Advertisements

Essay on durga puja in hindi दुर्गा पूजा

दुर्गा पूजा (Durga Puja) को दुर्गोत्सव या शरदोत्सव भी कहा जाता है. यह एक हिन्दू पर्व है, जिसमें हिन्दू देवी दुर्गा (Maa Durga) की पूजा की जाती है. इसमें 6 दिनों को महालय, षष्ठी, महा सप्तमी, महा अष्टमी, महा नवमी और विजयदशमी (Vijayadashami) के रूप में मनाया जाता है.

essay on durga puja

दुर्गा पूजा बंगालियों (Durga Puja in Bengal) का काफी बड़ा त्योहार होता है चार दिनों तक चलने वाले इस त्योहार की तैयारियां वे लोग महीने भर पहले से कर देते हैं जिसमें पंडाल ,गायन, नृत्य, पेटिंग जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. इतना ही नहीं इस अवसर के लिए लोग नए कपड़े भी खरीदते हैं. सदियों से बंगाल में दुर्गा पूजा का बहुत महत्व रहा है.

durga puja story,
short essay on durga puja in hindi,
essay about durga puja,
puja in hindi,
hindi essay on durga puja,
about durga puja in hindi,
durga utsav,
essay letter in hindi,
essay on durga puja for kids,
durga puja essay in bengali,
meaning of puja in hindi,
dugga dugga meaning in hindi,
short story in hindi for class 3,
,
durga puja in hindi,
durga puja essay in hindi,
,
durga puja hindi song,
durga puja celebration essay,

दुर्गा पूजा का इतिहास – The History and Origin of the Durga Puja Festival

17वीं और 18वीं सदी में जमीदार और अमीर लोग बहुत बड़े स्तर पर पूजा का आयोजन करते थे, जहां सब लोग एक छत के नीचे देवी दुर्गा का पूजन करने के लिए इकट्ठा हुआ करते थे. उदाहरण के लिए कोलकाता में आचला पूजा काफी प्रसिद्ध है, जिसकी शुरुआत 1610 में जमींदार लक्ष्मीकांत मजूमदार ने कोलकाता के शोभा बाजार छोटो राजबरी के 33 राजा नबकृष्णा रोड से की थी. जो मुख्य रूप से 1757 में शुरू हुआ. इतना ही नहीं बंगाल के बाहर पंडालों में देवी दुर्गा की प्रतिमा की स्थापना कर भव्य तरीके से उनकी पूजा का आयोजन किया जाने लगा.

दुर्गा पूजा की कथा या कहानी (Durga Puja Katha) :  दुर्गा पूजा (Durga Puja) का त्योहार देवी दुर्गा ( Maa Durga) और राक्षस महिषासुर (Mahishasur) के बीच हुए युद्ध का प्रतीक है, यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का सन्देश है. राक्षस महिषासुर ने कई वर्षो तक तपस्या और प्रार्थना कर भगवान ब्रह्मा से अमर होने का वरदान मांगा. महिषासुर की भक्ति से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने उसे कई वरदान दिए . लेकिन भगवान ब्रह्मा ने महिषासुर को अमर होने के वरदान की जगह यह वरदान दिया कि उसकी मृत्यु एक स्त्री के हाथों होगी. ब्रह्मा जी से यह वरदान पाकर महिषासुर काफी प्रसन्न हो गया और सोचने लगा की किसी भी स्त्री में इतनी ताकत नहीं है जो उसके प्राण ले सकें.

paragraph on durga puja

इसी विश्वास के साथ महिषासुर ने अपनी असुर सेना के साथ देवों के विरूद्ध युद्ध छेड़ दिया जिसमें देवों की हार हो गई और सभी देवगण मदद के लिए त्रिदेव यानि भगवान शिव, ब्रह्मा और विष्णु के पास पहुंचें. तीनों देवताओं ने अपनी शक्ति से देवी दुर्गा को जन्म दिया जिसके बाद दुर्गा ने राक्षस महिषासुर से युद्ध कर उसका वध किया, तो इस तरह से महिषासुर एक स्त्री के हाथों मारा गया. इस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत हुई. इसके अलावा इस त्योहार को फसल से जोड़कर भी देखा जाता है जो दुर्गा माता के जीवन और सृजन रूप को भी चिन्हित करता है.

