mahadevi verma poems in hindi | महादेवी वर्मा कविता संग्रह

mahadevi verma ki kavita

पूछता क्यों शेष कितनी रात? | Mahadevi Verma poem in hindi

पूछता क्यों शेष कितनी रात?

छू नखों की क्रांति चिर संकेत पर जिनके जला तू

स्निग्ध सुधि जिनकी लिये कज्जल-दिशा में हँस चला तू

परिधि बन घेरे तुझे, वे उँगलियाँ अवदात!

झर गये ख्रद्योत सारे,

तिमिर-वात्याचक्र में सब पिस गये अनमोल तारे;

बुझ गई पवि के हृदय में काँपकर विद्युत-शिखा रे!

साथ तेरा चाहती एकाकिनी बरसात!

व्यंग्यमय है क्षितिज-घेरा

प्रश्नमय हर क्षण निठुर पूछता सा परिचय बसेरा;

आज उत्तर हो सभी का ज्वालवाही श्वास तेरा!

छीजता है इधर तू, उस ओर बढ़ता प्रात!

प्रणय लौ की आरती ले

धूम लेखा स्वर्ण-अक्षत नील-कुमकुम वारती ले

मूक प्राणों में व्यथा की स्नेह-उज्जवल भारती ले

मिल, अरे बढ़ रहे यदि प्रलय झंझावात।

कौन भय की बात।

पूछता क्यों कितनी रात?

मैं नीर भरी दुख की बदली |Mahadevi Verma poem in hindi

मैं नीर भरी दुख की बदली!

स्पन्दन में चिर निस्पन्द बसा

क्रन्दन में आहत विश्व हँसा

नयनों में दीपक से जलते,

पलकों में निर्झरिणी मचली!

मेरा पग-पग संगीत भरा

श्वासों से स्वप्न-पराग झरा

नभ के नव रंग बुनते दुकूल

छाया में मलय-बयार पली।

मैं क्षितिज-भृकुटि पर घिर धूमिल

चिन्ता का भार बनी अविरल

रज-कण पर जल-कण हो बरसी,

नव जीवन-अंकुर बन निकली!

पथ को न मलिन करता आना

पथ-चिह्न न दे जाता जाना;

सुधि मेरे आंगन की जग में

सुख की सिहरन हो अन्त खिली!

विस्तृत नभ का कोई कोना

मेरा न कभी अपना होना,

परिचय इतना, इतिहास यही-

उमड़ी कल थी, मिट आज चली!

mahadevi verma poems

स्वप्न से किसने जगाया? Mahadevi Verma poem in hindi

स्वप्न से किसने जगाया?

मैं सुरभि हूं।

छोड़ कोमल फूल का घर,

ढूंढ़ती हूं निर्झर।

पूछती हूं नभ धरा से-

क्या नहीं ऋतुराज आया?

मैं ऋतुओं में न्यारा वसंत,

मैं अग-जग का प्यारा वसंत।

मेरी पगध्वनी सुन जग जागा,

कण-कण ने छवि मधुरस मांगा।

नव जीवन का संगीत बहा,

पुलकों से भर आया दिगंत।

मेरी स्वप्नों की निधि अनंत,

मैं ऋतुओं में न्यारा वसंत।

कौन तुम मेरे हृदय में | Mahadevi Verma poem in hindi

कौन तुम मेरे हृदय में?

कौन मेरी कसक में नित

मधुरता भरता अलक्षित?

कौन प्यासे लोचनों में

घुमड़ घिर झरता अपरिचित?

स्वर्ण-स्वप्नों का चितेरा

नींद के सूने निलय में!

कौन तुम मेरे हृदय में?

अनुसरण नि:श्वास मेरे

कर रहे किसका निरन्तर?

चूमने पदचिन्ह किसके

लौटते यह श्वास फिर फिर

कौन बन्दी कर मुझे अब

बँध गया अपनी विजय में?

कौन तुम मेरे हृदय में?

एक करूण अभाव में चिर-

तृप्ति का संसार संचित

एक लघु क्षण दे रहा

निर्वाण के वरदान शत शत,

पा लिया मैंने किसे इस

वेदना के मधुर क्रय में?

कौन तुम मेरे हृदय में?

गूँजता उर में न जाने

दूर के संगीत सा क्या?

आज खो निज को मुझे

खोया मिला, विपरीत सा क्या

क्या नहा आई विरह-निशि

मिलन-मधु-दिन के उदय में?

कौन तुम मेरे हृदय में?

तिमिर-पारावार में

आलोक-प्रतिमा है अकम्पित

आज ज्वाला से बरसता

क्यों मधुर घनसार सुरभित?

सुन रहीं हूँ एक ही

झंकार जीवन में, प्रलय में?

कौन तुम मेरे हृदय में?

मूक सुख दुख कर रहे

मेरा नया श्रृंगार सा क्या?

झूम गर्वित स्वर्ग देता-

नत धरा को प्यार सा क्या?

आज पुलकित सृष्टि क्या

करने चली अभिसार लय में

कौन तुम मेरे हृदय में?

मैं अनंत पथ में लिखती जो | mahadevi verma kavita

मै अनंत पथ में लिखती जो

सस्मित सपनों की बाते

उनको कभी न धो पायेंगी

अपने आँसू से रातें!

उड़ उड़ कर जो धूल करेगी

मेघों का नभ में अभिषेक

अमिट रहेगी उसके अंचल-

में मेरी पीड़ा की रेख!

तारों में प्रतिबिम्बित हो

मुस्कायेंगी अनंत आँखें,

हो कर सीमाहीन, शून्य में

मँडरायेगी अभिलाषें!

वीणा होगी मूक बजाने-

वाला होगा अंतर्धान,

विस्मृति के चरणों पर आ कर

लौटेंगे सौ सौ निर्वाण!

