husn ki tareef shayari in hindi

हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ
दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं
परवीन शाकिर

हुस्न को शर्मसार करना ही
इश्क़ का इंतिक़ाम होता है
असरार-उल-हक़ मजाज़

तुम्हारा हुस्न आराइश तुम्हारी सादगी ज़ेवर
तुम्हें कोई ज़रूरत ही नहीं बनने सँवरने की
असर लखनवी

आइना देख के कहते हैं सँवरने वाले
आज बे-मौत मरेंगे मिरे मरने वाले
दाग़ देहलवी

न पूछो हुस्न की तारीफ़ हम से
मोहब्बत जिस से हो बस वो हसीं है
आदिल फ़ारूक़ी

हसीं तो और हैं लेकिन कोई कहाँ तुझ सा
जो दिल जलाए बहुत फिर भी दिलरुबा ही लगे
बशीर बद्र

कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर
अमीर मीनाई

husn ki shayari

इतने हिजाबों पर तो ये आलम है हुस्न का
क्या हाल हो जो देख लें पर्दा उठा के हम
जिगर मुरादाबादी

तुझे कौन जानता था मिरी दोस्ती से पहले
तिरा हुस्न कुछ नहीं था मिरी शाइरी से पहले
कैफ़ भोपाली

शाम भी थी धुआँ धुआँ हुस्न भी था उदास उदास
दिल को कई कहानियाँ याद सी आ के रह गईं
फ़िराक़ गोरखपुरी

इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है
हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए
असरार-उल-हक़ मजाज़

तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन
ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं
जिगर मुरादाबादी

न पाक होगा कभी हुस्न ओ इश्क़ का झगड़ा
वो क़िस्सा है ये कि जिस का कोई गवाह नहीं
हैदर अली आतिश

तुम हुस्न की ख़ुद इक दुनिया हो शायद ये तुम्हें मालूम नहीं
महफ़िल में तुम्हारे आने से हर चीज़ पे नूर आ जाता है
साहिर लुधियानवी

ज़रा विसाल के बाद आइना तो देख ऐ दोस्त
तिरे जमाल की दोशीज़गी निखर आई
फ़िराक़ गोरखपुरी

फूल गुल शम्स ओ क़मर सारे ही थे
पर हमें उन में तुम्हीं भाए बहुत
मीर तक़ी मीर

इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में
या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर
अल्लामा इक़बाल

हुस्न इक दिलरुबा हुकूमत है
इश्क़ इक क़ुदरती ग़ुलामी है
अब्दुल हमीद अदम

अपने मरकज़ की तरफ़ माइल-ए-परवाज़ था हुस्न
भूलता ही नहीं आलम तिरी अंगड़ाई का
अज़ीज़ लखनवी

हम अपना इश्क़ चमकाएँ तुम अपना हुस्न चमकाओ
कि हैराँ देख कर आलम हमें भी हो तुम्हें भी हो
बहादुर शाह ज़फ़र

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है
हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है
जिगर मुरादाबादी

किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी
ये हुस्न ओ इश्क़ तो धोका है सब मगर फिर भी
फ़िराक़ गोरखपुरी

ज़माना हुस्न नज़ाकत बला जफ़ा शोख़ी
सिमट के आ गए सब आप की अदाओं में
कालीदास गुप्ता रज़ा

tere husn ki shayari,
shayari husn ki,
tareef husn poetry,
husan ka ghamand shayari,
husn par poetry,
urdu sher on husn,
husn ki tareef urdu shayari,
shayari about husn,

क्यूँ जल गया न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख कर
जलता हूँ अपनी ताक़त-ए-दीदार देख कर
मिर्ज़ा ग़ालिब

अब तो तेरे हुस्न की हर अंजुमन में धूम है
जिस ने मेरा हाल देखा तेरा दीवाना हुआ
जमील यूसुफ़

