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इस पोस्ट के तहत हम शेरावाली माँ के प्यार में गाये गए बहुत सारे अच्छे और हिट गाने का संग्रह एक साथ करने का प्रयास कर रहे हैं

कैलाश पर्वत के निवासी भगवान शिव की अर्धांगिनी मां सती के ही शैलपुत्री‍, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायिनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री आदि कई रूप हैं।

यह माता सती ही अपने दूसरे जन्म में पार्वती नाम से विख्यात हुई थी। हम उनकी आराधना में ये गाने पेश कर रहे हैं

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उम्मीद है की दर्शक हमारे दूसरे कलेक्शन जिसमे man ka dil song download mp3,आदि सांग रहेंगे उसको पसंद करेंगे ।

quran in hindi | सूरह फातिहा

यह सूरह मक्की है, इसमें सात आयते है। यह सूरह आरंभिक युग मे मक्का मे उतरी है, जो कुरान की भूमिका है। इसी कारण इस का नाम ((सुरहा फातिहा)) अर्थात: “आरंभिक सूरह “है।

इस का चमत्कार यह है की इस की सात आयतों में पूरे कुरान का सारांश रख दिया गया है। इसमे अल्लाह की दया, उस के पालक तथा पूज्य होने के गुणों को वर्णित किया गया है।

सुरह के अर्थो पर विचार करने से बहुत से तथ्य उजागर हो जाते है| और ऐसा प्रतीत होता है की सागर को गागर मे बंद कर दिया गया है ।

इस सुरह में अल्लाह के गुण–गान तथा उस से पार्थना करने की शिक्षा दी गई है की अल्लाह की सराहना और प्रशंशा किन शब्दो से की जाये। इसी प्रकार इस मे बंदो को न केवल वंदना की शिक्षा दी गई है बल्कि उन्हें जीवन यापन के गुण भी बताये गये है।

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सूरए फातेहा मक्का में नाजि़ल हुआ और इस की 7 आयते हैं


शुरू करता हूँ ख़ु़दा के नाम से जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है (1)
सब तारीफ ख़ु़दा ही के लिए सज़ावार है (2)
और सारे जहाँन का पालने वाला बड़ा मेहरबान रहम वाला है (3)
रोज़े जज़ा का मालिक है (4)


ख़ु़दाया हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद चाहते हैं (5)
तो हमको सीधी राह पर साबित क़दम रख (6)
उनकी राह जिन्हें तूने (अपनी) नेअमत अता की है न उनकी राह जिन पर तेरा ग़ज़ब ढ़ाया गया और न गुमराहों की (7)

Gayatri mantra in bengali

গায়ত্রী মন্ত্রের দেবতা সবিতা। ঋগ্বেদের ২য় মন্ডলের ৩৮ সূক্তের ৭ থেকে ১১ নং মন্ত্রে সূর্য বা সবিতাকে সকল শক্তির উত্স বলে তার স্তুতি করা হয়েছে। এই মন্ত্রে বলা হয়েছে, 

হে সবিতা, তুমি অন্তরীক্ষ, জল, স্থল সকল কিছু সৃষ্টি করেছ। তুমি সকল ভূত, পশুপাখী, স্থাবর জঙ্গম ইত্যাদিকে স্ব স্ব স্থানে রেখেছ। ইন্দ্র, বরুণ, মিত্র, অর্য্যমা বা রুদ্র সবাই তোমার শক্তিতে বলীয়ান। কেউ তোমাকে হিংসা করে না। হে পরমেশ্বর, তোমার দুতিমান জ্যোতিকে (অথ্যাৎ, সকল প্রকাশ যুক্তশক্তি এবং অপ্রকাশিত অতিন্দ্রিয় শক্তিকে) আমরা নমষ্কার করি। তুমি সকলের কল্যাণ কর। আমাদের জন্যে যেন সকল কিছু শুভ হয়। 

এটাই এই গায়ত্রী মন্ত্রের দেবতা সবিতার তাত্পর্য। বেদভাষ্যকার সায়নাচার্য গায়ত্রী মন্ত্রে সূর্য ও সবিতার দুই রকম অর্থ করেছেন। তার মতে এই মন্ত্রে সবিতা হল, সকল কারণের কারণ সেই সচ্চিদানন্দ নিরাকার পরম ব্রহ্ম বা জগত স্রষ্টা। “সু” ধাতু থেকে সবিতৃ নিষ্পন্ন হয়েছে, যায় জন্যে সবিতার অর্থ এক্ষেত্রে প্রসবিতা বলে উল্লিখিত হয়েছে। নিরুক্তিকার যস্ক এর অর্থ করেছেন “সর্ব্বস্য প্রসবিতা।

Ganesh Vandana in hindi | गणेश वंदना

| Agneepath Song | ganesh vandana in hindi written

देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा

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देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,

ज्वाला सी चलती है आँखों में जिसके भी
दिल में तेरा नाम है
परवाह ही क्या उसका आरंभ कैसा है
और कैसा परिणाम है

धरती अंबार सितारे है
उसस्की नज़ारे उतारें
दर्र भी यूयेसेस से डरा रे
जिसकी रखवालिया रे करता साया तेरा

देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,

हूओतेरी भक्ति का वरदान है
जो कमाए वो धनवान है
बिन किनारे की कश्ती है वो
देव, तुझसे जो अंजान है

यूँ ट्टो मूषक सवारी तेरी
सब पे है पहरेदारी तेरी
पाप की आँधियाँ ना कहा
कभी ज्योति ना हारी तेरी