जब असीम से हो जायेगा

मेरी लघु सीमा का मेल,

देखोगे तुम देव! अमरता

खेलेगी मिटने का खेल!

mahadevi verma short poems in hindi | जब यह दीप थके तब आना।



यह चंचल सपने भोले है,
दृग-जल पर पाले मैने, मृदु
पलकों पर तोले हैं;
दे सौरभ के पंख इन्हें सब नयनों में पहुँचाना!

साधें करुणा-अंक ढली है,
सान्ध्य गगन-सी रंगमयी पर
पावस की सजला बदली है;
विद्युत के दे चरण इन्हें उर-उर की राह बताना!

यह उड़ते क्षण पुलक-भरे है,
सुधि से सुरभित स्नेह-धुले,
ज्वाला के चुम्बन से निखरे है;
दे तारो के प्राण इन्ही से सूने श्वास बसाना!

यह स्पन्दन है अंक-व्यथा के
चिर उज्ज्वल अक्षर जीवन की
बिखरी विस्मृत क्षार-कथा के;
कण का चल इतिहास इन्हीं से लिख-लिख अजर बनाना!

लौ ने वर्ती को जाना है
वर्ती ने यह स्नेह, स्नेह ने
रज का अंचल पहचाना है;
चिर बन्धन में बाँध इन्हें धुलने का वर दे जाना!

पूछता क्यों शेष कितनी रात?
छू नखों की क्रांति चिर संकेत पर जिनके जला तू
स्निग्ध सुधि जिनकी लिये कज्जल-दिशा में हँस चला तू
परिधि बन घेरे तुझे, वे उँगलियाँ अवदात!

झर गये ख्रद्योत सारे,
तिमिर-वात्याचक्र में सब पिस गये अनमोल तारे;
बुझ गई पवि के हृदय में काँपकर विद्युत-शिखा रे!
साथ तेरा चाहती एकाकिनी बरसात!

व्यंग्यमय है क्षितिज-घेरा
प्रश्नमय हर क्षण निठुर पूछता सा परिचय बसेरा;
आज उत्तर हो सभी का ज्वालवाही श्वास तेरा!
छीजता है इधर तू, उस ओर बढता प्रात!

प्रणय लौ की आरती ले
धूम लेखा स्वर्ण-अक्षत नील-कुमकुम वारती ले
मूक प्राणों में व्यथा की स्नेह-उज्जवल भारती ले
मिल, अरे बढ़ रहे यदि प्रलय झंझावात।

कौन भय की बात।
पूछता क्यों कितनी रात?

mahadevi verma poems in hindi on nature

यह मन्दिर का दीप इसे नीरव जलने दो
रजत शंख घड़ियाल स्वर्ण वंशी-वीणा-स्वर,
गये आरती वेला को शत-शत लय से भर,
जब था कल कंठो का मेला,
विहंसे उपल तिमिर था खेला,
अब मन्दिर में इष्ट अकेला,
इसे अजिर का शून्य गलाने को गलने दो!

चरणों से चिन्हित अलिन्द की भूमि सुनहली,
प्रणत शिरों के अंक लिये चन्दन की दहली,
झर सुमन बिखरे अक्षत सित,
धूप-अर्घ्य नैवेदय अपरिमित
तम में सब होंगे अन्तर्हित,
सबकी अर्चित कथा इसी लौ में पलने दो!

पल के मनके फेर पुजारी विश्व सो गया,
प्रतिध्वनि का इतिहास प्रस्तरों बीच खो गया,
सांसों की समाधि सा जीवन,
मसि-सागर का पंथ गया बन
रुका मुखर कण-कण स्पंदन,
इस ज्वाला में प्राण-रूप फिर से ढलने दो!

झंझा है दिग्भ्रान्त रात की मूर्छा गहरी
आज पुजारी बने, ज्योति का यह लघु प्रहरी,
जब तक लौटे दिन की हलचल,
तब तक यह जागेगा प्रतिपल,
रेखाओं में भर आभा-जल
दूत सांझ का इसे प्रभाती तक चलने दो!

जो तुम आ जाते एक बार

कितनी करूणा कितने संदेश
पथ में बिछ जाते बन पराग
गाता प्राणों का तार तार
अनुराग भरा उन्माद राग

आँसू लेते वे पथ पखार
जो तुम आ जाते एक बार

हँस उठते पल में आर्द्र नयन
धुल जाता होठों से विषाद
छा जाता जीवन में बसंत
लुट जाता चिर संचित विराग

आँखें देतीं सर्वस्व वार
जो तुम आ जाते एक बार

कौन तुम मेरे हृदय में ? | Mahadevi Verma poems in hindi



कौन मेरी कसक में नित
मधुरता भरता अलक्षित?
कौन प्यासे लोचनों में
घुमड़ घिर झरता अपरिचित?

स्वर्ण-स्वप्नों का चितेरा
नींद के सूने निलय में!
कौन तुम मेरे हृदय में?

अनुसरण निश्वास मेरे
कर रहे किसका निरन्तर?
चूमने पदचिन्ह किसके
लौटते यह श्वास फिर फिर

कौन बन्दी कर मुझे अब
बँध गया अपनी विजय में?
कौन तुम मेरे हृदय में?

एक करूण अभाव में चिर-
तृप्ति का संसार संचित
एक लघु क्षण दे रहा
निर्वाण के वरदान शत शत,

पा लिया मैंने किसे इस
वेदना के मधुर क्रय में?
कौन तुम मेरे हृदय में?

गूँजता उर में न जाने
दूर के संगीत सा क्या?
आज खो निज को मुझे
खोया मिला, विपरीत सा क्या

क्या नहा आई विरह-निशि
मिलन-मधु-दिन के उदय में?
कौन तुम मेरे हृदय में?

तिमिर-पारावार में
आलोक-प्रतिमा है अकम्पित
आज ज्वाला से बरसता
क्यों मधुर घनसार सुरभित?

