Gulzar Shayari

कही किसी रोज़ यु भी होता ,हमारी हालत तुम्हारी होती 
जो रात हमने गुजारी मरके ,वो रात तुमने गुजारी होती
कही किसी रोज़ यु भी होता ,हमारी हालत तुम्हारी होती
जो रात हमने गुजारी मरके ,वो रात तुमने गुजारी होती
अच्छी किताबें और अच्छे लोग तुरंत समझमें नहीं आते उन्हें पढना पड़ता हैं

अच्छी किताबें और अच्छे लोग तुरंत समझमें नहीं आते उन्हें पढना पड़ता हैं
 सुनो जरा रास्ता तो बताना ,मोहब्बत के सफर से वापसी है मेरी
सुनो जरा रास्ता तो बताना ,मोहब्बत के सफर से वापसी है मेरी
ऐ इश्क़.. दिल की बात कहूँ तो बुरा तो नहीं मानोगे,
बड़ी रहत के दिन थे तेरी पहचान से पहले
ऐ इश्क़.. दिल की बात कहूँ तो बुरा तो नहीं मानोगे,
बड़ी रहत के दिन थे तेरी पहचान से पहले
मेरे दिल में एक धड़कन तेरी हैं,
उस धड़कन की कसम तू ज़िन्दगी मेरी है,
मेरी तो हर सांस में एक सांस तेरी हैं,
जो कभी सांस जो रुक जाए तो मौत मेरी हैं

मेरे दिल में एक धड़कन तेरी हैं,
उस धड़कन की कसम तू ज़िन्दगी मेरी है,
मेरी तो हर सांस में एक सांस तेरी हैं,
जो कभी सांस जो रुक जाए तो मौत मेरी हैं
कौन कहता हैं की हम झूठ नहीं बोलते एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें

कौन कहता हैं की हम झूठ नहीं बोलते एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें 
आइना देख के तसल्ली हुई ,हमको इस घर में जानता है कोई
आइना देख के तसल्ली हुई ,हमको इस घर में जानता है कोई
इस दिल का कहा मनो एक काम कर दो
एक बे-नाम सी मोहब्बत मेरे नाम करदो
मेरी ज़ात पर फ़क़त इतना अहसान कर दो
किसी दिन सुबह को मिलो, और शाम कर दो.
मेरी खामोशी मे सन्नाटा भी है शोर भी है, 
तुने देखा ही नहीं...
आखों में कुछ ओर भी है

मेरी खामोशी मे सन्नाटा भी है शोर भी है, 
तुने देखा ही नहीं…
आखों में कुछ ओर भी है
ख्वाहिशें  कुछ कुछ  यु भी अधूरी रही 
पहले उम्र नहीं थी अब उम्र नहीं रही
ख्वाहिशें कुछ कुछ यु भी अधूरी रही
पहले उम्र नहीं थी अब उम्र नहीं रही
मिलता तो बहुत कुछ है जिंदगी में ,बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल न हो सका
मिलता तो बहुत कुछ है जिंदगी में ,बस हम गिनती उसी की करते है जो हासिल न हो सका
कुछ रिश्तो में मुनाफा नहीं होता 
जिंदगी को अमिर बना देते है
कुछ रिश्तो में मुनाफा नहीं होता
जिंदगी को अमिर बना देते है
वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं, हम भूल गए हैं रख के कहीं…

वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं, हम भूल गए हैं रख के कहीं…
आप के बाद हर घड़ी हमने
आप के साथ ही गुज़ारी है

आप के बाद हर घड़ी हमने
आप के साथ ही गुज़ारी है
दर्द की अपनी भी एक अदा है ,वह भी सहने वालो पे फ़िदा है
दर्द की अपनी भी एक अदा है ,वह भी सहने वालो पे फ़िदा है
मां ने जिस चांद सी  दुल्हन की दुआ दी थी मुझे 
आज  की  रात वह फ़ु टपाथ से देखा मैंने 
रात भर रोटी  नज़र आया है वो चांद मुझे
ज़मीं भी उसकी ,ज़मी की  नेमते उसकी 
ये सब उसी का है,घर भी,ये घर के बंदे भी
खुदा से कहिये ,कभी वो भी अपने घर  आयें
.सारा दिन बैठा मैं ,हाथ में लेकर खाली हाथ कासा 
रात जो गुजरी ,चाँद की कौड़ी डाल  गयी उसमे 
सूदखो़र सूरज कल मुझसे ये भी लेजायेगा।

.कभी कभी बाजा़र में यूँ भी हो जाता है
कीमत ठीक  थी,जेब म.इतने दाम नहीं थे  में 
ऐसे ही एक बार मै  तुमको हार आया

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