अपनी तक़दीर का वो
खुद सिकंदर हुआ रे
भूल के यह जहाँ रे
किसकी सीलिएन या हारे
साथ पाया तेरा
हे

देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,

हो तेरी धूलि का टीका किए
देव जो भक्त तेरा जिए
उसे अमृत का है मो है क्या
हस्स के विष का वो प्याला पिए

तेरी महिमा की छ्चाया तले
काल के रात का पहिया चले
एक चिंगारी प्रतिशोध से
खड़ी रवाँ की लंका जले

शत्रुओं की क़तारें
इक अकेले से हारे
कन्न भी पर्वत हुआ रे
श्लोक बॅन के जहाँ रे
नाम आया तेरा हे

देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,
देव श्री गणेशा, देव श्री गणेशा,

गणपति बप्पा मोरेया
त्वामेवा माता छा पिता त्वामेवा
त्वामेवा बंधु सखा त्वामेवा
त्वामेवा विद्या द्रविनम त्वामेवा
त्वामेवा सर्वाँ मम देव देव

अचूतम केशवाँ रामा नारायनाँ
कृष्णा दामोदराम वासुदेवं हारीं
सृईधरम माधाओं गोपिका वल्लभं
जानकी नायकम रमचंड्रम भजे
हारे राम हारे राम, राम राम हारे हारे
हारे कृष्णा हारे कृष्णा कृष्णा कृष्णा हारे हारे

वक्रतुंडा महकाया सूर्या कोटि समप्रभा |Vakratunda mahakaya

Ganesh Slok Shankar Mahadevan

ganesh vandana by shankar mahadevan lyrics in hindi

वक्रतुंडा महकाया सूर्या कोटि समप्रभा
निर्विघ्नम कुरुमेदेव सर्वाकारयेशू सर्वदा
गुरावे सर्वा लोकनाम भीषाजे भावा रोगिणाम
निधाए सर्वा विद्यानाँ दक्षीणामुर्ताए नमः

ओम नमः प्राणवर्ताया शुद्धा ज्ञानेका मूर्ताए
निर्मालया प्रशांताया दक्षिणा मूर्ताए नमः
ईश्वरो गुरु आतमेटी मूर्ति भेदा विभागिनी
व्यॉमवत व्याप्त देहाया दक्षिणा मूर्ताए नमः

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Ganpati Bappa Morya | Ganesh Vandana in hindi

ganesh vandana lyrics in hindi

गणपति बाप्पा मोरया,
मंगल मूर्ती मोरया
मोरया रे, बाप्पा मोरया रे

देवा हो देवा, गणपति देवा,
तुमसे बढ़कर कौन
स्वामी तुमसे बढ़कर कौन

और तुम्हारे भक्तजनों में,
हमसे बढ़कर कौन
हमसे बढ़कर कौन

देवा हो देवा, गणपति देवा,
तुमसे बढ़कर कौन
स्वामी तुमसे बढ़कर कौन

अद्भुत रूप ये काया भारी,
महिमा बड़ी है दर्शन की
प्रभु महिमा बड़ी है दर्शन की

बिन मांगे पूरी हो जाए,
जो भी इच्छा हो मन की
प्रभु जो भी इच्छा हो मन की

गणपति बाप्पा मोरया,
मंगल मूर्ती मोरया
देवा हो देवा, गणपति देवा,
तुमसे बढ़कर कौन
स्वामी तुमसे बढ़कर कौन

और तुम्हारे भक्तजनों में,
हमसे बढ़कर कौन
हमसे बढ़कर कौन

छोटी सी आशा लाया हूँ
छोटे से मन में दाता
इस छोटे से मन में दाता

माँगने सब आते हैं
पहले सच्चा भक्त ही है पाता
सच्चा भक्त ही है पाता

देवा हो देवा, गणपति देवा,
तुमसे बढ़कर कौन
स्वामी तुमसे बढ़कर कौन

और तुम्हारे भक्तजनों में,
हमसे बढ़कर कौन
हमसे बढ़कर कौन

भक्तों की इस भीड़ में
ऐसे बगुला भगत भी मिलते हैं
हाँ बगुला भगत भी मिलते हैं

भेस बदल कर के भक्तों का
जो भगवान को छलते हैं
अरे जो भगवान को छलते हैं

गणपति बाप्पा मोरया,
मंगल मूर्ती मोरया
देवा हो देवा, गणपति देवा,
तुमसे बढ़कर कौन
स्वामी तुमसे बढ़कर कौन

और तुम्हारे भक्तजनों में,
हमसे बढ़कर कौन
हमसे बढ़कर कौन

एक डाल के फूलों का भी
अलग अलग है भाग्य रहा
प्रभु अलग अलग है भाग्य रहा

दिल में रखना दर उसका
मत भूल विधाता जाग रहा
मत भूल विधाता जाग रहा

गणपति बाप्पा मोरया,
मंगल मूर्ती मोरया
देवा हो देवा, गणपति देवा,
तुमसे बढ़कर कौन
स्वामी तुमसे बढ़कर कौन