कैसे और कब मनाया जाता है दुर्गा पूजा (Durga Puja 2020)

How and when is Durga Puja 2020 celebrated

essay on durga puja in hindi for class 6,
essay on durga puja in hindi for class 3,
essay on durga puja in hindi
essay on durga puja in hindi for class 5,
दुर्गा पूजा पर निबंध,
paragraph on durga puja,
durga puja essay,
essay on durga puja,
durga puja paragraph,
durga puja png,
paragraph on durga puja,

पंचमी या षष्ठी वाले दिन पंडाल में स्थापित देवी दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी, कार्तिक और भगवान गणेश की खूबसूरत मूर्तियों का अनावरण भक्तों के दर्शन के लिए किया जाता है. पंचमी वाले दिन पूजा से पहले कई पंडालों में स्थानीय महिलाओं द्वारा आनंद मेला की व्यवस्था की जाती है. इसमें स्वादिष्ट चॉप, कटलेट्स, फिटर्स, मिठाईयों के अलावा कई मजेदार स्नैनक खाने को मिलते हैं, अगर आप सच में खाने के शौकीन है तो एक बार आनंद मेले के उत्सव में जरूर जाएं.

दुर्गा पूजा पर कैसे रखें व्रत

Durga Puja Fast – Purpose and Rituals

पूजा वाले दिन भक्त सुबह जल्द उठकर दुर्गा अंजली होने तक उपवास करते हैं, उसके बाद फल और मिठाई खाकर अपना व्रत तोड़ते हैं. इसके बाद ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरूआत की जाती है. दुर्गा पूजा के मौके पर ज्यादातर शहरों में एक लाइन से कई पंडाल देखे जा सकते हैं और कई परिवार इन पंडालों में देवी दर्शन के लिए जाते हैं.

दोपहर के समय में देवी को पारंपरिक भोग जिसमें खिचड़ी, पापड़, मिक्स वेजिटेबल, टमाटर की चटनी, बैंगन भाजा के साथ रसगुल्ला भोग लगाया जाता है. अष्टमी वाले दिन, यह पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है, इस दिन भोग में कुछ विशेष चीजें शामिल की जाती हैं जिसमें खिचड़ी की जगह चावल, चना दाल, पनीर की सब्जी, मिक्स वेजिटेबल, बैंगन भाजा, टमाटर की चटनी, पापड़, राजभोग और पेयश भोग में चढ़ाया जाता है.

navratri essay

दुर्गा पंडाल की विशेषता

देवी की प्रतिमा: कोलकाता में नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के महिषासुर मर्दिनी स्वरुप को पूजा जाता है। दुर्गा पूजा पंडालों में दुर्गा की प्रतिमा महिसासुर का वध करते हुए बनाई जाती है। दुर्गा के साथ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी बनाई जाती हैं। इस पूरी प्रस्तुति को चाला कहा जाता है। देवी त्रिशूल को पकड़े हुए होती हैं और उनके चरणों में महिषासुर नाम का असुर होता है।

देवी के पीछे उनका वाहन शेर भी होता है। इसके साथ ही दाईं ओर होती हैं सरस्वती और कार्तिका, और बाईं ओर लक्ष्मी गणेश होते हैं।

साथ ही छाल पर शिव की प्रतिमा या तस्वीर भी होती है।

चोखूदान: कोलकाता में दुर्गा पूजा के लिए चली आ रही परंपराओं में चोखूदान सबसे पुरानी परंपरा है। ‘चोखूदान’ के दौरान दुर्गा की आंखों को चढ़ावा दिया जाता है।

about durga puja
durga pooja,
essay on durga puja in hindi for class 3,
durga puja paragraph,
दुर्गा पूजा,
essay on durga puja in hindi for class 6,
durga puja wikipedia,
essay on durga puja,
durga classes,
navratri essay,
essay on durga puja in hindi,
essay on durga puja in hindi for class 5,
durga puja essay,mahalaya 2020,

‘चाला’ बनाने में 3 से 4 महीने का समय लगता है। इसमें दुर्गा की आंखों को अंत में बनाया जाता है.

