Essay on MSME Schemes in hindi | 2020 में MSME रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया क्या है ?

एमएसएमई 2020 में क्या है msme full form in hindi

MSME का फुलफॉर्म – Micro, Small and Medium Enterprises – माइक्रो, स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइज होता है। इसे हिन्दी में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग कहते हैं। एमएसएमई को हम बिल्कुल आसान आसान भाषा में छोटे एवं मध्यम उद्योग/कारोबार कहते हैं।

MSME के प्रकार

मैनुफैक्चरिंग उद्योग (Manufacturing Enterprise)- मैनुफैक्चरिंग उद्योग में नई चीजों को बनाने यानी निर्माण करने का कार्य किया जाता है।
सर्विस सेक्टर (Service Enterprise)- सर्विस सेक्टर में मुख्य रुप से सेवा प्रदान करने का कार्य किया जाता है।। इस सेक्टर में लोगों को और विभिन्न संस्थाओं को सर्विस देने का काम होता है

msme kya hai

मैनुफैक्चरिंग अंग्रेजी भाषा का शब्द है। इसका हिन्दी में अर्थ- विनिनिर्माण होता है। विनिनिर्माण मतलब किसी चीज का निर्माण करना। । एमएसएमई के मैनुफैक्चरिंग उद्योग के अंतर्गत विभिन्न तरह के उपयोगी प्रोडक्ट्स का निर्माण किया जाता है।

सर्विस शब्द का हिन्दी में अर्थ- सेवा होता है। मतलब जब कोई व्यक्ति किसी का काम करने के बदले कोई रकम फीस के तौर पर लेता है तो उसे सर्विस बिजनेस कहते हैं। एमएसएमई उद्योग के तहत सर्विस उद्योग की बात करें तो इसमें ट्रेवेल एजेंसी चलाने से लेकर रेस्टोरेंट चलाने, कर्मचारी उपलब्ध कराने तक का बिजनेस सर्विस सेक्टर के रुप में जाना जाता है।

सरकार द्वारा चलाई जा रही सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए उद्योग का एमएसएमई रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य होता है। एमएसएमई के प्रकार समझने के बाद आइए अब आकार यानी साइज के हिसाब से एमएसएमई को समझते है।

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MSME के तीन प्रमुख प्रकार

इसके तहत सरकार छोटे उद्योगों को अनेक प्रकार से फ़ायदे पहुंचाने का प्रयास करती है। इस स्कीम के तहत छोटे उद्योगों को प्रायः 3 भागों में बांटा गया है- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग।

MSME में रजिस्ट्रेशन के माध्यम से छोटी छोटी कंपनियां सरकार की योजनाओं का लाभ उठा सकती हैं। वहीं, लघु उद्योग से सम्बंधित कई सरकारी स्कीम्स ऐसी हैं, जिनका लाभ आप बिना MSME का रजिस्ट्रेशन के नहीं ले सकते हैं।

इसलिये यदि आप उद्यमी हैं तो आपकी कम्पनी या फर्म एमएसएमई में पंजीकृत अवश्य होनी चाहिए, ताकि आप भी इसका लाभ उठा सकिये।

MSME के अंतर्गत विभिन्न कंपनियों या फर्मों आदि को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। पहला माइक्रो, दूसरा स्मॉल और तीसरा मीडियम, जिनके लिए अलग अलग परिभाषा है। हाल ही में मोदी सरकार ने इन परिभाषाओं में कुछ आमूलचूल बदलाव किये हैं।

New definition of MSME

MSME की नई परिभाषा इस प्रकार है- पहला, सूक्ष्म उद्योग के अंतर्गत वो कंपनी आती हैं, जिनका निवेश Rs 1 करोड़ से कम हैं और टर्नओवर Rs 5 करोड़ से अधिक नहीं है।

दूसरा, लघु उद्योग के अंतर्गत वो कंपनी आती हैं जिनका निवेश Rs 10 करोड़ से कम और टर्नओवर Rs 50 करोड़ से कम है।

तीसरा, मध्यम उद्योग के अंतर्गत वो कंपनी आती हैं जिनका निवेश Rs 20 करोड़ से कम और टर्नओवर Rs 100 करोड़ से कम है।

