Shayari on running in Hindi | दौड़ने पर शायरी

जिंदगी का संघर्ष आपको जीने की ताकत देगा। जीवन की संतुष्टि के लिए मेहनत और संघर्ष सबसे आवश्यक होते हैं। आप कुछ भी कर लें, बिना संघर्ष के आपके जीवन की नैय्या को किनारा नहीं मिलने वाला।

जब जीवन का सबसे मूल्यवान सच संघर्ष ही है तो हममें से हर किसी को इससे बचने की कोशिश नहीं करना चाहिए। ये शेर-शायरी और कविताएं आपको मेहनत करने की प्रेरणा देंगे।

Shayari on running in Hindi

जिंदगी दौड़ का नाम है
दौड़ते रहना ही जीवन का काम है
एक बार हौसला उठाया मेरे यार
जिंदगी बहुत मजा देगी, मिलेगा प्यार

रात नहीं खाब बदलता है,
मंजिल नहीं कारवाँ बदलता है;
जज्बा रखो जीतने का क्यूंकि,
किस्मत बदले न बदले ,
पर वक्त जरुर बदलता है

हौसला बढ़ाओ रोज सवेरे उठ जाओ
जूता उठाओ और दौड़ने निकल जाओ
ज्यादा सोचोगे तो दिन ढल जाएगा
ये कीमती वक़्त यूँ ही निकल जाएगा

लोग हैरत है मेरी मंजिल और हौंसला देख कर…
डर मुझे भी लगा था फासला देख कर,
पर मैं बढ़ता गया रास्ता देख कर,
खुद ब खुद मेरे नजदीक आती गई,
मेरी मंजिल मेरा हौंसला देख कर

जब हौसला बना लिया
ऊंची उड़ान का
फिर देखना फिजूल है
वो कद आसमान का

अच्छा मुसाफ़िर बन जाऊँगा…
चलता रहूँगा पथ पर,
चलने में माहिर बन जाऊँगा,
या तो मंजिल मिल जायेगी या
अच्छा मुसाफ़िर बन जाऊँगा…

पसीने की स्याही से जो लिखते हैं इरादें को,
उसके मुक्कद्दर के सफ़ेद पन्ने कभी कोरे नही होते…
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है…
मौजों की सियासत से मायूस न हो ‘फ़ानी’
गिर्दाब की हर तह में साहिल नज़र आता है
-फ़ानी बदायुनी

साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
-आल-ए-अहमद सूरूर

दौड़ने पर शायरी

मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है…
सदा एक ही रुख़ नहीं नाव चलती
चलो तुम उधर को हवा हो जिधर की
अल्ताफ़ हुसैन हाली

उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है
नफ़स अम्बालवी

तुम्हें संघर्ष करना आना चाहिए: येलेना रेरिख़
बीहड़ से गुज़रते हाथियों की तरह
झाड़ियों को रौंदते हुए
हटाते हुए पेड़ों को अपने रास्ते से
तुम भी चलो महान् तपस्या की राह पर।

इसलिए तुम्हें
संघर्ष करना आना चाहिए

बहुतों को आमंत्रित किया जाता है ज्ञान-प्राप्ति के लिए
पर बहुत कम हैं जिन्हें ज्ञान प्राप्त होता है हमारे निर्णय-रहस्यों का।

इसलिए तुम्हें
संघर्ष करना आना चाहिए।

तुम देखोगे- किस तरह लांछित होती है मेरी ढाल
देखोगे किस तरह रिक्त हो जाते हैं मेरे भण्डार
तुम उठाओगे अपनी तलवार तब

इसलिए तुम्हें
संघर्ष करना आना चाहिए।

इनमें से कुछ शेर-शायरी हमें सोशल मीडिया पर मिली हैं। जहां इनके रचनाकारों के नाम नहीं दिए गए हैं। रचनाकार यहां प्रकाशित अपने शेर के बारे में हमें सूचित कर सकते हैं। हमें उनका नाम प्रकाशित करने पर प्रसन्नता होगी।