और तुम्हारे भक्तजनों में,
हमसे बढ़कर कौन
हमसे बढ़कर कौन

देवा हो देवा, गणपति देवा,
तुमसे बढ़कर कौन
स्वामी तुमसे बढ़कर कौन

हे गजवदना, गौरी नंदना |Ganesh Vandana written

हे गजवदना, गौरी नंदना
रक्षा करो सबकी।

मंगलमय हो जीवन सारा
धारा बहे सुख की॥

हे गजवदना, गौरी नंदना
रक्षा करो सबकी।
मंगलमय हो जीवन सारा
धारा बहे सुख की॥

रिद्धि सिद्धि के दाता,
तुम हो विद्या के स्वामी।

विघ्न विनाशक एकदंत हो
तुम अन्तर्यामी।

चिन्तामणि का करे जो चिन्तन
चिंता हरो उसकी॥

हे गजवदना, गौरी नंदना
रक्षा करो सबकी।
मंगलमय हो जीवन सारा
धारा बहे सुख की॥

विश्वविधाता विश्वविनायक
जग के पालनहारे।

नाद ब्रह्म के तुम निर्माता
सुर गण तुम पर वारे।

तुम ही प्रेरणा, तुम ही चेतना
आस है दर्शन की॥

हे गजवदना, गौरी नंदना
रक्षा करो सबकी।
मंगलमय हो जीवन सारा
धारा बहे सुख की॥

हे गजवदना, गौरी नंदना
रक्षा करो सबकी।
मंगलमय हो जीवन सारा
धारा बहे सुख की॥

Mira Bai Bhajan Lyrics video | मीरा बाई जी के भजन

Mira bai | Bhajan Lyrics

बाला मैं बैरागन हूंगी

बाला मैं बैरागन हूंगी – २
जिन भेषा मेरो साहब रीझे
सोहि भेष धरूंगी
बाला मैं बैरागन हूंगी

कहो तो कुसुमल साड़ी रंगावा
कहो तो भगवा भेष
कहो तो मोतियन मांग भरावा
कहो छिटकावा केश
बाला मैं बैरागन हूंगी

प्राण हमारा वह बसत है
यहाँ तो खाली खोड़
मात पिता परिवार सहूँ है
कही ये दिन का तोड़
बाला मैं बैरागन हूंगी

बाला मैं बैरागन हूंगी – २
जिन भेषा मेरो साहब रीझे
सोहि भेष धरूंगी
बाला मैं बैरागन हूंगी

स्वर – वाणी जयराम
संगीत – पंडित रवि शंकर
फिल्म – मीरा बाई

Mere to girdhar gopal

मेरे तो गिरधर गोपाल| Bhajan lyrics Meera Bai video

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो ना कोई
जाके सर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई

कोई कहे कारो,कोई कहे गोरो
लियो है अँखियाँ खोल
कोई कहे हलको,कोई कहे भारो
लियो है तराजू तौल
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई

कोई कहे छाने,कोई कहे छुवने
लियो है बजन्ता ढोल
तन का गहना मैं सब कुछ दीन्हा
लियो है बाजूबंद खोल
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई

असुवन जल सींच-सींच प्रेम बेल बोई
अब तो बेल फ़ैल गयी
आनंद फल होई
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई

तात-मात भ्रात बंधू
आपणो ना कोई
छाड़ गयी कुल की कान
का करीहे कोई?
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई

चुनरी के किये टोक
ओढली लिए लोई
मोती-मूंगे उतार
बन-माला पोई
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई

फिल्म – मीरा बाई
संगीत – पंडित रवि शंकर
स्वर – वाणी जयराम

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Mira bai bhajan Lyrics

किणु संग खेलूं होली, पिया तज गए हैं अकेली

माणिक मोती सब हम छोड़े, गल में पहनी सेली
भोजन भवन बलो नहीं लागे, पिया कारण भई रे अकेली,
मुझे दूरी क्यों मेलि, पिया तज गए हैं अकेली
किणु संग खेलूं होली…

अब तुम प्रीत अवरसो जोड़ी, हम से करी क्यों पहेली
बहु दिन बीते अजहू आ आये, लगा रही ताला बेली
कीनू दिलमा ये हेली, पिया तज गए हैं अकेली
किणु संग खेलूं होली…

श्याम बिना जीयड़ो मुरझावे, जैसे जल बिन बेली
मीरा को प्रभु दर्शन दीजो, मैं तो जनम जनम की चेली
दरश बिना खड़ी दोहेली, पिया तज गए हैं अकेली
किणु संग खेलूं होली…


स्वरलता मंगेशकर
कविमीरा बाई
श्रेणीकृष्ण भजन

करम की गति न्यारी न्यारी ।

karam ki gati nyari nyaari |

Mira Bai Bhajan video

करम की गति न्यारी न्यारी ।

बड़े बड़े नयन दिए मिरगन को,
बन बन फिरत उधारी॥

उज्वल वरन दीन्ही बगलन को,
कोयल लार दीन्ही कारी॥

औरन दीपन जल निर्मल किन्ही,
समुंदर कर दीन्ही खारी॥

मूर्ख को तुम राज दीयत हो,
पंडित फिरत भिखारी॥

मीरा के प्रभु गिरिधर नागुण
राजा जी को कौन बिचारी॥


स्वर लता मंगेशकर
कवि मीरा बाई
श्रेणी विविध भजन

he ri mai to prem diwani | Meera Bai poetry

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय

हे री मैं तो प्रेम-दिवानी मेरो दरद न जाणै कोय।
दरद की मारी बन बन डोलूं बैद मिल्यो नही कोई॥

ना मैं जानू आरती वन्दन, ना पूजा की रीत।
लिए री मैंने दो नैनो के दीपक लिए संजोये॥

घायल की गति घायल जाणै, जो कोई घायल होय।
जौहरि की गति जौहरी जाणै की जिन जौहर होय॥

सूली ऊपर सेज हमारी, सोवण किस बिध होय।
गगन मंडल पर सेज पिया की, मिलणा किस बिध  होय॥

