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New Hindi Poem on Indian Culture

गाय हमारी
COW बन गयी,

शर्म हया अब
WOW बन गयी,

काढ़ा हमारा
CHAI बन गया,

छोरा बेचारा
GUY बन गया ,

योग हमारा YOGA बन गया,
घर का जोगी JOGA बन गया,

भोजन 100 रु.
PLATE बन गया,
हमारा भारत
GREAT बन गया..

घर की दीवारेँ WALL बन गयी,
दुकानेँ SHOPING MALLबन गयीँ,

गली मोहल्ला WARD बन गया,
ऊपरवाला LORD बन गया,

माँ हमारी MOM बन गयी
छोरियाँ ITEM BOMB बन गयीँ, ,

तुलसी की जगह मनी प्लांट ने ले ली..!
चाची की जगह आंटी ने ले ली..!

पिता जी डैड हो गये..! भाई तो अब ब्रो हो गये..!
बेचारी बहन भी अब सिस हो गयी..!

दादी की लोरी तो अब टांय टांय फिस्स हो गयी।
जीती जागती माँ बच्चों के लिए ममी हो गयी..!

रोटी अब अच्छी कैसे लगे मैग्गी जो इतनी यम्मी हो गयी..!

गाय का आशियाना अब शहरों की सड़कों पर बचा है..!

विदेशी कुत्तों ने लोगों के कंधों पर बैठकर इतिहास रचा है..!
बहुत दुःखी हूँ ये सब देखकर दिल टूट रहा है..!

हमारे द्वारा ही हमारी भारतीय सभ्यता का साथ छूट रहा है