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poems in hindi | हिंदी कविता

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दोस्तों प्रश्तुत है  Poems in Hindi | कविता संग्रह ,हिंदी कविताएँ. वर्तमान समय में सभी को प्रेरणा चाहिए। हर उस व्यक्ति का हाथ थामना चाहिए जो निराशा से ग्रस्त है।

कवी का काम समाज में चल रही कुरीतिये, कुव्यवस्थाओं के साथ साथ पाठक का मनोरंजन करना भी होता है. हमारी कोशिश है की हम सारो मुद्दों को मनोरंजक रुप में रखें बहुत सारे कविता थोड़े बड़े हैं लेकिन पाठक अगर पढ़ेंगे तो उन्हें मजा आएगा
इसीलिए हम कविताओं के माध्यम से सभी को प्रेरणा देने का प्रयास किया है. उम्मीद है कि आपको यह सभी कविताएं Poems in Hindi | कविता संग्रह पसंद आएंगी.

[su_heading] Poem in Hindi | अंजाम अभी बाकी है[/su_heading]

हुजूम निकला है हुकमदारो का ,अंजाम निकलना अभी बाकी है |
सुकून पिघला है सितारों का, चाँद पिघलना अभी बाकी है ||
सुना है तहखाने भरे है मोतियों से , खदान खुलना अभी बाकी है |
गड़े है मुर्दे शामियाने में , कब्रिस्तान निकलना अभी बाकी है ||
जल रहे अरमान, गंगास्नान करना अभी बाकी है
मर रही है उम्मींदे, समशान निकलना अभी बाकी है
गर्म चर्चाएं हो रही इन चुनावी गर्मियों में , आस्मां पिघलना अभी बाकी है
रुझानों ने हवा का रुख बता दिया है ,परिणाम निकलना अभी बाकी है
सतरंज के प्यादे लद गए है , अंजाम निकलना अभी बाकी है
कुछ पात्र रचे गए है ,पुराण निकलना अभी बाकी है
थकी है जनता उत्पीड़न से , एलान निकलना अभी बाकी है
ढकी है इज्जत जिनकी सत्ता से ,सम्मान निकलना अभी बाकी है
संजो के रखना उम्मीद के परो को ,उड़ान निकलना अभी बाकी है
सीता का अपहरण हुआ है ,हनुमान निकलना अभी बाकी है

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[su_heading size=”16″]Poem in Hindi | महात्मा गाँधी[/su_heading]

उन्हतर में इस श्रिस्टी ने दिया भारत को वरदान था ,
जब आया इस धरती पे वो एक ऐसा इंसान था ॥
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था ॥
हिन्दू का वो बनिया भारत का गुजरती था
कहाँ सेहर थे उस वक़्त ,वो तो ठेठ देहाती था ॥
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था ॥
किसने सोचा तब चलके आगे ये गाँधी ‘ बापू महान’ था ,
भारत में के गौरव पे लगा तिलक संग्राम था ॥
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था ॥
विदेशी धारित से शुरू की वो तो एक’ उत्थान ‘था
ना आया केवल आम श्रमिक, जुड़ गया किसान था ॥
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था ॥
स्वराज की लौ जलाई वो सन इक्कीस था ,
अंग्रेजो के लिए जीता जागता अहिंसक टीस था
वो कहाँ एक सामान्य पुत्र था ,
जीवन मूल्यों का अभिमान सूत्र था[su_divider size=”4″ margin=”25″]

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[su_heading size=”16″] new kavita 2020| भारत को हिंदुस्तान चाहिए[/su_heading]

इंसान को एक काम या हिन्दू को भगवान् चाहिए
मंदिर में राम या भारत को इंसान चाहिए
नहीं चाहिए अरबो पैसे ,नहीं कोई महान चाहिए
देदो ऐसा मुल्क जहाँ इंसान को इंसान चाहिए
मुझको राम, तुझे अल्लाह का नाम चाहिए
मोहब्बत से जो जीना दिखाए सिर्फ वही अंजाम चाहिए
ना हिन्दू मंदिर में, ना ही मस्जिद में मुसलमान
बस दे सके सबका हक़ ऐसा एक रुझान चाहिए
दे हमको कबीर की कहानी जो चले मीरा की जुबानी
ऐसा कोई अफसाना ऐसा ही कोई फरमान चाहिए
नहीं तुम्हारी भागती अंग्रेजी , ना ही मेरी शर्माती हिंदी
बिना बोले हम सब समझे ऐसी एक जुबान चाहिए
ना तुम्हारी अनमोल अशर्फी ,ना ही बड़ा इनाम चाहिए
बिन पिए मदमस्त झूमा दे ऐसा कोई जाम चाहिए
दे दो ऐसा मुक्क्दर जहाँ ढेर सारा काम चाहिए
ना चाह्ने देना हराम ऐसा वो पैगाम चाहिए