MSME को मिलने वाला लाभ

बैंक से बॉन्ड-फ्री लोन की सुविधा
लघु उद्योगों के लिए सरकार द्वारा क्रेडिट गारंटी फंड स्कीम (CGS) शुरु किया गया है। इस योजना में नए और पुराने उद्योगों को ही जल्दी MSME बिजनेस लोन मिलता है।

लाइसेंस रजिस्ट्रेशन पर छूट की सुविधा
MSME उद्योगों लाइसेंस रजिस्ट्रेशन कराने पर 50 प्रतिशत की छूट प्रदान की जाती है।

ओवरड्रफ्ट पर ब्याज दर में राहत मिलना

बैंक द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि MSME के तहत पंजीकृत उद्यमों को OD (ओवरड्राफ्ट) में ब्याज पर कम से कम 1% की राहत मिले।

MSME कम्पनियों को बैंकों से भी लाभ मिलता है। । उन्हें कम ब्याज दर पर भी लोन आदि भी उपलब्ध कराया जाता है। MSME में रजिस्टर्ड कंपनी के लिए ब्याज की दर सामान्य व्यापार की ब्याज दर की तुलना में लगभग 1 से 1.5 प्रतिशत तक कम होती है।

MSME उद्यमियों को राज्य सरकार भी छूट प्रदान करती है। विभिन्न राज्य सरकारें ऐसी कंपनियों को औद्योगिक अनुदान, बिजली बिल अनुदान और कर सब्सिडी भी उपलब्ध कराती हैं। MSME के अंतर्गत आने वाली कंपनियों को विशेष रूप से बिक्री कर में भी छूट दी जाती है, जिसका लाभ उठाकर उद्यमी निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

MSME को सरकार से कर लाभ भी मिलता है। कोई भी रजिस्टर्ड MSME कंपनी एक्साईज छूट योजना का लाभ ले सकती हैं।

शुरूआती कुछ वर्षों में प्रत्यक्ष करों से भी छूट मिलती है। सरकार MSME व्यवसाय को स्थापित करने में मदद करती है और कई तरह की सब्सिडी भी प्रदान करती है, इसका फ़ायदा उठाकर कई MSME कम्पनी या फर्म काफी आगे बढ़ रही हैं।

MSME को केंद्र और राज्य की सरकार से अप्रूवल भी प्राप्त होता है। MSME रजिस्टर्ड कंपनियों को सरकारी लाईसेंस तथा प्रमाणीकरण शीघ्रतापूर्वक और आसानी से मिल जाते हैं।

सरकार ने MSME कई तरह की सरकारी निविदाएं या टेंडर भी खोले हैं, इसका लाभ उठाकर कई MSME कंपनीज काफी आगे बढ़ चुकी हैं।

एमएसएमई MSME के बारें में महत्वपूर्ण तथ्य

MSME को भारतीय अर्थव्यवस्था का रीढ़ कहा जाता है।
MSME देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 29 फीसदी का योगदान अकेला है।
यह देश में रोजगार सृजन का बहुत बड़ा माध्यम है।
एमएसएमई के करीब – करीब 12 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष – अ-प्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिला हुआ है।
MSME के विकास के लिए पीएम मुद्रा योजना और उद्योग आधार योजना चलाई जा रही हैं।

MSME में कौन करवा सकता है रजिस्ट्रेशन ? msme registration in hindi

MSME के तहत प्रोप्राइटरशिप फर्म, सरकारी और प्राइवेट कंपनियां, एलएलपी, हिन्दू अविभाजित परिवार, पार्टनरशिप फर्म, वन पर्सन कंपनी, को-ऑपरेटिव सोसाइटीज और एसोसिएशन ऑफ पर्सन संस्थाएं अपना रजिस्ट्रेशन करवा सकती हैं- । सरकार के दिशा निर्देश में कार्य करने वाली सभी कंपनियां इसमें रजिस्ट्रेशन करा सकती हैं।

MSME 2018-19 में मंत्रालय द्वारा प्रकाशित वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 % MSME विनिर्माण गतिविधियों में लगे हुए पाए गए, जबकि 36 % MSME व्यापार में और 33 % अन्य सेवाओं में थे।

देश में MSME की अनुमानित संख्या 633.88 लाख में से, 324.88 लाख MSMEs यानी 51.25 % ग्रामीण क्षेत्र में और 309 लाख MSMEs यानी 48.75 % शहरी क्षेत्रों में थे।

MSME रजिस्ट्रेशन के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज

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आप MSME रजिस्ट्रेशन ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीके से कर सकते हैं। क्योंकि रजिस्ट्रेशन करने में कोई शुल्क नहीं लगता है। MSME में रजिस्ट्रेशन करने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज़ की जरुरत होती है।

उद्योग को शुरू करने का लीगल सर्टिफिकेट, व्यवसाय का पता प्रमाण पत्र, बिक्री बिल और खरीद बिल की प्रतियां, औद्योगिक लाइसेन्स की कॉपी और मशीनों की खरीद का बिल आदि विभिन्न वक्तों पर आपसे मांगे जाते हैं।

MSME रजिस्ट्रेशन करने के लिए सबसे पहले आपको ऑफिसियल वेबसाईट में जाना होगा, जहां पर आप ऑनलाइन बिजनेस के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यहां पर रजिस्ट्रेशन के लिए आपको निम्नलिखित चीजें दर्ज करनी पड़ेंगी:- आवेदन करने वाले का नाम, लिंग, ईमेल आईडी और मोबाइल नंबर, पैन नंबर, आधार नंबर, उद्योग का नाम, पता और पैन नंबर, उद्योग में काम कर रहे कर्मचारियों की संख्या, नाम और कब से काम कर रहे हैं, बैंक अकाउंट नंबर और आईएफएससी कोड, उद्योग का प्रमुख कार्य, 2 अंकों का एनआईसी कोड और मशीन खरीद का ब्योरा।

इस प्रकार पूरा फॉर्म भरने के बाद आपको मांगे गए सभी डाक्यूमेंट्स अटैच करने होंगे, जिनका जिक्र हमने ऊपर में किया है। इसके बाद कुछ दिनों के अंतराल में आपका वेरिफिकेशन होगा।

वेरिफिकेशन के बाद आपको एप्लिकेशन नंबर के जरिये MSME प्रमाणपत्र मिल जाएगा, जिसे आप वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। इसे हर वक्त सुरक्षित रखना चाहिए।

ZipLoan से मिलता है MSME को 3 दिन में बिजनेस लोन


‘ZipLoan’ NBFC यानी नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी है। ‘कंपनी द्वारा सूक्ष्म, लघु उद्योग के लिए लोन दिया जाता है। कारोबार बढ़ाने के लिए बेहद कम शर्तों पर 1 से 5 लाख तक का बिजनेस लोन सिर्फ 3 दिन में प्रदान किया जाता है।

ZipLoan से बिजनेस लोन पाने की शर्ते

  • बिजनेस कम से कम 2 साल पुराना हो।
  • बिजनेस का सालाना टर्नओवर कम से कम 5 लाख से अधिक का होना चाहिए।
  • पिछले साल भरी गई ITR डेढ़ लाख रुपये की हो या इससे अधिक की होनी चाहिए।
  • घर या बिजनेस की जगह में से कोई एक खुद के नाम पर होना चाहिए।

ZipLoan से बिजनेस लोन लेने के फायदे

बिजनेस लोन की रकम अप्लाई करने के सिर्फ 3 दिन के भीतर मिल जाती है।
लोन घर बैठे ऑनलाइन अप्लाई किया जा सकता है।
बिजनेस लोन की रकम 6 महीने बाद प्री पेमेंट फ्री है।
लोन की रकम 12 से लेकर 24 महीने के बीच वापस कर सकते है।

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आवश्यक सुचना : हम (www.motivational.page ) / यह वेबसाइट किसी सरकारी संगठन या किसी सरकारी संस्था से संबंधित नहीं हैं। वेबसाइट पर कोई भी जानकारी सिर्फ सूचना के उद्देश्य के लिए है। किसी भी सरकारी योजनाओं या नीतियों से संबंधित अधिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित सरकारी वेबसाइट देखें।

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