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maharana pratap history in hindi language – महाराणा प्रताप जयंती 2020

राजस्थान के वीर ,साहस के प्रतीक महाराणा प्रताप की आज (9 मई 2020) को 480वीं जयंती है. महान योद्धा महाराणा प्रताप ने मुगलों से कई लड़ाइयां लड़ी, लेकिन अकबर के साथ हल्दी घाटी का युद्ध उनका सबसे ऐतिहासिक रहा है. इतिहास की कई लड़ाइयां जीतने में अद्भुत, बहादुर घोड़े चेतक की अहम भूमिका रही है. प्रताप की हर शौर्य गाथा में उनके चेतक घोड़े का भी जिक्र जरूर होता है.

महाराणा प्रताप का जन्म महाराजा उदयसिंह के घर 9 मई, 1540 में हुआ था.. उनका जन्म वर्तमान राजस्थान के कुम्भलगढ़ में माता राणी जयवंत कँवर के घर हुआ था।महाराणा प्रताप की माता का नाम जयवंता बाई था, जो पाली के सोनगरा अखैराज की बेटी थी। महाराणा प्रताप को बचपन में कीका के नाम से पुकारा जाता था।

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महाराणा प्रताप का प्रथम राज्याभिषेक मेंं 28 फरवरी, 1572 में गोगुन्दा में होता हैै, लेकिन विधि विधानस्वरूप राणा प्रताप का द्वितीय राज्याभिषेक 1572 ई. में ही कुुंभलगढ़़ दुुर्ग में हुआ, दूूूसरे राज्याभिषेक में जोधपुर का राठौड़ शासक राव चन्द्रसेेन भी उपस्थित थे |

प्रताप और अकबर के बीच युद्ध भारतीय इतिहास में दो बड़े शासकों के बीच युद्ध की गाथा है. 1576 में हुए इस युद्ध में प्रताप ने 20 हजार सैनिकों के साथ मुगल के 80 हजार सैनिकों का सामना किया था.

युद्ध में प्रताप के चेतक ने भी अपनी वीरता और बुद्धिमत्ता का परिचय दिया था.

. युद्ध में चेतक ने सेनापति मानसिंह के हाथी के सिर पर पांव रख दिया था, जिसके बाद महाराणा प्रताप ने दुश्मन पर प्रहार किया. हालांकि उसी समय चेतक घायल हो गया था, लेकिन फिर भी दुश्मनों के बीच से महाराणा प्रताप को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया था.

इस युद्ध में मुगल सेना और जयपुर के राजा मानसिंह की जीत हुई थी. भले ही ज्यादातर राजपूत राजा मुगलों के अधीन हो गए थे लेकिन महाराणा प्रताप और उनके सहयोगी मुगलों के हाथ नहीं आए. प्रताप ने मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और पूरी जिंदगी मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़ते रहे. महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को कईं बार युद्ध में भी हराया।

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