दरद की मारी बन-बन डोलूं बैद मिल्या नहिं कोय।
मीरा की प्रभु पीर मिटेगी जद बैद सांवरिया होय॥

कवि मीरा बाई

Baisakhi 2020 essay in hindi | बैसाखी 2020


वैसाखी  जिसे बैसाख के नाम से भी जाना जाता है, सिख धर्म में एक ऐतिहासिक और धार्मिक त्योहार है । यह आमतौर पर हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है जो 1699 में गुरु गोविंद सिंह के अधीन योद्धाओं के खालसा पंथ के गठन की स्मृति में था।

बैसाखी नाम वैशाख से बना है। पंजाब और हरियाणा के किसान सर्दियों की फसल काट लेने के बाद नए साल की खुशियाँ मनाते हैं। इसीलिए बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है। यह रबी की फसल के पकने की खुशी का प्रतीक है।

  सिख इस त्योहार को सामूहिक जन्मदिवस के रूप में मनाते हैं।  यह त्योहार सिख और हिन्दुओं दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य क्षेत्रों में जैसे पोहेला बोशाख, बोहाग बिहू, विशु, पुथंडु और अन्य क्षेत्रों में वैशाख के दिन मनाए जाते हैं।

वैसाखी सिख धर्म और पंजाब क्षेत्र में होने वाले भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास की प्रमुख घटनाओं का अवलोकन करती है ।

Baisakhi or Vaisakhi  festival History in hindi

कहा जाता है कि सन 1699 मे इसी दिन सिक्खो के अंतिम गुरु, गुरु गोबिन्द सिह जी ने सिक्खो को खालसा के रूप मे संगठित किया था, तो यह भी इस दिन को खास बनाने का एक कारण है

सिख धर्म को चिह्नित करने वाले एक प्रमुख सिख त्योहार के रूप में वैसाखी का महत्व है ।  मुगल सम्राट औरंगजेब के आदेश के तहत इस्लाम में बदलने से इनकार करने के बाद गुरु तेग बहादुर के उत्पीड़न और शहीद हो जाने के बाद शुरू हुआ।

वैसाखी ने सिखों के दसवें गुरु के राज्याभिषेक और खालसा के ऐतिहासिक गठन, दोनों को वैशाखी के दिन शुरू हुआ ।

baisakhi in hindi
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रणजीत सिंह को 12 अप्रैल 1801 (वैसाखी के साथ मेल खाना) में सिख साम्राज्य के महाराजा के रूप में घोषित किया गया था। गुरु नानक देव के वंशज साहिब सिंह बेदी ने राज्याभिषेक किया। वैसाखी वह दिन था जब ब्रिटिश साम्राज्य के अधिकारियों ने एक सभा पर जलियांवाला बाग हत्याकांड को अंजाम दिया था ।

बैसाखी पर्व महत्त्व | Baisakhi or Vaisakhi Festival  Importance


वैसाखी पर गुरुद्वारों को सजाया जाता है और स्थानीय गुरुद्वारों, सामुदायिक मेलों और नगर कीर्तन के जुलूसों में जाने से पहले सिखों का दौरा किया जाता है और झीलों या नदियों में स्नान किया जाता है ।

बैसाखी का पर्व किसानो का प्रमुख त्योहार होता है, किसान इस दिन अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान को धन्यवाद देते है.

वैसाखी पंजाब क्षेत्र के लोगों के लिए एक फसल उत्सव है। पंजाब में वैसाखी में रबी की फसल पकने का निशान है। वैसाखी भी पंजाबी नए साल का प्रतीक है। यह दिन किसानों द्वारा धन्यवाद दिवस के रूप में मनाया जाता है । किसान भगवान को भरपूर फसल के लिए धन्यवाद देते हैं और भविष्य की समृद्धि के लिए प्रार्थना भी करते हैं ।

बैसाखी पर्व कब है  | Baisakhi festival 2020 Date

.यह पर्व हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है. हर साल मनाये जाने वाले इस त्योहार बैसाखी का सिक्खों मे विशेष महत्त्व है

वैसाखी शायरी इन हिंदी

Easter 2020 meaning in Hindi | ईस्टर

Easter 2020-ईस्टर ईसाइयों का सबसे बड़ा पर्व है। ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने की खुशी में ईस्टर पर्व मनाया जाता है. मान्यताओं के अनुसार गुड फ्राइडे के तीसरे दिन ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे, जिसे ईसाई धर्म के लोग ईस्टर संडे के नाम से मनाते हैं. ईस्टर खुशी का दिन होता है।ईस्टर का पर्व नव जीवन के बदलाव के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। 

‘ईस्टर’ का मतलब ईस्टर शब्द की उत्पत्ति जर्मन के “ईओस्टर” शब्द से हुई हैं जिसका अर्थ देवी हैं।

इसे वो मृतोत्थान दिवस या मृतोत्थान रविवार भी कहते हैं । 26 और 36 ई.प. के बीच में हुई उनकी मृत्यु और उनके जी उठने के कालक्रम को अनेकों तरीके से बताया जाता है।

ईस्टर की आराधना उषाकाल में महिलाओं द्वारा की जाती है क्योंकि इसी वक्त यीशु का पुनरुत्थान हुआ था . ईस्टर के दिन उषाकाल में होने वाली प्रार्थना के बाद दोपहर 12 बजे से पूर्व में भी आराधना होती है। इसमें पुनरुत्थान प्रवचन व प्रार्थना होती है।

क्रिसमस के अलावा ईस्टर ईसाई धर्म का सबसे बड़ा पर्व है. दोनों ही पर्व ईसाह मसीह के जन्मदिन के रूप में मनाए जाते हैं. इस बार Easter 2020-ईस्टर 12 अप्रैल के दिन मनाया जा रहा है. ईस्टर एक गतिशील त्यौहार है, जिसका अर्थ है कि ये नागरिक कैलेंडर के अनुसार नहीं चलता.