सुन रहीं हूँ एक ही
झंकार जीवन में, प्रलय में?
कौन तुम मेरे हृदय में?

मूक सुख दुख कर रहे
मेरा नया श्रृंगार सा क्या?
झूम गर्वित स्वर्ग देता-
नत धरा को प्यार सा क्या?

आज पुलकित सृष्टि क्या
करने चली अभिसार लय में
कौन तुम मेरे हृदय में?

Karmveer Ayodhya Singh Upadhyay | कर्मवीर – अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ |

देख कर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं
रह भरोसे भाग के दुख भोग पछताते नहीं
काम कितना ही कठिन हो किन्तु उबताते नहीं
भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं
हो गये एक आन में उनके बुरे दिन भी भले
सब जगह सब काल में वे ही मिले फूले फले ।

आज करना है जिसे करते उसे हैं आज ही
सोचते कहते हैं जो कुछ कर दिखाते हैं वही
मानते जो भी हैं सुनते हैं सदा सबकी कही
जो मदद करते हैं अपनी इस जगत में आप ही
भूल कर वे दूसरों का मुँह कभी तकते नहीं
कौन ऐसा काम है वे कर जिसे सकते नहीं ।

जो कभी अपने समय को यों बिताते हैं नहीं
काम करने की जगह बातें बनाते हैं नहीं
आज कल करते हुये जो दिन गंवाते हैं नहीं
यत्न करने से कभी जो जी चुराते हैं नहीं
बात है वह कौन जो होती नहीं उनके लिये
वे नमूना आप बन जाते हैं औरों के लिये ।

व्योम को छूते हुये दुर्गम पहाड़ों के शिखर
वे घने जंगल जहां रहता है तम आठों पहर
गर्जते जल-राशि की उठती हुयी ऊँची लहर
आग की भयदायिनी फैली दिशाओं में लपट
ये कंपा सकती कभी जिसके कलेजे को नहीं
भूलकर भी वह नहीं नाकाम रहता है कहीं ।

—अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

ayodhya singh upadhyay poems in hindi,
karamveer meaning in hindi
ek boond kavita ka saransh,
ayodhya singh upadhyay jivan parichay,
karmveer,
ayodhya kavita,
ayodhya singh upadhyay poem,
karamveer poem explanation in hindi,
kavita ka saransh in hindi,
hindi poem summary,
poem on veer
karmaveera meaning,
ayodhya singh upadhyay poems ek boond,
ayodhya singh upadhyay short poems,
karamveer poem summary in english,
ek boond kavita ki vyakhya,
ayodhya singh upadhyay 'hariaudh ki rachna,
karmveer kavita ka arth,
karamveer newspaper,
acharya karmaveer,
swami karamveer maharaj ji,
karmveer ki pahchan kya hai,
karamveer katha,
dhano ka geet class 8,
jungle manjari,
amarkantak se dindori class 8,

hasya kavita baccho ke liye | बचपन हास्य कविता

टूट गया किस्से का तार / प्रकाश मनु | बेहतरीन हास्य कविता

टूट गया किस्से का तार
अगड़म-बगड़म गए बाजार
वहाँ से लाए मोती चार,
दो मोती थे टूटे-फूटे
बाकी दो हाथों से छूटे,
अगड़म-बगड़म दोनों रूठे!

आगे आया नया बाजार
पीं-पीं बाजा, सीटी चार,
लेकर बोले अगड़म-बगड़म-
लिख लो, यह सब रहा उधार
पैसे कल ले लेना यार!

अगडत्रम उछल-उछलकर चलता
बगड़म फिसल-फिसलकर बढ़ता,
पीछे पड़ गए कुत्ते चार-
कूद गए पानी में दोनों,
झटपट पहुँचे नदिया पार!

अगड़म रोता इधर खड़ा है
बगड़म भी उखड़ा-उखड़ा है,
अब ना पीं-पीं, अब ना बाजा
फूटा घुटना, फूट गया सिर-
टूट गया किस्से का तार!

कम्प्यूटर पर हास्य कविता,
लड्डू पर कविता,
बचपन पर हास्य कविता,
हास्य कविता परीक्षा,
हास्य कविता भ्रष्टाचार,
हास्य कविता नेता पर,
सब्जियों की कविता,
छोटे बच्चों पर कविता,
Children's Poems,
कविताएँ हिन्दी,
छोटे बच्चों के लिए देशभक्ति कविता,
Flower child poem,
स्कूल पत्रिका के लिए कविता,
बेहतरीन हास्य कविता,
टीचर पर हास्य कविता,
हास्य कविता सुरेन्द्र शर्मा,
व्यंगात्मक कविता,
छत्तीसगढ़ी हास्य कविता,
\व्यंगात्मक कविता

पप्पू जी ने रंग जमाया | कविताएँ हिन्दी | हास्य कविता बच्चों के लिए

पप्पू जी थे खूब रंग में,
पप्पू जी ने रंग जमाया।

गए फील्ड में, खेल-खेल में
ऐसा छक्का एक जमाया,
बॉल न आई हाथ, दर्शकों
का माथा था चकराया।
पप्पू जी सहवाग बने थे,
पप्पू जी ने रंग जमाया।

खेल कबड्डी हुआ पार्क में
पप्पू जी पहुँचे आगे,
ऐसे दावँ चलाए भाई
दौड़-दौड़कर सब भागे।
‘पप्पू जिंदाबाद’ हुआ फिर
सबने कंधे पर बैठाया।

ड्राइंग का घंटा आया तो
पप्पू जी का दिल घबराया,
भारी एक बनाया बस्ता,
चूहा उस पर एक बिठाया।
आहा! हँसकर टीचर बोलीं-
मैडल लेने पास बुलाया!

