Motivational Poetry in hindi – inspirational poems in hindi

Motivational Poetry in hindi

गिरना भी अच्छा है – अमिताभ बच्चन

गिरना भी अच्छा है
“गिरना भी अच्छा है,
औकात का पता चलता है…
बढ़ते हैं जब हाथ उठाने को…
अपनों का पता चलता है!

जिन्हे गुस्सा आता है,
वो लोग सच्चे होते हैं,
मैंने झूठों को अक्सर
मुस्कुराते हुए देखा है…

सीख रहा हूँ मैं भी,
मनुष्यों को पढ़ने का हुनर,
सुना है चेहरे पे…
किताबो से ज्यादा लिखा होता है…!”

—अमिताभ बच्चन – Amitabh Bachchan

गिरना भी अच्छा है - अमिताभ बच्चन,girna bhi accha hai amitabh bacchan
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Sohan LAL Dwivedi Harivansh Rai Bacchan

सोहन लाल द्विवेदी हरिवंश राय बच्चन के नाम से मशहूर हो गयी

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

असफलता एक चुनौती है, स्वीकार करो
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम
संघर्ष का मैदान छोड़ मत भागो तुम
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती

लहरों से डर कर नौका lahro ki darr se nauka

inspirational poems in hindi | Rabindranath Tagore Chal Tu Akela

चल तू अकेला! – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

चल तू अकेला!

तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो तू चल अकेला,

चल अकेला, चल अकेला, चल तू अकेला!

तेरा आह्वान सुन कोई ना आए, तो चल तू अकेला,

जब सबके मुंह पे पाश..

ओरे ओरे ओ अभागी! सबके मुंह पे पाश,

हर कोई मुंह मोड़के बैठे, हर कोई डर जाय!

तब भी तू दिल खोलके, अरे! जोश में आकर,

मनका गाना गूंज तू अकेला!

जब हर कोई वापस जाय..

ओरे ओरे ओ अभागी! हर कोई बापस जाय..

कानन-कूचकी बेला पर सब कोने में छिप जाय…

– रवीन्द्रनाथ ठाकुर (Rabindranath Tagore)

inspirational poems in hindi Veer Tum Badhe chalo

वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो! द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी

वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

प्रात हो कि रात हो संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो चन्द्र से बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

एक ध्वज लिये हुए एक प्रण किये हुए
मातृ भूमि के लिये पितृ भूमि के लिये
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

अन्न भूमि में भरा वारि भूमि में भरा
यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!

veer tum badhe chalo

Chalna Hamara Kaam Hai inspirational poems in hindi

गति प्रबल पैरों में भरी

फिर क्यों रहूं दर दर खड़ा

जब आज मेरे सामने

है रास्ता इतना पड़ा

जब तक मंजिल न पा सकूं

तब तक मुझे न विराम है

चलना हमारा काम है.

कुछ कह लिया, कुछ सुन लिया

कुछ बोझ अपना बंट गया

अच्छा हुआ, तुम मिल गई

कुछ रास्ता ही कट गया

क्या राह में परिचय कहूं

राही हमारा नाम है

चलना हमारा काम है.

जीवन अपूर्ण लिए हुए

पाता कभी खोता कभी

आशा निराशा से घिरा

हँसता कभी रोता कभी

गति-मति न हो अवरूद्ध

इसका ध्यान आठो याम है

चलना हमारा काम है.

इस विषद विश्व-प्रहार में

किसको नहीं बहना पड़ा

सुख-दुःख हमारी ही तरह

किसको नहीं सहना पड़ा

फिर व्यर्थ क्यों कहता फिरूं

मुझ पर विधाता वाम है

चलना हमारा काम है.

मैं पूर्णता की खोज में

दर-दर भटकता ही रहा

प्रत्येक पग पर कुछ न कुछ

रोड़ा अटकता ही रहा

निराशा क्यों मुझे?

जीवन इसी का नाम है

चलना हमारा काम है.

साथ में चलते रहे

कुछ बीच ही से फिर गए

गति न जीवन की रुकी

जो गिर गए सो गिर गए

रहे हर दम

उसी की सफ़लता अभिराम है

चलना हमारा काम है.

फ़कत यह जानता

जो मिट गया वह जी गया

मूंदकर पलकें सहज

दो घूंट हँसकर पी गया

सुधा-मिक्ष्रित गरल

वह साकिया का जाम है

चलना हमारा काम है.

कवि –शिवमंगल सिंह  ‘सुमन’ | Shiv Mangal Singh ‘Suman’

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