Rajiv Gandhi quotes in hindi

राजीव गाँधी के अनमोल विचार

सबसे कम उम्र में भारत के प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त सन 1944 को मुंबई में हुआ था. इनके पिता का नाम फिरोज गाँधी और माता का नाम इंदिरा गाँधी था. राजीव गाँधी पेशे से पायलट थे.

आधुनिक भारत के अग्रणी नेताओं में शुमार राजीव गांधी अब हमारे बीच नहीं हैं। राजीव ने देश में कंप्यूटर की शुरुआत कर विकास को गति दी थी। 1980 में भाई संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव 1982 में राजनीति में उतर आये।

सन 1985 में भारी मतो से विजयी होकर राजीव गाँधी देश के सातवें प्रधानमंत्री बने. राजीव गाँधी एक सशक्त और कुशल राजनेता थे. 21 मई 1991 को एक आत्मघाती हमले में इनकी मृत्यु हो गई

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राजीव गाँधी के प्रमुख कथन और विचार कुछ इस प्रकार हैं

शिक्षा को हमारे समाज में बराबरी का स्थान दिया जाता है. यह एक ऐसा उपकरण है जो हमारे पिछले हजारो वर्षो के सामाजिक व्यवस्था को एक बराबर के स्तर पर ला सकता है.

हमारा आज का काम भारत को इक्कीसवीं सदी में गरीबी के बोझ से मुक्ति, हमारे औपनिवेशिक अतीत की विरासत और हमारे लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होगा.

जब भी कोई बड़ा पेड़ गिरता है, तो जमीन हिलती है.

वह केवल मेरे लिए ही माँ नहीं थी बल्कि पूरे देश के लिए माँ थी. अपने खून की आखिरी बूंद तक उन्होंने भारतीय लोगों की सेवा की.

महिलायें एक देश की सामाजिक चेतना होती हैं. वे हमारे समाज को एक साथ जोड़ कर रखती है.

भारत एक प्राचीन देश, लेकिन एक युवा राष्ट्र है… मैं जवान हूँ और मेरा भी एक सपना है. मेरा सपना है भारत को मजबूत, स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और दुनिया के सभी देशों में से प्रथम रैंक में लाना और मानव जाति की सेवा करना.

भारत औद्योगिक क्रांति से चूक गया; यह कंप्यूटर क्रांति से चूक करने का खतरा नहीं उठा सकता है।

हर व्यक्ति को इतिहास से सबक लेना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि जहां कहीं भी आंतरिक झगड़े और देश में आपसी संघर्ष हुआ है, वह देश कमजोर हो गया है। इस कारण, बाहर से खतरा बढ़ता है। देश को ऐसी कमजोरी के कारण देश बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।

हमारा आज का काम भारत को इक्कीसवीं सदी में गरीबी के बोझ से मुक्ति, हमारे औपनिवेशिक अतीत की विरासत और हमारे लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होगा।

कारखानों, बांधों और सड़कों को विकास नहीं कहते। विकास तो लोगों के बारे में है। इसका लक्ष्य लोगों के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पूर्ति करना है। विकास में मानवीय मूल्यों को प्रथम वरीयता दी जाती है।

लोग अपने कर्तव्यों को भूल जाते हैं पर अधिकारों को याद रखते हैं .

भारत में कोई राजनेता इतना साहसी नहीं है कि वो लोगों को यह समझाने का प्रयास कर सके कि गायों को खाया जा सकता है

शहादत कुछ ख़त्म नहीं करती , वो महज़ शुरआत है .

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