अल्लामा इक़बाल की शायरी ( Allama iqbal shayari in hindi )

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इकबाल – मतलब हिंदी में Iqbal meaning in hindi

प्रताप,तेज, किस्मत,भाग्य ,धनदौलत, वैभव,अपराध आदि स्वीकार करने की क्रिया या भाव स्वीकृति,इकरार।

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allama iqbal shayari in hindi

दिल की बस्ती अजीब बस्ती है,
लूटने वाले को तरसती है।

Dil ki basti ajeeb hai
Lootne waale ko tarsati hai

ढूंढता रहता हूं ऐ ‘इकबाल’ अपने आप को,

आप ही गोया मुसाफिर, आप ही मंजिल हूं मैं।

इश्क़ क़ातिल से भी मक़तूल से हमदर्दी भी
यह बता किस से मुहब्बत की जज़ा मांगेगा
सजदा ख़ालिक़ को भी इबलीस से याराना भी
हसर में किस से अक़ीदत का सिला मांगेगा।

Doondta rahta hoon ae ‘Iqbal’ apne aap ko
Aap hi goya musafir, aap hi manjil hoon main

नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी

भरी बज़्म में अपने आशिक़ को ताड़ा
तेरी आँख मस्ती में होश्यार क्या थी

अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे

मुझे रोकेगा तू ऐ नाखुदा क्या गर्क होने से
कि जिसे डूबना हो, डूब जाते हैं सफीनों  में

allama iqbal quotes in hindi

Mujhe rokega tu ae nakhuda kya gark hone se
Ki jise doobna ho, doob jaate hai safeenon mein

उम्र भर तेरी मोहब्बत मेरी खिदमत रही
मैं तेरी खिदमत के क़ाबिल जब हुआ तो तू चल बसी

Umr bhar teri mohabbat meri khidmat rahi
Mai teri khidmat ke kabil jab hua tu chal basi

allama iqbal sher in hindi

साकी की मुहब्बत में दिल साफ हुआ इतना
जब सर को झुकाता हूं शीशा नजर आता है

Saaqi ki muhabbat mein dil saaf hua itna
Jab sar ko jhukaata hoon sheesha nazar aata hai

iqbal poetry in hindi

साकी की मुहब्बत में दिल साफ हुआ इतना
जब सर को झुकाता हूं शीशा नजर आता है

Saaqi ki muhabbat mein dil saaf hua itna
Jab sar ko jhukaata hoon sheesha nazar aata hai

और भी कर देता है दर्द में इज़ाफ़ा
तेरे होते हुए गैरों का दिलासा देना

Aur bhi kar deta hai dard me ijafa
Tere hote hue gairon ka dilasa dena

allama iqbal shayari on imam hussain in hindi

कभी छोड़ी हुई मंज़िल भी याद आती है राही को
खटक सी है जो सीने में ग़म-ए-मंज़िल न बन जाए

ख़ुदी वो बहर है जिस का कोई किनारा नहीं
तू आबजू इसे समझा अगर तो चारा नहीं

आईन-ए-जवाँ-मर्दां हक़-गोई ओ बे-बाकी
अल्लाह के शेरों को आती नहीं रूबाही

किसे ख़बर कि सफ़ीने डुबो चुकी कितने
फ़क़ीह ओ सूफ़ी ओ शाइर की ना-ख़ुश-अंदेशी

कभी हम से कभी ग़ैरों से शनासाई है

बात कहने की नहीं तू भी तो हरजाई है

shayari iqbal in hindi

किसी की याद ने ज़ख्मो से भर दिया सीना
हर एक सांस पर शक है के आखरी होगी

Kisi ki yaad ne jakhmo se bhar diya sina
Har ek saans par shaq hai ke akhiri hoga

मिटा दे अपनी हस्ती को गर कुछ मर्तबा* चाहिए
कि दाना खाक में मिलकर, गुले-गुलजार होता है

ALLAMA IQBAL SHAYARI ON NAMAZ

उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी से अंजुम सहमे जाते हैं
कि ये टूटा हुआ तारा मह-ए-कामिल न बन जाए

ज़मीर-ए-लाला मय-ए-लाल से हुआ लबरेज़
इशारा पाते ही सूफ़ी ने तोड़ दी परहेज़

अज़ाब-ए-दानिश-ए-हाज़िर से बा-ख़बर हूँ मैं
कि मैं इस आग में डाला गया हूँ मिस्ल-ए-ख़लील

