motivational story in hindi for success : Sridhar vembu in hindi

inspirational hindi story of sridhar vembu

किसी भी देश में दो तरह के लोग होते हैं, एक- जो अच्छे अंकों के पीछे भागते हैं और अच्छी नौकरी करने के लिए जी-तोड़ मेहनत करते हैं और दूसरे वो, जो ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिश में रहते हैं। ऐसे ही एक शख्स हैं, जो अमेरिका में अपनी कंपनी चलाने के बाद भी तमिलनाडु के एक गांव में स्कूल चला रहे हैं। 

चेन्नई स्थित SaaS दिग्गज कंपनी Zoho के फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू तहे दिल से इस बात से सहमत हैं। उनके अनुसार Zoho अकेले उन्होंने नहीं बनाया गया था।

कंपनी के 60 से अधिक Million ग्राहक हैं और वैश्विक स्तर पर 9000 से अधिक कर्मचारी हैं। इसमें 50 से अधिक एकीकृत online application हैं जो sales and marketing , वित्त, ईमेल और सहयोग, सूचना प्रौद्योगिकी और हेल्प डेस्क, मानव संसाधन और ऐप निर्माता और विश्लेषिकी जैसे कस्टम समाधान जैसे कई व्यावसायिक कार्यों का समर्थन करते हैं। यह लेवी, अमेज़ॅन, फिलिप्स, व्हर्लपूल, ओला, श्याओमी, अन्य के साथ गिना जाता है।

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inspirational hindi story of Zoho

अमेरिका में अपने दम पर कंपनी खड़ा कर नाम कमा चुके श्रीधर वेंबू भारत वापस लौटकर गांव में शिक्षा को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी कंपनी जोहो के संस्थापक श्रीधर मौजूदा समय में तमिलनाडु के एक छोटे से गांव तेनकासी में बच्चों को मुफ्त में पढ़ा रहे हैं।  वेंबु का सपना गांव में स्कूलों में पढ़ाई के लिए स्टार्टअप खोलने का है।’

Sridhar Vembu tweet on padma shree award

बताते चले कि श्रीधर की कंपनी की नेटवर्थ Rs 18,000 करोड़ रुपये है और श्रीधर बच्चों को गांव में मुफ्त में पिछले छह महीनों से होम ट्यूशन दे रहे हैं। श्रीधर एक स्टार्टअप खोलना चाहते हैं, जिसके तहत वो बच्चों को मुफ्त में शिक्षा और भोजन देंगेे। 

Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बु ने बताया है कि उनकी SaaS कंपनी ‘1000 हीरो’ ने बनाई थी, जिनके पास 1000 और स्टार्टअप बनाने की क्षमता है, जो भारत के लिए अधिक रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं। “यहां 1000 हीरो हैं और आप शायद उन्हें केवल तभी जान पाएंगे जब वे अपनी कंपनियां शुरू करेंगे।”

Sridhar Vembu hindi motivatinal story

“हमारे पास अभी बहुत सारे स्टार्टअप हैं। बीस साल पहले, इनमें से कोई भी अस्तित्व में नहीं था। वास्तव में बड़ी कंपनियों के लिए, हमने एक बड़े इकोसिस्टम का निर्माण किया है, लेकिन फाउंडेशनल टेक्नोलॉजी के निर्माण की दिशा में भी काम करना है। भारत को हमारी बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए उन्नत राष्ट्र बनने के लिए टेक्नोलॉजी में विशेषज्ञता की आवश्यकता है।”

अगले 20 वर्षों में, इकोसिस्टम कृत्रिम तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग आदि की ओर बढ़ेगा और Zoho भी टेक स्टैक में गहराई से जाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा था।

श्रीधर ने एस्पायरिंग आंत्रप्रेन्योर्स को अपनी खुद की प्लेबुक बनाने और अपनी कल्चर को डिफाइन करने के लिए स्पेसिफिक कॉन्टेक्स्ट बनाने की सलाह दी। उन्होंने अपने स्वयं के प्रोडक्ट और इंजीनियरिंग कल्चर्स को बनाने के महत्व पर जोर दिया।

भारतीय संस्कृति की पहचान संतोष और विनम्रता है। श्रीधर ने कहा, “हमें ज्ञान का विकास करना होगा और विनम्रता उसके लिए जरूरी है।”

Zoho ने 1996 में एडवेंटनेट इंक के रूप में अपनी यात्रा शुरू की; कैलिफोर्निया में वेम्बू और टोनी थॉमस द्वारा स्थापित, कंपनी का अब चेन्नई में मुख्यालय है। कंपनी को भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में एक चमकता सितारा माना जाता है

कई ने वेम्बु का उपयोग एक उदाहरण के रूप में किया है कि कैसे एक स्थायी तरीके से व्यवसाय चलाया जाए, और उसके काम ने पूर्व ज़ोहो कर्मचारियों के बहुत सारे उद्यमी बनने के लिए प्रेरित किया है। इसके सात देशों में कार्यालय हैं जिनमें अमेरिका, नीदरलैंड, सिंगापुर, यूएई, जापान और चीन शामिल हैं। कंपनी बूटस्ट्रैप्ड रहती है और यहां तक ​​कि $ 1 Bn + मूल्यांकन भी है।

Sridhar Vembu ke safalta ki kahani

श्रीधर का कहना है कि वो शिक्षा में एक ऐसा मॉडल बनाना चाहते हैं, जिसमें डिग्री और नंबरों को महत्व नहीं दिया जाएगा। वेंबु का कहना है कि उनका लक्ष्य बच्चों को जमीनी तौर पर शिक्षित करना है। नए प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने पेपर वर्क भी तैयार कर लिया है। उनका स्टार्टअप सीबीएसई और किसी पारंपरिक बोर्ड से संबंधित नहीं होगा। 

वेंबु का मानना है कि सभी बच्चों को यह याद दिलाना जरूरी है कि नंबरों से ज्यादा आपको नॉलेज के पीछे भागना चाहिए। वेंबु ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान स्कूल चलाने में कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई बच्चों के पास पढ़ाई के लिए पर्याप्त स्मार्टफोन नहीं थे। 

वेंबु ने कहा कि ऐसे कई छात्र होते हैं जो पढ़ने में काफी होशियार होते हैं लेकिन वो सिर्फ नंबरों पर फोकस करते हैं। उन्होंने कहा कि वो कुछ ऐसे छात्रों को भी जानते हैं जो बहुत अच्छे नंबर नहीं लाते हैं लेकिन पढ़ाई में आगे होते हैं। 

ज़ोहो कॉर्प न केवल भारत में कुछ लाभदायक यूनिकॉर्न में से एक है, इसने 1996 में लॉन्च होने के बाद से लाभप्रदता का दावा किया है। वित्तीय वर्ष 2019 में, ज़ोहो कॉर्प ने लाभ में INR 516 Cr दर्ज किया, जो कि INR 408 Cr पंजीकृत लाभ के साथ 26.3% बढ़ोतरी का प्रतिनिधित्व करता है।