Independence day speech in hindi | स्वतंत्रता दिवस पर भाषण

स्वतंत्रता दिवस पर भाषण

स्वतंत्रता को हमारे पूर्वजों ने 15 अगस्त 1947 को दिलाई.यह एक ऐसी सुनहरा दिन है तारीख जिसके कारण आज हम आजाद भारत में सांस ले रहे हैं. इस आजादी के लिए कई शहीदों ने अपनी जान गवाई . यह आजादी इतनी आसानी से नहीं मिली. कई लोगो ने कुर्बानियां दी थी तब जाकर हमें आजाद भारत की छत मिल पाई हैं.अब हमारा कर्तव्य हैं कि हम उन शहीदों को श्रद्धांजलि के रूप में भारत देश का नाम दुनिया का सबसे प्रगतिशील और शक्तिशाली देश बनाये

भारत भूमि माँ के रूप में मानी जाती हैं. देशवासी भारत माता के बच्चे की तरह देखे जाते हैं. अपनी माँ के लिए अपना सब कुछ छोड़ देने वाले शहीद ही माँ की सच्ची संताने हैं.शहीद के लिए जितना भी कहिये लिखिए वह सब कम है . एक ऐसा महान व्यक्ति जो अपने कर्तव्य के आगे अपनी जान तक को तुच्छ मानता हैं. उसके लिए शब्दों में कुछ कह पाना आसान नहीं.

हम सभी लोग जिन्हें जान देने का मौका नहीं मिलता या हममे उतनी हिम्मत नहीं हैं. पर हम भी भारत के लिए कार्य कर सकते हैं. जान देकर ही देशभक्ति का दिखानी जरूरी नहीं . हमें नागरिक के तौर पर अपने कर्तव्यों अधिकारों के प्रति सजक होना होगा और उनका निर्वाह करना होगा. यही उन महान शहीदों और अपनी मातृभूमि के लिए हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

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देश भक्ति केवल प्राण न्यौछावर करके ही निभाई नहीं जा सकती . देश के लिए हर मायने में सोचना ,काम करना भी देश भक्ति हैं. देश की पारम्परिक धरोहर की रक्षा करना, देश को स्वच्छ बनना, कानून का पालन करना, भ्रष्ट्राचार का विरोध करना, आपसी प्रेम से रहना ,देश को प्रगति के मार्र्ग पर ले जाने के प्रयास करना ,आदि यह सभी कार्य देशभक्ति के काम हैं.

देश के लिए अपना मन श्रम और जीवन लगाना ही सही मायने में देश की सेवा हैं. यह सब करने से देश भीतर से ही नहीं बल्कि बाहर से भी मजबूत होता हैं. देश में एकता बढती हैं और एकता ही देश की शक्ति होती हैं.

200 सालों की गुलामी के बाद भारत आजाद हुआ था. हमें 1947 में देश को आजादी एकता के कारण ही मिली थी। परन्तु इस एकता में सदा के लिए दो गुट बन गए. यह गुट धर्म, साम्प्रदायिकता की देन नहीं बल्कि अंग्रेजो की की देन थी. यह दो गुट और उसके घृणित अंजाम हमारे देश को कमजोर बना रहा हैं. यह मन का फांसला हमारे भारत के भीतर तो है पर भारत पाकिस्तान दोनों देशो के बीच भी आज तक गहरा हैं.

इस घृणा का मोल हम सभी को हर वक्त चुकाना पड़ता हैं. देश की आय का कई गुना खर्च सीमा पर व्यय होता हैं जिस कारण दोनों ही देशों के कई लोगो को रात्रि में बिना भोजन के सोना पड़ता हैं.आजादी के 72 सालों बाद भी दोनों देश गरीब हैं इसका कारण आपसी फुट हैं जिसका फायदा तीसरे लोगो ( USA, China ) ने उठाया और आज भी उठा रहे हैं.

