Nafrat Shayari in hindi | नफ़रत शायरी

Nafrat Shayari

इस पोस्ट में आप नफ़रत शायरी 2 लाइन, नफ़रत शायरी in Urdu, Nafrat Status, नफ़रत शायरी 4 लाइन, पर बनी बेजोड़ शानदार नफ़रत शायरी को, पढ़ सकते हैं मित्रो आशा करता हूँ कि यह पोस्ट आप सभी को बेहद पसंद आएगी.

तुम नफरत का धरना कयामत तक जारी रखो,
मैं प्यार का इस्तीफा जिंदगी भर नहीं दूंगी ।

महोब्बत और नफरत सब मिल चुके हैं मुझे,
मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चुका हूँ।

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली दोस्तो…

नफरतों की दुनिया में हमें प्यार की बस्तियां बसानी हैं,
दूर रहना कोई कमाल नहीं, पास आओ एक बात बतानी है

जब नफरत करते करते थक जाओ,
तब एक मौका प्यार को भी देते जाना ।

कुछ इस अदा से निभाना है किरदार मुझको,
जो मुहब्बत ना कर सके मुझसे वो नफरत भी ना कर सके।

Nafrat Shayar

नफ़रत हो जायेगी तुझे अपने ही किरदार से,
अगर मैं तेरे ही अंदाज में तुमसे बात करुं।

देख कर मुझको तेरा यूँ पलट जाना,
नफरत बता रही है इश्क बेमिसाल था।

तुमसे प्यार भी तुम्हारी हैसियत से ज्यादा किया था,
अब बात नफरत की है तो नफरत ही सही।

हमें बरबाद करना है तो हमसे प्यार करो,
नफरत करोगे तो खुद बरबाद हो जाओगे।

हाँ मुझे मोहब्बत का सलीक़ा ही नहीं,
जा किसी और का होने की इजाज़त है तुझे।

अगर इतनी ही नफरत है हमसे तो,
दिल से कुछ ऐसी दुआ करो,
की आज ही तुम्हारी दुआ भी पूरी हो जाये,
और हमारी ज़िन्दगी भी।

Nafrat Shayari In Hindi For Girlfriend

कभी उसने भी हमें इश्क का पैगाम लिखा था,
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था,
सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है,
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।

तुमने नफ़रत से जो देखा है तो याद आया,
कितने रिश्ते तेरी ख़ातिर यूँ ही तोड़ आया हूँ,
कितने धुंधले हैं ये चेहरे जिन्हें अपनाया है,
कितनी उजली थी वो आँखें जिन्हें छोड़ आया हूँ।

Nafrat Shayari

तुम नफरत करो या मोहब्बत,
दोनों हमारे लिए बेहतर हैं,
नफरत करोगे तो हम तुम्हारे दिमाग में,
मोहब्बत करोगे तो दिल में बस जायेंगे।

गुजरे हैं इश्क़ में हम इस मुकाम से
नफरत सी हो गई है मोहब्बत के नाम से
हम वो नहीं जो मोहब्बत में रो कर के
जिंदगी को गुजार दे…
अगर परछाई भी तेरी नजर आ जाए
तो उसे भी ठोकर मार दें।

खुदा सलामत रखना उन्हें,
जो हमसे नफरत करते हैं,
प्यार न सही नफरत ही सही,
कुछ तो है जो वो हमसे करते हैं।

न मोहब्बत संभाली गई, न नफरतें पाली गईं,
अफसोस है उस जिंदगी का, जो तेरे पीछे खाली गई।

इश्क करने से फुरसत नहीं मिली यारो,
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है।

2 line nafrat shayari

खाब बदल जाते हैं बस और कुछ नहीं,
वरना नफरत और मोहब्बत एक ही दिल में होती है।

कुछ जुदा सा है मेरे महबूब का अंदाज,
नजर भी मुझ पर है और नफरत भी मुझसे ही।

वो नफरतें पाले रहे हम प्यार निभाते रहे,
लो ये जिंदगी भी कट गयी खाली हाथ सी।

फिर यूँ हुआ के गैर को दिल से लगा लिया,
अंदर वो नफरतें थी के बाहर के हो गये।

ये मत कहना कि तुम्हारी याद से रिश्ता नहीं रखा,
मैं खुद तन्हा रहा पर दिल को तन्हा नहीं रखा,
तुम्हारी चाहतों के फूल तो महफूज रखे हैं,
तुम्हारी नफरतों की पीड़ को जिंदा नहीं रखा।

एक नफरत ही है जिसे,
दुनिया चंद लम्हों में जान लेती है, वरना..
चाहत का यकीन दिलाने में तो
ज़िन्दगी बीत जाती है।

चला जाऊँगा मैं धुंध के बादल की तरह,
देखते रह जाओगे मुझे पागल की तरह,
जब करते हो मुझसे इतनी नफरत तो क्यों,
सजाते हो आँखो में मुझे काजल की तरह।

