Advertisements

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी – Biography of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan in Hindi

आजाद भारत के पहले उपराष्ट्रपति और दूसरे राष्ट्रपति के तौर पर डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में है. राधाकृष्णन प्रसिध्य शिक्षक थे,उनकी याद में हर वर्ष 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है. बीसवीं सदी के विद्वानों में उनका नाम सबसे उपर है. वे दर्शनशास्त्र का ज्ञान रखते थे, राधाकृष्णन जी ने हिंदू धर्म को भारत और पश्चिम दोनों में फ़ैलाने का प्रयास किया, वे दोनों सभ्यता को मिलाना चाहते थे. राधाकृष्णन ने भारतीय दर्शनशास्त्र में पश्चिमी सोच की शुरुवात की थी.

मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज से अध्यापन का कार्य शुरू करने वाले राधाकृष्णन आगे चलकर मैसूर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हुए । 1939 से लेकर 1948 तक वह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बी. एच. यू.) के कुलपति भी रहे।

भारत की आजादी के बाद यूनिस्को में उन्होंने देश का प्रतिनिदितिव किया। 1949 से लेकर 1952 तक राधाकृष्णन सोवियत संघ में भारत के राजदूत रहे।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जीवनी

डॉ राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर 1888 को तमिलनाडु के छोटे से गांव तिरुमनी में ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इनके पिता का नाम सर्वपल्ली विरास्वामी था . इनके पिता गरीब जरुर थे के ऊपर पुरे परिवार की जिम्मदारी थी,

राधाकृष्णन का आरम्भिक जीवन :

। साधारण परिवार में जन्में राधाकृष्णन का बचपन तिरूतनी एवं तिरूपति जैसे धार्मिक स्थलों पर बीता । वह शुरू से ही पढाई-लिखाई में काफी रूचि रखते थे, उनकी प्राम्भिक शिक्षा क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथर्न मिशन स्कूल में हुई और आगे की पढाई मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज में पूरी हुई।

स्कूल के दिनों में ही डॉक्टर राधाकृष्णन ने बाइबिल के महत्त्वपूर्ण अंश कंठस्थ कर लिए थे । कम उम्र में ही आपने स्वामी विवेकानंद और वीर सावरकर को पढा तथा उनके विचारों को आत्मसात भी किया।

डॉ. राधाकृष्णन के नाम में पहले सर्वपल्ली का सम्बोधन उन्हे विरासत में मिला था। राधाकृष्णन के पूर्वज ‘सर्वपल्ली’ नामक गॉव में रहते थे और 18वीं शताब्दी के मध्य में वे तिरूतनी गॉव में बस गये। उनके पूर्वज चाहते थे कि उनके नाम के साथ उनके जन्मस्थल के गॉव का बोध भी सदैव रहना चाहिए। इसी कारण सभी परिजन अपने नाम के पूर्व ‘सर्वपल्ली’ धारण करने लगे थे।

राधाकृष्णन ने 1902 में मैट्रिक स्तर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की और छात्रवृत्ति भी प्राप्त की । क्रिश्चियन कॉलेज मद्रास ने भी छात्रवृत्ति प्रदान की। डॉ राधाकृष्णन ने 1916 में दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया और मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में इसी विषय के सहायक प्राध्यापक का पद संभाला।

1903 में 16 वर्ष की आयु में ही उनका विवाह दूर के रिश्ते की बहन ‘सिवाकामू’ के साथ सम्पन्न हो गया। उस समय उनकी पत्नी की आयु मात्र 10 वर्ष की थी। अतः तीन वर्ष बाद ही उनकी पत्नी ने उनके साथ रहना आरम्भ किया। जिनसे उन्हें 5 बेटी व 1 बेटा हुआ. इनके बेटे का नाम सर्वपल्ली गोपाल है, जो भारत के महान इतिहासकारक थे. भारतीय क्रिकेट टीम के महान खिलाड़ी वीवी एस लक्ष्मण इन्हीं के खानदान से ताल्लुक रखते है.

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के अध्यापन की शुरुवात

1909 में राधाकृष्णन जी को मद्रास प्रेसीडेंसी कॉलेज में दर्शनशास्त्र का अध्यापक बना दिया गया | सन 1916 में मद्रास रजिडेसी कालेज में दर्शन शास्त्र के सहायक प्राध्यापक बने. 1918 मैसूर यूनिवर्सिटी में दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर बने | तत्पश्चात वे इंग्लैंड के oxford university में भारतीय दर्शन शास्त्र के शिक्षक बन गए.

शिक्षा के प्रति रुझान ने उन्हें एक मजबूत व्यक्तित्व प्रदान किया था. हमेशा कुछ नया सीखना पढने के लिए उतारू रहते थे. जिस कालेज से इन्होंने M.A किया था वही का इन्हें उपकुलपति बना दिया गया.

