bhagat singh new poem in hindi

bhagat singh new poem in hindi | भगत सिंह पर नयी कविता

bhagat singh hindi poem

गोडसे से भगत सिंह पर गोली ना चलाई जाएगी।

एक दिन तेरी खाक उछाली जाएगी
या के फिर तुझ पर खाक डाली जाएगी
वह बदन जिसके लिए तूने सब जतन किए
गाड़ डाली या झोंक डाली जाएगी

पगड़िया गर जो गिराई जाएंगी
टोपीयां गर जो हटाई जाएंगी
वह गांधी नहीं की हे राम कहे और गिर पड़े
गोडसे से भगत सिंह पर गोलियां चलाई जाएगी

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मुसलमानों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी
किसानों की जबरदस्ती जबरदस्त आमदनी बढ़ाई जाएगी
अदानी कि थोड़ी सी और मनमानी बढ़ाई जाएगी
पहले फ्री में Jio दियो, बाद में अंबानी की आमदनी बढ़ाई जाएगी

आपने मुसलमानों का साथ नहीं दिया यह बात भुला दी जाएगी
आपने डॉक्टरों का साथ नहीं दिया यह बात भी बुलाई जाएगी
आप ने मजदूरों का साथ न दिया यह बात भी बुलाई जाएगी
मगर अगर आज आपने किसानों का साथ न दिया तो फिर आपसे रोटी कैसे खाई जाएगी?

जवाब में राम राम कहेगा अगर मुसलमानों को प्यार से राम राम की जाएगी
मगर जबरदस्ती ना करना भक्त मंडली, तुमसे ना हो पाएगी
कुरान का एक सिरा मोमिन के हाथ में तो दूसरा अल्लाह के हाथ में है
जिंदगी छोड़ देगा वह, कुरान उससे ना छोड़ी जाएगी

bhagat singh poem in hindi

जिस दिन हर मुसलमान कुरान पढ़ने लगे और गीता तेरी समझ में आएगी
उस दिन से मंदिर मस्जिद तो क्या तुझ से फूलों पर बैठी तितली तक ना हटाई जाएगी
हर वह शक्स जो अनल हक़ कहेगा औरों के हक के लिए लड़ेगा आखिर में सूली पर चलेगा
उसे इंसान में भगवान तो नहीं मगर भगवान की परछाई जरूर नजर आएगी

मरने के बाद तुझे जो तस्वीर दिखाई जाएगी
मजलूमों के आंखो में झांक वही तस्वीर नजर आएगी
इस्लाम ना तो तलवार से फैला ना Sikhism कृपाण से
तुझे वह तलवार वह कृपाण कभी ज़ईफो के गर्दन पर नजर नहीं आएगी

हिफाजत संविधान, गीता ज्ञान और कुरान के हर एक हर्फ की की जाएगी
तरफदारी कुफ्र तारीख के तरफ की ना की जाएगी
इबादत में हम से शिर्क की ना की जाएगी
वाहवाही किसी कमजार्फ की ना की जाएगी

उसे hunger क्या सताएगा जो कौम लंगर लगाएगी
जय श्री राम, अल्लाह हू अकबर, जो बोले सो निहाल एक साथ गूंजे तो चाइना की लहर जाएगी
ऑस्ट्रिया स्लोवाकिया और हंगरी के बॉर्डर पर एक डिनर टेबल है जहां तीनों देश के लोग एक साथ चाय पर चर्चा करते हैं
यहां इंडिया में एक ही घर में एक ही डिनर टेबल पर वेज बिरयानी, मटन बिरयानी से लड़ जाएगी

चल हट जयचंद, बंद तो बंद, कोशिश हरचंद की जाएगी
बहरों को सुनाने के लिए धमाके नहीं, बस yes/no बोलेंगे, हर बात बंद की जाएगी
आपके सारे घमंड की झंड झंड की जाएगी
आपके पूरे मुगल गार्डन की मुगलई किसानों द्वारा फंड की जाएगी

bhagat singh kavita

हड्डियां गला कर च्यवनप्राश बन चुका, अब जंजीरे गला कर शमशीरे बनाई जाएंगी
औरतें अपनी छातियां काट लेंगे अगर उनसे तीरे ना चलाई जाएंगी
गर्दन कटा लेंगे अगर हमसे पगड़िया ना बचाई जाएगी
बच्चे सड़कों पर निकल आएंगे अगर मां की इज्जत पर बात आएगी

कान्हा जैसी अब किसी से बांसुरी बजाई जाएगी
हजरत बिलाल रजियल्लाहु इस्लाम जैसी आवाज किसी से ना पाई जाएगी
आका ने जो सुना था अब वह आवाज न दोहराई जाएगी
गुंबदे खिज़रा की परछाई अब ना दिखाई जाएगी

रामराज तभी बनाई जाएगी जब मोहम्मद के शहर तक पक्की सड़क जाएगी
रामराज तभी बनाई जाएगी जब शबरी के बेर शर्मा जी से खाई जाएगी
रामराज तभी बनाई जाएगी जब हरिजन को बिना reservation के नौकरी थमाई जाएगी
रामराज तभी बनाई जाएगी जाएगी जब खीर और सेवई एक ही चूल्हे पर बनाई जाएगी।

रचनाकार – अमित चौधरी
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