Shradhanjali Kavita in hindi- नयी श्रद्धांजलि कविता

ऐसे बहुत से लोग होते हैं जो इस दुनिया से रुख़्सत होने के बाद अपने पीछे अपना प्रभावी इतिहास छोड़ जाते हैं और उनकी यादें हमेशा दिलो-दिमाग में घर किए होती हैं। शायरों ने हमेशा ऐसे नायकों की यादों और अपनी संवेदनाओं को लफ़्जों से नवाजा है। पेश है श्रद्धांजलि स्वरूप याद्गार अशआर…

उठ गई हैं सामने से कैसी कैसी सूरतें
रोइए किस के लिए किस किस का मातम कीजिए
हैदर अली आतिश

एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा
परवीन शाकिर

कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई
कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
रहमान फ़ारिस

अब नहीं लौट के आने वाला
घर खुला छोड़ के जाने वाला
अज्ञात

बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया
ख़ालिद शरीफ़

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
~अल्लामा इक़बाल

मत सहल हमें जानो फिरता है फ़लक बरसों
तब ख़ाक के पर्दे से इंसान निकलते हैं
मीर तक़ी मीर

रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई
कैफ़ी आज़मी

बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई
इक शख़्स सारे शहर को वीरान कर गया
ख़ालिद शरीफ़

लोग अच्छे हैं बहुत दिल में उतर जाते हैं
इक बुराई है तो बस ये है कि मर जाते हैं
रईस फ़रोग़

Best Shradhanjali Kavita In Hindi

हो रही है आज
न जाने कैसी यह विधा ?

आँसूभरे आँखों से करते हुए तुझे विदा,
इस खबर ने हृदय में

न जाने कैसी हलचल है मचाई?
जानता हूँ यह है सच्चाई;
फिर भी यकीन नहीं हो रहा है
कि तुम इस तरह अचानक,

सबको रोता-बिलखते छोड़कर,
मोह का हर बन्धन तोड़कर

ऐसे कैसे जा सकती हो ? सबकी तुम प्यारी थीं,
सब तुम्हे चाहते थे ,सबकी राजदुलारी थीं,

अपनों को कैसे ठेस लगा सकते हो?
तुममें तो गति थी;जीवन था,हौसला था
फिर जिंदगी से हार मानने का
यह कैसा तेरा फैसला था