आइना देख कर वो ये समझे
मिल गया हुस्न-ए-बे-मिसाल हमें
बेख़ुद देहलवी

जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें
ईद के चाँद का दीदार बहाना ही सही
अमजद इस्लाम अमजद

आप क्या आए कि रुख़्सत सब अंधेरे हो गए
इस क़दर घर में कभी भी रौशनी देखी न थी
हकीम नासिर

हुस्न यूँ इश्क़ से नाराज़ है अब
फूल ख़ुश्बू से ख़फ़ा हो जैसे
इफ़्तिख़ार आज़मी

इस दिल में तिरे हुस्न की वो जल्वागरी है
जो देखे है कहता है कि शीशे में परी है
जोश मलीहाबादी

husn shayari in hindi

हुस्न ये है कि दिलरुबा हो तुम
ऐब ये है कि बेवफ़ा हो तुम
जलील मानिकपूरी

न देखना कभी आईना भूल कर देखो
तुम्हारे हुस्न का पैदा जवाब कर देगा
बेख़ुद देहलवी

हुस्न सब को ख़ुदा नहीं देता
हर किसी की नज़र नहीं होती
इब्न-ए-इंशा

आओ हुस्न-ए-यार की बातें करें
ज़ुल्फ़ की रुख़्सार की बातें करें
चराग़ हसन हसरत

हम इश्क़ में हैं फ़र्द तो तुम हुस्न में यकता
हम सा भी नहीं एक जो तुम सा नहीं कोई
लाला माधव राम जौहर

पूछो न अरक़ रुख़्सारों से रंगीनी-ए-हुस्न को बढ़ने दो
सुनते हैं कि शबनम के क़तरे फूलों को निखारा करते हैं
क़मर जलालवी

जितना देखो उसे थकती नहीं आँखें वर्ना
ख़त्म हो जाता है हर हुस्न कहानी की तरह
ज़ेब ग़ौरी

हुस्न है काफ़िर बनाने के लिए
इश्क़ है ईमान लाने के लिए
हैरत गोंडवी

सितम-नवाज़ी-ए-पैहम है इश्क़ की फ़ितरत
फ़ुज़ूल हुस्न पे तोहमत लगाई जाती है
शकील बदायुनी

जल्वा-गर बज़्म-ए-हसीनाँ में हैं वो इस शान से
चाँद जैसे ऐ ‘क़मर’ तारों भरी महफ़िल में है
क़मर जलालवी

हमेशा आग के दरिया में इश्क़ क्यूँ उतरे
कभी तो हुस्न को ग़र्क़-ए-अज़ाब होना था
करामत अली करामत

वो चेहरा हाथ में ले कर किताब की सूरत
हर एक लफ़्ज़ हर इक नक़्श की अदा देखूँ
ज़फ़र इक़बाल

हुस्न भी कम्बख़्त कब ख़ाली है सोज़-ए-इश्क़ से
शम्अ भी तो रात भर जलती है परवाने के साथ
बिस्मिल सईदी

husn shayari hindi

किसी में ताब कहाँ थी कि देखता उन को
उठी नक़ाब तो हैरत नक़ाब हो के रही
जलील मानिकपूरी
मुझी को पर्दा-ए-हस्ती में दे रहा है फ़रेब
वो हुस्न जिस को किया जल्वा-आफ़रीं मैं ने
अख़्तर अली अख़्तर

khuda jab husn deta hai urdu poetry,
husn shayari image,
husn ki tareef shayari in punjabi,
ghazal on husn,
husn aur ishq shayari,
husn poetry sms,
urdu poetry about husn,
husn ki shayari hindi,
shayari husn urdu,
husn pe poetry,

अल्लाह अल्लाह हुस्न की ये पर्दा-दारी देखिए
भेद जिस ने खोलना चाहा वो दीवाना हुआ
आरज़ू लखनवी

चाँद मशरिक़ से निकलता नहीं देखा मैं ने
तुझ को देखा है तो तुझ सा नहीं देखा मैं ने
सईद क़ैस