मिल्ली-टिल्ली | हास्य कविता परीक्षा |

गेंद बनारस से आई थी
कलकत्ते से बल्ला,
दिल्ली में आकर दोनों ने
खूब मचाया हल्ला।

लुधियाने से गुड़िया आई
गुड्डा है लाहौरी,
शादी हुई, बैंड यह बोला-
कैसी बाँकी छोरी!

मिल्ली जामनगर से आई
टिल्ली का घर दिल्ली,
मिल्ली-टिल्ली खेल रही हैं
हँसती-हा-हा, दिल्ली!

बबलू जी ने दिल्ली देखी / प्रकाश मनु | हास्य कविता बच्चों के लिए

short hasya kavita in hindi for class 1,
best hasya kavita lyrics,
hasya kavita for kids,
hasya kavita students,
hindi hasya kavita on exams,
famous hasya kavita in hindi,
short hasya kavita in hindi for class 4,
32 teeth hasya kavita,
बेहतरीन हास्य कविता

बबलू जी ने दिल्ली देखी
दिल्ली में एक बिल्ली देखी,
लाल किले पर चढ़कर कूदी
तबीयत उसकी ढिल्ली देखी।

महरौली में बिल्ला देखा
हाँ जी, बागड़बिल्ला देखा,
उस पर भौं-भौं भौंक रहा था
मरियल सा एक पिल्ला देखा।

कनाट प्लेस में भीड़-भड़क्का
दरियागंज में ट्रैफिक बंद,
पों-पों, पीं-पीं कान फोड़ती
भूल गए कविताई, छंद!

इधर भीड़ थी, उधर भीड़ थी
परेशान बबलू बेचारे,
इसी बीच में जेब कटी तो
दीख गए आँखों में तारे।

बबलू जी घबराकर बोले-
जाएँगे जी, हम अपने घर,
दिल्ली हमको रास न आती
पछताए दिल्ली में आकर!

Poems on Success in Hindi

सफलता पर कविता यहाँ पर पर हम अलग अलग टॉपिक्स और परिस्थितियों के ऊपर सफलता-पर कविता संग्रह प्रश्तुत कर रहे हैं. पाठको को इससे आत्मा विश्वास और सही रास्ता चुनने में मदद मिल सकती है

poem on success in hindi | सफलता पर कविता

ओ सफलता के चाहने वाले जरा सुनो
अगर होना है सफल तो हथियार तो चुनो
सोच को जरा बड़ा करो किसी बात से ना डरा करो
एक बड़ा लक्ष्य चुनो ,करो अपनी बार सबकी सुनो

लोग हसेंगे करेंगे तुम्हे खामोश रहना है
जवाब उनको वक़्त देगा तुम्हे अपना काम करना है
सफलता पाने निकले हो तुम तुम्हे ही जितना है
आत्मविश्वास के साथ हिम्मत ढोल पीटना है

जल्दी सफलता पाने की चिंता में मत करना कभी
देर से सफलता अगर मिले ,सफलता भी होगी उतनी बड़ी
तेरे घर के बाहर भी एक दिन भीड़ खड़ी हो सकती है
विश्वास रखो तुम भी बड़े होंगे और हर शाम बड़ी हो सकती है

इस सफलता की चाह में माँ बाप को याद रखना है
ज़िन्दगी में ख़ुश रखो उनकी आँखों को साफ़ रखना है
वरना सफलता बेकार हो जाएगी जरा ध्यान से सुनो
गर अपने लोग खुश ना हो , इसलिए सफलता जरा ध्यान से चुनो


poem on success and hard work in hindi,
short motivational poems in hindi about success,
motivational poems in hindi about success for students,
motivational poem in hindi for success,
short poem on success and hard work in hindi,motivational kavita in hindi for success,
safalta poem in hindi,
success poetry in hindi,
hindi poems on success,
poem for success in hindi,
poem in hindi on success,
harivansh rai bachchan poems on success,
short poem on success in hindi,
hindi poem motivation success,
hindi kavita on success,
inspirational poem in hindi on success,
Harivansh Rai bacchan Agneepath

Motivational Poems in Hindi about Success for Students

तू कायर नहीं है चल सबको बता
कब तक यु डरता रहेगा चल दुनिया को दिखा ?
दुनिया की कब तक यूँही सुनता रहेगा?
तू कमजोर नहीं है चल दुनिया को हिला
तू कायर नहीं है चल सबको बता

हिम्मत अंदर से ला और दुआ मांग उस से जो है तेरा खुदा
हिम्मत कुछ करने से आएगा चल के बार मन तो बना
पहले विश्वास खुद पर पर कर दुनिया को भरोसा दिला
तू कायर नहीं है चल सबको बता

ज्यादा मत सोच की आगे क्या होगा उस रास्ते पे तो जा
गलत भी हुआ तो क्या हुआ तू इतना मत घबरा
लगा दे अपनी जान और साहस को आजमा
तू कायर नहीं है चल सबको बता

बिना कुछ किये तो पत्ता भी नहीं हिलता
बिना मेहनत किये कोई सत्ता नहीं मिलता
तू एक बार आस्मां की और देख और उड़ जा
तू कायर नहीं है चल सबको बता

short poem on safalta in hindi,
poem on success and hard work in hindi,
motivational poems in hindi about success for students,
short motivational poems in hindi about success,
hindi poems on life for students,
self motivation poem hindi,
motivational poem in hindi,
motivational poem in hindi pdf,
poem on hard work for students,
safalta hindi kavita,
personality development poem in hindi,
poem on success in english,
poem on hard work in punjabi,
motivational poem in hindi pdf,
haar mat mano poem in hindi,
poem on teamwork in hindi,
vidyarthi jeevan par kavita,
dar par kavita,
self love poetry in hindi,
kamyabi ki kavita,
poem on student life in english,
inspirational poem in hindi for students,
hindi kavita on motivational,
poem on personality in hindi,
funny poem on student life in hindi,
poem on duniya in hindi,
hindi poem on time management,
hindi poems on happy life,
mehnat par kavita,
lic poem,
hindi poems on life values,
motivational poems in marathi,
poem in hindi on life struggle,
poem on helping others in hindi,
dinkar motivational poems,
poem on truth of life in hindi,
hindi poem on life and death,
hindi poems on life struggle,
hindi poem on zindagi,