Why Easter is Celebrated in Hindi? क्यों मनाया जाता है ईस्टर पर्व?

ईसाई धर्म के अनुसार  हजारों साल पहले गुड फ्राइडे के दिन ईसाह मसीह को यरुशलम की पहाड़ियों पर सूली पर चढ़ाया गया था. इसके बाद गुड फ्राइड के तीसरे दिन यानी पहले संडे को ईसाह मसीह दोबारा जीवित हो गए थे. माना जाता है कि पुनर्जन्म के बाद ईसा मसीह करीब 40 दिन तक अपने शिष्यों के साथ रहे थे. इसके बाद वे हमेशा के लिए स्वर्ग चले गए थे.  शुरुआती समय में ईसाई धर्म को मानने वाले अधिकांश यहूदी थे। जिन्होंने प्रभु यीशु के जी उठने को ईस्टर घोषित कर दिया। 

इसलिए ईस्टर पर्व का जश्न पूरे 40 दिन तक मनाया जाता है. लेकिन आधिकारिक तौर पर ईस्टर पर्व 50 दिनों तक चलता है. इस पर्व को ईसाई धर्म के लोग बड़ी धूम-धाम और उत्साह से मनाते हैं.

मृतोत्थान ने यीशु को ईश्वर के एक शक्तिशाली पुत्र के रूप में स्थापित किया और इस बात को उद्धृत करते हुए प्रमाण दिया कि ईश्वर इस सृष्टि का न्यायोचित इंसाफ करेंगे.

 “मृत्यु के बाद यीशु के जी उठने द्वारा ईश्वर ने ईसाइयों को एक नए जन्म की जीती-जागती आशा दी.”  ईश्वर के कार्य पर विश्वास के साथ ईसाई आध्यात्मिक रूप से यीशु के साथ ही पुनर्जीवित हुए ताकि वो जीवन को एक नए तरीके से जी सके.

How is Easter Celebrated in hindi ? कैसे मनाया जाता है ईस्टर?

ईस्टर सन्डे के दिन सभी लोग सुबह फिर से एकत्रित होते हैं और गिरजाघर में मोमबत्ती जलाकर ईसा के पुन:जीवित होने की ख़ुशी मनाते हैं। ईसा की अराधना करते हैं और प्रभु भोज में शामिल होते हैं। भोज करने के बाद एक दुसरे को ईसा के दुबारा जीवित होने की शुभकामनाएं देते हैं।

  • ईस्टर पर्व के पहले सप्ताह को ईस्टर सप्ताह कहा जाता है. लोग प्रार्थना करते हैं, व्रत रखते हैं.
  •   चर्चों को खास तौर पर सजाया जाता है.
  • इस दिन चर्च में मोमबत्तियां जलाई जाती हैं. कई लोग इस दिन अपने घरों को भी मोमबत्तियों से रौशन करते हैं. असंख्य मोमबत्तियां जलाकर प्रभु यीशु में अपने विश्वास प्रकट करते हैं। यही कारण है कि ईस्टर पर सजी हुई मोमबत्तियां अपने घरों में जलाना तथा मित्रों में इन्हें बांटना एक प्रचलित परंपरा है। 
  • ईस्टर डे के दिन विशेष तौर पर बाइबल का पाठ किया जाता है.

Easter Sunday and Egg Importance in hindi | ईस्टर पर अंडे का महत्व

ईस्टर पर्व पर अंडे का खास महत्व होता है.  लोग ईस्टर पर्व पर अंडे सजाकर एक दूसरे को गिफ्ट करते हैं. उनकी मान्यता है कि अंडे अच्छे दिनों की शुरुआत और नए जीवन का संदेश देते हैं. दरअसल, लोगों का मानना है कि अंडे में से जिस तरह एक नया जीवन उत्पन्न होता है, वह लोगों को नई शुरुआत का संदेश देता है.

Easter 2020 Images

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Good friday meaning in hindi | गुड फ्राइडे

भारत में  हर जाति के लोग अपने त्यौहार अपनी पद्धति से मनाते है. क्रिश्चियन लोगो का गुड फ्राइडे व ईस्टर बहुत महत्वपूर्ण त्यौहार है,. इसी के साथ गुड फ्राइडे शुक्रवार और ईस्टर रविवार को बनाया जाता है जो क्रिश्चियन समाज के लिये बहुत पवित्र शुक्रवार व रविवार मे से एक है

गुड फ्राइडे को होली फ्राइडे, ब्लैक फ्राइडे या ग्रेट फ्राइडे भी कहते हैं। यह त्यौहार ईसाई धर्म के लोगों द्वारा  ईसा मसीह को सलीब पर चढ़ाने के कारण हुई मृत्यु के उपलक्ष्य में मनाया है। यह त्यौहार पवित्र सप्ताह के दौरान मनाया जाता है, जो ईस्टर सन्डे से पहले पड़नेवाले शुक्रवार को आता है ।

ईसाई लोग इस दिन को शोक की तरह मनाते हैं. ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि यही वो दिन था जिस दिन प्रभु ईसा मसीह को तमाम शारीरक यातनाएं देने के बाद सूली पर चढ़ाया गया था.कहा जाता है कि ईसा ने बहुत कठिन उपवास किये  त्याग व आत्म बलिदान किया. आज लोग उसी का अनुसरण करते हुए उनके इस बलिदान को याद करते है और उनके लिये उपवास रखते है.