दिल के दो हिस्से जो कर डाले थे हुस्न-ओ-इश्क़ ने
एक सहरा बन गया और एक गुलशन हो गया
नूह नारवी

अफ़्सुर्दगी भी हुस्न है ताबिंदगी भी हुस्न
हम को ख़िज़ाँ ने तुम को सँवारा बहार ने
इज्तिबा रिज़वी

रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम
दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम
हसरत मोहानी

वो अपने हुस्न की ख़ैरात देने वाले हैं
तमाम जिस्म को कासा बना के चलना है
अहमद कमाल परवाज़ी

ये हुस्न-ए-दिल-फ़रेब ये आलम शबाब का
गोया छलक रहा है पियाला शराब का
असर सहबाई

तफ़रीक़ हुस्न-ओ-इश्क़ के अंदाज़ में न हो
लफ़्ज़ों में फ़र्क़ हो मगर आवाज़ में न हो
मंज़र लखनवी

आसमान और ज़मीं का है तफ़ावुत हर-चंद
ऐ सनम दूर ही से चाँद सा मुखड़ा दिखला
हैदर अली आतिश

हुस्न को दुनिया की आँखों से न देख
अपनी इक तर्ज़-ए-नज़र ईजाद कर
एहसान दानिश

two line husn shayari

हुस्न बना जब बहती गंगा
इश्क़ हुआ काग़ज़ की नाव
इब्न-ए-सफ़ी

तुझ को शिकवा है कि उश्शाक़ ने बदनाम किया
सच तो ये है कि तिरा हुस्न है दुश्मन तेरा
जलील मानिकपूरी

तेरे क़ुर्बान ‘क़मर’ मुँह सर-ए-गुलज़ार न खोल
सदक़े उस चाँद सी सूरत पे न हो जाए बहार
क़मर जलालवी

हुस्न के जल्वे नहीं मुहताज-ए-चश्म-ए-आरज़ू
शम्अ जलती है इजाज़त ले के परवाने से क्या
आनंद नारायण मुल्ला

शोख़ी-ए-हुस्न के नज़्ज़ारे की ताक़त है कहाँ
तिफ़्ल-ए-नादाँ हूँ मैं बिजली से दहल जाता हूँ
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

husn ko chand shayari,
husn e yousuf shayari,
husn shayari in english,
husn pe shayari in hindi,
shayari for husn,
husn tareef shayari in urdu,
husn ki tareef shayari in hindi font,
husn ka guroor shayari,

है साया चाँदनी और चाँद मुखड़ा
दुपट्टा आसमान-ए-आसमाँ है
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर

तमाम मज़हर-ए-फ़ितरत तिरे ग़ज़ल-ख़्वाँ हैं
ये चाँदनी भी तिरे जिस्म का क़सीदा है
इज़हार असर

जी चाहता है साने-ए-क़ुदरत पे हूँ निसार
बुत को बिठा के सामने याद-ए-ख़ुदा करूँ
अमानत लखनवी

हुस्न आईना फ़ाश करता है
ऐसे दुश्मन को संगसार करो
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

हुस्न और इश्क़ का मज़कूर न होवे जब तक
मुझ को भाता नहीं सुनना किसी अफ़्साने का
जोशिश अज़ीमाबादी

हुस्न ऐसा कि ज़माने में नहीं जिस की मिसाल
और जमाल ऐसा कि ढूँडा करे हर ख़्वाब-ओ-ख़याल
अनवर जमाल अनवर

अल्लाह-रे उन के हुस्न की मोजिज़-नुमाइयाँ
जिस बाम पर वो आएँ वही कोह-ए-तूर हो
नूह नारवी

husn pe guroor shayari

हुस्न हर हाल में है हुस्न परागंदा नक़ाब
कोई पर्दा है न चिलमन ये कोई क्या जाने
अर्श मलसियानी

