Gold me invest kaise kare हाई रिटर्न के लिए सोने में कब और कैसे निवेश करें

दुनिया में हर जगह सोना को मूल्यवान माना गया है। राजाओं के दौर से लेकर देशों के केंद्रीय बैंकों तक, हर दौर में इस कीमती धातु का मूल्य निर्विवाद रूप से माना गया है। गोल्ड को मूल्य के लिहाज से दुनिया में सबसे ज्यादा लिक्विड यानी तरल माना जाता है। सोने के मूल्य पर किसी भी देश के आर्थिक प्रदर्शन से फर्क नहीं पड़ता है।

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सोना खरीदने के इन स्पष्ट कारणों के बावजूद गोल्ड एक रणनीतिक संपत्ति माना जाता है, जो निवेश में विविधता लाने के लिए जरूरी माना जाता है। भारत में परिवारों में सोना खरीदना परंपरा है, और यह किसी भी तरह के आर्थिक संकट के समय में मदद भी करता है।

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यही कारण है कि आपको अपने निवेश में इस कीमती धातु के बारे में पुनर्विचार करना चाहिए, क्यों कि यहा जोखिम-समायोजित रिटर्न देने में भी सक्षम है।

इतिहास से यह मान्य बात है कि इस कीमती धातु ने अन्य सभी संपत्ति वर्गों की तुलना में आर्थिक संकट के समय सबसे ज्यादा सुरक्षा दी है। अगर आप पिछले 10 वर्षों में सोने के रेट के प्रदर्शन को देखें, तो इसने 2010, 2011 और यहां तक ​​कि 2019 में भी भारतीय शेयर बाजार की तुलना में बहुत ही बेहतर रिटर्न दिया है। जहां तक 2020 में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है ।

इसी साल अगस्त में भारत के साथ-साथ विदेशों में भी सोने के रेट ने एक नया उच्चस्तर बना दिया था।ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सोने के रेट और स्टॉक बाजार में एक निगेटिव कोरिलेशन होता है। जब भी आर्थिक दृष्टिकोण सुस्त दिखाई देता है (उदाहरण के लिए 2019 में यूएस-चीन व्यापार युद्ध के कारण और 2020 में कोविड-19 के कारण), उस वक्त सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में लिया जाता है। इसके चलते सोने के रेट में बढ़त आती है।दूसरी तरफ कारोबारियों की कमाई में कमी के चलते निवेशक शेयर बाजार से पैसा निकालने लगते हैं।

इसलिए निवेश को ऐसा नहीं करना चाहिए जो एक समय में एक सा ही रिटर्न दें। जैसे की यदि आपने शेयर बाजार के साथ ही इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश कर रखा है तो यह दोनों एक ही समय में गिरेंगे या बढ़ेंगे, क्योंकि दोनों ही निवेश इक्विटी से जुड़े हुए हैं। इसी प्रकार केवल सोने में निवेश भी समझदारी का पर्याय नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि अपने निवेश के पोर्टफोलियो में सोने का विविधता लाने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए।

गोल्ड में कितना निवेश करना चाहिए?


विशेषज्ञों की राय पर अगर ध्यान दिया जाए तो निवेशकों को अपने पोर्टफोलियों में 2 फीसदी से लेकर 10 फीसदी तक निवेश सोने में करना चाहिए। जब भी इक्विटी बाजारों में गिरावट आती है, तो सोना में मिलने वाला लाभ पोर्टफोलियो के घाटे को संतुलित कर देता है। अगर आप पोर्टफोलियो में गोल्ड रखने पर सहमत हों तो यह जरूरी नहीं है कि सोने को फिजिकल रूप में रखा जाए। अगर आप गोल्ड ईटीएफ, गोल्ड म्यूचुअल फंड या डिजिटल गोल्ड खरीदते हैं तो यह भी अच्छा तरीका है। साथ ही यह गोल्ड बेचने ने भी आसान है।

गोल्ड को किसी भी निवेश पोर्टफोलियो का एक जरूरी हिस्सा माना गया है, क्योंकि जब भी किसी कारण से शेयर बाजार या बॉड मार्केट में गिरावट आती है तो यह अच्छा रिटर्न देकर नुकसान होने से बचाता है।

वहीं छोटी अवधि में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है, लेकिन लॉगटर्म में इसके रेट में हमेशा वृद्धि ही होती रही है।इसका सबसे बड़ा कारण सोना एक सीमित मात्रा में ही उपलब्ध है और इसकी मांग काफी है।

जेवर बनाने के अलावा, सोने का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स में किया जाता है। वहीं देशों के केंद्रीय बैंकों इसे अपने फॉरेक्स रिजर्व में भी रखते हैं। इसके चलते सोने के ईटीएफ की भारी मांग रहती है। वहीं इसका इसका इस्तेमाल मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव और करेंसी की वैल्यूएशन में गिरावट को रोकने में भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि इसे लंबी अवधि में निवेश के लिए अच्छा माना जाता है।

सोना खरीदने या निवेश करने के लिए 5 बेस्ट तरीके कौन-से हैं.

फिजिकल गोल्ड खरीदना

फिजिकल गोल्ड खरीदने का एक विकल्प पड़ोस का ज्वैलर है जिस पर आप विश्वास भी करें. आपको कैश में भुगतान करना है और अपने लोकल ज्वैलर से ज्वैलरी खरीदनी है. अगर आपके क्षेत्र में ज्वैलरी की दुकानें बंद हैं या बाहर जाना आपको सुरक्षित नहीं लग रहा है, तो आप दूसरे विकल्पों पर ध्यान दे सकते हैं.

गोल्ड ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में निवेश करना

आप गोल्ड ETF में भी निवेश कर सकते हैं. भारत में ये ज्यादा लोकप्रिय नहीं हैं. लेकिन अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच इनकी लोकप्रियता बहुत अधिक है.

गोल्ड एकम्यूलेशन प्लान (GAP)

व्यक्ति सोना ऑनलाइन मोबाइल वॉलेट जैसे पेटीएम, फोन पे और स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के गोल्ड रश प्लान के तहत खरीद सकता है. ये सोने को खरीदने के विकल्प MMTC-PAMP के साथ SafeGold या दोनों के साथ मिलकर पेश किए जाते हैं.

फ्यूचर/ ऑप्शंस प्लेटफॉर्म पर सोने को खरीदना या बेचना

यह पूरे तौर पर व्यापार की दृष्टि से है. जहां व्यक्ति सोने में ट्रेड अपने अकाउंट में मार्जिन रखकर और कीमतों में उतार-चढ़ाव से फायदा लेने के लिए करना चाहता है.

भारत सरकार द्वारा जारी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश

भारत में सोने को एक उत्पादक एसेट में बदलने के लिए सरकार ने 5 नवंबर 2015 को गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) को पेश किया था जिसकी मदद से बैंक लोकर में रखे सोने पर ब्याज कमाने में मदद मिलती है.

क्योंकि सोना भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश और विदेशी निवेश के आउटफ्लो का बड़ा भाग है, इसलिए गोल्ड बॉन्ड स्कीम ऐसे निवेशकों के लिए अहम है जो सोने में अपने पोर्टफोलियो को विभाजित करना चाहते हैं.