अष्टमी का महत्व: कोलकाता में अष्टमी के दिन अष्टमी पुष्पांजलि का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन सभी लोग दुर्गा को फूल अर्पित करते हैं। इसे मां दुर्गा को पुष्पांजलि अर्पित करना कहा जाता है। बंगाली चाहे किसी भी कोने में रहे, पर अष्टमी के दिन सुबह-सुबह उठ कर दुर्गा को फूल जरूर अर्पित करते हैं।

दो पूजा:

कोलकाता में दुर्गा का त्योहार केवल पंडालों तक ही सीमित नहीं है। यहां लोग दो तरह की दुर्गा पूजा करते हैं। दो अलग-अलग दुर्गा पूजा से अर्थ है एक जो बहुत बड़े स्तर पर दुर्गा पूजा मनाई जाती है, जिसे पारा कहा जाता है और दूसरा बारिर जो घर में मनाई जाती है। पारा का आयोजन पंडालों और बड़े-बड़े सामुदायिक केंद्रों में किया जाता है। वहीं दूसरा बारिर का आयोजन कोलकाता के उत्तर और दक्षिण के क्षेत्रों में किया जाता है।

कुमारी पूजा:

कोलकाता में संपूर्ण पूजा के दौरान देवी दुर्गा की पूजा विभिन्न रूपों में की जाती है इन रूपों में सबसे प्रसिद्ध रूप है- कुमारी. इस दौरान देवी के सामने कुमारी की पूजा की जाती है। यह देवी की पूजा का सबसे शुद्ध और पवित्र रूप माना जाता है। देवी के इस रूप की पूजा के लिए 1 से 16 वर्ष की लड़कियों का चयन किया जाता है और उनकी पूजा आरती की जाती है।

संध्या आरती:

संध्या आरती का इस दौरान खास महत्व है। कोलकाता में संध्या आरती की रौनक इतनी चमकदार और खूबसूरत होती है कि लोग इसे देखने दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं। बंगाली पारंपरिक परिधानों में सजे-धजे लोग इस पूजा की भव्यता और सुंदरता और बढ़ा देते हैं। चारों ओर उत्सव का माहौल समां बांध देता है।

संध्या आरती नौ दिनों तक चलने वाले त्योहार के दौरान रोज शाम को की जाती है। संगीत, शंख, ढोल, नगाड़ों, घंटियों और नाच-गाने के बीच संध्या आरती की रस्म पूरी की जाती है।

सिंदूर खेला:

दशमी के दिन पूजा के आखिरी दिन महिलाएं सिंदूर खेला खेलती हैं। इसमें वह एक-दूसरे पर सिंदूर से एक दूसरे को रंग लगाती हैं। और इसी के साथ अंत होता है इस पूरे उत्सव का, जिसकी तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती हैं।

धुनुची नृत्य :

धुनुची नृत्य असल में शक्ति नृत्य है। बंगाल पूजा परंपरा में यह नृत्य मां भवानी की शक्ति और ऊर्जा बढ़ाने के लिए किया जाता है। धुनुची में नारियल की जटा व रेशे (कोकोनट कॉयर) और हवन सामग्री (धुनी) रखी जाता है। उसी से मां की आरती की जाती है। धुनुची नृत्य सप्तमी से शुरू होता है और अष्टमी और नवमी तक चलता है।

विजय दशमी:

नवरात्रि त्योहार का आखिरी दिन दशमी होता है। इस दिन बंगाल की सड़कों में हर तरफ केवल भीड़ ही भीड़ दिखती है इस दिन यहां दुर्गा की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है, और इस तरह दुर्गा अपने परिवार के पास वापस लौट जाती हैं। इस दिन पूजा करने वाले सभी लोग एक दूसरे के घर जाते हैं। शुभकामनाएं और मिठाई देते हैं।

बंगाल का सच्चा और पवित्र सौंदर्य देखना है तो इन 9 दिनों में कोलकाता अवश्य जाना चाहिए। जैसे गुजरात में गरबा की चमक-दमक होती है वैसे ही पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की चहल-पहल देखते ही बनती है।

Leave a Comment