वो तग़ाफ़ुल-शिआर क्या जाने
इश्क़ तो हुस्न की ज़रूरत है
ख़ुर्शीद रब्बानी

अगर आ जाए पहलू में ‘क़मर’ वो माह-ए-कामिल भी
दो आलम जगमगा उट्ठेंगे दोहरी चाँदनी होगी
क़मर जलालवी

इश्क़ अब भी है वो महरम-ए-बे-गाना-नुमा
हुस्न यूँ लाख छुपे लाख नुमायाँ हो जाए
फ़िराक़ गोरखपुरी

हम इतनी रौशनी में देख भी सकते नहीं उस को
सो अपने आप ही इस चाँद को गहनाए रखते हैं
ज़फ़र इक़बाल

हर हक़ीक़त है एक हुस्न ‘हफ़ीज़’
और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
हफ़ीज़ बनारसी

हैं लाज़िम-ओ-मलज़ूम बहम हुस्न ओ मोहब्बत
हम होते न तालिब जो वो मतलूब न होता
जुरअत क़लंदर बख़्श

husn ki tareef poetry in urdu,
husan di tareef punjabi shayari,
urdu shayari husn ki tareef
poetry about husn in urdu,
husn pe shayari in urdu,
husn par shayari in hindi,
khuda jab husn deta hai shayari,
husn ki tareef shayari urdu,

हुस्न को भी कहाँ नसीब ‘जिगर’
वो जो इक शय मिरी निगाह में है
जिगर मुरादाबादी

urdu shayari on husn

किस के चेहरे से उठ गया पर्दा
झिलमिलाए चराग़ महफ़िल के
हसन बरेलवी

अबरू ने मिज़ा ने निगह-ए-यार ने यारो
बे-रुत्बा किया तेग़ को ख़ंजर को सिनाँ को
अज्ञात

कौन सानी शहर में इस मेरे मह-पारे का है
चाँद सी सूरत दुपट्टा सर पे यक-तारे का है
अब्दुल रहमान एहसान देहलवी

वो नहा कर ज़ुल्फ़-ए-पेचाँ को जो बिखराने लगे
हुस्न के दरिया में पिन्हाँ साँप लहराने लगे
शाद लखनवी

हुस्न और इश्क़ हैं दोनों काफ़िर
दोनों में इक झगड़ा सा है
अज़ीम कुरेशी

इश्क़ है बे-गुदाज़ क्यूँ हुस्न है बे-नियाज़ क्यूँ
मेरी वफ़ा कहाँ गई उन की जफ़ा को क्या हुआ
अब्दुल मजीद सालिक

शोरिश-ए-इश्क़ में है हुस्न बराबर का शरीक
सोच कर जुर्म-ए-तमन्ना की सज़ा दो हम को
एहसान दानिश

हुस्न के हर जमाल में पिन्हाँ
मेरी रानाई-ए-ख़याल भी है
जिगर मुरादाबादी

अल्लाह-रे सनम ये तिरी ख़ुद-नुमाईयाँ
इस हुस्न-ए-चंद-रोज़ा पे इतना ग़ुरूर हो
ख़्वाजा इमामी अमानी

महकते फूल सितारे दमकता चाँद धनक
तिरे जमाल से कितनों ने इस्तिफ़ादा क्या
अहमद ख़याल

हुस्न ओ इश्क़ की लाग में अक्सर छेड़ उधर से होती है
शम्अ की शोअ’ला जब लहराई उड़ के चला परवाना भी
आरज़ू लखनवी

निस्बत फिर उस से क्या मह-ए-दाग़ी को दीजिए
सारे बदन में जिस के न हो एक तिल कहीं
मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

दाग़-ए-जिगर का अपने अहवाल क्या सुनाऊँ
भरते हैं उस के आगे शम्-ओ-चराग़ पानी
जोशिश अज़ीमाबादी

कोह संगीन हक़ाएक़ था जहाँ
हुस्न का ख़्वाब तराशा हम ने
रविश सिद्दीक़ी

Leave a Comment

%d bloggers like this: