10 lines on Sip in hindi -Systematic investment plan in hindi | सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) क्या है

SIP kya hai -Systematic Investment Plan In Hindi

सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) अपने निवेशकों को म्यूचुअल फंड की ओर से दी गई सुविधा है जो उन्हें फंड में तय समयसीमा के लिए निवेश करने की अनुमति देती है। निवेशक SIP से न्यूनतम 500 रुपये की राशि से भी म्यूचुअल फंड में निवेश करना शुरू कर सकते हैं। निवेशक के बैंक अकाउंट से हर महीने एक निश्चित राशि को चुने गए म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाता है। इसके बाद निवेशक को नेट एसेट वैल्यू (NAV) के आधार पर म्यूचुअल फण्ड यूनिट की एक निश्चित संख्या दी जाती है।

SIP में आपके Bank Account को Mutual Fund की SIP Scheme से लिंक कर दिया जाता हैं और हर महीने की निश्चित तारीख को वह पैसा आपके Bank Account से SIP Scheme में Transfer हो जायेगा |

इस तरह यह निवेश (Invest )करने का स्वतः Authomated तरीका हैं ताकि आपको निवेश करने की आदत लग जाए और आपको इसके बारे में बार बार सोचना ना पड़े |

जैसे अगर आप SBI की SIP में Rs.500 रूपये से निवेश करते हैं तो हर महीने आपके Bank Account से Rs.500 रूपये Deduct हो जायेंगे और SBI Mutual Fund में Invest कर दिए जाएंगे | SIP Investment म्यूच्यूअल फंड्स में Invest करने का ही एक तरीका हैं | आप म्यूच्यूअल फण्ड में या तो Lump Sum तरीके से निवेश कर सकते हैं या SIP के जरिये |

sip in hindi
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SIP Benefits in hindi

SIP के माध्यम से म्यूचुअल फंड में निवेश के लाभ:

अनुशासित निवेश: निवेश के प्रति एक अनुशासित नज़रिया ,लंबी अवधि में धन की बढ़ोतरी में मदद करता है। SIP की के कारण आप आप लगातार निवेश करते रहते हैं क्योंकि SIP चुने गए म्यूचुअल फंड में निवेश करने के साथ-बाज़ार के रिस्क को भी बैंलेस करते है।

निवेश प्रकिर्या के कारण लाभ: SIP में निश्चित समयसीमा पर एक निश्चित राशि का निवेश करना शामिल है, यह बाज़ार की अस्थिरता से बाहर निकलने के लिए रुपये की औसत लागत का लाभ उठाता है। बाज़ार में मंदी आने पर SIP के माध्यम से आप समान निवेश कर ज़्यादा फण्ड यूनिट खरीद पाते हैं और बाज़ार में तेज़ी आने पर आपके इन खरीदे गए यूनिट का मूल्य बढ़ जाता है।

आसान निवेश अवधि: यह आपको अपनी इच्छानुसार SIP शुरू करने और बंद करने की अनुमति देती है। इसके अलावा आप SIP को बिना किसी रोक-टोक के शुरू करने के बाद उसकी अवधि की तारीख भी बदल सकते हैं।

आसान निवेश राशि: आप आय और बचत क्षमता के अनुसार, SIP की राशि घटा और बढ़ा सकते हैं। यदि आप अपनी SIP की राशि बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको नए SIP शुरु करने की जरुरत नहीं है। आप मौजूदा SIP में वद्धि कर राशि को बढ़ा सकते हैं।

लॉन्ग-टर्म कंपाउडिंग के लाभ: म्युचुअल फंड निवेश सामान्य नियम के अधीन काम करता हैं – आप जितना पहले निवेश करते हैं, उतना ही आपका पैसा समय के साथ बढ़ता है।

SBI इस प्रकार SIP के माध्यम से म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश की गई छोटी राशि भी आपको कंपाउडिंग पावर की सुविधा के कारण काफी ज़्यादा लाभ दे सकती है।

Best SBI Mutual Fund in hindi

SBI म्यूचुअल फंड SIP कैसे काम करता है ?

SIP की अवधारणा एक हद तक बैंक रेक्रिंग डिपॉज़िट(Recurring deposit in hindi) के समान है। जब आप एक SBI SIP, शुरू करते हैं, तो आपके बैंक अकाउंट से मासिक/ साप्ताहिक या दैनिक निवेश पूंजी ऑटोमेटिक रुप से विशेष तारीख पर कट जाती है। पहले से निर्धारित यह राशि आपके SBI म्यूचुअल फंड योजना में निवेश की जाती है।

वहीं जानना जजरुरी है कि आपकी व्यक्तिगत निवेश राशि परिवर्तित नहीं रहेगी, आपको यह ध्यान रखना होगा कि आपके द्वारा चुने गए फंड की NAV/ मूल्य प्रतिदिन अलग अलग होगी। इस प्रकार, खरीदी गई यूनिट की संख्या भी हर बार अलग होगी।

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि आप SIP के ज़रिए हर महीने 500 रुपए निवेश करते हैं और पहली बार जब आप SIP के माध्यम से निवेश करते हैं, तो आपके चुने हुए SBI म्यूचुअल फंड प्लान का NAV/ मूल्य 50 रुपये होता है और इस प्रकार आप योजना की 10 यूनिट खरीदते हैं। अगली बार जब आपका SIP भुगतान होता है, तो मान लें कि उस म्यूचुअल फण्ड यूनिट का NAV/ मूल्य बढ़कर 60 रुपये हो गया है, उस स्थिति में, आप केवल 8.33 यूनिट को खरीदने में सक्षम होंगें।

हमने कुछ अच्छे SBI म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में एक बेसिक जानकारी प्रस्तुत की है। उम्मीद है आपको इससे एक अंदाज़ा मिल जाएगा की आप किस म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में और सोच सकते हैं

एसबीआई ब्लू चिप फंड -SBI Blue Chip Fund in hindi

एसबीआई की यह सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड स्कीम है। इस फंड का रिकॉर्ड बहुत अच्छा है। इस फंड के पोर्टफोलियो में HDFC बैंक, आईटीसी और महिंद्रा एंड महिंद्रा शामिल हैं। एसआईपी में 500 रुपये के छोटे से अमाउंट के साथ भी शुरुआत की जा सकती है। शुरुआती इन्वेस्टमेंट 5,000 रुपये है। जो लोग अच्छा रिटर्न चाहते हैं वे एसआईपी चुन कर एसबीआई ब्लू चिप फंड में पैसा लगा सकते हैं।

एसबीआई मैग्नम इक्विटी ESG फंड – SBI Magnum Equity ESG Fund in hindi

यह लार्ज कैप फंड है। इस फंड के स्टॉक में एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, आईटीसी और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे कंपनी शामिल हैं। फंड के होल्डिंग्स में कई डेब्ट इंस्ट्रूमेंट भी हैं। इनमें कुछ जाने-माने सरकारी बॉन्ड्स भी शामिल हैं। आप इस फंड में न्यूनतम 500 रुपये के छोटे एसआईपी और 1,000 रुपये के शुरुआती एसआईपी के साथ इन्वेस्ट कर सकते हैं। एसआईपी में कम से कम 12 चेक की जरूरत होती है। अगर आप लॉन्ग टर्म के लिए पैसा लगाना चाहते हैं तो यह अच्छा विकल्प है। देखा गया है की रिटर्न हमेशा वहीं बेहतर मिलता है जहां निवेश 5 साल या इससे ज्यादा के लिए किया गया है।

एसबीआई कॉन्ट्रा फंड एसबीआई कॉन्ट्रेरियन फंड (SBI Contra Fund SBI Contrarian Fund in hindi )

एसबीआई की यह स्कीम एक अलग तरह के सिद्धांत पर चलती है। इसमें उन स्टॉक में निवेश होता है जिनका दाम कम है पर उनकी नींव मजबूत है। यह फंड भी एक अच्छा निवेश के लिए अच्छा फण्ड है। इस फंड का पोर्टफोलियो विविध है। इसमें आईसीआईसीआई बैंक, कॉग्निजेंट, एसबीई शामिल हैं। आप 500 रुपये हर महीने के साथ एक एसआईपी में इन्वेस्टमेंट शुरू कर सकते हैं। एक बात ध्यान देने की इन्वेस्टमेंट की शुरुआती रकम 5,000 रुपये है।

एसबीआई मैग्नम मिडकैप फंड (SBI Magnum Midcap Fund in hindi )

एसबीआई की यह स्कीम लॉन्ग टर्म के लिए है और एसबीआई के लिए यह बढ़िया परफॉर्मर रही है। इसके पोर्टफोलियो में गोदरेज प्रॉपर्टीज, शीला फोम आदि शामिल है। यादद रखें कि मिडकैप स्टॉक थोड़े रिस्की होते हैं, हालांकि रिटर्न अच्छा मिल सकता है। इसलिए निवेश करने से पहले आपको अपनी जरूरतें देखने की आवश्यकता है।

एसबीआई शॉर्ट टर्म डेट फंड (SBI Short Term Debt Fund in hindi )

एसबीआई की यह स्कीम उन लोगों के लिए है जो डेब्ट स्कीम (बांड्स)चाहते हैं। यह एक डेट फंड है। दूसरी स्कीम की तरह इस फंड में इक्विटी में इन्वेस्ट न होकर सिर्फ डेट में होता है। इसकी अधिकतर होल्डिंग्स सरकारी सिक्यॉरिटीज में हैं। इस स्कीम में आप 5,000 रुपये की शुरुआती और इसके बाद एसआईपी के जरिए 1,000 रुपये के साथ इन्वेस्ट कर सकते हैं। याद रखें कि यह एक डेट फंड है और आपको यहां बहुत ज्यादा रिटर्न नहीं मिलेगा। आपका रिटर्न इकॉनमी में मिलने वाली ब्याज दर पर निर्भर करेगा। अगर ब्याज दर गिरती है तो कम और अगर ब्याज दर ऊंची रहती है तो आपका रिटर्न ज्यादा रहेगा।

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