही है..!

मोहब्बत में नही फर्क जीने और मरने का
उसी को देखकर जीते है जिस ‘काफ़िर’ पे दम निकले..!

galib ki shayari hindi mai

मगर लिखवाए कोई उस को खत
तो हम से लिखवाए
हुई सुब्ह और
घरसे कान पर रख कर कलम निकले..

मरते है आरज़ू में मरने की
मौत आती है पर नही आती,
काबा किस मुँह से जाओगे ‘ग़ालिब’
शर्म तुमको मगर नही आती ।

कहाँ मयखाने का दरवाज़ा ‘ग़ालिब’ और कहाँ वाइज
पर इतना जानते है कल वो जाता था के हम निकले..
-मिर्जा ग़ालिब

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बना कर फकीरों का हम भेस ग़ालिब
तमाशा-ए-अहल-ए-करम देखते है..

पीने दे बैठ कर मस्ज़िद में ग़ालिब,
वरना वो जगह बता जहाँ खुदा नहीं।

ghazals of ghalib in hindi

गुनाह करके कहाँ जाओगे ग़ालिब,
ये जमीं और आस्मां सब उसी का है।

ग़ालिब ने यह कह कर तोड़ दी तस्बीह,
गिनकर क्यों नाम लू उसका जो बेहिसाब देता है।

waqt shayari ghalib

दर्द जब दिल में हो तो दवा कीजिए,
दिल ही जब दर्द हो तो क्या कीजिए।
मैं तो इस सादगी-ए-हुस्न पे सदक़े,
न जफ़ा आती है जिसको न वफ़ा आती है।

mirza ghalib shayari on taj mahal

दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई,
दोनों को इक अदा में रज़ामंद कर गई।

गुज़र रहा हूँ यहाँ से भी गुज़र जाउँगा,
मैं वक़्त हूँ कहीं ठहरा तो मर जाउँगा।

mirza ghalib 2 line shayari

Bazicha-e-atfal hai Duniya mere aage. Hota hai shab-o-roz Tamasha mere aage

The world is a children’s playground before me
Night and day, a new play is enacted before me

Aah ko chahiye ik umr asar hote tak Kaun jeetaa hai teri zulf ke sar hote tak

A prayer needs a lifetime, an answer to obtain
who can live until the time that you decide to deign

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Hazaaron ḳhvahishen aisi ki har ḳhvahish pe dam nikle. Bahut nikle mire arman lekin phir bhī kam nikle

Though many of my desires were fulfilled, majority remained unfulfilled.

mirza ghalib best shayari

Na tha kuchh to ḳhuda tha Kuchh na hota to ḳhuda hota. Duboya mujh ko hone ne Na hota maiñ to kya hota

In nothingness God was there, if naught he would persist
Existence has sunk me, what loss, if I didn’t exist

ghalib sad shayari

Ye na thi hamari qismat ki visal-e-yaar hota Agar aur jiite rahte yahī intizar hota

That my love be consummated, fate did not ordain
Living longer had I waited, would have been in vain

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mirza ghalib sad shayari in hindi

भीगी हुई सी रात में जब याद जल उठी,
बादल सा इक निचोड़ के सिरहाने रख लिया !!

अब अगले मौसमों में यही काम आएगा,
कुछ रोज़ दर्द ओढ़ के सिरहाने रख लिया !!

वो रास्ते जिन पे कोई सिलवट ना पड़ सकी,
उन रास्तों को मोड़ के सिरहाने रख लिया !!

रंज से ख़ूगर हुआ इंसाँ तो मिट जाता है रंज,
मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसाँ हो गईं !!

हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार
या इलाही ये माजरा क्या है !!
जान तुम पर निसार करता हूँ,
मैं नहीं जानता दुआ क्या है !!

ghalib sad shayari in hindi

न सुनो गर बुरा कहे कोई,
न कहो गर बुरा करे कोई !!
रोक लो गर ग़लत चले कोई,
बख़्श दो गर ख़ता करे कोई !!

तेरे वादे पर जिये हम
तो यह जान,झूठ जाना
कि ख़ुशी से मर न जाते
अगर एतबार होता ..
गा़लिब

mirza ghalib romantic shayari in hindi

तुम अपने शिकवे की बातें
न खोद खोद के पूछो
हज़र करो मिरे दिल से
कि उस में आग दबी है..
गा़लिब

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
गा़लिब

mirza ghalib ke sher

अपनी गली में मुझ को
न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल
मेरे पते से ख़ल्क़ को
क्यूँ तेरा घर मिले
गा़लिब

आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
कौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक

कुछ लम्हे हमने ख़र्च किए थे मिले नही,
सारा हिसाब जोड़ के सिरहाने रख लिया !!


पड़िए गर बीमार तो कोई न हो तीमारदार
और अगर मर जाइए तो नौहा-ख़्वाँ कोई न हो

हसद से दिल अगर अफ़्सुर्दा है गर्म-ए-तमाशा हो
कि चश्म-ए-तंग शायद कसरत-ए-नज़्ज़ारा से वा हो

हम तो जाने कब से हैं आवारा-ए-ज़ुल्मत मगर,
तुम ठहर जाओ तो पल भर में गुज़र जाएगी रात !!
है उफ़ुक़ से एक संग-ए-आफ़्ताब आने की देर,
टूट कर मानिंद-ए-आईना बिखर जाएगी रात !!

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दैर नहीं हरम नहीं दर नहीं आस्ताँ नहीं
बैठे हैं रहगुज़र पे हम ग़ैर हमें उठाए क्यूँ

हम हैं मुश्ताक़ और वो बे-ज़ार
या इलाही ये माजरा क्या है

ghalib best shayari in hindi

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइल 
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है 

इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदा 
लड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं 

ghalib shayari two lines

ishrat-e-qatra hai dariyā meñ fanā ho jaanā
dard kā had se guzarnā hai davā ho jaanā

ye na thī hamārī qismat ki visāl-e-yār hotā
agar aur jiite rahte yahī intizār hotā

haiñ aur bhī duniyā meñ suḳhan-var bahut achchhe
kahte haiñ ki ‘ġhālib’ kā hai andāz-e-bayāñ aur

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ghalib best shayari

यह कहाँ की दोस्ती है कि बने हैं दोस्त़ नासेह
कोई चारासाज होता कोई गमगुसार होता

ये फ़ित्ना आदमी की ख़ाना-वीरानी को क्या कम है
हुए तुम दोस्त जिस के दुश्मन उस का आसमां क्यूं हो।
मिर्ज़ा ग़ालिब

जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए!
हमें तो ना ज़मीन, ना सितारे, ना चांद, ना रात चाहिए।
गालिब

Jo Kagaz Ke Phoolon Mein Khushbu Dhund Jate Hain,
Jo Chhoti Chhoti Khushiyon Mein Bada Sukh Pate Hai,
Jo Apno Mein Farishte Dhund Lete Hai,
Aise Hi Log Zindagi Jee Lete Hai..

mirza ghalib sad shayari

Ranj se khugar hua insaan to mit jata hai insaan
mushkilen mujh par padin ki asaan ho gayin

Umr bhar ghalib yahi bhul karta raha
dhool chehre pe thi aina saaf karta raha

रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ायल
जब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है

हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है
तुम्हीं कहो कि ये अंदाज़-ए-गुफ़्तगू क्या है

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