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Satsangati in 500 words in Hindi

सत्संगति पर निबंध 200 शब्दों में

मनुष्य पर जितना प्रभाव उसकी संगती का पड़ता है उतना किसी और बात का नहीं पड़ता. इसलिए भारतीय परंपरा में बचपन से सत्संगति पर बहुत जोर दिया गया है. सही मायनों में देखा जाए तो सत्संगति से संस्कार प्रबल होते हैं और बुरी संगती से चरित्र में दोष उत्पन्न होते हैं.

सत्संगति शब्द “सत्’ अर्थात उत्तम और “संगति” अर्थात साहचर्य (साथ) से मिलकर बना है. यानि अच्छे व्यवहार एवं अच्छे चरित्र वाले लोगों के साथ रहना ही सत्संगति करना है.

सत्संग से सदाचार, धर्मभावना, कर्त्तव्यनिष्ठा और सदभावना आदि गुणों का उदय होता है । सत्संग से आत्मा पुष्ट और पवित्र होती है । सत्संग करने वाला व्यक्ति मन, वचन और कर्म से एक जैसा व्यवहार करता है । उसकी कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं होता । सत्संग की महिमा सभी संतों ने गाई है । मन की स्व्छता बिना सत्संग के नहीं आ सकती।

Short Essay on Satsangati in 200 words in Hindi

कुसंगति का जीवन पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है । कुसंगति से सदा हानि होती है । इंसान कितना ही सतर्क और सावधान रहे कुसंगति काली कोठरी के समान है । सत्संग के अनेक साधन हैं । सभी धर्मों की पुस्तकें सत्संग में बल देती हैं । सत्संग ही सही मार्ग है । अतः सभी को सत्संग मार्ग पर चलना चाहिए ।

सत्संगति पर 150 शब्दों में निबंध, Essay on Satsangati in 150 words


जीवन में हमें हर समय किसी न किसी मित्र या साथी की आवश्यकता ज़रूर होती है। हमारे मित्र की अच्छे-बुराई का प्रभाव हमारे ऊपर अवशय पड़ता है. मित्र के बिना जीवन अधूरा है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मित्रता कुसंग लोगों के साथ रखे। एक कुसंग संगति का मित्र विष के समान होता है और एक सत्संगति का मित्र औषधि।

सत्संगति में रहकर हम चरित्रवान बन सकते है। अगर हम सत्संगति में रहते है तो हम अपनी ज़िंदगी में कभी गलत रास्ता नही पकड़ेंगे। एक सत्संगति वाला मित्र हमारा मार्गदर्शक होता है।

आज कल सत्संगति पाना बहुत कठिन होता जा रहा है। हमें दोस्ती करते हुए यह नही सोचना चाहिए कि वह गरीब है या अमीर है। हमें दूसरे व्यक्ति की भावनाओँ को समझ कर ही उससे दोस्ती करनी चाहिए क्योंकि हो सकता है कि वो व्यक्ति अच्छे स्वाभाव एवं चरित्र वाला न हो।