Nafrat Shayari

मत रख इतनी नफ़रतें अपने दिल में ए इंसान,
जिस दिल में नफरत होती है उस दिल में रब नहीं बसता।

लेकर के मेरा नाम मुझे कोसता तो है,
नफरत ही सही, पर वह मुझे सोचता तो है।

वो वक़्त गुजर गया जब मुझे तेरी आरज़ू थी,
अब तू खुदा भी बन जाए तो मैं सज़दा न करूँ।

नफरत करने वाले भी गज़ब का प्यार करते हैं मुझसे,
जब भी मिलते हैं कहते हैं कि तुझे छोड़ेंगे नहीं ।

तेरी नफरतों को प्यार की खुशबु बना देता,
मेरे बस में अगर होता तुझे उर्दू सिखा देता।

अदावत तो है अपनी नफरतों के रहनुमाओं से।
जो दिल में दे जगह उससे भला न क्यूँ सुलह कर लें।।

मैं काबिले नफरत हूँ, तो छोड़ दे मुझको।
तू मुझसे यूँ दिखावे की मोहब्बत न किया कर।।

नफरत मत करना मुझसे,
बुरा लगेगा।

nafrat shayari 2 lines

बस एक बार प्यार से कह देना,
अब तेरी जरूरत नहीं।।

ना मेरा प्यार कम हुआ, ना उनकी नफरत।
अपना अपना फर्ज था, दोनों अदा कर गये।।

ये तेरी हल्की सी नफ़रत और थोड़ा सा इश्क़।
यह तो बता ये मज़ा-ए-इश्क़ है या सजा़-ए-इश्क़।।

मोहब्बत में मेरे जज़्बात से तो खूब खेली तू।
मेरे इश्क़ को नफरत के तराजू में तौलकर बेच डाली।।

मुझे नफ़रत सी हो गयी है
अपनी जिन्दगी से।

और तू ज्यादा खुश ना हो,
क्योंकि तू ही मेरी जिन्दगी है।।

Nafrat Shayari in hindi

प्यार में बेवाफाई मिले तो गम न करना,
अपनी आँखे किसी के लिए नम न करना।

वो चाहे लाख नफरते करें तुमसे,
पर तुम अपना प्यार कभी उसके लिए कम न करना।।

प्यार करना सिखा है
नफरतो की कोई जगह नही।

बस तु ही तु है इस दिल मे,
दूसरा कोई और नही।।.

जो मुझसे नफरत करते हैं शौक से करें।
हर शख्स को मैं अपनी मोहब्बत के काबिल नहीं समझती।।

तुम्हारी नफरत पर भी लुटा दी ज़िन्दगी हमने।
सोचो अगर तुम मुहब्बत करते तो हम क्या करते।।

अब हम तो नए नफरत करने वाले तलाशा करते हैं।
क्योंकि पुराने वाले तो अब हमसे मोहब्बत किया करते हैं।।

नफरत हो गयी मुझे।
एक मोहब्बत लफ्ज से।।

नफरत करना तो सीखा ही नहीं साहब।
हमने दर्द को भी चाहा है, अपना समझकार।।

ज़्यादा कुछ नहीं बदला उसके और मेरे बीच में।
पहले नफरत नहीं थी और अब प्यार नहीं है।।

इश्क़ करे या नफरत इजाज़त है उन्हें।
हमे इश्क़ से अपने कोई शिकायत नही।।

कुछ दगाबाज़ी हम भी तेरे ऐतबार से करेंगे।
तुझसे नफ़रत भी जालिम ज़रा प्यार से_करेंगे।।

मुझसे नफरत करनी है तो इरादे मजबूत रखना।
जरा से भी चूके तो महोब्बत हो जायेगी।।

हक़ से दो तो तुम्हारी नफरत भी कबूल हमें।
खैरात में तो हम तुम्हारी मोहब्बत भी न लें।।

कभी उसने भी हमें चाहत का पैगाम लिखा था
सब कुछ उसने अपना हमारे नाम लिखा था।

सुना है आज उनको हमारे जिक्र से भी नफ़रत है।
जिसने कभी अपने दिल पर हमारा नाम लिखा था।।

देख के हमको वो सर झुकाते हैं,
बुला कर महफ़िल में नजरें चुराते हैं।

नफरत हैं तो कह देते हमसे,
गैरों से मिलकर क्यों दिल जलाते हैं।।

Nafrat Status

कुछ लोग तो मुझसे सिर्फ इसलिए भी नफरत करते हैं।
क्योंकि..बहुत सारे लोग मुझसे प्यार करते हैं।।

नफरत तेरी बुलंदियों पे थी,
फिर भी तुझे चाहा था।

ए सनम तूने ही आवाज ना लगाई,
हमने तो तुझे हर लम्हे में पुकारा था।।

नफ़रत शायरी in Urdu

नफरत को हम प्यार देते हैं प्यार पे खुशियां वार देते हैं।
बहुत सोच समझ कर हमसे कोई वादा करना ऐ दोस्त।
हम पर वादे पर जिंदगी गुजार देते हैं।।

