Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

ग़ज़ल अगर शब्दों से खेलने की कला है तो मान लीजिए कि राहत इंदौरी वो कलाकार हैं जो अपने अंदाज में इस कला के माहिर खिलाडी है । Rahat Indori Shayari,डाॅ. राहत इंदौरी के शायरी शेर हर लफ्ज में मोहब्बत की नई शुरुआत करते हैं. वह सरकार और सामजिक व्यवस्था को आइना भी दिखाते हैं।

राहत इंदौरी का जन्म 1 जनवरी 1950 को हुआ था। राहत कुरैशी उनका असल नाम है। डाॅ. राहत इंदौरी एक भारतीय बॉलीवुड गीतकार और उर्दू भाषा के कवि हैं। वह उर्दू भाषा के प्रोफेसर भी रह चुके है और चित्रकारी भी करना पसंद करते हैं. इससे पहले वे इंदौर विश्वविद्यालय में उर्दू साहित्य के शिक्षाविद भी रह चुके हैं |

उनके पिता कपड़ा मिल मजदूर थे और वे अपने माँ पिता के चौथे बच्चे हैं, उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर से की जहाँ से उन्होंने अपनी हायर सेकंडरी पूरी की। उन्होंने 1973 में इस्लामिया करीमिया कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और 1975 में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल (मध्य प्रदेश) से उर्दू साहित्य में एम.ए. किया

इंदौरी ने पिछले 40 – 45 वर्षों से मुशायरा और कवि सम्मेलन में अनेक कार्यक्रम किये हैं । उन्होंने भारत के लगभग सभी जिलों में काव्य संगोष्ठियों में भाग लिया है और अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, मॉरीशस, केएसए, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल में भी अपने शेरो शायरी से लोगो का दिल जीता है

उन्होंने कई किताबें लिखी है।उन किताबो के नाम इस प्रकार हैं। रुत, कादर या साही, मेरे बाड़े धुप बहोत है,चांद पागल है ,मौजूद , नराज|उन्होंने कुछ बॉलीवुड गानों के गीत भी लिखें हैं.

हम डॉ राहत इंदौरी के सबसे ताज़ा और मशहूर शायरियां अंग्रेजी और हिंदी में प्रश्तुत कर रहे हैं .उम्मीद है की पाठको को हमारा Rahat Indori Shayari |राहत इंदौरी शायरी संग्रह कलेक्शन पसंद आये |

Rahat Indori Shayari images
Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

फूलों की दुकानें खोलो,
खुशबु का ब्योपार करो…
इश्क़ खता है, तो ये खता,
इक बार नहीं…. सौ बार करो….

Phoolo.n ki dukaane.n kholo,
Khushbu ka byopaar karo …..
Ishq khataa hai, to ye khataa,
Ik baar nahi, Sou baar karo…..

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

रोज तारों को नुमाइश में खलल पता है
चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है

roz taron ko numa.ish men ḳhalal paḌta hai
chand pagal hai andhere men nikal paḌta hai

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

आग का क्या है पल दो पल में लगती है,
बुझाते बुझाते एक ज़माना लगता है’

Aag ka kya hai pal do pal me lagti hai,
Bujhate bujhaate ek jamana lagta hai

Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

आंख में पानी रखो होठों पर चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तक़रीबें बहुत सारी रखो

aankh men paani rakho honTon pe chingari rakho
zinda rahna hai to tarkiben bahut saari rakho

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

घर के बाहर ढूंढता रहता हूं दुनिया
घर के अंदर दुनिया डेरी रहती है

ghar ke bahar DhūnDhta rahta huun duniya
ghar ke andar duniya-dari rahti hai

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

हम से पहले पहले भी मुसाफिर कई गुजरे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

ham se pahle bhi musafir ka.i guzre honge
kam se kam raah ke patthar to haTate jaate

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

माँ के क़दमों के निशाँ हैं के दिये रोशन हैं,
ग़ौर से देख यहीं पर कहीं जन्नत होगी….

Maa ke kadamo ke nishan hai ke din roshan hain
Gair se dekh yahi par kahin jannat hogi

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना,
लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना…..

Mai jab mar jaaun to meri alag pehchaan likh dena,
Lahu se meri peshaani pe hindustaan likh dena…..

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

ना हमसफ़र सी हमनशि से निकलेगा
हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेगा

na ham-safar na kisi ham-nashin se niklega
hamare paanv ka kanTa hamin se niklega

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

नफरत का बाज़ार ना बन,
फूल खिला तलवार ना बन….

