Mulaqat Shayari in Hindi | मुलाकात शायरी

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Mulaqat Shayari for Her

सुबह को जो नींद से जागे तब रात का ख्याब याद आ गया
क्या खूब रही थी सपनो में मुलाक़ात आपसे.

खुशिया किसी की मोहताज नहीं होती,
दोस्ती यूँही इत्तेफ़ाक़ से नहीं होती
कुछ तो मायने होंगे इस पल के,
वरना यूँही आपसे मुलाक़ात नहीं होती.

अगर हमारी आपसे मुलाक़ात हो गई होती
आपकी आपके दिल से अदावत हो गई होती.

Mulaqat Shayari in Hindi on death
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Short Mulaqat Shayari in English Language
Har Mulaaqaat Kaa Anjaam Judaai Kyoon Hai Ab to Har Vaqt Yahi Baat Sataati Hai Hamen.

Kabhi gamo se apki mulakat na ho,
udas baithe raho aisi koi baat na ho,
shikayat ho to hame maaf kar dena,
fursat se baithe ho to hame yaad karlena.

Musafir hai ham bhi musafir ho tum bhī kisi moḌ par phir mulāqāt hogi.

जाने वाले से मुलाक़ात न होने पाई
दिल की दिल में ही रही बात न होने पाई
शकील बदायूंनी

कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई….
‘नदीम’ जो भी मुलाक़ात थी अधूरी थी
कि एक चेहरे के पीछे हज़ार चेहरे थे
अहमद नदीम क़ासमी

कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई
शकील बदायूंनी

Two Line Mulaqat Shayari in Hindi Fonts
मेरी नजरो को आज भी तलाश हे तेरी बिन तेरे ख़ुशी भी उदास हे मेरी खुदा से मांगा हे तो सिर्फ इतना मरने से पहले आपसे मुलाक़ात हो मेरी.

Mulaqat Shayari in Hindi for her

2 Line Sad Mulaqat Shayari for Girlfriend
वो बात अधूरी रह गई
मेरी मुलाकात अधूरी रह गई
कहना तो उससे बहुत कुछ था
पर वो रात अधूरी रह गई.

एक मुद्दत के बाद तुझे जाना है
तू चांद बड़ा अफसाना है
यूं तो और भी है मेरी ज़िन्दगी में मगर
ना जाने दिल क्यूं तेरा ही दीवाना है.

दिले तस्वीरे है यार जबकि गर्दन झुका ली, और मुलाक़ात कर ली वो थे न मुझसे दुर,न मै उनसे दूर था आता न था नजर, तो नजर का कसूर था.

ख़्वाहिश यह की उनसे नायाब मुलाक़ात एक बार तो हो जाये ज़िन्दगी भर यादों के सहारे गुज़ारने से बेहतर है रुबरू हो जायें.

मिल कर भी उनसे हसरत-ए-मुलाक़ात रह गई,
बादल तो घर आ गए पर बस बरसात रह गई.

करनी है मुझे खुदा से एक फरियाद बाकी
कहनी है उनसे एक बात बाकी
मौत भी आ जाये तो कह दूंगी जरा रुक जा
अभी मेरे दोस्तो से है. एक मुलाक़ात बाकी

दो बातें कर लेना उनसे
ग़र चार न हो सके,
ख़्याल ही कर लेना
ग़र मुलाक़ात न हो सके.

जिंदा रहने के लिए तेरी क़सम एक मुलाक़ात ज़रूरी है सनम

Mulaqat Shayari in Hindi on heart

‘मुलाक़ात’ सिर्फ एक सुखद अनुभूति ही नहीं है, कई तरह के दर्द में मरहम भी है। इश्क़ में जुदाई के दिनों में ‘मुलाक़ात’ उम्मीद भी है, तो रिश्तों के संतुलन में एक ज़रूरत भी। पेश है ‘मुलाकात’ पर चुनिंदा शायरों के अल्फ़ाज़

कुछ लोग ज़रा देर में खुलते हैं किसी से
पहली ही मुलाक़ात से मायूस न होना
वाक़िफ़ राय बरेलवी

ये मुलाक़ात आख़िरी तो नहीं
हम जुदाई के डर से पूछते हैं
राहत इंदौरी

मुलाक़ात हुआ करती है
जब ख़यालों में दबे पांव वो आ जाता है
वो मुलाक़ात मुलाक़ात हुआ करती है
मीना नक़वी

वो आदमी था कितना भला कितना पुरख़ुलूस
उससे भी आज लीजे मुलाक़ात हो गई
-निदा फ़ाज़ली

मौत मेरी इक शर्त मान कर आए
पहले जीते-जी मुझ से मुलाक़ात करे
किश्वर नाहीद

यूं सर-ए-राह मुलाक़ात….
यूं सर-ए-राह मुलाक़ात हुई है अक्सर
उसने देखा भी नहीं हमने पुकारा भी नहीं
इक़बाल अज़ीम

आज तो मिल के भी जैसे न मिले हों तुझसे
चौंक उठते थे कभी तेरी मुलाक़ात से हम
जाँ निसार अख़्तर

‘नज़ीर’ आओ रो लें गले मिल के हम तुम
ख़ुदा जाने फिर कब मुलाक़ात होगी
नज़ीर बनारसी

एहसान नहीं ख़्वाब में….
एहसान नहीं ख़्वाब में आए जो मेरे पास
चोरी की मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं है
मुनीर शिकोहाबादी

रात के माथे पे सूरज ने सहर लिख दी है
आसरा उससे मुलाक़ात का भी टूट गया
मुजाहिद फ़राज़

हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है
मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे
फ़ैज़ अनवर

इश्क़ की ख़ैर हो अल्लाह….
इश्क़ की ख़ैर हो अल्लाह कि ना-शुक्रों ने
इक अधूरी सी मुलाक़ात को काफ़ी लिक्खा
शकील जमाली

तेरी मुलाक़ात की धनक से दहकती रातें
उजाड़ आँखों के प्यास पाताल की तहों में
मोहसिन नक़वी

इस मुलाक़ात ने इक रौशनी फैलाई है
लोग बढ़ते हैं तो तहज़ीब बढ़ा करती है

कभी हुई न मुलाक़ात….
कभी हुई न मुलाक़ात शहर से मेरी
मैं जब भी सो के उठा शहर सोने वाला था
फ़रहत एहसास

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई था अगर
फिर ये हंगामा मुलाक़ात से पहले क्या था
एजाज़ गुल

गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है ‘अमीर’
क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना
अमीर मीनाई