Moral story in hindi for class 5 – रमेश के आलस

एक आदमी था उसका नाम था रमेश। रमेश गाँव के गरीब लोगों में आता था । रमेश ने 2-3 भैंस रखी हुई थी जिनका दूध बेचकर ही रमेश जीवन यापन करता था। सुरेश ने धीरे-धीरे अपनी कमाई से अपनी दूध की डेरी में भैंसों की संख्या बढ़ानी शुरू कर दी जिससे उसकी कमाई भी बढ़नी शुरू हो गयी। रमेश की गरीबी अब खत्म हो चुकी थी, रमेश ने ओर अधिक पैसे कमाकर खेती करने के लिए जमीन भी खरीद ली। देखते ही देखते रमेश ने अपना व्यापार बढ़ा लिया और अब उसने काम करने के लिए नौकर रख लिए।

Advertisements

रमेश को अब आराम की आदत हो गयी थी। उसका सारा व्यापार अब उसके पास काम करने वाले लोगों के हाथ में था। धीरे-धीरे रमेश ने आलस के कारण अपने व्यापार का ब्यौरा लेना भी छोड़ दिया और यह भी देखना छोड़ दिया के उसके पास काम करने वाले लोग कैसे उसके व्यापार को संभाल रहे हैं। महीने के बाद उसके पास नौकर उसे जो भी लाकर देते वह उसमे ही खुश हो जाता। रमेश अब गरीबी का शिकार हो गया था। वह सुबह आराम से उठता और खाना खा कर फिर पूरा दिन आराम करता। देखते ही देखते उसका व्यापार ठंडा पड़ने लग गया। रमेश को अब पहले के बजाए कम पैसे मिलने लगे।

रमेश की गरीबी को देखकर उसके बूढ़े पिता ने उसको काम की देख रेख करने के लिए समझाया लेकिन यह बात उसके नहीं मानी । फिर एक दिन गाँव में एक साधू आया, सुरेश ने सोचा इस बाबा से कोई उपाए पूछता हूँ अपना व्यापार ओर बढ़ाने के लिए। बाबा रमेश की बातों से समझ गया की सुरेश अब अपने आलस्य के कारण ही यह सब पूछ रहा है। उस बाबा ने रमेश से कहा, “जहाँ भी तुम काम करते हो वहाँ सफ़ेद रंग का हंस आता है जिसे देखने से तुम्हारा व्यापार बढ़ जाएगा।” रमेश ने बाबा की बात मान ली और सोचा मैं कल से ही अपने खेतों और डेरी में उस हंस को देखने जाऊंगा।

अगले दिन सुबह जल्दी उठकर जब सुरेश अपनी डेरी में गया तो उसने देखा वहाँ भैंसों की देखभाल करने वाला आदमी आराम से सो रहा है और भैंसों की खल में चारा भी नहीं है। रमेश ने उसे उठाया और धमकाकर उसे भैंसों को चारा डालने को कहा। फिर वह अपने खेतों की तरफ गया जहाँ अभी तक कोई भी मजदूर काम करने नहीं आया था। वह वहाँ पर बैठकर उस सफ़ेद हंस का इन्तजार करने लगा और दोपहर होने पर भी उसे कोई हंस नजर नहीं आया और उसे पता चला के खेतों में काम करने वाले मजदूर भी ठीक से खेती नहीं कर रहे हैं और खेतों में कुछ ही जगह पर फसल उगा रखी है। मजदूरों के आने पर रमेश ने उनकी भी क्लास ली।

अब रमेश रोज सुबह जल्दी उठकर उस सफ़ेद हंस की तलाश में अपने खेतों और डेरी में जाने लगा और मालिक को रोज वहाँ देखकर रमेश के आदमी ठीक से काम करने लगे और धीरे-धीरे उसका व्यापार फिर से बढ़ने लगा। लेकिन रमेश को कभी भी वह सफ़ेद हंस दिखाई नहीं दिया। 2-3 महीने बीत गए, वह बाबा एक दिन रमेश को अपने गाँव में दिखाई दिया और रमेश भागकर उसके पास गया और पूछा, “बाबा, मैं रोज सुबह उस सफ़ेद हंस की तलाश में जाता हूँ लेकिन वह कभी मुझे दिखाई भी नहीं दिया पर फिर भी मेरा व्यापार पहले से अच्छा हो गया है। बाबा मुस्कुराने लगे और रमेश को सारी बात समझाई कि सफ़ेद हंस तो कुछ नहीं था लेकिन बाबा ने यह सब सिर्फ उसकी आलस और दरद्रिता को दूर करने के लिए कहा था।

शिक्षा(Moral of the story):

दोस्तों, हमें कभी भी पूरी तरह से दूसरों के ऊपर निर्भर नहीं रहना चाहिए और अपने आलस को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। हमारा आलस्य ही हमारी दरिद्रता का कारण बनता है।Moral Story In Hindi For Class 5 | रमेश के आलसदोस्तों, हमें कभी भी पूरी तरह से दूसरों के ऊपर निर्भर नहीं रहना चाहिए और अपने आलस को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। हमारा आलस्य ही हमारी दरिद्रता का कारण बनता है।