कामिल की शायरी | Irshad kamil Shayari

irshad kamil best lines

भीगी भीगी

भीगी भीगी
सर्द रात और
बिजली गुल
परछाइयों में बातें पुल।

आप भला क्या समझाएंगे
इश्क़ मदरसा
सबक इश्क़ है
अब तो चारों तबक इश्क़ है

मेरे अंदर…

मेरे अंदर 
बंजर-बंजर
तेरी प्यास
समंदर की

राही लौटे
पंछी लौटे
सूरज लौटा अपने देस
माये, कैसे लौटेगा वो
जिसके घर में है परदेस…

मेरी सोच…

मेरी सोच
तुम झुंझलाना मुझ पर
और गुस्से में आकर
फाड़ देना उस ख़त को
जो तुमने अभी नहीं लिखा।

irshad kamil ghazals

शहर की 
तन्हाई से घबराई है
ये हवा 
जो जंगलों से आयी है।

न दोस्ती न दुश्मनी
मेरा काम तो है रौशनी
मैं रास्ते का चराग़ हूँ
कहो सर-फिरी हवाओं से
न चलें ठुमक-अदाओं से

कभी फिर करूँगा मोहब्बतें
अभी सामने हैं ज़ुल्मतें

ये अँधेरा पहले नोच लूँ
कोई चाल अगली सोच लूँ

मैं गुम हूँ अपने ख़याल में
ये जान लो कि इस लम्हे

मैं दिल नहीं दिमाग़ हूँ
मैं रास्ते का चराग़ हूँ

मेरा काम तो है रौशनी
न दोस्ती न दुश्मनी