Self Motivation poem hindi

तुम हिम्मत का पहाड़ हो दुनिया की दहाड़ हो
जिंदगी की लड़ाई में तुम खुद अपने यार हो
ताकत को पहचान अपनी,खुद के लिए तुम्ही जिम्मेदार हो
आँधियो से लड़ना सीख,तुम ही अब घुड़सवार हो

चिलचिलाती धुप में किसका कर रहे इंतजार हो
बादल तो अपनी मर्जी से पानी गिरायेगा
चल पड़ो तुम ही झरने हो, तुम ही सागर की कतार हो ,
तुम हिम्मत का पहाड़ हो दुनिया की दहाड़ हो

समाज की इन बुराइयों के तुम ही उद्धार हो
उम्मीदे कइयों की टिकी हो जिसपे वही तुम दिवार हो
दूर से दिखने लगोगे क्या तुम आशाओं का अम्बार हो
तुम हिम्मत का पहाड़ हो दुनिया की दहाड़ हो

Comedy kavita | कॉमेडी कविता

स्टेट बस का सफ़र

मै नहीं भूलूंगा स्टेट बस का सफ़र
जिसे याद करके हंस देता हूं अक्सर
भरी बस में कंडक्टर तक पहुँचने का जंग
परेशां था मैं देख के लोगो का ये रंग

सोचा पड़ोसी को पैसे दूँ टिकट मंगवा लू
डर लगता था सौ का वो नोट ही गवां दू
डरते डरते सौ का नोट मैंने उसे थमाया
खो गया भीड़ में वो कहाँ नज़र आया

जैसे तैसे मैंने टिकट कटवाइ और खुद का स्थान बनाया
पर थोड़ी देर में ही भीड़ का एक और हुज़ूम उमड़ आया
दिन के समय में अँधेरा छा गया
उतरने की जल्दी में मैं बस पे पसरा गया

समझाया खुद को चलो जैसे तैसे सफ़र तो कटा
तभी वहां लगे बोर्ड को देख कर मेरा ध्यान बंटा
वाह री स्टेट सर्विस वाह तेरा क्या काम है
शहर से 40 किलोमीटर दूर था बोर्ड पर वहीं नाम है

comedy kavita,
comedy poems in hindi,
comedy kavita in hindi,
comedy poem on corruption in hindi,
comedy poem in marathi,
comedy poem in hindi language,
hindi kavita comedy,
best comedy poem in hindi,
marathi kavita vinodi,
hindi comedy poems for class 8,

motivational poems in hindi by rabindranath tagore

rabindrath tagore hindi poem

धीरे चलो, धीरे बंधु लिए चलो धीरे 
मंदिर में, अपने विजन में 
पास में प्रकाश नहीं, पथ मुझको ज्ञात नहीं 
छाई है कालिमा घनेरी 
चरणों की उठती ध्वनि आती बस तेरी
रात है अँधेरी 
हवा सौंप जाती है वसनों की वह सुगंधि,
तेरी, बस तेरी 
उसी ओर आऊँ मैं, तनिक से इशारे पर,
करूँ नहीं देरी 

rabindranath tagore poems in hindi on mother, rabindranath tagore poems in hindi on nature, rabindranath tagore poems in hindi on patriotism, rabindranath tagore poems in hindi pdf, rabindranath tagore poems in hindi wikipedia, rabindranath taogre poems in hindi, rabindrath tagore hindi poem, vardan poem in hindi by rabindranath tagore explanation

दिन पर दिन चले गए |rabindranth tagore poem in hindi on life

दिन पर दिन चले गए पथ के किनारे
गीतों पर गीत अरे रहता पसारे 
बीतती नहीं बेला सुर मैं उठाता 
जोड़-जोड़ सपनों से उनको मैं गाता 
दिन पर दिन जाते मैं बैठा एकाकी
जोह रहा बाट अभी मिलना तो बाकी 
चाहो क्या रुकूँ नहीं रहूँ सदा गाता 
करता जो प्रीत अरे व्यथा वही पाता

गर्मी की रातों में | love poem in hindi by rabindranath tagore

गर्मी की रातों में
जैसे रहता है पूर्णिमा का चांद
तुम मेरे हृदय की शांति में निवास करोगी
आश्चर्य में डूबे मुझ पर
तुम्हारी उदास आंखें
निगाह रखेंगी
तुम्हारे घूंघट की छाया
मेरे हृदय पर टिकी रहेगी
गर्मी की रातों में पूरे चांद की तरह खिलती
तुम्हारी सांसें, उन्हें सुगंधित बनातीं
मरे स्वप्नों का पीछा करेंगी।

hindi poems, rabindranath tagore in hindi, rabindranath tagore poems in hindi gitanjali,

rabindranath-tagore-poems-in-hindi

धीरे चलो, धीरे बंधु लिए चलो धीरे 
मंदिर में, अपने विजन में 
पास में प्रकाश नहीं, पथ मुझको ज्ञात नहीं 
छाई है कालिमा घनेरी 
चरणों की उठती ध्वनि आती बस तेरी
रात है अँधेरी 
हवा सौंप जाती है वसनों की वह सुगंधि,
तेरी, बस तेरी 
उसी ओर आऊँ मैं, तनिक से इशारे पर,
करूँ नहीं देरी 

मेरे प्यार की ख़ुशबू |Rabindra nath tagore poems in hindi on love

मेरे प्यार की ख़ुशबू
वसंत के फूलों-सी
चारों ओर उठ रही है।
यह पुरानी धुनों की 
याद दिला रही है
अचानक मेरे हृदय में
इच्छाओं की हरी पत्तियाँ
उगने लगी हैं