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[su_heading size=”16″] new kavita 2020 | हिन्दुस्तान किसका है[/su_heading]

जाओ देखो तो सही जुबान किसका है
लाओ फेंको तो कही शैतान किसका है
जो नहीं मिली इजाजत फरमान किसका है
दो वहीं दिली हिफाजत मुसलमान किसका है
अंदर का डर निकालो ,अरमान किसका है
सिकंदर का नर निकालो ,जिस्मो जान किसका है
अल्लाह की है पाक रवानी रमजान किसका है
मल्लाह की बेबाक जुबानी बेफारमन किसका है
नफरतो के इस जंगल में ,सोम बुध और मंगल में तालिबान किसका है
फ़रहतो के इस दंगल में ,रोम रूस और चम्बल में कत्लेआम किसका है
क्यों तोड़ने लगे है मेरे जुटे इमारत को ,फरमान किसका है |
लूट गया है महल मेरा ,जाने साजो सामान किसका है
कभी मुर्दो ने उठ कर पूछा है क्या ये कब्रिस्तान किसका है
सोचता हूँ उड़ के देख लू , वो आस्मां किसका है
जिन्दा लोग जलने लगे है ,समसान किसका है
लंगड़े लोग टहलने लगे है ,मतदान किसका है
मत बांधो मेरे अरमानो को ,ये खुला आसमान किसका है
तैर के आया हु मै उस सूखे समंदर से ,ये भरा जाम किसका है
बिलखता बेवा का चेहरा ,काम किसका है
बिदकता जानलेवा शेहरा इंतजाम किसका है

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[su_heading size=”16″]Hindi Poetry on life| Middle class[/su_heading]

तुम देखते भरी ,वो आधी गिलास को,
चुनते सही मिड पाथ को,
कही ना हो जाए सत्यानाश
बेचारा बिंदास, हे पार्थ, तुम मिडिल क्लास
क्या कभी मिला सबकुछ ,जो तुमने फ़रमाया था
क्यों भूल गए पापा का चेहरा, जो गुस्से में झल्लाया था
लाइट जाने पे चंद रातो को देखे है चांदनी आकाश
यही है इतिहास ,हे पार्थ तुम मिडिल क्लास
घर के दुलारे और शायद आखिरी आस,
मेहनत से किये है तुमने कई एंट्रेंस पास
सीखा है तुमने करना जीवन भर निरंतर प्रयास
तुम झकास हो, हे पार्थ, तुम मिडिल क्लास
सरकारी बस का वो मंथली पास
क्या अनजाने में सताता है तुम्हारा क्लास
नौकरी पाने पे होता हर्षो उल्लास
पहन लो एडिडास, पर हे पार्थ, तुम मिडिल क्लास
क्या गरीब ,क्या आमिर, सबके तुम काम आते
कुछ गरीब को खाना मिलता ,अमीरो का चेहरा लोन से खिलता
तुम्हारा खुदका ना हो घर ,पर हर गरीब घर के पीछे तुम्हारा वो कर ,
तुम जीवित मास , हे पार्थ, तुम मिडिल क्लास
तुमको आता थोड़ा रास, कभी हो जाते उदास
वसूले कर के पैसो का सवाल तो पूछो
कहाँ क्या किया है सरकार ने ,जरा हाल तो पूछो

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[su_box title=”जीवन पर कविता ” radius=”4″]Hindi Poetry on life | 377 [/su_box]

ईश्वर बने भार का ढोना नश्वर जने वो जादू टोना |
कब तक हम भगवान् बनेंगे बलवान हम है,कब हम इंसान बनेंगे ii
नफरत का वो खेल पुराना ग़फ़लत का बेमेल जमाना i
दूसरे को तीसरा बताना तीसरे को खतरा समझाना ii
उस शिखंडी को महाभारत गाता खुश पाखंडी को शरारत भाता |
कब तक हम ईमान चरेंगेक्या अब भी अभिमान भरेंगे ||
हर भीसम को शिखंडी चाहिए ‘पने जीवन की लड़ाई में
हर ग्रीष्म को कालिंदी चाहिएअपने यौवन की अंगड़ाई में ||

[su_box title=”जीवन पर कविता ” radius=”4″]समंदर [/su_box]

बना धरती की ज्वाला से जो ,
सना तरंगो की माला से वो ।
पानी का मंजर है यह
,गागर नहीं समंदर है यह ॥

उस पानी के खारेपन में ,
जलजीवों के ईशारेपन में ।
नदियों से शदियों का नाता
पशु पक्षियों का यह भाग्य विधाता ॥

धरा के नीलेपन का होना
सूरज से पीलेपन का खोना ।
पानी का मंजर है यह
,गागर नहीं समंदर है यह ॥

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