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story behind good friday in hindi | ईसा ने दिया लोगों को मानवता का उपदेश

कहा जाता है कि 2000 साल पहले यरुशलम में ईसा लोगों को मानवता एकता और अहिंसा का उपदेश दे रहे थे. उनके उपदेशों से प्रभावित होकर वहां के लोगों ने उन्हें ईश्वर मानना शुरू कर दिया. इस बात से वहां धार्मिक अंधविश्वास फैलाने वाले धर्मगुरु उनसे चिढ़ने लग गए.

लोगों के बीच ईसा की बढ़ती लोकप्रियता वहां के ढोंगी धर्मगुरुओं का अखरने लगी. उन्होंने ईसा की शिकायत रोम के शासक पिलातुस से कर दी. उन्होंने पिलातुस को बताया कि खुद को ईश्वरपुत्र बताने वाला यह युवक पापी होने के साथ ईश्वर राज की बातें भी करता है.

शिकायत मिलने के बाद ईसा पर धर्म की अवमानना के साथ राजद्रोह का आरोप लगाया गया. इसके बाद ईसा को क्रूज पर मत्यु दंड देने का फरमान जारी कर दिया गया. कोड़ें-चाबुक बरसाने और कांटों का ताज पहनाने के बाद कीलों से ठोकते हुए सूली पर लटका दिया गया.

ईसा मसीह को लोगो ने जबरदस्ती सूली पर चढ़ा दिया था। लोगो का मानना था की वो कोई भगवान नहीं है बल्कि भगवान होने का नाटक करके लोगो को धोखा दे रहे है। वैसे तो यह एक शोक का दिवस है लेकिन ईसाई धर्म के लोग इसे गुड फ्राइडे के रूप में मनाते है। जिन लोगो ने उन्हें सूली पर लटकाकर सज़ा दी थी उन्हें ईसा ने कुछ नहीं कहा था बल्कि यह बोला थे की ईश्वर इन्हे क्षमा करे यह खुद नहीं जानते की यह क्या कर रहे है। उन्हें सूली पर लटकाने के दो दिन बाद वो ज़िंदा हो गए थे तब उन लोगो को अपनी गलती का एहसास हुआ था लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 

इसी दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था और उस दिन फ्राइडे था इसीलिए हर साल अप्रैल में इस फ्राइडे को गुड फ्राइडे के नाम से मनाया जाता है।

ईसा लोगो को मानवता और शांति का सन्देश देते थे लेकिन कुछ लोगो ने उनपर अन्धविश्वास फ़ैलाने का आरोप लगाया और उन्हें मृत्यु दंड की सज़ा मिली। उनका मानना है की ईसा उनके दिल में आज भी ज़िंदा है।

history of good friday 2020 in hindi | गुड फ्राइडे

इस दिन ईसा मसीह की मृत्यु हुई थी उन्ही की याद में ईसाई धर्म के लोग इस दिन को मनाते है। इस दिन लोग चर्च में जाकर भगवान यशु को याद करते  है। इस दिन चर्च की घंटी नहीं बजाई जाती है।

 शाम के समय लोग काले रंग के कपडे पहन कर एक शोक यात्रा निकालते है। सभी लोग ईसा मसीह पर हुए अत्याचार को याद करते है। ईसा मसीह को 3 घंटे तक क्रॉस पर लटकाकर तड़पाया गया था और उन्हें सज़ा दी गई थी। गुड फ्राइडे को एक प्रार्थना दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्रॉस को ईसा मसीह का प्रतिक माना जाता है लोग इसे श्रद्धा के साथ चूमते है और भगवान पर हुए अत्याचार का शोक मनाकर उन्हें दिल से याद करते है।

गुड फ्राइडे के दिन बहुत से लोग समाज के कार्यो के लिए चंदा और दान देते है ।इस दिन सभी लोग दुनिया में प्रेम और विश्वास फ़ैलाने के लिए प्रार्थना करते है

बहुत से लोग इसदिन प्रेम, सत्य और विश्वास की डगर पर चलने का प्रण लेते है। यह दिन सभी जगह पर अलग अलग तरीके से मनाया जाता है लेकिन सब मिलकर ईसा मसीह को याद करते है।

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motivational story in hindi for success – महावीर जैन 30 की उम्र में क्यों घर से निकल गए ?

पूरे भारत वर्ष मे महावीर जयंती जैन समाज द्वारा भगवान महावीर के जन्म उत्सव के रूप मे मनाई जाती है. इस त्योहार को महावीर जयंती के साथ साथ महावीर जन्म कल्याणक नाम से भी जानते है. महावीर जयंती हर वर्ष चैत्र माह के 13 वे दिन मनाई जाती है, इस दिन हर तरह के जैन दिगम्बर, श्वेताम्बर आदि एक साथ मिलकर इस उत्सव को मनाते है

भगवान महावीर जैन समाज के 24वें तीर्थंकर थे. तीर्थंकर मतलब जो इंसान के रूप में महान आत्मा या भगवान जो कि अपने ध्यान और ईश्वर की तपस्या से भगवान बना हो. किसी भी जैन के लिए महावीर किसी भगवान से कम नहीं है .उनके दर्शन करने को गीता के ज्ञान के समान माना गया है.