1947 के पहले 1857 में भी इसी तरह से क्रांति छिड़ी थी. देश में चारो तरह आजादी के लिए युद्ध चल रहे थे. उस वक्त राजा महाराजों का शासन था लेकिन वे सभी राजा अंग्रेजों के आधीन थे. 1857 का वक्त रानी लक्ष्मी बाई के नाम से जाना जाता हैं. उस वक्त भी अंग्रेजो की फुट एवम राजाओं के बीच सत्ता की लालसा के कारण देश आजाद नहीं हो पाया.

उसके जब हम मुगुलो और राजपूतों का वक्त देखे तब भी फुट ने ही देश को कमजोर बनाया. उस वक्त भी महाराणा प्रताप की हार का कारण फुट एवम राजाओं की सत्ता की भूख थी.

और आज हम जब निगाहे उठाकर देखते हैं तब हमें दीखता हैं कि देश के नेताओं को सत्ता की भूख हैं.वो देश की जानता को साम्प्रदायिकता के जरिये तोड़ रहे हैं. और उन्हें बस सत्ता की भूख हैं. इन सभी में बदलाव लाने के लिए हम सभी को जागने की जरुरत हैं.

यह लड़ाई इतनी आसानी से कम नहीं है ,यह दिन पर दिन बढ़ती जाएगी. इसका एक ही हल हो सकता हैं कि आने वाली पीढ़ी को शिक्षित किया जाये. अच्छे बुरे की समझ दी जाये. आदर, सम्मान एवम देशभक्ति का मार्ग दिखाया जाये. इसके बाद ही देश में बदलाव आ सकते हैं.

हमारा देश जिसका ध्वज तीन रंगों से मिल कर बना हैं जिसमे केसरिया रंग जो प्रगति का प्रतीक हैं, सफ़ेद जो अमन एवं शांति का प्रतीक हैं, हरा जो समृद्धि का प्रतीक हैं. साथ में अशोक चक्र जो हर पल बढ़ते रहने का सन्देश देता हैं. तिरंगे का सफ़ेद रंग पूरी दुनियाँ को शांति का सन्देश देता हैं क्यूंकि युद्ध से सभी देशों एवम नागरिको पर बुरा असर पड़ता हैं.याद रखियेगा लड़ते वही हैं जिनमे शिक्षा का आभाव होता हैं. अगर किसी देश की प्रगति चाहिए तो उस देश का शिक्षा स्तर सुधारना सबसे जरुरी हैं.

स्वतंत्रता दिवस पर केवल शहीदों को याद करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है . उनका राष्ट्रीय सम्मान करना हमारा कर्म है .इस दिन हम सभी को प्रण लेना चाहिए कि रोजमर्रा के कार्य में देश के लिए सोच कर कुछ करे जिसमे देश की सफाई, अपने बच्चो एवम आस-पास के बच्चो को एक सही दिशा देने के लिए कुछ कार्य करें, गरीब बच्चो को पढ़ने में मदद करें, बुजुर्गो को सम्मान दे, क्राइम के प्रति जागरूक होकर दोषी को दंडित करें, गलत को गलत कहने की हिम्मत रखे, जान बुझकर या अनजाने में भी भ्रष्टाचार का साथ ना दे एवम सबसे जरुरी देश के नियमो का पालन करे. अगर हम रोजमर्रा में इन चीजो को शामिल करते हैं तो देश जरुर प्रगति करेगा और हम सभी भी देश के सपूत कहलायेंगे.

देशभक्ति के लिए केवल 15 अगस्त, 26 जनवरी के मोहताज ना बने. देश और देशभक्ति केवल इस दिन का इन्तजार नहीं करते . हमारा देश तो उस दिन का इंतजार कर रहा है जब भारत में भ्रष्टाचार का नाम न हो, जब बेगुनाहों का कत्लेआम ना हो, जब नारी और कमजोर लोगो को उनका हक़ मिले। अन्याय का व्यापार ना हो, जब माता- पिता को वृद्ध होने का पछतावा ना हो. ऐसे दिन के इंतज़ार में हमारी भारत माँ आस लगाये बैठी हैं.हमें इससे ठीक करने का सौभाग्य मिला है और हम अपने छोटे से कार्य का योगदान देकर मातृभूमि की इस इच्छा को पूरी करने के लिए एक नीव का मूक पत्थर बन जायें.