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फेमस शायरी – famous shayari in hindi

आँखें न जीने देंगी तिरी बे-वफ़ा मुझे
क्यूँ खिड़कियों से झाँक रही है क़ज़ा मुझे
इमदाद अली बहर


पानी तस्वीर कहाँ बनाती है !
खाब तकदीर कहाँ बनाती है !
रिश्तों को सच्चे दिल से निभाइये !
ये जिंदगी फिर वापस कहाँ मिलाती है !!

paani tasvir kahaan banaati hai
khaab takdir kahaan banaati hai
rishto ko sacche dil se nibhaiye
ye jindai fir wapas kahaan milaati hai

आईना क्यूँ न दूँ कि तमाशा कहें जिसे
ऐसा कहाँ से लाऊँ कि तुझ सा कहें जिसे
मिर्ज़ा ग़ालिब

प्रसिद्द शायरी

अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़

आगाह अपनी मौत से कोई बशर नहीं
सामान सौ बरस का है पल की खबर नहीं
-हैरत इलाहाबादी

ज़िन्दगी ज़िंदादिली का नाम है
मुर्दा दिल क्या ख़ाक जिया करते हैं
-नासिख लखनवी

करीब है यारो रोज़े-महशर, छुपेगा कुश्तों का खून क्योंकर
जो चुप रहेगी ज़ुबाने–खंजर, लहू पुकारेगा आस्तीं का

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले,
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है.
-अल्लामा इकबाल

चल साथ कि हसरतें दिल-ए-महरूम से निकले
आशिक का जनाज़ा है, ज़रा धूम से निकले
-मुहम्मद अली फिदवी

ये इश्क नहीं आसां, बस इतना समझ लीजै
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
-जिगर मुरादाबादी

यहां लिबास की कीमत है आदमी की नहीं
मुझे गिलास बड़ा दे, शराब कम कर दे
-बशीर बद्र

बड़े गौर से सुन रहा था जमाना
तुम्ही सो गये दास्तां कहते कहते
-साक़िब लखनवी

हम तालिबे-शोहरत हैं, हमें नंग से क्या काम
बदनाम अगर होंगे तो क्या नाम न होगा
-नवाब मुहम्मद मुस्तफा खान शेफ़्ता

खंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम अमीर
सारे जहां का दर्द हमारे जिगर में है
-अमीर मीनाई


अभी न छेड़ मोहब्बत के गीत ऐ मुतरिब
अभी हयात का माहौल ख़ुश-गवार नहीं
साहिर लुधियानवी


ज़िन्दगी ना ज़ाने कौनसी बात “आख़री” हो जाए !
ना ज़ाने कौनसी फ़रियाद “आख़री” हो जाए !
मिलिए मुस्कुराइए बातें करिये दोस्तों एक दूसरे से !
ना जाने कौनसी “मुलाक़ात” आख़री हो जाए !!

jindagi naa jaane kaun si baat aakhiri ho jaaye
naa jaane kaun si fariyaad akhiri ho jaaye
miliye muskuraaiye baate kariye dosto ek dusre se
naa jaane kaun si mulaakaat aakhiri ho jaaye

जीना चाहा तो खुद से दूर थे हम !
मरना चाहा तो तुमसे मजबूर थे हम !
सर झुका कर कबूला हर सजा!
बस दर्द इतना है कि बेकसूर थे हम !!


jina chaha to khud se dur the hum
marna to tumse majbur the hum
sar jhuka kar kabula har saja
bas dard itna hai ki bekasur the hum

बात उल्टी वो समझते हैं जो कुछ कहता हूँ
अब की पूछा तो ये कह दूँगा कि हाल अच्छा है
जलील मानिकपूरी

मैंने जब छोड़ दी दुनिया तो अकेला ही रहा
कौन देता मेरा होने का पता मेरे बाद

किस किस को बताएंगे जुदाई का सबब हम
तू मुझसे ख़फ़ा है तो ज़माने के लिए आ

आप मत पूछिए क्या हम पे स़फर में गुज़री
था लुटेरों का जहाँ, वहीं रात हुई

मैं उसका हो नही सकता बता न देना उसे
लकीरें हाथ की अपनी वह सब जला लेगा

जिस्म आँखों से चुरा लेता है
एक तस्वीर बनाने वाला

पानी में अक्स और किसी आसमाँ का है
ये नाव कौन सी है ये दरिया कहाँ का है
अहमद मुश्ताक़


नींद तुझसे क्या शिकवा की आती नहीं !
कसूर तो उस दीदार का है जो सोने नहीं देता!!

nind tujhse kya sikwa ki aati nahi
kasur to us didar ka hai jo sone nahi deta

चल साथ कि हसरत दिल-ए-मरहूम से निकले
आशिक़ का जनाज़ा है ज़रा धूम से निकले
फ़िदवी लाहौरी

प्रचलित शायरी

अजीब लुत्फ़ कुछ आपस के छेड़-छाड़ में है
कहाँ मिलाप में वो बात जो बिगाड़ में है
इंशा अल्लाह ख़ान

चले तो पाँव के नीचे कुचल गई कोई शय
नशे की झोंक में देखा नहीं कि दुनिया है
शहाब जाफ़री


दूर बैठे रहिये , पास न आईये कभी !
गर ऐसे रूठेंगे तो जान ले जाइएगा कभी !
शोले बन गए है सभी फूल मेरे आंचल के !
मोहब्बत की बारिश बनके न बरसाइये कभी !!

dur baithe rahiye ,paas naa aaiye kabhi
gar aise ruthenge to jaan le jaiyega kabhi
shole ban gaye hai sabhi fool mere aanchal ke
mohabbat ki baarish banke na barshaiye kabhi

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