Nafrat ka bajaar naa ban,
Ful khilaa talwar naa ban,….

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

राज़ जो कुछ हो इशारों में बता भी देना,
हाथ जब उससे मिलाना तो दबा भी देना…..

Raaj jo kuch ho isshare me bata bhi dena….
Haath jab usase milana toh daba bhi dena….

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

रिश्ता रिश्ता लिख मंज़िल,
रस्ता बन दीवार ना बन….

Rishta rishta likh manjil,
Raasta ban diwaar naa ban.

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

शाखों से टूट जाएं वह पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे

shaḳhon se TuuT jaa.en vo patte nahin hain ham
andhi se koi kah de ki auqat men rahe

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

थोड़ी पी ली है….. के कुछ देख सकूँ ये दुनिया,
होश उड़ जाएँ….. अगर होश में आकर देखूं…..

Thodi pi li hai ….ke kuch dekh sakun ye duniya,
Hosh udd jaayei ….agar hosh me aakar dekhu…..

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

उसकी याद आई है सांसों जरा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में खलल पड़ता है

us ki yaad aa.i hai sanso zara ahista chalo
dhadkanon se bhi ibadat men ḳhalal padta hai

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

रोज तारों को नुमाइश में खलल पता है
चांद पागल है अंधेरे में निकल पड़ता है

roz taron ko numa.ish men ḳhalal padta hai
chand pagal hai andhere men nikal padta hai

अक़्ल ये सोच के थक जाती है
इतनी नफ़रत कहाँ से आती है !!!

Akl ye soch ke thak jaati hai
Itni nafrat kahan se aati hai …

यक़ीन हो कि न हो, बात तो यक़ीन की है ।
हमारे जिस्म की मिट्टी इसी ज़मीन की है ।
हमारे मुल्क के सब लोग भाई भाई हैं
ये दूरियों की सियासत किसी कमीन की है..

दोस्ती जब किसी से की जाए दुश्मनों की भी राय ली जाए

dosti jab kisi se ki jaa.e
dushmanon ki bhi raa.e li jaa.e

बहुत गुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरे प्यार से उलझे तो धज्जियां उड़ा जाएं

bahut ġhurūr hai dariya ko apne hone par
jo meri pyaas se uljhe to dhajjiyan uḌ jaa.en

नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है

na.e kirdar aate ja rahe hain
magar naTak purana chal raha hai

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Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

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मिर्ज़ा ग़ालिब शायरी, गुलजार शायरी,मुन्नवर राणा शायरी

राहत इंदौरी
राहत इंदौरी

vo chahta tha ki kaasa ḳharid le mera
main us ke taaj ki qimat laga ke lauT aaya

बीमार को मर्ज की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूं पीला देनी चाहिए


bimar ko maraz ki dava deni chahiye
main piina chahta huun pila deni chahiye

ख्याल था कि यह पथराव रोक दें चलकर, जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे राहत इंदौरी

मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में है ना दीवार उठे
मेरे भाई की जमीन तू रख ले

miri ḳhvahish hai ki angan men na divar uThe
mire bhaa.i mire hisse ki zamin tū rakh le

बोतलें खोल कर दो
आज दिल खोल कर भी पी जाए

botalen khol kar to pi barson
aaj dil khol kar bhi pi jaa.e

घर के बाहर ढूंढता रहता हूं दुनिया
घर के अंदर दुनिया डेरी रहती है

ghar ke bahar DhūnDhta rahta huun duniya
ghar ke andar duniya-dari rahti hai

मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
हर एक मौसम को गुजर जाने की जल्दी थी

main aḳhir kaun sa mausam tumhare naam kar deta
yahan har ek mausam ko guzar jaane ki jaldi thi

यह जरूरी है कि आंखों की भरम कायम रहे नींद रखो या ना रखो ख्वाब में यारी रखो राहत इंदौरी

ye zarūri hai ki ankhon ka bharam qaa.em rahe
niind rakkho ya na rakkho ḳhvab meyari rakho

अब तो हर हाथ के पत्थर हमें पहचानता है है उम्र गुजरी है शहर में राहत इंदौरी

ab to har haath ka patthar hamen pahchanta hai
umr guzri hai tire shahr men aate jaate

मैं पर्वतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली जमीन खोद के फरहाद हो गए

main parbaton se laḌta raha aur chand log
giili zamin khod ke farhad ho ga.e

यह हवाएं उड़ ना जाए लेकर कागज का बदन
दोस्तों तुम मुझ पर कोई पत्थर जरा भारी रखो

ye hava.en uḌ na jaa.en le ke kaġhaz ka badan
dosto mujh par koi patthar zara bhari rakho

Rahat Indori Shayari images
राहत इंदौरी शायरी

एक ही नदी के हैं यह दो किनारे दोस्तों
दोस्ताना जिंदगी से मौत से यारी रखो

ek hi nadi ke hain ye do kinare dosto
dostana zindagi se maut se yaari rakho

मैंने अपनी खुशबू आंखों से लहू छलका दिया
एक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए

main ne apni ḳhushk ankhon se lahū chhalka diya
ik samundar kah raha tha mujh ko paani chahiye

मजा चखा के ही माना हूं मैं भी दुनिया को
समझ रही थी ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे

maza chakha ke hi maana huun main bhi duniya ko
samajh rahi thi ki aise hi chhoḌ dūnga use

रोज पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं
रोज शीशों से कोई काम निकल पड़ता है

roz patthar ki himayat men ġhazal likhte hain
roz shishon se koi kaam nikal paḌta hai

मैं आकर दुश्मनों में बस गया हूं
यहां हमदर्द चार

main aa kar dushmanon men bas gaya huun
yahan hamdard hain do-char mere

सूरज सितारे चांद साथ मेरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे

sūraj sitare chand mire saat men rahe
jab tak tumhare haat mire haat men rahe

ख्याल था कि यह पथराव रोक दें चलकर,
जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे

ḳhayal tha ki ye pathrav rok den chal kar
jo hosh aaya to dekha lahū lahū ham the

कॉलेज के बच्चे चुप हैं एक कागज की नाव के लिए
चारों तरफ दरिया की सूरत हुई बेकारी है

collage ke sab bachche chup hain kaġhaz ki ik naav liye
charon taraf dariya ki sūrat phaili hui bekari hai

शहर क्या देखें की मंजर में जाले पड़ गए हैं
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए

shahr kya dekhen ki har manzar men jaale paḌ ga.e
aisi garmi hai ki piile phuul kaale paḌ ga.e

हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं
मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं

ham apni jaan ke dushman ko apni jaan kahte hain
mohabbat ki isi miTTi ko hindustan kahte hain

एक मुलाकात का जादू की उतरता ही नहीं
तेरी खुशबू मेरी चादर से नहीं जाती है

ik mulaqat ka jaadū ki utarta hi nahin
tiri ḳhushbū miri chadar se nahin jaati hai

सच बात कौन है जो सरेआम कह सकें
मैं कह रहा हूं मुझको सजा देनी चाहिए

sach baat kaun hai jo sar-e-am kah sake
main kah raha huun mujh ko saza deni chahiye

Rahat Indori Ghazal |राहत इंदौरी ग़ज़ल

Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी
Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

सिर्फ खंजर ही नहीं आंखों में पानी चाहिए
ए खुदा दुश्मन भी मुझको खानदानी चाहिए


शहर की सारी अलिफ लैला बुड्ढी हो चुकी हैं
शहजादे को कोई ताजा कहानी चाहिए


मैंने ने सूरज तुझे पूजा नहीं समझा तो है
मेरे हिस्से में भी थोड़ी धूप आनी चाहिए


मेरी कीमत कौन दे सकता है इस बाजार में
तुम जुलेखा हो तुम्हें कीमत लगानी चाहिए


जिंदगी है एक सफर और जिंदगी की राह में
ज़िन्दगी भी आये तो ठोकर लगानी चाहिए


मैंने अपनी खुश्क आंखों से लहू छलका दिया
एक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए

sirf ḳhanjar hi nahin ankhon men paani chahiye
ai ḳhuda dushman bhi mujh ko ḳhandani chahiye

shahr ki saari alif-laila.en būḌhi ho chukin
shahzade ko koi taaza kahani chahiye

main ne ai sūraj tujhe puuja nahin samjha to hai
mere hisse men bhi thoḌi dhuup aani chahiye
meri qimat kaun de sakta hai is bazar men

tum zuleḳha ho tumhen qimat lagani chahiye

zindagi hai ik safar aur zindagi ki raah men, zindagi bhi aa.e to Thokar lagani chahiye


main ne apni ḳhushk ankhon se lahū chhalka diya
ik samundar kah raha tha mujh ko paani chahiye

Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी
Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

अंदर का जहर चूम लिया धूल के आ गए
कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए


सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए


मस्जिद में दूर-दूर कोई दूसरा ना था
आईने को मजे भी तकबुल के आ गए


अनजाने से फिरने लगे हैं इधर-उधर
मौसम हमारे शहर में काबुल के आ गए

andar ka zahr chuum liya dhul ke aa ga.e
kitne sharif log the sab khul ke aa ga.e


sūraj se jang jitne nikle the bevaqūf
saare sipahi mom ke the ghul ke aa ga.e


masjid men duur duur koi dūsra na tha
ham aaj apne aap se mil-jul ke aa ga.e


nindon se jang hoti rahegi tamam umr
ankhon men band ḳhvab agar khul ke aa ga.e


sūraj ne apni shakl bhi dekhi thi pahli baar
a.ine ko maze bhi taqabul ke aa ga.e


anjane saa.e phirne lage hain idhar udhar
mausam hamare shahr men kabul ke aa ga.e

ग़ालिब की मशहूर शायरी पढ़ने के लिए क्लिक करें

Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी
Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

बुलाती है…..मगर जाने का नई,
ये दुनिया है, इधर जाने का नई…..


कुशादा ज़र्फ़ होना चाहिए,
छलक जाने का भर जाने का नई….


सितारे नोंच कर ले जाऊँगा,
मैं खाली हाथ घर जाने का नई….


मेरे बेटे…..किसी से इश्क़ कर,
मगर हद से गुज़र जाने का नई…..


वो गर्दन नापता है….नाप ले,
मगर ज़ालिम से डर जाने का नई…..


वबा फैली हुई है हर तरफ,
अभी माहौल मर जाने का नई……

Bulati hai ….magar jaane ka nai,
Ye dunia hai ,idhar jaane ka nai.


Kushad jarf hona chahiye
Chalak jaane ka bhar jaane ka nai


Sitaare noch kar le jaunga
Mai khali haath ghar jaane ka nai


Mere bête…kisi se ishq kar,
Magar had se gujar jaane ka nai


Wo garden naapta hai..naap le,
Magar jaalim se dar jaane ka nai


Wafa faili hui hai har taraf
Abhi mahaul mar jaane ka nai

Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी
Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

मैं लाख कह दूं कि आकाश हूं जमीन हूं मैं
मगर उसे तो खबर कि कुछ नहीं हूं मैं


अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझको
वहां पर ढूंढ रहे हैं जहां नहीं हूं मैं


मैं से तो मायूस लौट आया था
मगर किसी ने बताया बहुत हसीन हूं मैं


वह एक किताब जो मनसुख तेरे नाम से है
उसी किताब के अंदर कहीं-कहीं हूं मैं


सितारों आओ मेरी राह में बिखर जाओ
यह मेरा हुक्म है हालांकि कुछ नहीं हूं मैं


यही हुसैन भी गुजरे यही याजिद भी था
हजार रंग में डूबी कोई जमीन हूं मैं


यह बुड्ढी खबरें तुम्हें कुछ नहीं बताएंगे
मुझे तलाश करो दोस्तों यहीं हूं

Mai laakh kah dun ki akash huun zamin hu mai
magar use to ḳhabar hai ki kuchh nahin hu mai


ajiib log hain meri talash men mujh ko
vahan pe DhūnD rahe hain jahan nahin hu mai


main a.inon se to mayūs lauT aaya tha
magar kisi ne bataya bahut hasin hu mai


vo zarre zarre men maujūd hai magar main bhi
kahin kahin huun kahan huun kahin nahin hu mai


vo ik kitab jo mansūb tere naam se hai
usi kitab ke andar kahin kahin hu mai


sitaro aao miri raah men bikhar jaao
ye mera hukm hai halanki kuchh nahin hu mai


yahin husain bhi guzre yahin yazid bhi tha
hazar rang men Duubi hui zamin hu mai


ye būḌhi qabren tumhen kuchh nahin bata.engi
mujhe talash karo dosto yahin hu mai

Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी
Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

घर से यह सोचकर निकला हूं कि मर जाना है
अब कोई राह दिखा दे कि किधर जाना है


जिस्म से साथ निभाने की मत उम्मीद रखो
इस मुसाफिर को तो रास्ते में ठहर जाना है


मौत लम्हे की सदा जिंदगी उम्र ओं की पुकार
मैं यही सोच कर जिंदा हूं कि मर जाना है


नशा ऐसा था कि मैंखाने को दुनिया समझा
होश आया तो ख्याल आया कि घर जाना है
मेरे जज्बे की बड़ी कदर है लोगों में मगर
जज्बे को मेरे साथ ही मर जाना है

ghar se ye soch ke nikla huun ki mar jaana hai
ab koi raah dikha de ki kidhar jaana hai


jism se saath nibhane ki mat ummid rakho
is musafir ko to raste men Thahar jaana hai
maut lamhe ki sada zindagi umron ki pukar
main yahi soch ke zinda huun ki mar jaana hai
nashsha aisa tha ki mai-ḳhane ko duniya samjha


hosh aaya to ḳhayal aaya ki ghar jaana hai
mire jazbe ki baḌi qadr hai logon men magar
mere jazbe ko mire saath hi mar jaana hai

Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी
Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

अंदर का जहर चूम लिया धूल के आ गए
कितने शरीफ लोग थे सब खुल के आ गए
सूरज से जंग जीतने निकले थे बेवकूफ
सारे सिपाही मोम के थे घुल के आ गए


मस्जिद में दूर-दूर कोई दूसरा ना था
आईने को मजे भी तकबुल के आ गए
अनजाने से फिरने लगे हैं इधर-उधर
मौसम हमारे शहर में काबुल के आ गए

andar ka zahr chuum liya dhul ke aa ga.e
kitne sharif log the sab khul ke aa ga.e
sūraj se jang jitne nikle the bevaqūf
saare sipahi mom ke the ghul ke aa ga.e
masjid men duur duur koi dūsra na tha


ham aaj apne aap se mil-jul ke aa ga.e
nindon se jang hoti rahegi tamam umr
ankhon men band ḳhvab agar khul ke aa ga.e
sūraj ne apni shakl bhi dekhi thi pahli baar
a.ine ko maze bhi taqabul ke aa ga.e


anjane saa.e phirne lage hain idhar udhar
mausam hamare shahr men kabul ke aa ga.e

rahat indori shayari in hindi

सभी का ख़ून है शामिल यहां की मिट्टी में,
किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है

अजनबी ख़्वाहिशें , सीने में दबा भी न सकूँ |
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे ,  कि उड़ा भी न सकूँ ||

आँख में पानी रखो , होंटों पे चिंगारी रखो |
ज़िंदा रहना है तो , तरकीबें बहुत सारी रखो ||

रोज़ तारों को नुमाइश  में , खलल पड़ता हैं |
चाँद पागल हैं , अंधेरे में निकल पड़ता हैं ||

उसकी याद आई हैं , साँसों ज़रा धीरे चलो |
धड़कनो से भी इबादत में ,  खलल पड़ता हैं ||

ये हादसा तो किसी दिन , गुज़रने वाला था |
मैं बच भी जाता तो , इक रोज़ मरने वाला था ||

ना त-आरूफ़ ना त-अल्लुक हैं , मगर दिल अक्सर |
नाम सुनता हैं , तुम्हारा तो उछल पड़ता हैं ||

अंदर का ज़हर चूम लिया , धुल के आ गए |
कितने शरीफ़ लोग थे , सब खुल के आ गए ||

दो गज सही ये  , मेरी मिलकियत तो हैं |
ऐ मौत तूने मुझे  , ज़मीदार कर दिया ||

मुझसे पहले वो किसी और की थी , मगर कुछ शायराना चाहिए था |
चलो माना ये छोटी बात है , पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिए था ||

अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं
पता चला हैं की मेहमान आने वाले हैं

आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो
राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो

जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए
काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए
दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर किया
फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए

गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम  क्या क्या हैं
में आ गया हु बता इंतज़ाम क्या क्या हैं
फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या हैं

कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते  हैं
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं
ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी
की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं

हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं
आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा हैं
मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं

जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं
अगर अनारकली हैं सबब बगावत का
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं

इश्क ने गूथें थे जो गजरे नुकीले हो गए
तेरे हाथों में तो ये कंगन भी ढीले हो गए
फूल बेचारे अकेले रह गए है शाख पर
गाँव की सब तितलियों के हाथ पीले हो गए


सरहदों पर तनाव हे क्या
ज़रा पता तो करो चुनाव हैं क्या
शहरों में तो बारूदो का मौसम हैं
गाँव चलों अमरूदो का मौसम हैं

rahat indori best shayari

लवे दीयों की हवा में उछालते रहना
गुलो के रंग पे तेजाब डालते रहना
में नूर बन के ज़माने में फ़ैल जाऊँगा
तुम आफताब में कीड़े निकालते रहना


जुबा तो खोल, नज़र तो मिला,जवाब तो दे
में कितनी बार लुटा हु, मुझे हिसाब तो दे
तेरे बदन की लिखावट में हैं उतार चढाव
में तुझको कैसे पढूंगा, मुझे किताब तो दे


सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे
चले चलो की जहाँ तक ये आसमान  रहे
ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल
मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे

shayari rahat indori

उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर मंतर सब
चाक़ू वाक़ू, छुरियां वुरियां, ख़ंजर वंजर सब


जिस दिन से तुम रूठीं,मुझ से, रूठे रूठे हैं
चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब


मुझसे बिछड़ कर, वह भी कहां अब पहले जैसी है
फीके पड़ गए कपड़े वपड़े, ज़ेवर वेवर सब

जा के कोई कह दे, शोलों से चिंगारी से
फूल इस बार खिले हैं बड़ी तैयारी से


बादशाहों से भी फेके हुए सिक्के ना लिए
हमने खैरात भी मांगी है तो खुद्दारी से


बन के इक हादसा बाज़ार में आ जाएगा
जो नहीं होगा वो अखबार में आ जाएगा

चोर उचक्कों की करो कद्र, की मालूम नहीं
कौन, कब, कौन सी  सरकार में आ जाएगा

rahat indori love shayari

लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं
मोड़  होता हैं जवानी का संभलने  के लिए
और सब लोग यही आके फिसलते क्यों हैं


साँसों की सीडियों से उतर आई जिंदगी
बुझते हुए दिए की तरह, जल रहे हैं हम
उम्रों की धुप, जिस्म का दरिया सुखा गयी
हैं हम भी आफताब, मगर ढल रहे हैं हम


इश्क में पीट के आने के लिए काफी हूँ
मैं निहत्था ही ज़माने  के लिए काफी हूँ
हर हकीकत को मेरी, खाक समझने वाले
मैं तेरी नींद उड़ाने के लिए काफी हूँ
एक अख़बार हूँ, औकात ही क्या मेरी
मगर शहर में आग लगाने के लिए काफी हूँ


दिलों में आग, लबों पर गुलाब रखते हैं
सब अपने चहेरों पर, दोहरी नकाब रखते हैं
हमें चराग समझ कर भुझा ना पाओगे
हम अपने घर में कई आफ़ताब रखते हैं

shayari of rahat indori

Ab Na Main Hun, Na Baaki Hai Zamane Mere,
Fir Bhi MashHoor Hain Shaharon Mein Fasane Mere,
Zindagi Hai Toh Naye Zakhm Bhi Lag Jayenge,
Ab Bhi Baaki Hain Kayi Dost Puraane Mere.


अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,
ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

Loo Bhi Chalti Thi Toh Baad-e-Shaba Kehte The,
Paanv Failaye Andheron Ko Diya Kehte The,
Unka Anjaam Tujhe Yaad Nahi Hai Shayad,
Aur Bhi Log The Jo Khud Ko Khuda Kehte The.


लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,
पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,
उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।

Haath Khali Hain Tere Shahar Se Jate Jate,
Jaan Hoti Toh Meri Jaan Lutate Jate,
Ab Toh Har Haath Ka Patthar Humein Pehchanta Hai,
Umr Gujri Hai Tere Shahar Mein Aate Jate.


हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।

Chehron Ke Liye Aayine Kurbaan Kiye Hain,
Iss Shauk Mein Apne Bade Nuksaan Kiye Hain,
Mehfil Mein Mujhe Gaaliyan Dekar Hai Bahut Khush,
Jis Shakhs Par Maine Bade Ehsaan Kiye Hain.


चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं,
इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं,​
महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश​,
जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है।

Teri Har Baat Mohabbat Mein Ganwara Karke,
Dil Ke Bajaar Mein Baithe Hain Khasaara Karke,
Main Woh Dariya Hun Ke Har Boond Bhanwar Hai Jiski,
Tumne Achha Hi Kiya Hai Mujhse Kinaara Karke.


​तेरी हर बात ​मोहब्बत में गँवारा करके​,
​दिल के बाज़ार में बैठे हैं खसारा करके​,
​मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भंवर है जिसकी​,​​
​तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

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One thought on “Rahat Indori Shayari | राहत इंदौरी शायरी

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