भगवान महावीर का जीवन उनके जन्म के ढाई हजार साल भी पूरी दुनिया को अहिंसा का पाठ पढ़ा रहा है. पंचशील सिद्धान्त के प्रर्वतक और जैन धर्म के चौबिसवें तीर्थंकर महावीर स्वामी अहिंसा के प्रमुख ध्‍वज वाहकों में से एक हैं. जैन ग्रंथों के अनुसार, 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ जी के मोक्ष प्राप्ति के  298 वर्ष बाद महावीर स्वामी का जन्म‍ ऐसे युग में हुआ, जहां पशु‍बलि, हिंसा और जाति-पाति के भेदभाव का अंधविश्वास था. 

Mahavir jain life in hindi |भगवान महावीर का जीवन

महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था. 30 साल की उम्र में उन्होंने अपना घर त्यागकर लोगों के मन में आध्यात्मिक जागृति के लिए संन्यास ले लिया और अगले साढ़े 12 वर्षों तक उन्होंने गहरा तप और ध्यान किया. तप से ज्ञान अर्जित कर लेने के बाद भगवान महावीर ने पूरे भारतवर्ष में अगले 30 सालों तक जैन धर्म का प्रचार प्रसार किया

  Mahavir jain information in hindi | महावीर स्वामी का जीवन परिचय

क्र. . बिंदु(Points) जानकारी (Information)
1. नाम(Name) महावीर
2. वास्तविक नाम (Real Name) वर्धमान
3. जन्म(Birth) 599 ईसा पूर्व
4. जन्म स्थान (Birth Place) कुंडलग्राम
5. पत्नी का नाम (Wife Name) यशोदा
6. वंश(Dynasty) इक्ष्वाकु
7. पिता (Father Name) राजा सिद्धार्थ
8. पुत्र(Son) प्रियदर्शन
9. मोक्षप्राप्ति(Death) 527 ईसा पूर्व
10. मोक्षप्राप्ति स्थान(Death Place) पावापुरी, जिला नालंदा, बिहार

life of mahavira in hindi |महावीर स्वामी

महावीर स्वामी(Mahavira Swami) का जन्म एक राजसी क्षत्रिय परिवार में हुआ। भगवान महावीर का जन्म लगभग 600 वर्ष पूर्व क्षत्रियकुण्ड नगर मे हुआ. भगवान महावीर की माता का नाम महारानी त्रिशला था . भगवान महावीर को कई नामो से पुकारा गया उनमे से प्रमुख है  वर्धमान, महावीर, सन्मति, श्रमण आदि थे. महावीर स्वामी के भाई नंदिवर्धन और बहन सुदर्शना थी.

बचपन से ही महावीर तेजस्वी और साहसी थे. इसलिए इनका नाम “महावीर” पड़ा। शिक्षा पूरी होने के बाद इनके माता—पिता ने इनका विवाह राजकुमारी यशोदा के साथ कर दिया. बाद में उन्हें एक पुत्री प्रियदर्शना की प्राप्ति हुई, जिसका विवाह जमली से हुआ

ऊँचे महल के  शानशौकत उन्हें ज्यादा पसंद नहीं थे । राजा सिध्दार्थ ने उनका विवाह यशोधरा से करने का प्रस्ताव रखा तो उसके लिए भी महावीर स्वामी तैयार नहीं थे। लेकिन पिता की आज्ञा की वजह से उन्होंने यशोधरा से विवाह किया और इससे उनकी एक सुन्दर पुत्री प्रियदर्शना ने जन्म लिया

श्वेताम्बर जैन गुरूओ का मानना है है कि वर्द्धमान का विवाह यशोधरा से हुआ था लेकिन दिगम्बर सम्प्रदाय में ऐसी मान्यता है कि वर्द्धमान का विवाह नहीं हुआ था| वह बाल ब्रह्मचारी थे|

lord mahavira in hindi | महावीर स्वामी का वैराग्य

जब महावीर 28 साल के थे तब उनके माता-पिता की मृत्यु हो गयी थी । उनके मन मे वैराग्य लेने की इच्छा जागृत हुई  परंतु  उनके बड़े भाई  ने कुछ समय रुकने का आग्रह किया. अपने भाई की आज्ञा का मान रखते हुये 2 वर्ष पश्चात 30 वर्ष की आयु मे वैराग्य लिया.

इतनी कम आयु में घर का त्याग कर ‘केशलोच’ के साथ जंगल में रहने लगे. अब वह जंगल में एक अशोक के वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यान लगाया करते वर्द्धमान महावीर ने 12 साल तक मौन तपस्या की और तरह-तरह के कष्ट झेले। अन्त में उन्हें ‘केवलज्ञान’ प्राप्त हुआ।। उन्होंने शांति प्राप्त की, अपने गुस्से पर काबू करना सिखा, हर प्राणी के साथ उन्होंने अहिंसा की नीति अपनाई.

