Irshad kamil Shayari | कामिल की शायरी

Irshad kamil Best lines

ये उमर वक़्त रास्ता गुज़रता रहा
सफ़र का ही था मैं सफ़र का रहा…

हवा के कागज़ पर पेड़
पत्तियों की कलम से
तुम्हारा नाम लिख रहा है

-इरशाद कामिल

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सात रंगों से
दोस्ताना हुआ तो यूँ हुआ
मैंने बोला ज़िन्दगी
आजा खेलेंगे हम ख्वाबों का
निगाहों से जुआ

सवेरे को जीत जाऊँगी
भीगे भीगे उजालों को
पीती जाऊँगी
मैंने खुद को आज कह दिया
है हाँ

मेंडा तो है रब खो गया
मेंडा तो है सब खो गया
तेरियाँ मोहब्बताँ ने लुट्टी-पुट्टी साईयाँ
तेरियाँ मोहब्बता ने सच्चेयाँ सताईयाँ
खाली हाथ मोड़ी ना तू, खाली हाथ आईयाँ।

तू है मुझमें समाया
कहाँ ले के मुझे आया
मैं हूँ तुझमें समाया
तेरे पीछे चला आया
तेरा ही मैं एक साया…

मैं तो जग को ना भाया,
तूने गले से लगाया.

चाहिए किसी साये में जगह चाहा बहोत बार है
ना कहीं कभी मेरा दिल लगा कैसा समझदार है

मैं उसका हो भी चुका
और उसे ख़बर भी नहीं
इलाही
इस ख़बर से
बेख़बर करे मुझको

Maanga jo mera hai
Jaata kya tera hai
Maine kaun si tujhse jannat maang li
Kaisa khuda hai tu
Bas naam ka hai tu
Rabba jo teri itni si bhi na chali
Chahiye jo mujhe
Kar de tu mujhko ata