मेरा प्यार पास नहीं है
पर उसके स्पर्श मेरे केशों पर हैं
और उसकी आवाज़ अप्रैल के
सुहावने मैदानों से फुसफुसाती आ रही है ।
उसकी एकटक निगाह यहाँ के
आसमानों से मुझे देख रही है
पर उसकी आँखें कहाँ हैं
उसके चुंबन हवाओं में हैं
पर उसके होंठ कहाँ हैं …

osho poems on love in hindi | ओशो कविता

osho poems on love in hindi | ओशो कविता

तुम्हारे नाम जैसी, छलकते जाम जैसी

मुहब्बत सी नशीली शरद की चाँदनी है।
ह्रदय को मोहती है, प्रणय संगीत जैसी
नयन को सोहती है, सपन के मीत जैसी,

तुम्हारे रूप जैसी, वसंती धूप जैसी
मधुस्मृति सी रसीली शरद की चाँदनी है।
चाँदनी खिल रही है तुम्हारे हास जैसी,
उमंगें भर रही है मिलन की आस जैसी,

प्रणय की बाँह जैसी, अलक की छाँह जैसी
प्रिये, तुम सी लजीली शरद की चाँदनी‍ है।

हुई है क्या ना जाने अनोखी बात जैसी
भरे पुलकन बदन में प्रथम मधु रात जैस‍ी,

हँसी दिल खोल पुनम, गया अब हार संयम
वचन से भी हठीली शरद की चाँदनी है।

तुम्हारे नाम जैसी, छलकते जाम जैसी
मुहब्बत सी नशीली, शरद की चाँदनी है।

osho poems on love in hindi

When love goes into action,
Life becomes amazing,
Our minds
Become naked,
Our hearts
Start to radiate
And the world
Becomes a Paradise.

love poem in hindi for husband

देख ना चाँद साथ कैसे चलता है
मेरी तरह ये भी तुम पर मरता है

सितारे जो टूटे तेरे दामन में गिरे
इक तारा इसी आरजू में गिरता है

Dekh na chand saath kaise chalta hai
Meri tarah ye bhi tum par marta hai

Sitare jo tute tere daaman me gire,
Ik tara issi aarju me girta hai

Best Poem in hindi on corona virus

                                       “करोना प्यार है”

 जा तुझे ब्लॉक कर दिया ,तुझे ऑनलाइन गाड़ दिया

 ‘मोहब्बत’ ले मैं अपना हाथ झार लिया

 किसी ने हनुमान से पूछा था राम से प्यार करते हो ,

मैने मुसलमान से पूछा हिंदुस्तान से प्यार करते हो और उसने भी अपना छाती फार दिया

 एक ना तमाशा दिल दिया और इश्क़ का भारी पहाड़ दिया ।

 तूने दिल को छुया था और #सेनेटाइजर था नही, मैने उसे धड़कता हुआ गार दिया

 हम गरीब गुरबों को बस सियासत ने भात मार दिया

 और बदले में मैंने अपना शहंशाहों को *** दिया

 इतनी नफरत है की मैने कैलेंडर से फरवरी का महीना ही फार दिया

 मैंने टिंडर विंडर से अपना पल्ला भी झाड़ लिया ,

 जिस नफरत के कारण हमने दिल्ली में घरो को उजाड़ दिया ,

 उसी नफरत के कारण हिन्दुस्तान चाइना से लड़ाई में अट्ठाइस दिल्ली के बराबर की जमीन हार गया,

 तेरे साथ वाली तस्वीर को मैंने बीचो बीच फार दिया,

 तेरा दिया हुआ लॉकेट मैंने कूड़े के ताजमहल में गार दिया

 इंडिया में आजकल हर कुछ फॉग है या दिल्ली में स्मोग है या #करोना का रोग है

 सीरिया के मरती हुई उस बच्ची ने कहा था अल्लाह को सब बताउंगी ,

लगता है अल्लाह को उसने सब बताया और अल्लह ने कोरोना का अज़ाब डाल दिया

और तुम्हे क्या लगता है निर्भया ने अपने रेपिस्ट को छोड़ दिया

सात साल तक रोज उसके अंदर रॉड **मरने से पहले उसकी इतनी फट गई की उसने नहाना खाना तक छोड़ दिया

ये मत समझना की जो तुमने किया है उसने तुम्हारा पीछा छोड़ दिया  नेहरू की सत्तर साल पहले की गलती ने आज कश्मीर को सुलगता छोड़ दिया(उन्होंने पटेल की बात नही मानी थी)

कोरोना के डर से साँपो ने डसना नही, बस बिलो से निकलना छोड़ दिया

नफरत पे बस दस दिन का ब्रेक लगा इसका मतलब ये मत समझना की मैंने नफरत करना छोड़ दिया

#कोरोना का इलाज करुणा है,#कोरोना ने कहा है नफरत करो-ना .