किन्तु डॉ राधाकृष्णन ने एक वर्ष के अंदर ही इसे छोड़ कर बनारस विश्वविद्यालय में उपकुलपति बन गए. इसी दौरान वे दर्शनशास्त्र पर बहुत सी पुस्तकें भी लिखा करते थे|

डॉ राधाकृष्णन, विवेकानंद और वीर सावरकर को अपना आदर्श मानते थे. इनके बारे में इन्होंने गहन अध्ययन कर रखा था. डॉ राधाकृष्णन अपने लेखों और भाषणों के माध्यम से समूचे विश्व को भारतीय दर्शन शास्त्र से परिचित कराने का प्रयास किया. डॉ.राधाकृष्णन देश की संस्कृति को प्यार करने वाले व्यक्ति भी थे.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन की खास बातें

जब भारत को स्वतंत्रता मिली उस समय जवाहरलाल नेहरू ने राधाकृष्णन से यह आग्रह किया, कि वह विशिष्ट राजदूत के रूप में सोवियत संघ के साथ राजनयिक कार्यों की पूर्ति करें. सन 1949 में इन्हें मास्को में भारत का राजदूत चुना गया. मास्को में भारत की प्रतिष्ठा इन्ही की देन है. नेहरू की बात को स्वीकारते हुए डॉ.राधाकृष्णन ने 1947 से 1949 तक संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य के रूप में कार्य किया. ।

13 मई 1952 से 13 मई 1962 तक वे देश के उपराष्ट्रपति रहे . 13 मई 1962 को ही वे भारत के राष्ट्रपति निर्वाचित हुए. इनका कार्यकाल काफी चुनौतियों भरा था, क्योंकि जहां एक ओर भारत के चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध हुए, जिसमें चीन के साथ भारत को हार का सामना करना पड़ा. ।

sarvepalli radhakrishnanin hindi,
sarvepalli radha krishnain hindi,
dr radhakrishnanin hindi,
about dr.radhakrishnanin hindi,
sarvepalli radhakrishnan imagesin hindi,
dr radhakrishnain hindi,
about sarvepalli radhakrishnanin hindi,
about dr sarvepalli radhakrishnanin hindi,
dr sarvepalliin hindi,
about dr radhakrishnanin hindi,
radha krishnanin hindi,
dr sarvapalli radha krishnanin hindi,
sarvepalli radhakrishnan imagein hindi,
sarvapalli radhakrishnanin hindi,
dr sarvapalli radhakrishananin hindi,
dr. radhakrishnanin hindi,
s. radhakrishnanin hindi,
dr.s radhakrishnanin hindi,

राधाकृष्णन ने 1967 के गणतंत्र दिवस पर देश को सम्बोधित करते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि वह अब किसी भी सत्र के लिए राष्ट्रपति नहीं बनना चाहेंगे । मई सन 1967 में चेन्नई (मद्रास) स्थित घर के माहौल में चले गये और अंतिम 8 वर्ष अच्छी तरह व्यतीत किये.

सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का निधन 17 अप्रैल 1975 को एक लम्बी बीमारी के बाद हो गया राधाकृष्णन के मरणोपरांत उन्हें मार्च 1975 में अमेरिकी सरकार द्वारा टेम्पलटन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस पुरस्कार को ग्रहण करने वाले यह प्रथम गैर-ईसाई सम्प्रदाय के व्यक्ति थे।

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन पटुवक्ता थे. इनके व्याख्यानों से पूरी दुनिया के लोग प्रभावित थे.

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की पुस्तके :

• द एथिक्स ऑफ़ वेदांत.

• द फिलासफी ऑफ़ रवीन्द्रनाथ टैगोर.

• माई सर्च फॉर ट्रूथ.

• द रेन ऑफ़ कंटम्परेरी फिलासफी.

• रिलीजन एंड सोसाइटी.

• इंडियन फिलासफी.

• द एसेंसियल ऑफ़ सायकलॉजी.

biography of dr sarvepalli radhakrishnanin hindi,
dr sarvapalliin hindi,
about dr s radhakrishnanin hindi,
dr. s. radhakrishnanin hindi,
information about radhakrishnanin hindi,
s.radhakrishnanin hindi,
dr. s radhakrishnanin hindi,
sarvepalli radhakrishnan informationin hindi,
dr sarvepalli radhakrishnanin hindi,
information about dr radhakrishnanin hindi,
sarvepalli radhakrishnan photoin hindi,
sarvapalli radha krishnanin hindi,
dr. radhakrishnain hindi,
information about dr s radhakrishnanin hindi,
dr radhakrishnan informationin hindi,
dr sarvepalli radha krishnanin hindi,

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के पुरस्कार

• 1938 ब्रिटिश अकादमी के सभासद के रूप में नियुक्ति।

• 1954 नागरिकत्व का सबसे बड़ा सम्मान, “भारत रत्न”।

• 1954 जर्मन के, “कला और विज्ञानं के विशेषग्य”।

• 1961 जर्मन बुक ट्रेड का “शांति पुरस्कार”।

• 1962 भारतीय शिक्षक दिन संस्था, हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिन के रूप में मनाती है।

• 1963 ब्रिटिश आर्डर ऑफ़ मेरिट का सम्मान।

• 1968 साहित्य अकादमी द्वारा उनका सभासद बनने का सम्मान (ये सम्मान पाने वाले वे पहले व्यक्ति थे)।

डॉ. राधाकृष्णन एक महान दार्शनिक, शिक्षाविद और लेखक थे। राधाकृष्णन ने अपने जीवन के 40 वर्ष एक शिक्षक के रूप में बिताए . वे हमेसा अपने आपको शिक्षक मानते रहे। उन्होंने अपना जन्मदिवस शिक्षकों के लिए समर्पित किया। इसलिए 5 सितंबर सारे भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

इन्हे भी पढ़ें

Teachers Day Quotes In Hindi

Leave a Comment