12 साल तपस्या करने के दौरान वे बिहार, बंगाल, उड़ीसा और उत्तरप्रदेश भी गए. वहाँ पर उन्होंने जैन धर्म का प्रचार किया. इसके बाद उन्हें ‘केवलिन’ नाम से जाना गया तथा उनके उपदेश चारों और फैलने लगे

teaching of mahavira in hindi | महावीर जैन शिक्षाएं

महावीर जैन ने लोगों को जीवन का एक मूल मन्त्र दिया। उनकी दी हुई शिक्षाएं इस प्रकार हैं –सत्य, अहिंसा, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह

सत्य –सत्य सबसे बलवान है और हर इंसान को किसी भी परिस्थिति में सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। सदा सत्य बोलो।

अहिंसा – दूसरों के प्रति हिंसा की भावना नहीं रखनी चाहिए। जितना प्रेम हम खुद से करते हैं उतना ही प्रेम दूसरों से भी करें।

अस्तेय – महावीर जैन कहते हैं कि दूसरों की चीज़ों को चुराना और दूसरों की चीज़ों की इच्छा करना महापाप है। जो मिला है उसमें संतुष्ट रहें।

बृह्मचर्य – महावीर जी कहते हैं कि बृह्मचर्य सबसे कठोर तपस्या है और जो पुरुष इसका पालन करते हैं वो मोक्ष की प्राप्ति करते हैं

अपरिग्रह – ये दुनियां नश्वर है। चीज़ों के प्रति मोह ही आपके दुखों का कारण है। सच्चे इंसान किसी भी सांसारिक चीज़ का मोह नहीं करते

महावीर जिस वन में थे वहाँ 11 ब्राह्मणों को बुलाया गया ताकि वे महावीर के कहे शब्दों को लिखित रूप दे सके. यही आगे चलकर त्रिपादी ज्ञान, उपनिव, विगामिवा और धुवेइव कहलाये.

Mahavir Jain Dharma | महावीर और जैन धर्म 

वे महावीर स्वामी ही थे जिनके कारण ही 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ द्वारा प्रतिपादित सिद्धान्तों ने एक विशाल धर्म ‘जैन धर्म’ का रूप धारण किया

 भगवान महावीर के कार्यकाल को ईराक के जराथ्रुस्ट, फिलिस्तीन के जिरेमिया, चीन के कन्फ्यूसियस तथा लाओत्से और युनान के पाइथोगोरस, प्लेटो और सुकरात के समकालीन  माना जाता है

. उनकी शिक्षाओं से तत्कालीन राजवंश  प्रभावित हुए और ढेरों राजाओं ने जैन धर्म को अपना राजधर्म बनाया. बिम्बसार और चंद्रगुप्त मौर्य का नाम इन राजवंशों में प्रमुखता से लिया जा सकता है, जो जैन धर्म के अनुयायी बने.

 उन्होंने तत्कालीन हिन्दु समाज में व्याप्त जाति व्यवस्था का विरोध किया और सबको समान मानने पर जोर दिया. उन्होंने जियो और ​जीने दो के सिद्धान्त पर जोर दिया. सबको एक समान नजर में देखने वाले भगवान महावीर अहिंसा और अपरिग्रह के साक्षात मूर्ति थे. वे किसी को भी कोई दु:ख नहीं देना चाहते थे.

mahaveer jain updesh in hindi | महावीर जैन के उपदेश 

भगवान महावीर ने अहिंसा, तप, संयम, पाच महाव्रत, पाच समिति, तीन गुप्ती, अनेकान्त, अपरिग्रह एवं आत्मवाद का संदेश दिया.

महावीर स्वामी जी ने यज्ञ के नाम पर होने वाली पशु-पक्षी तथा नर की बाली का पूर्ण रूप से विरोध किया .  महावीर स्वामी जी ने उस समय जाती-पाति और लिंग भेद को मिटाने के लिए उपदेश दिये.

महावीर के शिष्य अपने मित्र और सगे सम्बन्धी को महावीर की शरण में लाये. महावीर उन्हें सुखद जीवन जीने और मोक्ष प्राप्ति का ज्ञान देने लगे. लोगों की संख्या बढ़कर लाखों तक पहुँच गयी. उनकी संस्था में 14 हजार मुनि, 36 हजार आर्यिका, 1 लाख 59 हजार श्रावक और 3 लाख 18 हजार श्राविका थी.

Mahavir Jain Death | मृत्यु

महावीर ने  अभिजात वर्ग की संस्कृत के खिलाफ स्थानीय भाषा का भी निर्माण कर उन्हें फैलाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया. भगवान महावीर ने आखिरी प्रवचन पावापूरी में दिया था. वो समागम लगातार 48 घंटे चला था. अपने आखिरी प्रवचन को ख़त्म करने के बाद 527 ईसा पूर्व 72 वर्ष की आयु में उन्हें मौक्ष की प्राप्ति हुई.

Mahavir Jayanti 2021 Date | वर्ष 2020 मे महावीर जयंती कब है? 

वर्ष 2020  मे महावीर जयंती 6 अप्रैल  के दिन मनाई जाएगी. महावीर जयंती अधिकतर त्योहारो से अलग बहुत ही शांत माहौल मे विशेष पूजा अर्चना द्वारा मनाई जाती है . इस दिन भगवान महावीर का विशेष अभिषेक किया जाता है तथा जैन बंधुओ द्वारा अपने मंदिरो मे जाकर विशेष ध्यान और प्रार्थना की जाती है . इस दिन हर जैन मंदिर मे गरीबो मे दान दक्षिणा का विशेष महत्व है.  भारत मे गुजरात, राजेस्थान, बिहार और कोलकाता मे उपस्थित प्रसिध्द मंदिरो मे यह उत्सव विशेष रूप से मनाया जाता है.