…हद है कल एक भीड़ में एक आदमी खाँस दिया तो भीड़ ने उसे फोड़ दिया

चाइना ने अपनी तैयारी से इस महामारी का रुख मोर दिया

और हमारे यहाँ तो Big_Bazar ने सेनेटाइजर तक रखना छोड़ दिया

उस सैनिको को नमन करते हो न जो सियाचिन में एक मिनट तक अपनी जगह नही छोड़ते,

तुम्हे तो देश के लिए घर पर बैठना था और तुमने वहाँ भी अपने फ़र्ज़ से मुँह मोर लिया

कविता को Youtube पे सुनने के लिए इस लिंक पे क्लिक करें. अमित चौधरी वर्क्स कोरोना प्यार है

तुम मानो बम हो अगर खाँसी छुपा रहे हो,

तुम मानो बम हो अगर दोस्तो से मिलने जा रहे हो ,

तुम मानो बम हो अगर रास्ते में मोबाइल और लोगो को छुये जा रहे हो,

तुम मानो बम हो अगर बिना हाथ धोये नाक आँख खुजा रहे हो ,

तुम मानो बम अगर बाहर जाकर अभी इकॉनमी बचा रहे हो,

तुम मानो बम हो अगर सिर्फ 22 तारीख को सिर्फ घर पे रहो

और बाकी दिन इटली वालो की तरह पिकनिक मना रहे हो,

तुम मानो बम हो अगर उसी मास्क को अगर धो के,सूखा के बार-बार लगा रहे हो।

कल भी देखना लोग अपने नौकरो को बुलाएँगे कल भी देखना लोग ताली बजायेंगे और भूल जाएँगे।

कल भी देखना दुकानदार पैसा बनाएँगे, कल भी देखना लोग #कोरोना की कॉलर ट्यून का मज़ाक उड़ाएँगे

एक बार अगर फैल गया तो हम कंट्रोल नही कर पाएँगे

जो सबसे आसान है वो ये है की हम घर से बाहर नही जाएंगे

ऐसा करो ना इस छुट्टी में अपने माँ बाप से पुराने दिनों की बात करो ना

ऐसा करो ना इन छुटियों में किसी नए काम की शुरुआत करो ना

ऐसे करो ना इन छुटियों में उस पुराने दोस्त से फ़ोन पे बात करो ना

और डाइटिंग और डायरी राइटिंग की शुरुआत करो ना

ऐसा करो ना इन छुटियों में किसी टॉपिक पे रिसर्च कर डालो,

ऐसा करो ना इन छुटियों में कुछ ख्वाब देखो और अगले महीने जब हम कोरोना से जीत जाएँगे तो उन्हें सच कर डालो।

इससे पहले की कोई निर्भया कहे की मुझे जीना है ‘माँ’

या मुझे जीना है ‘अम्मी’  इससे पहले उसे बचा लो*

—————-अमित_चौधरी——————-

अमित चौधरी पिछले 10 सालो से कवितायें लिख रहे हैं. उन्होंने एक अंग्रेजी नावेल भी लिखी हुई है. पाठक अमित चौधरी के कविताओं को youtube पर भी देख सकते हैं. कृपया यहाँ क्लिक करें

coronavirus par poem in hindi

कोरोना तुम्हे दूर भगाना है
मानवता के दुश्मन तुम हो
तुमको दुनिया से मिटाना है
कई बचे हैं औरो को बचाना है

हमको कोरोना को लड़ने में सरकार का साथ निभाना है
नमस्ते करना है हमने नहीं हाथ मिलाना है
बच्चो और दादा दादी को बहार नहीं ले जाना है
इस लड़ाई को हमको मिलके जितना और जिताना है

Poem about coronavirus in Hindi easy for 1 minute

मम्मी तुम कहो ना पापा आप चुप हो जाइये
अब हम बाहर नहीं जायेंगे अंदर ही खाना खाइये
कोरोना किसी की नहीं सुनता है
खुद को बचिए और दुसरो को बचाइये

love poetry in hindi | प्यार पर कविताएँ

प्यार शब्द का मतलब बहुत मुश्किल से समझ आता है क्यूंकि उसे हमें महसूस करना पड़ता है। प्यार एक एहसास हैं जिसे भगवान ने हमारे लिए बनाया हैं। एक इन्सान किसी दुसरे इन्सान को उसके हर आदतों के साथ प्यार करता हैं. हम सब में बहुत सारी अच्छाईयाँ और कुछ बुराई भी होगी।

लेकिन जब हम किसी से प्यार करते हैं तो जो जैसा होता है, वैसा ही उसको पसंद करते हैं। यह सबसे खूबसूरत बात होती है. । आज हम आपके लिए प्यार पर कुछ कविताएँ – poetries on love in hindi लाये हैं. आपको जरुर पसंद आएँगी। कविताएं हिंदी और रोमन इंग्लिश में भी लिखी गयी हैं.

If you are looking Love Poems or Love Poetry in Hindi, love poetry in hindi for girlfriend, love poetry in hindi for boyfriend, love poetry in hindi lyrics, hindi love poems in english, romantic love poems for her in hindi, hindi love poems by famous poets, sad hindi love poems, heart touching love poems in hindi then your are at right place.you can read nice collection of Love Poems or Love Poetry in Hindi.

love poetry in hindi -bayaan

swarachit rachna in hindi

बयान तो करो

तुम अकेले हो हम तनहा है
कभी मिले थे आज कहां हैं
क्या हाल है तुम्हारे ?
थोड़ा बयान तो करो

कहो दुबारा उन परियों की कहानी
बितायी थी जिसमें हमने जवानी
क्या तुम भूल गए सब कुछ?
पूछो खुद से ,थोड़ा ना तो करो

खामोश लब मुस्कुरा लेंगे दोबारा
जी लेंगे वह पल हम फिर सहारा
मेरे सवालों की तुम ही राह्बहरो
मान जाओ, थोड़ा हां तो करो

गम को हटाकर जरा इश्किया सागर तो देखो
मन को समझा कर थोड़ा दूरियां बाहर तो फेंको
दिल के प्याले को चलो थोड़ा भरो
मोहब्बत के दिलवाले को थोड़ा बयान तो करो

love poem in hindi image
love poetry in hindi

best poems in hindi Thoda Bayaan toh karo

swarachit kavita in hindi

Tum akele ho hum tanha hai
Kabhi mile the aaj kahan hai
Kyaa haaal hai tumhare
Thoda Bayaan toh karo

Kaho dubara un pariyo ki kahani
Bitaayi thi hamne jisme jawani
Kya tum bhul gaye sab kuch ?
Thoda naa toh karo