ज़िंदगानी की हक़ीक़त कोहकन के दिल से पूछ
जू-ए-शीर ओ तेशा ओ संग-ए-गिराँ है ज़िंदगी

अल्लामा इक़बाल शायरी

उसे सुब्ह-ए-अज़ल इंकार की जुरअत हुई क्यूँकर
मुझे मालूम क्या वो राज़-दाँ तेरा है या मेरा

Allama iqbal shayari on karabali in hindi

अगर हंगामा-हा-ए-शौक़ से है ला-मकाँ ख़ाली
ख़ता किस की है या रब ला-मकाँ तेरा है या मेरा

नहीं इस खुली फ़ज़ा में कोई गोशा-ए-फ़राग़त
ये जहाँ अजब जहाँ है न क़फ़स न आशियाना

जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही
खुलते हैं ग़ुलामों पर असरार-ए-शहंशाही

नहीं तेरा नशेमन क़स्र-ए-सुल्तानी के गुम्बद पर
तू शाहीं है बसेरा कर पहाड़ों की चटानों में

इश्क़ तिरी इंतिहा इश्क़ मिरी इंतिहा

तू भी अभी ना-तमाम मैं भी अभी ना-तमाम

Mita de apni hasti ko gar kuchh martba chaahiye
Ki daana khaak meinmilkar, gule-gulzaar hota hai


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allama iqbal shayari in urdu

तेरी दुआ से कज़ा तो बदल नहीं सकती
मगर है इस से यह मुमकिन की तू बदल जाये

Teri dua se kaza to badal nahi sakti
Magar hai is se yeh mumkin ki tu badal jaye

allama iqbal shayari in hindi font

जफा जो इश्क में होती है वह जफा ही नहीं,
सितम न हो तो मुहब्बत में कुछ मजा ही नही

Jafa jo ishq mein hoti hai wah zafa hi nahin
Sitam na ho to muhabbat mein kuchh maza hi nahin

हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ी
ख़ुदा करे कि जवानी तिरी रहे बे-दाग़

Haya nahi hai jamaane ki aankh mein baki
Khuda kare ki jawaani teri bedaag rahe

allama iqbal motivational shayari in hindi

हंसी आती है मुझे हसरते इंसान पर
गुनाह करता है खुद और लानत भेजता है सैतान पर

Hansi Aati Hai Mujhe Hasrate Insaan Par
Gunah Karta Hai Khud Aur Lanat Bhejta Hai Saitan Par.. …
.

dr iqbal shayari in hindi

फूल की पती से कट सकता है हीरे का जिगर
मर्दे नादाँ पर कलाम-ऐ-नरम-ऐ-नाज़ुक बेअसर

Phool Ki Patti Sy Cut Sakta He Heeray Ka Jigar
Kalam E Narm O Nazuk Mard E Nadan Pr By Asar..

shayari on muhammad saw by allama iqbal

हजारों साल नर्गिस अपनी बेनूरी पे रोती है

बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा

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iqbal quotes in hindi

Hazaron saal nargis apni benoori pe roti hai
Badi mushkil se hota hai chaman mein deedawar paida

न पूछो मुझ से लज़्ज़त ख़ानमाँ-बर्बाद रहने की
नशेमन सैकड़ों मैं ने बना कर फूँक डाले हैं

इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में
या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर

iqbal ki shayari

न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्ताँ वालो
तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में

ज़र जा अक़्ल से आगे कि ये नूर

चराग़-ए-राह है मंज़िल नहीं है

नहीं है ना-उमीद ‘इक़बाल’ अपनी किश्त-ए-वीराँ से
ज़रा नम हो तो ये मिट्टी बहुत ज़रख़ेज़ है साक़ी

allama iqbal best poetry in hindi

एक सरमस्ती ओ हैरत है सरापा तारीक
एक सरमस्ती ओ हैरत है तमाम आगाही

बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी
मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है

गला तो घोंट दिया अहल-ए-मदरसा ने तिरा
कहाँ से आए सदा ला इलाह इल-लल्लाह

allama iqbal shayari
iqbal ki shayari in hindi

दिल से जो बात निकलती है असर रखती है
पर नहीं ताक़त-ए-परवाज़ मगर रखती है

इकबाल शायरी

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अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल
लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे

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