काश कि दिल पर अपना अख्तियार होता।
ना नफरत होती ना प्यार होता।।

नफरत हमने सीखी नही कभी दिल से।
हम तो बस मौहब्बत ही रखते है हर किसी से।।

प्यार, एहसान, नफरत, दुश्मनी जो चाहो वो मुझसे करलो।
आप की कसम वही दुगुना मिलेगा।

तेरी जुदाई में और तो कुछ ना हो सका।
बस इश्क से नफरत हो गयी ।।

देख कर उसको तेरा यूँ पलट जाना।
नफरत बता रही है तूने गज़ब की मोहब्बत थी।।

तूने ज़िन्दगी को मेरी इस क़दर कुछ यूँ मोड़ा हैं।
कि अब मोहब्बत भी नफरत भी, दोनों थोड़ा थोड़ा हैं।।

मत रख इतनी नफ़रतें अपने दिल में ए इंसान।
जिस दिल में नफरत होती है उस दिल में रब नहीं बसता।।

उनकी नफरत बता रही है।
हमारी मोहब्बत गज़ब की थी।।

गुज़रे है आज मोहब्बत के उस मुकाम से।
नफरत सी हो गयी है मोहब्बत के नाम से।।

सुनो न.बेहद गुस्सा करते हो आजकल।
नफरत करने लगे हो या ईश्क ज्यादा हो गया।।

नफ़रत करना है तो इस क़दर करना।
के हम दुनिया से चले जाए पर तेरी आँख में आंशु ना आए।।

एक नफरत ही नहीं दुनिया में दर्द का सबब फ़राज़।
मोहब्बत भी सकूँ वालों को बड़ी तकलीफ़ देती है।।

दुनिया को नफरत का यकीन नहीं दिलाना पङता।
मगर लोग मोहब्बत का सबूत ज़रूर मॉगते हैं।।

मेरे पास वक्त कहाँ है, नफ़रत करने का उन लोगो से,
जो मुझसे नफऱत किया करते है।

क्योंकि मैं व्यस्त हूँ उन लोगो मे
जो मुझसे प्यार किया करते है।।

पहले इश्क़, फिर दर्द, फिर बेहद नफरत।
बड़ी तरकीब से तबाह किया तुमने मुझको।।

हमारी अदा पे तो नफरत करने वाले भी फ़िदा हैं।
तो फिर सोच प्यार करने वालो का किया हाल होता होगा।।

नफरत करने की दवा बता दो यारो।
मेरी मौत की वजह मेरा इश्क ही होगा।।

नफरतें लाख मिलीं पर मोहब्बत न मिली,
ज़िन्दगी बीत गयी मगर राहत न मिली।

तेरी महफ़िल में हर एक को हँसता देखा,
एक मैं था जिसे हँसने की इजाजत न मिली।।

Nafrat Shayari in Urdu

सनम तेरी नफरत में वो दम नहीं
जो मेरी चाहत को मिटा दे।

ये मोहब्बत है कोई खेल नहीं
जो आज हंस के खेला और कल रो कर भुला दे।।

नाराजगी, डर, नफरत या फिर प्यार।
कुछ तो है जो तुम मुझ से दूर-दूर रहते हो।।

में अकेला वारिस हूँ तेरी अनगिनत नफरतों का,
ऐ मेरी जान ,तू सारे शहर में प्यार बाटती फिर रही है।।

प्यार करता हु इसलिए फ़िक्र करता हूँ।
नफरत करुगा तो जिक्र भी नही करुगा।।

कर लूं एक बार तेरा दीदार जी भर के, मेरे दोस्त।
मेरी मोहब्बत और तेरी नफरत के बीच का फासला खत्म हो जाएगा।।

नफरत है मुझे आज जालिम तेरे उस रुखसार से।
जिसे देख कर मैं अक्सर दीवाना हुआ करता था।।

ये मेरे दिल की जिद है की प्यार करुँ तो सिर्फ तुमसे करूँ।
वरना तुम्हारी जो फितरत है वो नफरत के भी काबिल नहीं।।

मोहब्बत करने से फुरसत नहीं मिली यारो।
वरना हम करके बताते नफरत किसको कहते है।।

वो इनकार करते हैं इक़रार के लिए,
नफऱत भी करते हैं तो प्यार करने के लिए।

उल्टी चाल चलते हैं ये इश्क़ करने वाले,
आंखे बंद करते हैं दीदार के लिए।।

अजीब सी आदत और गज़ब की फितरत है मेरी।
मोहब्बत हो या नफरत बहुत शिद्दत से करता हूँ।।

मुझे नफरत है इस मोहब्बत के नाम से,
क्यूँ बिना कसूर तडपा तडपाकर मारा है मुझे।

नफरत है इस रविवार से मुझे,
ये दिलाती है और भी तेरी याद खाली वक्त में।।