Khaamosh labh muskra lenge dubara
Ji lenge wo pal hum fir sara,
Mere sawaalo ka hi tum rehbaro ho
Maan jao Thoda haan toh karo

Gum ko hata kar zara isqhiya saagar toh dekho
Man ko samjhakar thoda duriyaa bahar toh fekho
Dil ke pyaale ko chalo thoda bharo
Mohabbat ke dilwale ko Thoda bayaan toh karo

love poem in hindi for girlfriend maangunga

Love Poem in Hindi |  swarachit kavita in hindi

आंखें खुले तो दीदार तुम्हारा मांगूंगा
अगर हो बंद तो प्यार तुम्हारा मांगूंगा
मरने के लिए हर लम्हा मंजूर है
गुजरने से पहले इंतजार तुम्हारा मांगूंगा

चाहता हूं तुम मेरी नजरों में रहो
तुम प्यार करती हो बस यही कहो
आंखों में चुरा कर छुपा लूं तुम्हें
कैसे कहूं कि तुम मेरी हो मेरी ही रहो

खुश तो रहने की लाख कोशिशें की हैं
मरने से पहले इश्क में चालाक हरकतें की हैं
बनाने वाले ने तुझे क्या बनाया है
तेरे जैसा यार ही हर बार मांगूंगा

हर मोहल्ले में चर्चा तुम्हारा ही रहता है
पर खुले में इश्क का पर्चा हमारा ही कहता है
सुन लो मेरी एक बात इंतजार तुम्हारा मांगूंगा
आंखें खुले जब भी प्यार तुम्हारा मांगूंगा

ना तेरा सलमान हूं ना कहीं का आमिर खान हूं
तू लैला है मेरी , मान जाओ मैं ही तेरा जान हूं
देखी है दिवाली संग संग खेले हैं होली के रंग
हर साल तेरा मजेदार हो हर बार यही मांगूंगा

kavita image
love poetry in hindi

hindi english poem maangunga

Ankhe khule toh didaar tumhara maangunga
Agar ho band ho toh pyaar tumhara mangunga
marne ke liye har lamha manjoor hai,
gujarne se pehale intejaar tumhara mangunga

Chahta hu tum meri najro me raho
tum pyar karti ho bas yahi kaho
aankhon me chura kar chupa lun tumhe
Kaise kahu ki tum meri ho meri hi raho

Khush toh rahne ki lakh koshishe ki hain
Marne se pehale ishq me chalaak harktei ki hai
Banaane wale ne tujhe kya banaya hai
Tera jaisa yaar hi harbaar maanguga

Har muhalle me charcha tumhara hi rehta hai
Par khule me ishq ka parcha hamara hi kehta hai
Sun lo meri ek baat intejaar tumhara maangunga
Aankh khule jab bhi pyaar tumhara maangunga

Naa tera salmaan hun naa kahi ka amir khan hu
Tu laila hai meri , maan jao mai hi tera jaan hu
Dekhi hai Diwali sangsang khele hai holi ke rang
Har saal tera majedaar ho harbaar yahi mangunga

new poem in hindi dil ke kone se

दिल के इस कोने से | samajik kavita hindi

हमने चाहा है तुम्हें दिल के इस कोने से
नींद आती नहीं, हम परेशान हैं रोने से
एहसास जिंदा है तुम्हारे जाने के बाद भी
कहीं मर ना जाएं, तुम्हारा इंकार होने से
एक हां और मांगता हूं, दोगी ना तुम यह जानता हूं
प्यार तुम ही हो, आवाज आती है दिल के उसी कोने से
तुम्हारी जुल्फों की वह भीनी खुशबू बहुत तड़पाती है
सोच कर खुश हो जाता हूं तुम्हारे शब्दों के खिलौने से
नहीं जी सकता घुट घुट के चाहे जो भी करना पड़े
तकलीफ होती है हमें, तुम्हारी नजरों के बेवजह होने से

love poem in hindi for husband

Hamne chaha hai tumhe dil ke is kone se
Neend aati nahi, hum pareshaan hai rone se

Ehsaas jinda hain, tumhare jaane ke baad bhi
kahi mar naa jaayei, tumhara inkaar hone se

ek haan aur maangta hu,dogi naa tum ye jaanta hu
pyaar tumhi ho ,awaaz aati hai dil ke ussi kone se

tumhari zulfo ki wo bhini khusbu bahut tadpaati hai
soch ke khush ho jaata hu, tumhare labo ke khilaune se

nahi ji sakta ghutghut ke chahe jo bhi karna pade
taklif hoti hai hamei, tumhare najro ke bewajah rone se

love poem in hindi for husband

प्यार पर कविता | तो क्या बात होगी

तेरे हाथ मेरे हाथों में रह जाए तो क्या बात होगी
जीवन बस यूं ही कट जाए तो क्या बात होगी
तुम मेरी ग़ज़ल हो इश्क का लहराती फसल हो
अगर तुम्हें यह पता चल जाए तो क्या बात होगी
झूम रहा हूं तुम्हारी याद में, अक्सर इसी जज्बात में
तुम आ जाओ मिलने,सब छोड़ के तो क्या बात होगी
मेरा दिल जलना चाहता है ,इश्क की राख बनना चाहता है
तुम अपने दिल को यह समझाओ तो क्या बात होगी

kavita image

Tere haath mere haathon me rah jaaye to kya baat hogi
Jiwan bas yu hi kat jaaye toh kya baat goi

Tum meri gazal ho ishq ka lahlahati fasl ho
Agar tumhe ye pata chal jaaye toh kyaa baat hogi

Jhoom raha hu tumhari yaad me aksar issi jazbaat me
Tum aa jao milne sab chor ke toh kyaa baat hogi

Mera dil jalna chahta hai ishq ki raakh banana chahta hai
Tum apne dil ko yah samjhao toh kyaa baat hoi