Moral story in hindi for class 9 | मन की गति

Moral hindi story for class 9

प्राचीन समय में गंगा के एक तट पर एक ऋषि का आश्रम था। उनके कई शिष्य थे। जिन को वह दुनिया भर का ज्ञान देते थे। वह उनको अनेक विधाओं की जानकारी देते थे।

उनके सभी शिष्य में से ऋषि के सबसे अधिक प्रिय 4 शिष्य थे।

 Moral Story In Hindi For Class 9

जब इनकी शिक्षा पूर्ण हुई तब उन्होंने उनके ज्ञान के विषय में जानना चाहा कि तुमने कितना ज्ञान प्राप्त किया है।

Advertisements

ऋषि ने कहा आपको मैंने बहुत सी चीज़ें सिखाई है पर मैं जानना चाहता हूं कि तुम लोगों मे से किसने किन विधाओं को सबसे ज्यादा पसंद किया ? किस के प्रयोग पर सबसे ज्यादा प्रसन्नता हुई है ?

उनका पहला शिष्य बोला की गुरु जी मैंने आपके द्वारा दी गई विधा में सबसे अधिक मंत्र फूंककर आग बुझाने वाली विद्या में जोर दिया है। यह मुझे अच्छी तरह मालूम है। मैं यह विधा को कभी भी प्रयोग कर सकता हूं। बाकी की विधाएँ मुझे खास याद नहीं है।

Guru ki kahani

दूसरा शिष्य बोला पानी में चलने की विधा सीखने और प्रयोग करने में मैंने अधिक ध्यान दिया है। इस विधा में मै कुशल हो चुका हूं। आप कभी भी मेरी परीक्षा ले सकते हैं।तीसरा शिष्य बोला गुरुजी मैंने आंधी को केवल एक मंत्र के द्वारा शांत करने की कला अच्छी तरह सीख ली है। मैं इसमें किसी को भी हरा सकता हूं।

चौथे शिष्य ने कहा गुरु जी मेरी इन चीजों में रुचि‌ नहीं रही। मैं तो सिर्फ मन को वश में करने की कला ही सीख पाया हूं। मैंने इसी पर अतिरिक्त मेहनत की है।

मुझे लगता है कि हम मन को वश में करके ही जीवन सफलतापूर्वक जी सकते हैं। चौथे शिष्य की बात सुनकर ऋषि बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा वास्तव में तुमने सभी शिक्षाओं के जड़ को सीख लिया है।

नैतिक सीख: Moral of the Story In Hindi For Class 9

किसी भी विधा में दक्षता हासिल करने के लिए मन की गति को वश में करना आवश्यक है। जिसने मन की गति पर अधिकार कर लिया वे सभी तरह के लोभ को जीत लेगा। जो सुखी जीवन के लिए जरूरी है।