कंजूस आदमी

एक बुड्ढे कंजूस आदमी के घर में एक बगीचा था। वह आदमी अपने सोने के सिक्को को पथ्थरो के निचे बगीचे में छुपा के रखता था। रोज रात में सोने से पहले उसको जाकर गिनता था। वह यह काम रोज करता था लेकिन एक भी सिक्के को कभी किसी चीज़ पे खर्च नहीं करता था। एक चोर ने उसकी यह आदत को देख लिया था। ३-४ दिन लगातार उसका सिक्का गिनने की क्रिया और समय को देख कर वह चोरी करने का समय समझ चूका था। एक रात बुड्ढे के जाने के बाद चोर ने उस जगह जाकर और सारे सिक्को को निकाल कर वह से भाग गया। अगले दिन जब बुड्ढे ने फिर से जाकर सिक्को को गिनना चाहा तो सिक्के वह से गायब थे। वह रोने लगा इतने में ही उसका पडोसी आ गया और उसके रोने का कारण पूछा। बुड्ढे ने पूरी कहानी बताई। पडोसी ने उसको पूछा “तुमने घर के अंदर सिक्को को क्यों नहीं रखा ताकि जब भी कुछ खरीदने की जरूरत पड़ती तो तुरंत निकाल पाते ?”

बुड्ढा आदमी बोला “मैंने कभी उन सिक्को को खर्च नहीं किया था और ना ही करने वाला था। ” इतना सुनते ही पडोसी को गुस्सा आया और उसने बुड्ढे के सामने कर बोला “इसको जमीं के अंदर गाड़ दो क्यूंकि यह भी उन सिक्को के जैसा ही बेकार है। “

कहानी से सीख : आपके पास रखी चीज़ो का उतना ही महत्व है जितना उनकी उपयोगिता है।

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